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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर लगातार हड़ताल जारी है और इस मांग को लेकर आम आदमी पार्टी जगह-जगह प्रदर्शन कर रही है। इसी विरोध प्रदर्शन के तहत बुराड़ी से आम आदमी पार्टी के विधायक ने छात्रों के साथ मिलकर मोर्चा संभाला और प्रदर्शन किया। कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में भी आम आदमी पार्टी की ओर से जगह-जगह प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
Dehli Voice
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर लगातार हड़ताल जारी है और इस मांग को लेकर आम आदमी पार्टी जगह-जगह प्रदर्शन कर रही है। इसी विरोध प्रदर्शन के तहत बुराड़ी से आम आदमी पार्टी के विधायक ने छात्रों के साथ मिलकर मोर्चा संभाला और प्रदर्शन किया। कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में भी आम आदमी पार्टी की ओर से जगह-जगह प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
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- दिल्ली की रहने वाली रेखा सिंह ने लोगों द्वारा धोखा दिए जाने और भरोसा तोड़े जाने पर गहरा मानसिक तनाव व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि आज वे बेहद परेशान हैं और उनका मन उदास है, क्योंकि लोगों पर भरोसा करने पर केवल धोखा मिलता है और विश्वास तोड़ दिया जाता है। इस स्थिति से आहत होकर उन्होंने सवाल किया है कि आखिर ऐसे माहौल में लोग दूसरों पर किस तरह विश्वास करें।4
- जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग पर विपक्ष पूरी तरह अड़ गया है। इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को तमाम विपक्षी दलों का समर्थन मिला है। जंतर-मंतर पर हो रहे इस विरोध प्रदर्शन के बीच विपक्षी दल लगातार शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।1
- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर लगातार हड़ताल जारी है और इस मांग को लेकर आम आदमी पार्टी जगह-जगह प्रदर्शन कर रही है। इसी विरोध प्रदर्शन के तहत बुराड़ी से आम आदमी पार्टी के विधायक ने छात्रों के साथ मिलकर मोर्चा संभाला और प्रदर्शन किया। कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में भी आम आदमी पार्टी की ओर से जगह-जगह प्रदर्शन किए जा रहे हैं।1
- माननीय केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में श्री सोनम वांगचुक जी से भेंट की। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने विद्यार्थियों से जुड़े विषयों पर सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण रखा और समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इसके उपरांत श्री वांगचुक जी ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। वांगचुक जी का यह निर्णय विद्यार्थियों के हितों के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता में उनके विश्वास को दर्शाता है। सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे। इसके साथ ही इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के माध्यम से सार्थक समाधान सुनिश्चित किए जाएंगे, क्योंकि देश के युवाओं के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। जैसा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा है, भारत की युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है और देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले प्रत्येक दोषी को दंड दिया जाएगा।1
- वीडियो में मौजूद टेक्स्ट में हिंदी हैशटैग और कैप्शन शामिल हैं जिनमें राजनीतिक और धार्मिक विषयों पर चर्चा की गई है।यह वीडियो सोशल मीडिया रील्स प्लेटफॉर्म के लिए फॉर्मेट किया गया है।1
- देश में परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मुद्दे पर सवाल उठाए गए हैं। यह पूछा गया है कि क्या अपने देश में मामला सिर्फ पेपर लीक तक ही सीमित रह गया है या फिर इसके पीछे कोई और बात भी है।1
- पत्रकार पंडित विशाल शर्मा 'लव' द्वारा किए गए कूटनीतिक और आध्यात्मिक विश्लेषण के अनुसार, 2014 से 2026 का यह महा-दशक भारत और संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़े काल-चक्र का मोड़ साबित हो रहा है। वेदों और पुराणों के विधान का हवाला देते हुए आलेख में कहा गया है कि अकारण ज्ञानियों, धर्म-रक्षकों और निर्दोषों को प्रताड़ित करने वाली सत्ता का विनाश तय है। अथर्ववेद और गरुड़ पुराण के संदर्भों के साथ-साथ इतिहास के उदाहरणों जैसे राजा वेन, नहुष, सहस्रबाहु और राजा परीक्षित के पतन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, 7 नवंबर 1966 को संसद के सामने गो-हत्या विरोधी संत आंदोलन पर हुए बल प्रयोग के परिणाम स्वरूप तत्कालीन सत्ताधीश परिवार को संजय गांधी की विमान दुर्घटना, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी के अंत जैसी त्रासदियों का सामना करना पड़ा। इतिहास की पड़ताल करते हुए आलेख में बताया गया है कि 80 के दशक में हुई कूटनीतिक चूकों, तुष्टिकरण, मुफ्त की योजनाओं और जातिगत विभाजन की राजनीति ने पंजाब में कट्टरपंथ और वैचारिक गुलामी को बढ़ावा दिया। वहीं 2014 से 2026 के वैश्विक दौर में 2014 का क्रीमिया विलय, 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन टैक-वॉर, लाल सागर में इसराइल-हमास संघर्ष, कोविड-19 महामारी और तुर्की-सीरिया भूकंप जैसे कई प्राकृतिक व सैन्य संकट देखने को मिले हैं। इस महा-संकट के बीच भारत ने रूस से तेल खरीदकर अपने रणनीतिक हितों की रक्षा की, QUAD व IMEC से जुड़ाव बढ़ाया, 'वैक्सीन मैत्री' के माध्यम से 100 से अधिक देशों की मदद की और G20 के जरिए 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनकर उभरा। दूसरी ओर, वर्तमान व्यवस्था में आंतरिक स्तम्भों पर प्रहार का मुद्दा उठाते हुए आलेख में सच दिखाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न, OROP व पेंशन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे पूर्व सैनिकों, किसानों और रोजगार की मांग कर रहे युवाओं पर लाठियां व जल-तोपें चलाने को एक गंभीर चक्रव्यूह बताया गया है। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और लाल किले पर निहंग परंपरा द्वारा ध्वज लहराने की घटना को नए युग और 'कलगीधर' की शक्तियों के उदय का आध्यात्मिक संकेत माना गया है। विश्लेषण का निष्कर्ष है कि बाह्य शक्तियां भारत को आंतरिक रूप से बांटना चाहती हैं, लेकिन युवा, किसान, फौजी, मजदूर और पत्रकारों की एकजुटता से अधर्म, छल और लाठी-तंत्र पर टिकी राजनीति का अंत निकट है।1
- जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन से संबंधित एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है। इस पोस्ट में छात्र प्रदर्शन को दर्शाने के लिए #StudentProtest और #JantarMantar जैसे हैशटैग का इस्तेमाल किया गया है।1