logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

डिंडौरी में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय श्री एम.एल. राठौर की उपस्थिति में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ किया गया *डिंडौरी में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ* *डिंडौरी12 सितंबर 2026* डिंडौरी में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय श्री एम.एल. राठौर की उपस्थिति में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर श्री राठौर ने कहा कि हमारा प्रयास है कि लोक अदालत के माध्यम से लोगों को त्वरित एवं सुलभ न्याय मिले और यह पक्षकारों को लाभ पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से कई वर्षों से लंबित प्रकरणों का भी एक ही दिन में निराकरण संभव है। आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर प्रकरणों के निराकरण से पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिलता है तथा उनके समय और धन की भी बचत होती है।

18 hrs ago
user_Ishwar prasad Sahu
Ishwar prasad Sahu
शाहपुरा, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
18 hrs ago

डिंडौरी में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय श्री एम.एल. राठौर की उपस्थिति में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ किया गया *डिंडौरी में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ* *डिंडौरी12 सितंबर 2026* डिंडौरी में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय श्री एम.एल. राठौर की उपस्थिति में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर श्री राठौर ने कहा कि हमारा प्रयास है कि लोक अदालत के माध्यम से लोगों को त्वरित एवं सुलभ न्याय मिले और यह पक्षकारों को लाभ पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से कई वर्षों से लंबित प्रकरणों का भी एक ही दिन में निराकरण संभव है। आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर प्रकरणों के निराकरण से पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिलता है तथा उनके समय और धन की भी बचत होती है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • डिंडौरी में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय श्री एम.एल. राठौर की उपस्थिति में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ किया गया *डिंडौरी में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ* *डिंडौरी12 सितंबर 2026* डिंडौरी में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय श्री एम.एल. राठौर की उपस्थिति में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर श्री राठौर ने कहा कि हमारा प्रयास है कि लोक अदालत के माध्यम से लोगों को त्वरित एवं सुलभ न्याय मिले और यह पक्षकारों को लाभ पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से कई वर्षों से लंबित प्रकरणों का भी एक ही दिन में निराकरण संभव है। आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर प्रकरणों के निराकरण से पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिलता है तथा उनके समय और धन की भी बचत होती है।
    4
    डिंडौरी में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय श्री एम.एल. राठौर की उपस्थिति में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ किया गया
*डिंडौरी में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ* 
*डिंडौरी12 सितंबर 2026* 
डिंडौरी में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय श्री एम.एल. राठौर की उपस्थिति में जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर श्री राठौर ने कहा कि  हमारा प्रयास है कि लोक अदालत के माध्यम से लोगों को त्वरित एवं सुलभ न्याय मिले और यह पक्षकारों को लाभ पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बने।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से कई वर्षों से लंबित प्रकरणों का भी एक ही दिन में निराकरण संभव है। आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर प्रकरणों के निराकरण से पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिलता है तथा उनके समय और धन की भी बचत होती है।
    user_Ishwar prasad Sahu
    Ishwar prasad Sahu
    शाहपुरा, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल, हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल, हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। खनन के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाए।
    4
    मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल,  हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है 

 बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ  होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी  पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं।

उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है?

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।

इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। 
मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल,  हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है 
बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ  होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी  पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं।
उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। खनन के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाए।
    user_Om Agrawal
    Om Agrawal
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • अवैध उत्खनन खनिज विभाग को शिकायत मिलने के बाद भी नहीं होती करवाई अवैध मुरूम खनन का खेल, पोकलेन से चल रहा था उत्खनन, खनिज विभाग सोया रहा बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन से मुरूम का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा था। खनिज माफिया बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। खनन के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाए।
    1
    अवैध उत्खनन खनिज विभाग को शिकायत मिलने के बाद भी नहीं होती करवाई
अवैध मुरूम खनन का खेल, पोकलेन से चल रहा था उत्खनन, खनिज विभाग सोया रहा
बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन से मुरूम का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा था। खनिज माफिया बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं।
उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। खनन के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाए।
    user_Shambhu nath Soni
    Shambhu nath Soni
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • NH 43 जो उमरिया से शहडोल जोड़ है इस समय लोगो के लिए बान मुसीबत NH43 का विकास रेल लाइन मे जो ओबर ब्रिज का काम कछुया की चल से चल रहा इस ब्रिज के चलते काई लोगो की जान चली गईं क्यों की सड़क बनी तो है लेकिन जहाँ जहाँ ब्रिज बनाना है वहां छोड़ी गई इस लेकिन सड़क मौत का कुआं बन गया आए दिन कोई ना कोई हद से होते रहते हैं नेता सरकारी अमला आप 9 10 सालों में कितनी बार वहां से निकले होंगे लेकिन अब तो जनता को भी लगने लगा है की कमीशन का खेल चल रहा है इन 10 सालों में तीन ओवर ब्रिज बने थे जो 9 10 सालों में पूरे नहीं हुए अब तो सड़क भी अपना दम तोड़ रही है जब तक ब्रिज बनेगा तब तक तू रोड ही नहीं रहेगी
    4
    NH 43 जो उमरिया से शहडोल जोड़ है इस समय लोगो के लिए बान मुसीबत 
NH43 का विकास रेल लाइन मे जो ओबर ब्रिज का काम कछुया की चल से चल रहा इस ब्रिज के चलते काई लोगो की जान चली गईं क्यों की सड़क बनी तो है लेकिन जहाँ जहाँ ब्रिज बनाना है वहां छोड़ी गई इस लेकिन सड़क मौत का कुआं बन गया आए दिन कोई ना कोई हद से होते रहते हैं नेता सरकारी अमला आप 9 10  सालों में कितनी बार वहां से निकले होंगे लेकिन अब तो जनता को भी लगने लगा है की कमीशन का खेल चल रहा है इन 10 सालों में तीन ओवर ब्रिज बने थे जो 9 10 सालों में पूरे नहीं हुए अब तो सड़क भी अपना दम तोड़ रही है जब तक ब्रिज बनेगा तब तक तू रोड ही नहीं रहेगी
    user_Chandu Yadav
    Chandu Yadav
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • उमरिया में नेशनल लोक अदालत का आयोजन 11 खंडपीठों में मामलों का हुआ निराकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार “न्याय आपके द्वार” की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष माननीय प्रियदर्शन शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। 📍 स्थान: उमरिया, मध्य प्रदेश 📺 NEWS 24 PUBLIC TV सच की आवाज
    1
    उमरिया में नेशनल लोक अदालत का आयोजन
11 खंडपीठों में मामलों का हुआ निराकरण
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार “न्याय आपके द्वार” की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष माननीय प्रियदर्शन शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
📍 स्थान: उमरिया, मध्य प्रदेश
📺 NEWS 24 PUBLIC TV
सच की आवाज
    user_NEWS 24 PUBLIC TV
    NEWS 24 PUBLIC TV
    Media company बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • घुघरीः घुघरी शराब दुकान में तीन विभागों का संयुक्त निरीक्षण, कई अनियमितताएं मिलीं; गोदाम की सघन जांच व स्टॉक मिलान के निर्देश जारी घुघरी शराब दुकान में तीन विभागों का संयुक्त निरीक्षण, कई अनियमितताएं मिलीं गोदाम की सघन जांच और स्टॉक मिलान के निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी घुघरी। घुघरी स्थित शासकीय शराब दुकान में शनिवार को प्रशासन एवं संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने सघन निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संस्कार बाबरिया, एसडीओपी पुलिस सौरभ तिवारी
    3
    घुघरीः घुघरी शराब दुकान में तीन विभागों का संयुक्त निरीक्षण, कई अनियमितताएं मिलीं; गोदाम की सघन जांच व स्टॉक मिलान के निर्देश जारी
घुघरी शराब दुकान में तीन विभागों का संयुक्त निरीक्षण, कई अनियमितताएं मिलीं गोदाम की सघन जांच और स्टॉक मिलान के निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी घुघरी। घुघरी स्थित शासकीय शराब दुकान में शनिवार को प्रशासन एवं संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने सघन निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संस्कार बाबरिया, एसडीओपी पुलिस सौरभ तिवारी
    user_Akash Chakarwarti
    Akash Chakarwarti
    Local News Reporter घुघरी, मंडला, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | बनहेरी रोड पर बड़ा हादसा ऑटो पलटा, 12 बच्चे घायल—बनहेरी रोड पर मचा हड़कंप घुघरी:- बनहेरी रोड पर आज एक ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में ऑटो में सवार 12 बच्चे घायल हो गए। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने की जानकारी सामने आई है। हादसा कैसे हुआ और बच्चों की हालत कैसी है, इसकी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
    1
    🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | बनहेरी रोड पर बड़ा हादसा
ऑटो पलटा, 12 बच्चे घायल—बनहेरी रोड पर मचा हड़कंप
घुघरी:- बनहेरी रोड पर आज एक ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में ऑटो में सवार 12 बच्चे घायल हो गए। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने की जानकारी सामने आई है।
हादसा कैसे हुआ और बच्चों की हालत कैसी है, इसकी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
    user_Pankaj Jhariya
    Pankaj Jhariya
    News Anchor घुघरी, मंडला, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • सागर की जहरीली शराब त्रासदी ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के आठ गांवों में मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच चुका है और डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों में बंद कराई गई सात शराब दुकानों को दोबारा खोलने का आदेश भी चर्चा में है। इन खबरों के बीच उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली गांव और शहर में पैकारी के जरिए अवैध शराब बेचे जाने के आरोपों ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। बिरसिंहपुर पाली में क्या हैं आरोप? स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के आरोप हैं कि बिरसिंहपुर पाली में लाइसेंसी ठेकेदार के जरिए पैकारी कर गांव-गांव में अवैध शराब बेचवाई जा रही है। आरोप है कि दुकानों के अलावा गुप्त ठिकानों से शराब की सप्लाई की जा रही है और इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा रहा। सागर की जहरीली शराब त्रासदी ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के आठ गांवों में मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच चुका है और डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों में बंद कराई गई सात शराब दुकानों को दोबारा खोलने का आदेश भी चर्चा में है। इन खबरों के बीच उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली गांव और शहर में पैकारी के जरिए अवैध शराब बेचे जाने के आरोपों ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। बिरसिंहपुर पाली में क्या हैं आरोप? स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के आरोप हैं कि बिरसिंहपुर पाली में लाइसेंसी ठेकेदार के जरिए पैकारी कर गांव-गांव में अवैध शराब बेचवाई जा रही है। आरोप है कि दुकानों के अलावा गुप्त ठिकानों से शराब की सप्लाई की जा रही है और इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि सागर जैसे हादसे का इंतजार है पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि ये आरोप स्थानीय स्तर के दावों पर आधारित हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि प्रशासन की जांच के बाद ही संभव होगी। क्या लग सकता है प्रतिबंध? नियमों के मुताबिक शराब ठेका क्षेत्र में अवैध बिक्री पर जिला आबकारी अधिकारी और कलेक्टर को कार्रवाई के अधिकार प्राप्त हैं। आबकारी अधिनियम के तहत अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर छापेमारी, जब्ती, जुर्माना और आपराधिक मुकदमे का प्रावधान है। यदि आरोपों में सच्चाई मिलती है तो ठेकेदार का लाइसेंस निलंबित या निरस्त करने का नियम है और संबंधित क्षेत्र में शराब की बिक्री पर अस्थायी या स्थायी प्रतिबंध भी संभव है। सागर कांड के बाद राज्य भर में आबकारी विभाग अलर्ट पर है, ऐसे में उमरिया प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। प्रशासन की चुनौती सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की सत्यता की जांच है। पैकारी नेटवर्क अक्सर रात के अंधेरे में और गुप्त ठिकानों से चलता है, जिसे पकड़ना आसान नहीं होता। साथ ही स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगते रहे हैं। सागर मामले में कांग्रेस ने भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिससे शराब माफिया और सत्ता के गठजोड़ की बहस तेज हुई है। उमरिया में भी इसी तरह के संदेहों से इनकार नहीं किया जा सकता। आगे क्या? अब गेंद उमरिया जिला प्रशासन के पाले में है। ग्रामीणों की मांग है कि बिरसिंहपुर पाली में विशेष छापेमार अभियान चलाया जाए, ठेकेदार के लेन-देन की जांच हो और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सागर की 28 मौतें इस बात की गवाही हैं कि अवैध शराब पर नरमी कितनी भारी पड़ सकती है। सवाल यह है कि क्या उमरिया प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई करेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। समय रहते कदम उठाए गए तो एक बड़ी त्रासदी टल सकती है।
    4
    सागर की जहरीली शराब त्रासदी ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के आठ गांवों में मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच चुका है और डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों में बंद कराई गई सात शराब दुकानों को दोबारा खोलने का आदेश भी चर्चा में है। इन खबरों के बीच उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली गांव और शहर में पैकारी के जरिए अवैध शराब बेचे जाने के आरोपों ने नया सवाल खड़ा कर दिया है।
बिरसिंहपुर पाली में क्या हैं आरोप?
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के आरोप हैं कि बिरसिंहपुर पाली में लाइसेंसी ठेकेदार के जरिए पैकारी कर गांव-गांव में अवैध शराब बेचवाई जा रही है। आरोप है कि दुकानों के अलावा गुप्त ठिकानों से शराब की सप्लाई की जा रही है और इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा रहा। 
सागर की जहरीली शराब त्रासदी ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के आठ गांवों में मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच चुका है और डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों में बंद कराई गई सात शराब दुकानों को दोबारा खोलने का आदेश भी चर्चा में है। इन खबरों के बीच उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली गांव और शहर में पैकारी के जरिए अवैध शराब बेचे जाने के आरोपों ने नया सवाल खड़ा कर दिया है।
बिरसिंहपुर पाली में क्या हैं आरोप?
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के आरोप हैं कि बिरसिंहपुर पाली में लाइसेंसी ठेकेदार के जरिए पैकारी कर गांव-गांव में अवैध शराब बेचवाई जा रही है। आरोप है कि दुकानों के अलावा गुप्त ठिकानों से शराब की सप्लाई की जा रही है और इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि सागर जैसे हादसे का इंतजार है पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि ये आरोप स्थानीय स्तर के दावों पर आधारित हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि प्रशासन की जांच के बाद ही संभव होगी।
क्या लग सकता है प्रतिबंध?
नियमों के मुताबिक शराब ठेका क्षेत्र में अवैध बिक्री पर जिला आबकारी अधिकारी और कलेक्टर को कार्रवाई के अधिकार प्राप्त हैं। आबकारी अधिनियम के तहत अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर छापेमारी, जब्ती, जुर्माना और आपराधिक मुकदमे का प्रावधान है। यदि आरोपों में सच्चाई मिलती है तो ठेकेदार का लाइसेंस निलंबित या निरस्त करने का नियम है और संबंधित क्षेत्र में शराब की बिक्री पर अस्थायी या स्थायी प्रतिबंध भी संभव है। सागर कांड के बाद राज्य भर में आबकारी विभाग अलर्ट पर है, ऐसे में उमरिया प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है।
प्रशासन की चुनौती
सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की सत्यता की जांच है। पैकारी नेटवर्क अक्सर रात के अंधेरे में और गुप्त ठिकानों से चलता है, जिसे पकड़ना आसान नहीं होता। साथ ही स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगते रहे हैं। सागर मामले में कांग्रेस ने भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिससे शराब माफिया और सत्ता के गठजोड़ की बहस तेज हुई है। उमरिया में भी इसी तरह के संदेहों से इनकार नहीं किया जा सकता।
आगे क्या?
अब गेंद उमरिया जिला प्रशासन के पाले में है। ग्रामीणों की मांग है कि बिरसिंहपुर पाली में विशेष छापेमार अभियान चलाया जाए, ठेकेदार के लेन-देन की जांच हो और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सागर की 28 मौतें इस बात की गवाही हैं कि अवैध शराब पर नरमी कितनी भारी पड़ सकती है। सवाल यह है कि क्या उमरिया प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई करेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। समय रहते कदम उठाए गए तो एक बड़ी त्रासदी टल सकती है।
    user_Om Agrawal
    Om Agrawal
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.