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यह कविता गहन प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति है, जिसमें प्रेमी अपने प्रिय को भद्र मास की पूर्णिमा के चांद के समान बताता है। कवि कहता है कि वे रात-रात भर प्यार में बिताएंगे और जीवन भर एक-दूसरे से कभी पराये नहीं होंगे। उनके बीच कोई कड़वाहट नहीं होगी क्योंकि वे एक-दूसरे में समाए हुए हैं। प्रिय के लिए प्रेम इतना गहरा है कि यह कभी नहीं मिटता, चाहे कितना भी प्यार कर लिया जाए, यह प्यास कभी बुझती नहीं। कविता में प्रिय के रूप की तुलना चंद्रमा से की गई है, जहाँ दोनों की सुंदरता एकाकार हो जाती है और उनकी छवि मेघना नदी के नीचे भी दिखाई देती है। अंत में, कवि स्पष्ट करता है कि उसे विश्व शांति की भी कोई इच्छा नहीं है, यदि प्रेम अप्रिय या विरक्त हो जाए।

23 hrs ago
user_Mottakin Ali sk
Mottakin Ali sk
सरस्वती विहार, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, दिल्ली•
23 hrs ago

यह कविता गहन प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति है, जिसमें प्रेमी अपने प्रिय को भद्र मास की पूर्णिमा के चांद के समान बताता है। कवि कहता है कि वे रात-रात भर प्यार में बिताएंगे और जीवन भर एक-दूसरे से कभी पराये नहीं होंगे। उनके बीच कोई कड़वाहट नहीं होगी क्योंकि वे एक-दूसरे में समाए हुए हैं। प्रिय के लिए प्रेम इतना गहरा है कि यह कभी नहीं मिटता, चाहे कितना भी प्यार कर लिया जाए, यह प्यास कभी बुझती नहीं। कविता में प्रिय के रूप की तुलना चंद्रमा से की गई है, जहाँ दोनों की सुंदरता एकाकार हो जाती है और उनकी छवि मेघना नदी के नीचे भी दिखाई देती है। अंत में, कवि स्पष्ट करता है कि उसे विश्व शांति की भी कोई इच्छा नहीं है, यदि प्रेम अप्रिय या विरक्त हो जाए।

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  • गोरक्षनाथ सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद त्रिपाठी के सानिध्य में और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सह दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पंडित संतोष मिश्रा के नेतृत्व में, पूर्व ब्लॉक प्रमुख व वरिष्ठ समाजसेवी स्व० केदार नाथ राय की प्रथम पुण्यतिथि पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने स्व० केदार नाथ राय के संघर्षपूर्ण और जनसेवा से ओत-प्रोत जीवन को याद करते हुए बताया कि उन्होंने सदैव समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुँचाने का कार्य किया। वे सामाजिक समरसता, संगठनात्मक मजबूती और जनहित के मुद्दों पर निरंतर सक्रिय रहे, और उनका व्यक्तित्व राजनीतिक तथा सामाजिक क्षेत्र में प्रेरणास्रोत के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद त्रिपाठी ने कहा कि स्व० केदार नाथ राय का जीवन सेवा, संस्कार और समाजहित के कार्यों के लिए समर्पित था। उन्होंने क्षेत्र के विकास और गरीब, शोषित व जरूरतमंद लोगों की आवाज़ को मजबूती प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य किया, और उनके आदर्श व विचार आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र एवं समाज सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे। वहीं, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सह दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पंडित संतोष मिश्रा ने उनके संगठनात्मक एवं सामाजिक जीवन में दिए गए योगदान को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने ज़ोर दिया कि सेवा, समर्पण और जनकल्याण की उनकी स्थापित परंपरा को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी लोगों ने स्व० केदार नाथ राय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का अंत दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ हुआ, इस दौरान यह भी कहा गया कि उनका संपूर्ण जीवन समाज सेवा, संगठनात्मक समर्पण और जनकल्याण की मिसाल था, जिनकी प्रेरणादायी स्मृतियाँ सदैव समाज को नई दिशा देती रहेंगी।
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    गोरक्षनाथ सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद त्रिपाठी के सानिध्य में और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सह दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पंडित संतोष मिश्रा के नेतृत्व में, पूर्व ब्लॉक प्रमुख व वरिष्ठ समाजसेवी स्व० केदार नाथ राय की प्रथम पुण्यतिथि पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

वक्ताओं ने स्व० केदार नाथ राय के संघर्षपूर्ण और जनसेवा से ओत-प्रोत जीवन को याद करते हुए बताया कि उन्होंने सदैव समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुँचाने का कार्य किया। वे सामाजिक समरसता, संगठनात्मक मजबूती और जनहित के मुद्दों पर निरंतर सक्रिय रहे, और उनका व्यक्तित्व राजनीतिक तथा सामाजिक क्षेत्र में प्रेरणास्रोत के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद त्रिपाठी ने कहा कि स्व० केदार नाथ राय का जीवन सेवा, संस्कार और समाजहित के कार्यों के लिए समर्पित था। उन्होंने क्षेत्र के विकास और गरीब, शोषित व जरूरतमंद लोगों की आवाज़ को मजबूती प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य किया, और उनके आदर्श व विचार आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र एवं समाज सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे। वहीं, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सह दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पंडित संतोष मिश्रा ने उनके संगठनात्मक एवं सामाजिक जीवन में दिए गए योगदान को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने ज़ोर दिया कि सेवा, समर्पण और जनकल्याण की उनकी स्थापित परंपरा को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी लोगों ने स्व० केदार नाथ राय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का अंत दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ हुआ, इस दौरान यह भी कहा गया कि उनका संपूर्ण जीवन समाज सेवा, संगठनात्मक समर्पण और जनकल्याण की मिसाल था, जिनकी प्रेरणादायी स्मृतियाँ सदैव समाज को नई दिशा देती रहेंगी।
    user_Amit mishra
    Amit mishra
    Local News Reporter Rohini, North West Delhi•
    57 min ago
  • राजधानी दिल्ली में अपराध और अवैध हथियारों पर लगाम कसने के लिए दिल्ली पुलिस की नॉर्दर्न रेंज ने 'ऑपरेशन शस्त्र' के तहत एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान में रोहिणी जिले के विभिन्न थानों और स्पेशल स्टाफ की टीमों से करीब 150 से 200 पुलिसकर्मी शामिल हुए। पुलिस ने सक्रिय बीसी (बैड कैरेक्टर्स) और आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को निशाना बनाया, साथ ही उन लोगों को भी चिह्नित किया जो सोशल मीडिया पर हथियार दिखाने का शौक रखते हैं। अभियान के दौरान पुलिस ने लगभग 500 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इस कार्रवाई के तहत कुल 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें करीब 6 सक्रिय बीसी भी शामिल हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 11 पिस्तौल, 13 जिंदा कारतूस, 7 चाकू और कुछ वाहन बरामद किए हैं। रोहिणी जिला पुलिस ने सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन करने वाले आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर हथियार दिखाकर दहशत फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। अभियान के दौरान नाबालिगों को भी अपराध से दूर रहने और कानून का पालन करने का सख्त संदेश दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि अपराध की दुनिया में कदम रखने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्रवाई की जाएगी, और राजधानी में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।
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    राजधानी दिल्ली में अपराध और अवैध हथियारों पर लगाम कसने के लिए दिल्ली पुलिस की नॉर्दर्न रेंज ने 'ऑपरेशन शस्त्र' के तहत एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान में रोहिणी जिले के विभिन्न थानों और स्पेशल स्टाफ की टीमों से करीब 150 से 200 पुलिसकर्मी शामिल हुए। पुलिस ने सक्रिय बीसी (बैड कैरेक्टर्स) और आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को निशाना बनाया, साथ ही उन लोगों को भी चिह्नित किया जो सोशल मीडिया पर हथियार दिखाने का शौक रखते हैं।

अभियान के दौरान पुलिस ने लगभग 500 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इस कार्रवाई के तहत कुल 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें करीब 6 सक्रिय बीसी भी शामिल हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 11 पिस्तौल, 13 जिंदा कारतूस, 7 चाकू और कुछ वाहन बरामद किए हैं। रोहिणी जिला पुलिस ने सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन करने वाले आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया है।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर हथियार दिखाकर दहशत फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। अभियान के दौरान नाबालिगों को भी अपराध से दूर रहने और कानून का पालन करने का सख्त संदेश दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि अपराध की दुनिया में कदम रखने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्रवाई की जाएगी, और राजधानी में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।
    user_Hamwaran TV
    Hamwaran TV
    Local News Reporter रोहिणी, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • Post by Satyaveer singh
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    Post by Satyaveer singh
    user_Satyaveer singh
    Satyaveer singh
    सिविल लाइन्स, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोट लाने पर विचार कर रहा है। इस कदम के साथ ही, यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या देश में एक बार फिर नोटबंदी होगी और लोगों को बैंकों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ेगा। RBI इस दिशा में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में है।
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    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोट लाने पर विचार कर रहा है। इस कदम के साथ ही, यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या देश में एक बार फिर नोटबंदी होगी और लोगों को बैंकों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ेगा। RBI इस दिशा में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में है।
    user_Ragini Garg
    Ragini Garg
    Civil Lines, Central Delhi•
    3 hrs ago
  • जापान ने 20 साल के अंतराल के बाद भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे जापान के लोग अब मुंह में घुल जाने वाले भारतीय आमों का स्वाद नहीं चख पाएंगे। इस प्रतिबंध का मुख्य कारण यह है कि इस साल की शुरुआत में किए गए निरीक्षण के दौरान जापान के क्वारंटाइन अधिकारियों ने भारतीय उपचार सुविधाओं में कीट नियंत्रण प्रक्रियाओं में कुछ खामियाँ पाई थीं। इस निर्णय से अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी भारतीय आमों की प्रीमियम किस्में प्रभावित हुई हैं। जापान द्वारा भारतीय आमों पर यह प्रतिबंध पिछले दो दशकों में पहली बार लगाया गया है। इससे पहले, जापान ने फल मक्खी के खतरे के कारण भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे भारत द्वारा अपने उपचार प्रोटोकॉल को मजबूत करने के बाद 2006 में हटा दिया गया था। अब, जापानी अधिकारियों ने एक बार फिर इस बात पर चिंता जताई है कि क्या भारतीय आमों की खेप देश के सख्त पौध स्वास्थ्य मानकों को पूरा कर रही है, क्योंकि जापान फल मक्खियों जैसे आक्रामक कीटों के लिए शून्य सहिष्णुता की नीति का पालन करता है, जिन्हें घरेलू कृषि के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है। निर्यात के हर सीजन से पहले, जापान आमों की जांच के लिए अपने क्वारंटाइन अधिकारियों को भारत के वाष्प ताप उपचार (वीएचटी) केंद्रों पर भेजता है। इन केंद्रों पर आमों को निर्यात से पहले कीटाणुरहित किया जाता है। वीएचटी एक गैर-रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें कीटों और फलों के कीड़ों के लार्वा को मारने के लिए आमों को नियंत्रित गर्म और आर्द्र हवा के संपर्क में रखा जाता है। यह भारत-जापान निर्यात समझौते के तहत एक बहुत ही ज़रूरी काम है।
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    जापान ने 20 साल के अंतराल के बाद भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे जापान के लोग अब मुंह में घुल जाने वाले भारतीय आमों का स्वाद नहीं चख पाएंगे। इस प्रतिबंध का मुख्य कारण यह है कि इस साल की शुरुआत में किए गए निरीक्षण के दौरान जापान के क्वारंटाइन अधिकारियों ने भारतीय उपचार सुविधाओं में कीट नियंत्रण प्रक्रियाओं में कुछ खामियाँ पाई थीं। इस निर्णय से अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी भारतीय आमों की प्रीमियम किस्में प्रभावित हुई हैं।

जापान द्वारा भारतीय आमों पर यह प्रतिबंध पिछले दो दशकों में पहली बार लगाया गया है। इससे पहले, जापान ने फल मक्खी के खतरे के कारण भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे भारत द्वारा अपने उपचार प्रोटोकॉल को मजबूत करने के बाद 2006 में हटा दिया गया था। अब, जापानी अधिकारियों ने एक बार फिर इस बात पर चिंता जताई है कि क्या भारतीय आमों की खेप देश के सख्त पौध स्वास्थ्य मानकों को पूरा कर रही है, क्योंकि जापान फल मक्खियों जैसे आक्रामक कीटों के लिए शून्य सहिष्णुता की नीति का पालन करता है, जिन्हें घरेलू कृषि के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है।

निर्यात के हर सीजन से पहले, जापान आमों की जांच के लिए अपने क्वारंटाइन अधिकारियों को भारत के वाष्प ताप उपचार (वीएचटी) केंद्रों पर भेजता है। इन केंद्रों पर आमों को निर्यात से पहले कीटाणुरहित किया जाता है। वीएचटी एक गैर-रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें कीटों और फलों के कीड़ों के लार्वा को मारने के लिए आमों को नियंत्रित गर्म और आर्द्र हवा के संपर्क में रखा जाता है। यह भारत-जापान निर्यात समझौते के तहत एक बहुत ही ज़रूरी काम है।
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Civil Lines, Central Delhi•
    7 hrs ago
  • भगवंत मान ने एक स्पष्ट संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने दृढ़ता से कहा है कि वे चुनौतियों से बिल्कुल नहीं रुकेंगे। उन्होंने अपनी बात को एक मुहावरे के साथ समझाया, यह ज़ोर देते हुए कि "कुछ तिनके टूटने से झाड़ू की ताकत कम नहीं होती"।
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    भगवंत मान ने एक स्पष्ट संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने दृढ़ता से कहा है कि वे चुनौतियों से बिल्कुल नहीं रुकेंगे। उन्होंने अपनी बात को एक मुहावरे के साथ समझाया, यह ज़ोर देते हुए कि "कुछ तिनके टूटने से झाड़ू की ताकत कम नहीं होती"।
    user_BHARAT TODAY NEWS
    BHARAT TODAY NEWS
    Media house Saraswati Vihar, North West Delhi•
    7 hrs ago
  • अखिल भारत हिन्दू महासभा ने वीर सावरकर जयंती के अवसर पर यह घोषणा की है कि वीर सावरकर और अखिल भारत हिन्दू महासभा के बिना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अधूरा है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने वीर सावरकर के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिन्दू नवयुवकों को शस्त्र प्रशिक्षण लेकर ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती होने का आह्वान किया था। उनकी प्रेरणा से ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस जापान जाकर जापान हिन्दू महासभा अध्यक्ष रास बिहारी बोस से आजाद हिंद फौज की कमान अपने हाथों में लेकर 'दिल्ली चलो' का नारा देने के लिए प्रेरित हुए। द्विवेदी के अनुसार, वीर सावरकर की प्रेरणा से ब्रिटिश भारतीय फौज में हिन्दू नवयुवकों की संख्या मुस्लिमों से अधिक हुई और इन हिन्दू सैनिकों ने ही नेताजी के 'दिल्ली चलो' के नारे के बाद ब्रिटिश हुकूमत का सहयोग करने से इनकार कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप देश को स्वतंत्रता मिली और ब्रिटिश हुकूमत को भारत छोड़कर भागना पड़ा। हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने बताया कि वीर सावरकर की जयंती पर देश भर में कार्यक्रम आयोजित कर उनके 'अधूरे मिशन' को पूरा करने और 'अखंड भारत हिन्दू राष्ट्र' के निर्माण का संकल्प लिया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने नई दिल्ली में कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश आक्रांताओं से सत्ता लेने के बाद स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास लेखन में वीर सावरकर और हिन्दू महासभा के योगदान की उपेक्षा की। उन्होंने इसे एक षड्यंत्र बताते हुए कांग्रेस, मुस्लिमों और वामपंथियों को महिमामंडित करने का आरोप लगाया। महासभा ने भारत सरकार से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का पुनर्लेखन करवाते हुए कांग्रेस और वामपंथियों के 'विकृत इतिहास' को हटाने तथा वीर सावरकर, हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संपूर्ण योगदान को इतिहास में शामिल करने की मांग की है। इस अवसर पर हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल सिंह ने कहा कि वीर सावरकर ने स्वतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय योगदान देने के साथ-साथ साहित्य सृजन के माध्यम से भी राष्ट्रसेवा का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने काला पानी की सजा के दौरान 'हिंदुत्व' नामक पुस्तक की रचना की, जिसमें हिन्दू समाज और सनातन धर्म को भारतीय हिन्दू जनमानस के समक्ष सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया, और उनकी हिंदुत्व की परिभाषा को भारतीय न्याय प्रणाली भी स्वीकार करती है। प्रोफेसर यशपाल सिंह ने यह भी बताया कि '1857 का स्वातंत्र्य समर' नामक पुस्तक लिखकर वीर सावरकर ने पहली बार प्रमाणित किया कि 1857 का युद्ध सैनिक विद्रोह न होकर भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। उन्होंने वीर सावरकर के सशस्त्र क्रांति के आह्वान को भारत की स्वतंत्रता का वास्तविक मार्ग बताया और कहा कि ऐसे महामानव के अधूरे मिशन को पूरा कर अखंड भारत का निर्माण और हिन्दू राष्ट्र की स्थापना भारत के समस्त हिन्दू नागरिकों का कर्तव्य है। राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के शासनकाल में वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान न दिए जाने पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान देकर दशकों से उनकी उपेक्षा के अध्याय को समाप्त करने की मांग की। इस अवसर पर हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय धर्माचार्य प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी मंगलानंद जी महाराज, राष्ट्रीय मंत्री सत्येंद्र झा, राष्ट्रीय प्रचार मंत्री संजय भदौरिया, राष्ट्रीय प्रवक्ता मदन लाल गुप्ता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र सिंह राजू पार्चा सहित अनेक पदाधिकारियों ने वीर सावरकर को नमन किया और उनकी शिक्षाओं तथा नीतियों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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    अखिल भारत हिन्दू महासभा ने वीर सावरकर जयंती के अवसर पर यह घोषणा की है कि वीर सावरकर और अखिल भारत हिन्दू महासभा के बिना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अधूरा है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने वीर सावरकर के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिन्दू नवयुवकों को शस्त्र प्रशिक्षण लेकर ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती होने का आह्वान किया था। उनकी प्रेरणा से ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस जापान जाकर जापान हिन्दू महासभा अध्यक्ष रास बिहारी बोस से आजाद हिंद फौज की कमान अपने हाथों में लेकर 'दिल्ली चलो' का नारा देने के लिए प्रेरित हुए। द्विवेदी के अनुसार, वीर सावरकर की प्रेरणा से ब्रिटिश भारतीय फौज में हिन्दू नवयुवकों की संख्या मुस्लिमों से अधिक हुई और इन हिन्दू सैनिकों ने ही नेताजी के 'दिल्ली चलो' के नारे के बाद ब्रिटिश हुकूमत का सहयोग करने से इनकार कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप देश को स्वतंत्रता मिली और ब्रिटिश हुकूमत को भारत छोड़कर भागना पड़ा।

हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने बताया कि वीर सावरकर की जयंती पर देश भर में कार्यक्रम आयोजित कर उनके 'अधूरे मिशन' को पूरा करने और 'अखंड भारत हिन्दू राष्ट्र' के निर्माण का संकल्प लिया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने नई दिल्ली में कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश आक्रांताओं से सत्ता लेने के बाद स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास लेखन में वीर सावरकर और हिन्दू महासभा के योगदान की उपेक्षा की। उन्होंने इसे एक षड्यंत्र बताते हुए कांग्रेस, मुस्लिमों और वामपंथियों को महिमामंडित करने का आरोप लगाया। महासभा ने भारत सरकार से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का पुनर्लेखन करवाते हुए कांग्रेस और वामपंथियों के 'विकृत इतिहास' को हटाने तथा वीर सावरकर, हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संपूर्ण योगदान को इतिहास में शामिल करने की मांग की है।

इस अवसर पर हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल सिंह ने कहा कि वीर सावरकर ने स्वतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय योगदान देने के साथ-साथ साहित्य सृजन के माध्यम से भी राष्ट्रसेवा का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने काला पानी की सजा के दौरान 'हिंदुत्व' नामक पुस्तक की रचना की, जिसमें हिन्दू समाज और सनातन धर्म को भारतीय हिन्दू जनमानस के समक्ष सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया, और उनकी हिंदुत्व की परिभाषा को भारतीय न्याय प्रणाली भी स्वीकार करती है। प्रोफेसर यशपाल सिंह ने यह भी बताया कि '1857 का स्वातंत्र्य समर' नामक पुस्तक लिखकर वीर सावरकर ने पहली बार प्रमाणित किया कि 1857 का युद्ध सैनिक विद्रोह न होकर भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। उन्होंने वीर सावरकर के सशस्त्र क्रांति के आह्वान को भारत की स्वतंत्रता का वास्तविक मार्ग बताया और कहा कि ऐसे महामानव के अधूरे मिशन को पूरा कर अखंड भारत का निर्माण और हिन्दू राष्ट्र की स्थापना भारत के समस्त हिन्दू नागरिकों का कर्तव्य है।

राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के शासनकाल में वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान न दिए जाने पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान देकर दशकों से उनकी उपेक्षा के अध्याय को समाप्त करने की मांग की। इस अवसर पर हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय धर्माचार्य प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी मंगलानंद जी महाराज, राष्ट्रीय मंत्री सत्येंद्र झा, राष्ट्रीय प्रचार मंत्री संजय भदौरिया, राष्ट्रीय प्रवक्ता मदन लाल गुप्ता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र सिंह राजू पार्चा सहित अनेक पदाधिकारियों ने वीर सावरकर को नमन किया और उनकी शिक्षाओं तथा नीतियों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
    user_Amit mishra
    Amit mishra
    Local News Reporter Rohini, North West Delhi•
    5 hrs ago
  • दिल्ली में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली की CM रेखा गुप्ता के विधानसभा क्षेत्र शालीमार बाग से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहाँ संभावित कार्रवाई की खबरों के बाद कई परिवारों ने अपने मकान खाली करने शुरू कर दिए हैं। इलाके में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और कई परिवार अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई की चर्चाओं और प्रशासनिक गतिविधियों के बाद उन्होंने एहतियातन घर खाली करने का फैसला लिया है। कई जगहों पर परिवारों को घरेलू सामान, फर्नीचर और जरूरी दस्तावेजों को दूसरे स्थानों पर ले जाते देखा गया है। दिल्ली में हाल के महीनों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ विभिन्न इलाकों में कार्रवाई देखने को मिली है, जहाँ प्रशासन ने नोटिस जारी कर लोगों को पहले ही जगह खाली करने के निर्देश दिए थे। इस तरह की कार्रवाइयों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है, जहाँ विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाती है। फिलहाल इलाके में स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। स्थानीय निवासी प्रशासन की अगली घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सुरक्षा और निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
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    दिल्ली में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली की CM रेखा गुप्ता के विधानसभा क्षेत्र शालीमार बाग से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहाँ संभावित कार्रवाई की खबरों के बाद कई परिवारों ने अपने मकान खाली करने शुरू कर दिए हैं। इलाके में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और कई परिवार अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में जुटे हुए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई की चर्चाओं और प्रशासनिक गतिविधियों के बाद उन्होंने एहतियातन घर खाली करने का फैसला लिया है। कई जगहों पर परिवारों को घरेलू सामान, फर्नीचर और जरूरी दस्तावेजों को दूसरे स्थानों पर ले जाते देखा गया है। दिल्ली में हाल के महीनों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ विभिन्न इलाकों में कार्रवाई देखने को मिली है, जहाँ प्रशासन ने नोटिस जारी कर लोगों को पहले ही जगह खाली करने के निर्देश दिए थे।

इस तरह की कार्रवाइयों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है, जहाँ विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाती है। फिलहाल इलाके में स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। स्थानीय निवासी प्रशासन की अगली घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सुरक्षा और निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
    user_Gaurav
    Gaurav
    Beautician पंजाबी बाग, पश्चिम दिल्ली, दिल्ली•
    2 hrs ago
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