क्या तुलसीपुर के मैरिज हॉलों में फल-फूल रहा है काले धन का कारोबार? आयकर विभाग क्यों है मौन! क्या तुलसीपुर के मैरिज हॉलों में फल-फूल रहा है काले धन का कारोबार? आयकर विभाग क्यों है मौन! तुलसीपुर (बलरामपुर): तहसील मुख्यालय और आस-पास के क्षेत्रों में संचालित मैरिज हॉल इन दिनों प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर राजस्व को भारी चपत लगा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि लाखों रुपये की बुकिंग के बदले ग्राहकों को 'पक्का बिल' (Sale Invoice) देने के बजाय केवल 'कच्ची पर्ची' थमाई जा रही है। ✓अघोषित आय और काला धन: एक अनुमान के मुताबिक, एक दिन की बुकिंग का खर्च ₹3 लाख या उससे अधिक होता है। पूरे 'लगन' के सीजन में यह टर्नओवर करोड़ों में पहुँच जाता है। यदि यह लेनदेन पक्के बिल पर नहीं है, तो यह स्पष्ट रूप से अघोषित आय है, जो अंततः काले धन (Black Money) के रूप में एकत्र हो रही है। ✓विभाग की चुप्पी पर सवाल: ✓क्या आयकर विभाग (Income Tax Department) और जीएसटी विभाग को इस बड़े खेल की भनक नहीं है? मैरिज हॉल संचालकों द्वारा पक्के इनवॉइस के बजाय कच्ची पर्ची देना न केवल टैक्स चोरी है, बल्कि भारत सरकार के पारदर्शी अर्थव्यवस्था के संकल्प को भी चुनौती देना है। जनहित में मांग: ✓सभी मैरिज हॉलों में डिजिटल लेनदेन और पक्के जीएसटी बिल को अनिवार्य किया जाए। आयकर विभाग इनके 'लगन' सीजन के वास्तविक आय और जमा किए गए टैक्स का मिलान करे। ग्राहकों को जागरूक होना होगा कि वे लाखों के भुगतान पर अपना कानूनी अधिकार यानी 'पक्का बिल' जरूर मांगें। जब तक सिस्टम में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक भ्रष्टाचार और काले धन की जड़ें मजबूत होती रहेंगी।
क्या तुलसीपुर के मैरिज हॉलों में फल-फूल रहा है काले धन का कारोबार? आयकर विभाग क्यों है मौन! क्या तुलसीपुर के मैरिज हॉलों में फल-फूल रहा है काले धन का कारोबार? आयकर विभाग क्यों है मौन! तुलसीपुर (बलरामपुर): तहसील मुख्यालय और आस-पास के क्षेत्रों में संचालित मैरिज हॉल इन दिनों प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर राजस्व को भारी चपत लगा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि लाखों रुपये की बुकिंग के बदले ग्राहकों को 'पक्का बिल' (Sale Invoice) देने के बजाय केवल 'कच्ची पर्ची' थमाई जा रही है। ✓अघोषित आय और काला धन: एक अनुमान के मुताबिक, एक दिन की बुकिंग का खर्च ₹3 लाख या उससे अधिक होता है। पूरे 'लगन' के सीजन में यह टर्नओवर करोड़ों में पहुँच जाता है। यदि यह लेनदेन पक्के बिल पर नहीं है, तो यह स्पष्ट रूप से अघोषित आय है, जो अंततः काले धन (Black Money) के रूप में एकत्र हो रही है। ✓विभाग की चुप्पी पर सवाल: ✓क्या आयकर विभाग (Income Tax Department) और जीएसटी विभाग को इस बड़े खेल की भनक नहीं है? मैरिज हॉल संचालकों द्वारा पक्के इनवॉइस के बजाय कच्ची पर्ची देना न केवल टैक्स चोरी है, बल्कि भारत सरकार के पारदर्शी अर्थव्यवस्था के संकल्प को भी चुनौती देना है। जनहित में मांग: ✓सभी मैरिज हॉलों में डिजिटल लेनदेन और पक्के जीएसटी बिल को अनिवार्य किया जाए। आयकर विभाग इनके 'लगन' सीजन के वास्तविक आय और जमा किए गए टैक्स का मिलान करे। ग्राहकों को जागरूक होना होगा कि वे लाखों के भुगतान पर अपना कानूनी अधिकार यानी 'पक्का बिल' जरूर मांगें। जब तक सिस्टम में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक भ्रष्टाचार और काले धन की जड़ें मजबूत होती रहेंगी।
- bhangha kla gulharya rod he Bhai bahut kharb he koi banwata nahi he1
- सरकारी दावों की खुली पोल 10 साल, लाखों का खर्च, फिर भी ग्रामीण खेतों में जाने को मजबूर! सरकारी दावों की खुली पोल 10 साल, लाखों का खर्च, फिर भी ग्रामीण खेतों में जाने को मजबूर! बलरामपुर के विकासखंड तुलसीपुर की ग्राम पंचायत सिकटीहिवा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत लाखों रुपये खर्च कर सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले 10 वर्षों से इस पर ताला लटका हुआ है। दावे बनाम हकीकत ग्रामीणों का आरोप: ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि निर्माण के बाद से आज तक एक दिन के लिए भी यह शौचालय नहीं खोला गया। महिलाएं और बुजुर्ग आज भी खुले में शौच जाने को विवश हैं। अधिकारी का तर्क: ग्राम पंचायत विकास अधिकारी का दावा है कि शौचालय सुबह 5:00 से 9:00 बजे तक खुलता है। जमीनी स्थिति: शौचालय की छत पर रखी पानी की टंकियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त और बदहाल हैं। जब पानी की व्यवस्था ही नहीं है, तो शौचालय का उपयोग कैसे संभव है? यह स्थिति अधिकारी के दावों को पूरी तरह कागजी साबित करती है। "क्या स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य सिर्फ इमारतें खड़ी करना है या जनता को सुविधा देना? लाखों के बजट का बंदरबांट आखिर कब तक चलेगा?" शासन-प्रशासन से अनुरोध है कि इस मामले का संज्ञान लें और दोषियों पर कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को उनके अधिकार की सुविधा उपलब्ध कराएं। ग्राम पंचायत सिकटीहिवा, विकासखंड तुलसीपुर, बलरामपुर 2
- शौच मुक्त भारत दिखता कागजो में जमीनी हकीकत वर्षो से नही खुला ग्राम पंचायत सिक्तिःवा शौचालय का ताला सोच मुक्त अभियान भले ही कागजों में दौड़ रहा है लेकिन धरातल की तस्वीरों से अंदाजा लगा सकते है कि लाखों खर्च के बाद भी सामुदायिक शौचालय में वर्षो से ताला लगा हुआ की जानकारी ग्रामीणों ने दी है जबकि इसके निर्माण में लगभग 7 लाख 2021,22 में खर्च और मरम्मत 2022,23 में 3 लाख की जानकारी मिल रही उसके बाद भी सिक्तिःवा ग्राम पंचायत में ग्रामीणों को शौच के लिए आज भी खेतो में जाना पड़ता है फिर कैसे हो शौच मुक्क्त भारत का सपना साकार जब इस प्रकार से ग्राम प्रधान और सचिव के द्वारा सिर्फ कागजो में ही विकास करवाया गया हो जिसकी पुष्टि खण्ड विकास अधिकारी तुलसीपुर से बात करने पर भी की जाती है कि हमारे जांच में भी शौचालय बन्द मिला है जबकि जिम्मेदार द्वारा दावा किया जाता है कि खुलता है ।1
- गौरा चौराहा क्षेत्र में बालक का शव मिलने से सनसनी, पुलिस जांच में जुटी गौरा चौराहा क्षेत्र में बालक का शव मिलने से सनसनी, पुलिस जांच में जुटी बलरामपुर जिले के थाना गौरा चौराहा क्षेत्र में एक बालक का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।1
- Phir use vot de kon raha hai😀😀...................... Phir use vot de kon raha hai😀😀😀1
- उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में "बहू-बेटी सम्मेलन" आयोजित कर महिलाओं को सशक्तिकरण का संदेश दिया गया। इसमें सरकारी योजनाओं, साइबर सुरक्षा, घरेलू हिंसा से बचाव और आत्मरक्षा के बारे में जागरूक कर आत्मनिर्भर बनने को प्रेरित किया गया। यह पहल महिलाओं को निर्भीक होकर समाज में अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी।1
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का ऐलान किया है। पार्टी ने साफ किया है कि जरूरत पड़ी तो वह भाजपा से अलग होकर भी चुनाव लड़ेगी, जिसका अंतिम फैसला चिराग पासवान लेंगे। यह ऐलान श्रावस्ती में हुई एक संगठन समीक्षा बैठक में किया गया, जिससे प्रदेश की राजनीति में नई हलचल मच गई है।3
- समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका 30 नेता ओपी राजभर पार्टी में शामिल समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका 30 नेता ओपी राजभर पार्टी में शामिल1