बस्ती: खाकी और खादी की छांव में 'लाल सोने' का काला खेल बस्ती। जनपद में सरयू और कुआनो की कोख को छलनी करने का खेल कोई नया नहीं है, लेकिन वर्तमान में खनन माफियाओं के हौसले जिस कदर बुलंद हैं, उसने शासन-प्रशासन की साख पर कालिख पोत दी है। ताज्जुब की बात यह है कि जिस खनन विभाग और जिला प्रशासन के कंधों पर अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी है, वही आज इन माफियाओं के लिए 'सुरक्षा कवच' बने नजर आ रहे हैं। अंधा प्रशासन, बहरा विभाग जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में रात के सन्नाटे को चीरती डंपरों की गड़गड़ाहट यह बताने के लिए काफी है कि 'साहब' की सहमति के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। खनन अधिकारी के दफ्तर से लेकर तहसील स्तर के जिम्मेदारों तक, सबकी खामोशी के पीछे की 'हकीकत' अब जिले की जनता से छिपी नहीं है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो नियम-कानून सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए रह जाते हैं। कुआनो और सरयू के अस्तित्व पर संकट अवैध खनन ने न केवल सरकार के राजस्व को चपत लगाई है, बल्कि जलस्तर और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। मानक से अधिक गहराई तक खोदी जा रही धरती भविष्य में बड़े संकट का संकेत दे रही है। माफियाओं ने नदियों के स्वरूप को बिगाड़ दिया है, लेकिन प्रशासन 'जांच' और 'कार्रवाई' के रटे-रटाए बयानों से आगे नहीं बढ़ पा रहा। सत्ता की हनक और रसूख का गठजोड़ बस्ती में खनन का यह कारोबार महज कुछ ट्रकों का खेल नहीं है, बल्कि यह रसूखदारों और अधिकारियों का एक ऐसा सिंडिकेट है, जिसमें शिकायतों की फाइलें दफ्तर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। आम आदमी अगर आवाज उठाए तो उसे डराया-धमकाया जाता है, और अगर पुलिस दखल दे भी, तो ऊपर से आने वाला 'एक फोन' खाकी के हाथ बांध देता है। सवाल यह उठता है: क्या सूबे के मुखिया का 'जीरो टॉलरेंस' का नारा बस्ती के खनन कार्यालय की चौखट पर आकर दम तोड़ देता है? आखिर क्यों बेखौफ माफिया प्रशासन की नाक के नीचे धरती का सीना चीर रहे हैं? वक्त आ गया है कि शासन स्तर से इस गठजोड़ पर कड़ा प्रहार किया जाए। अगर अब भी जिला प्रशासन ने कुंभकर्णी नींद नहीं त्यागी, तो बस्ती की उपजाऊ मिट्टी और नदियां केवल इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएंगी। सुनील दूबे की रिपोर्ट
बस्ती: खाकी और खादी की छांव में 'लाल सोने' का काला खेल बस्ती। जनपद में सरयू और कुआनो की कोख को छलनी करने का खेल कोई नया नहीं है, लेकिन वर्तमान में खनन माफियाओं के हौसले जिस कदर बुलंद हैं, उसने शासन-प्रशासन की साख पर कालिख पोत दी है। ताज्जुब की बात यह है कि जिस खनन विभाग और जिला प्रशासन के कंधों पर अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी है, वही आज इन माफियाओं के लिए 'सुरक्षा कवच' बने नजर आ रहे हैं। अंधा प्रशासन, बहरा विभाग जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में रात के सन्नाटे को चीरती डंपरों की गड़गड़ाहट यह बताने के लिए काफी है कि 'साहब' की सहमति के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। खनन अधिकारी के दफ्तर से लेकर तहसील स्तर के जिम्मेदारों तक, सबकी खामोशी के पीछे की 'हकीकत' अब जिले की जनता से छिपी नहीं है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो नियम-कानून सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए रह जाते हैं। कुआनो और सरयू के अस्तित्व पर संकट अवैध खनन ने न केवल सरकार के राजस्व को चपत लगाई है, बल्कि जलस्तर और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। मानक से अधिक गहराई तक खोदी जा रही धरती भविष्य में बड़े संकट का संकेत दे रही है। माफियाओं ने नदियों के स्वरूप को बिगाड़ दिया है, लेकिन प्रशासन 'जांच' और 'कार्रवाई' के रटे-रटाए बयानों से आगे नहीं बढ़ पा रहा। सत्ता की हनक और रसूख का गठजोड़ बस्ती में खनन का यह कारोबार महज कुछ ट्रकों का खेल नहीं है, बल्कि यह रसूखदारों और अधिकारियों का एक ऐसा सिंडिकेट है, जिसमें शिकायतों की फाइलें दफ्तर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। आम आदमी अगर आवाज उठाए तो उसे डराया-धमकाया जाता है, और अगर पुलिस दखल दे भी, तो ऊपर से आने वाला 'एक फोन' खाकी के हाथ बांध देता है। सवाल यह उठता है: क्या सूबे के मुखिया का 'जीरो टॉलरेंस' का नारा बस्ती के खनन कार्यालय की चौखट पर आकर दम तोड़ देता है? आखिर क्यों बेखौफ माफिया प्रशासन की नाक के नीचे धरती का सीना चीर रहे हैं? वक्त आ गया है कि शासन स्तर से इस गठजोड़ पर कड़ा प्रहार किया जाए। अगर अब भी जिला प्रशासन ने कुंभकर्णी नींद नहीं त्यागी, तो बस्ती की उपजाऊ मिट्टी और नदियां केवल इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएंगी। सुनील दूबे की रिपोर्ट
- कोई माई का लाल भारत को बेच नहीं सकता-रिजिजू, मोदीजी गाजा भी जाएं ओवैसी की मांग,विपक्ष को बजट समझाने की निर्मल कोशिश, राहुल कांग्रेस 100% हार देखने जा रही है- अनुराग, राहुल का सरकार पर टैरिफवार और नड्डा जी ने शुरू किया आपरेशन मलेरिया.... देखिए देश दुनिया की छ: बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर....1
- अंधविश्वास बना मौत की वजह1
- बस्ती: खाकी और खादी की छांव में 'लाल सोने' का काला खेल बस्ती। जनपद में सरयू और कुआनो की कोख को छलनी करने का खेल कोई नया नहीं है, लेकिन वर्तमान में खनन माफियाओं के हौसले जिस कदर बुलंद हैं, उसने शासन-प्रशासन की साख पर कालिख पोत दी है। ताज्जुब की बात यह है कि जिस खनन विभाग और जिला प्रशासन के कंधों पर अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी है, वही आज इन माफियाओं के लिए 'सुरक्षा कवच' बने नजर आ रहे हैं। अंधा प्रशासन, बहरा विभाग जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में रात के सन्नाटे को चीरती डंपरों की गड़गड़ाहट यह बताने के लिए काफी है कि 'साहब' की सहमति के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। खनन अधिकारी के दफ्तर से लेकर तहसील स्तर के जिम्मेदारों तक, सबकी खामोशी के पीछे की 'हकीकत' अब जिले की जनता से छिपी नहीं है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो नियम-कानून सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए रह जाते हैं। कुआनो और सरयू के अस्तित्व पर संकट अवैध खनन ने न केवल सरकार के राजस्व को चपत लगाई है, बल्कि जलस्तर और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। मानक से अधिक गहराई तक खोदी जा रही धरती भविष्य में बड़े संकट का संकेत दे रही है। माफियाओं ने नदियों के स्वरूप को बिगाड़ दिया है, लेकिन प्रशासन 'जांच' और 'कार्रवाई' के रटे-रटाए बयानों से आगे नहीं बढ़ पा रहा। सत्ता की हनक और रसूख का गठजोड़ बस्ती में खनन का यह कारोबार महज कुछ ट्रकों का खेल नहीं है, बल्कि यह रसूखदारों और अधिकारियों का एक ऐसा सिंडिकेट है, जिसमें शिकायतों की फाइलें दफ्तर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। आम आदमी अगर आवाज उठाए तो उसे डराया-धमकाया जाता है, और अगर पुलिस दखल दे भी, तो ऊपर से आने वाला 'एक फोन' खाकी के हाथ बांध देता है। सवाल यह उठता है: क्या सूबे के मुखिया का 'जीरो टॉलरेंस' का नारा बस्ती के खनन कार्यालय की चौखट पर आकर दम तोड़ देता है? आखिर क्यों बेखौफ माफिया प्रशासन की नाक के नीचे धरती का सीना चीर रहे हैं? वक्त आ गया है कि शासन स्तर से इस गठजोड़ पर कड़ा प्रहार किया जाए। अगर अब भी जिला प्रशासन ने कुंभकर्णी नींद नहीं त्यागी, तो बस्ती की उपजाऊ मिट्टी और नदियां केवल इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएंगी। सुनील दूबे की रिपोर्ट1
- दिल्ली के रोहिणी इलाके में मैनहोल में गिरने से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। इस मामले में एसीपी राजीव रंजन ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार दोपहर करीब 3 बजे बेगमपुर थाने में एक PCR कॉल प्राप्त हुई, जिसमें एक व्यक्ति के मैनहोल में गिरने की सूचना दी गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और संबंधित एजेंसियों को बुलाया गया। देर रात करीब 8:45 बजे मैनहोल से बिर्जु कुमार राय का शव बरामद किया गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक मजदूरी का काम करता था। शव मिलने से एक दिन पहले वह अपने दोस्त के साथ पार्टी में शामिल हुआ था और शराब का सेवन किया था। लौटते समय वह कब और कैसे लापता हो गया, इसका पता नहीं चल सका। उसका दोस्त घर पहुंचकर सो गया था। फिलहाल बेगमपुर थाने में लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।1
- नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम और डॉ. विक्रांत भूरिया ने विभिन्न राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार की नीतियों, सामाजिक मुद्दों और आगामी रणनीतियों पर भी चर्चा की गई। #Congress #RajendraPalGautam #DrVikrantBhuria #PressConference #DelhiPolitics #PoliticalNews #CongressOffice #NewDelhi #IndianPolitics #BreakingNews1
- कोई है लङकी जो मुझशे लब करके मेरे शाथ लबमैरिज करेगी।आश पाश के गांव शहर की भी चलेगी। क्योंकि मुझे शाद्दी करनी है। मैं तैतीश शाल का हो गया।धाणक हो या कोई और पन्थ की हो। और मैं मजाक नहीं कर रहा शाद्दी करुंगा तो करुंगा ही।वटशप नम्बर 7838434973, हिन्दू जितेन्द्र1
- पुलिस ने एक कथित तांत्रिक को गिरफ्तार किया है, जिसने ‘धन वर्षा’ कराने का लालच देकर तीनों को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी तांत्रिक ने पीड़ितों से करीब दो लाख रुपये ऐंठे थे और दावा किया था कि वह विशेष पूजा कर उनके ऊपर ‘धन वर्षा’ कर देगा। इसी बहाने उसने तीनों को अपने झांसे में फंसाया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने पूजा के दौरान प्रसाद के रूप में दिए गए लड्डुओं में जहरीला पदार्थ मिला दिया, जिसे खाने के बाद तीनों की हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। इसके बाद शव कार में ही मिले, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया था। 200 से ज्यादा CCTV से खुला राज मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के 200 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी जांच और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए आरोपी की पहचान हुई। आखिरकार पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के लौनी इलाके से गिरफ्तार कर लिया। अंधविश्वास बना मौत की वजह पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी खुद को तांत्रिक बताकर लोगों को ठगता था। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है1
- विराट हिंदू सम्मेलन बस्ती प्रताप विहार पार्ट 3 जिलाकंझावाला1