बैजनाथपुर चौक पर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) निर्माण कार्य की धीमी गति से स्थानीय दुकानदार और ग्रामीण पिछले कई वर्षों, विशेषकर छह वर्षों से, गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस धीमी रफ्तार के कारण दुकानदारों को भारी दिक्कतें हो रही हैं। लोगों का कहना है कि सड़क मार्ग के किनारे नाला निर्माण के लिए गड्ढे खोदकर कई दिनों तक ऐसे ही छोड़ दिए जाते हैं, जिससे मुख्य सड़क मार्ग से सटे घरों के निवासियों का सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है। साथ ही, ग्राहकों को दुकानों तक पहुँचने में भी बाधा आ रही है, जिससे दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान हैं। इस समस्या को लेकर पूर्व में भी कई बार सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन कार्य में अभी तक तेजी नहीं आई है। राहगीर और वाहन चालक लगातार इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। लोगों की मांग है कि अगर नाला निर्माण और सड़क मार्ग निर्माण कार्य समय पर पूरा कर लिया जाए, तो उन्हें काफी राहत मिलेगी।
बैजनाथपुर चौक पर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) निर्माण कार्य की धीमी गति से स्थानीय दुकानदार और ग्रामीण पिछले कई वर्षों, विशेषकर छह वर्षों से, गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस धीमी रफ्तार के कारण दुकानदारों को भारी दिक्कतें हो रही हैं। लोगों का कहना है कि सड़क मार्ग के किनारे नाला निर्माण के लिए गड्ढे खोदकर कई दिनों तक ऐसे ही छोड़ दिए जाते हैं, जिससे मुख्य सड़क मार्ग से सटे घरों के निवासियों का सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है। साथ ही, ग्राहकों को दुकानों तक पहुँचने में भी बाधा आ रही है, जिससे दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान हैं। इस समस्या को लेकर पूर्व में भी कई बार सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन कार्य में अभी तक तेजी नहीं आई है। राहगीर और वाहन चालक लगातार इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। लोगों की मांग है कि अगर नाला निर्माण और सड़क मार्ग निर्माण कार्य समय पर पूरा कर लिया जाए, तो उन्हें काफी राहत मिलेगी।
- बैजनाथपुर चौक पर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) निर्माण कार्य की धीमी गति से स्थानीय दुकानदार और ग्रामीण पिछले कई वर्षों, विशेषकर छह वर्षों से, गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस धीमी रफ्तार के कारण दुकानदारों को भारी दिक्कतें हो रही हैं। लोगों का कहना है कि सड़क मार्ग के किनारे नाला निर्माण के लिए गड्ढे खोदकर कई दिनों तक ऐसे ही छोड़ दिए जाते हैं, जिससे मुख्य सड़क मार्ग से सटे घरों के निवासियों का सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है। साथ ही, ग्राहकों को दुकानों तक पहुँचने में भी बाधा आ रही है, जिससे दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान हैं। इस समस्या को लेकर पूर्व में भी कई बार सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन कार्य में अभी तक तेजी नहीं आई है। राहगीर और वाहन चालक लगातार इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। लोगों की मांग है कि अगर नाला निर्माण और सड़क मार्ग निर्माण कार्य समय पर पूरा कर लिया जाए, तो उन्हें काफी राहत मिलेगी।1
- बिहार के सहरसा जिले से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो पोस्टमार्टम रूम का बताया जा रहा है, जिसमें पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान एक आवारा कुत्ता कमरे के भीतर मौजूद दिख रहा है।1
- मधेपुरा में मंगलवार को किसानों, मजदूरों और नौजवानों ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, महंगाई, बेरोजगारी और विभिन्न सरकारी नीतियों के खिलाफ एक जोरदार प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस), अखिल भारतीय नौजवान संघ (एआईवाईएफ) और बिहार खेत मजदूर यूनियन (बीकेएमयू) के राज्यव्यापी आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग समाहरणालय रोड स्थित बीपी मंडल चौक पर एकत्र हुए और सरकार विरोधी नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, बीज अधिनियम, विद्युत अधिनियम 2025, चार लेबर कोड और गरीबों के आशियानों पर बुलडोजर कार्रवाई को जनविरोधी करार दिया। प्रदर्शन का नेतृत्व किसान सभा के जिला सचिव मुकुंद प्रसाद यादव, खेत मजदूर यूनियन के जिला संयोजक अंबिका मंडल और नौजवान संघ के जिला संयोजक बूटीश स्वर्णकार ने किया। किसान सभा के जिला अध्यक्ष रमण कुमार की अध्यक्षता में हुई सभा को कई नेताओं ने संबोधित किया। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि देश में खेती, रोजगार और किसानों की स्थिति लगातार संकट में है, और कुछ आर्थिक नीतियों से किसानों, मजदूरों तथा नौजवानों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बीज अधिनियम और विद्युत अधिनियम 2025 के प्रभावों पर गंभीर चर्चा की व अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध जैसे मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। वहीं, भाकपा जिला मंत्री विद्याधर मुखिया ने किसानों के लिए फसल बीमा लागू करने, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों और मजदूरों को मासिक पेंशन देने तथा किसानों का कर्ज माफ करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने मनरेगा को प्रभावी ढंग से लागू करने, भूमिहीनों को वासगीत पर्चा देने, फसल का समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने और बेरोजगारों को रोजगार या मासिक भत्ता देने की भी मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों, मजदूरों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।3
- सहरसा जिले की रघुनाथपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले महुआ चकला (मंगला बाजार) गांव की स्थिति बेहद खराब है। गांव के निवासी इस गंभीर समस्या को लेकर चिंतित हैं और आरोप लगा रहे हैं कि उनके गांव के मुखिया इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि गांव की बदहाली को सुधारा जा सके।1
- पूरी मकई की फसल पानी में डूब गई है। इसके साथ ही, यह पोस्ट अपने दर्शकों से लाइक, सब्सक्राइब और फॉलो करने का भी आग्रह करती है।1
- खगड़िया जिले में पुलिस ने एक बड़े एक्शन में एक इनामी अपराधी का 'हाफ एनकाउंटर' किया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस कार्रवाई के दौरान यह इनामी अपराधी घायल हो गया, जिसके बाद उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद से पुलिस की छापेमारी और जांच लगातार जारी है, वहीं मामले को लेकर आधिकारिक जानकारी का अभी भी इंतजार किया जा रहा है।1
- खगड़िया में पुलिस की कार्रवाई के दौरान एक इनामी अपराधी का 'हाफ इनकाउंटर' हुआ है, जिसमें वह घायल हो गया। घायल अपराधी को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद इलाके में पुलिस की छापेमारी और जांच लगातार जारी है। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।1
- बिहार के मधेपुरा जिले के शंकरपुर थाना परिसर में एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ एक युवती ने कथित तौर पर शौचालय के भीतर खुद को आग लगाकर आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। गंभीर रूप से झुलसी युवती को प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया है। यह मामला पहले से दर्ज एक दुष्कर्म प्रकरण से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसका मुख्य आरोपी पहले ही जेल में बंद है। जानकारी के अनुसार, युवती ने सोमवार सुबह अपने शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर यह कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस उसे सुरक्षा के मद्देनजर अपने साथ थाने ले आई थी। थाने पहुँचने के बाद युवती ने महिला पुलिसकर्मी के साथ शौचालय जाने की बात कही। कुछ देर बाद उसकी चीखें सुनाई दीं, और जब पुलिसकर्मी मौके पर पहुँचे तो युवती आग की लपटों में घिरी हुई थी। पुलिस ने तुरंत आग बुझाई और उसे अस्पताल पहुँचाया। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि यदि युवती मानसिक तनाव में थी और उसके शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ होने की आशंका थी, तो थाने में पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? साथ ही, ऐसी स्थिति बनने तक प्रशासनिक सतर्कता में कहाँ कमी रही? फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच की बात कह रही है। इस घटना ने थाना परिसर के भीतर सुरक्षा प्रोटोकॉल और संवेदनशील मामलों के प्रबंधन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। मधेपुरा के एएसपी प्रवेन्द्र भारती ने भी इस मामले पर बाइट दी है।2