सरकारी दावों की खुली पोल 10 साल, लाखों का खर्च, फिर भी ग्रामीण खेतों में जाने को मजबूर! सरकारी दावों की खुली पोल 10 साल, लाखों का खर्च, फिर भी ग्रामीण खेतों में जाने को मजबूर! बलरामपुर के विकासखंड तुलसीपुर की ग्राम पंचायत सिकटीहिवा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत लाखों रुपये खर्च कर सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले 10 वर्षों से इस पर ताला लटका हुआ है। दावे बनाम हकीकत ग्रामीणों का आरोप: ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि निर्माण के बाद से आज तक एक दिन के लिए भी यह शौचालय नहीं खोला गया। महिलाएं और बुजुर्ग आज भी खुले में शौच जाने को विवश हैं। अधिकारी का तर्क: ग्राम पंचायत विकास अधिकारी का दावा है कि शौचालय सुबह 5:00 से 9:00 बजे तक खुलता है। जमीनी स्थिति: शौचालय की छत पर रखी पानी की टंकियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त और बदहाल हैं। जब पानी की व्यवस्था ही नहीं है, तो शौचालय का उपयोग कैसे संभव है? यह स्थिति अधिकारी के दावों को पूरी तरह कागजी साबित करती है। "क्या स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य सिर्फ इमारतें खड़ी करना है या जनता को सुविधा देना? लाखों के बजट का बंदरबांट आखिर कब तक चलेगा?" शासन-प्रशासन से अनुरोध है कि इस मामले का संज्ञान लें और दोषियों पर कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को उनके अधिकार की सुविधा उपलब्ध कराएं। ग्राम पंचायत सिकटीहिवा, विकासखंड तुलसीपुर, बलरामपुर
सरकारी दावों की खुली पोल 10 साल, लाखों का खर्च, फिर भी ग्रामीण खेतों में जाने को मजबूर! सरकारी दावों की खुली पोल 10 साल, लाखों का खर्च, फिर भी ग्रामीण खेतों में जाने को मजबूर! बलरामपुर के विकासखंड तुलसीपुर की ग्राम पंचायत सिकटीहिवा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत लाखों रुपये खर्च कर सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले 10 वर्षों से इस पर ताला लटका हुआ है। दावे बनाम हकीकत ग्रामीणों का आरोप: ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि निर्माण के बाद से आज तक एक दिन के लिए भी यह शौचालय नहीं खोला गया। महिलाएं और बुजुर्ग आज भी खुले में शौच
जाने को विवश हैं। अधिकारी का तर्क: ग्राम पंचायत विकास अधिकारी का दावा है कि शौचालय सुबह 5:00 से 9:00 बजे तक खुलता है। जमीनी स्थिति: शौचालय की छत पर रखी पानी की टंकियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त और बदहाल हैं। जब पानी की व्यवस्था ही नहीं है, तो शौचालय का उपयोग कैसे संभव है? यह स्थिति अधिकारी के दावों को पूरी तरह कागजी साबित करती है। "क्या स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य सिर्फ इमारतें खड़ी करना है या जनता को सुविधा देना? लाखों के बजट का बंदरबांट आखिर कब तक चलेगा?" शासन-प्रशासन से अनुरोध है कि इस मामले का संज्ञान लें और दोषियों पर कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को उनके अधिकार की सुविधा उपलब्ध कराएं। ग्राम पंचायत सिकटीहिवा, विकासखंड तुलसीपुर, बलरामपुर
- *गौवंशों के संरक्षण एवं बेहतर देखभाल को लेकर डीएम सख्त, मोतीपुर कला गौ संरक्षण केंद्र का किया विस्तृत निरीक्षण *गौवंशों के संरक्षण एवं बेहतर देखभाल को लेकर डीएम सख्त, मोतीपुर कला गौ संरक्षण केंद्र का किया विस्तृत निरीक्षण* *हरे चारे, भूसा भंडारण, साफ-सफाई, पेयजल एवं चिकित्सीय सुविधाओं की व्यवस्थाओं का लिया जायजा* *गर्मी से बचाव हेतु शेड पर पुवाल रखने एवं पौधारोपण कर छायादार वातावरण विकसित करने के दिए निर्देश* *सहभागिता योजना के तहत दुधारू गौवंश चिन्हित कुपोषित बच्चों के परिवारों को उपलब्ध कराने पर दिया जोर* दिनांक 11 मई 2026 जिलाधिकारी डॉ विपिन कुमार जैन द्वारा विकास खंड हरैया सतघरवा के ग्राम पंचायत मोतीपुर कला स्थित गौ संरक्षण केंद्र का निरीक्षण कर गौवंशों के संरक्षण, देखभाल एवं उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गौ संरक्षण केंद्र में संचालित व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गौवंशों के लिए उपलब्ध हरे चारे, भूसा गोदाम, पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई, शेड की स्थिति तथा चिकित्सीय सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने गौवंशों को उपलब्ध कराए जा रहे चारे की गुणवत्ता एवं मात्रा की जानकारी प्राप्त की तथा भूसा भंडारण की समुचित व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। इस दौरान जिलाधिकारी ने गौ संरक्षण केंद्र परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक न पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि नियमित साफ-सफाई एवं गोबर निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे गौवंशों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो सके। गर्मी को देखते हुए जिलाधिकारी ने गौवंशों को ताप से राहत प्रदान करने हेतु विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने शेड के ऊपर पुवाल रखने, शेड के आसपास छायादार पौधों का पौधारोपण करने तथा पर्याप्त पेयजल की सतत उपलब्धता बनाए रखने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि गर्मी के मौसम में गौवंशों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाए। जिलाधिकारी ने पशु चिकित्सीय सुविधाओं की समीक्षा करते हुए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण एवं आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण केंद्रों में पशु चिकित्सकों की नियमित निगरानी बनी रहनी चाहिए ताकि किसी भी बीमारी की स्थिति में त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा सके। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सहभागिता योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत दुधारू गौवंश को चिन्हित कुपोषित बच्चों के परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाया जा सके तथा परिवारों को आर्थिक एवं पोषण संबंधी सहयोग प्राप्त हो। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि गौ संरक्षण केंद्रों की व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा सभी व्यवस्थाओं को शासन की मंशा के अनुरूप बेहतर ढंग से संचालित किया जाए। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी हरैया सतघरवा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।2
- bhangha kla gulharya rod he Bhai bahut kharb he koi banwata nahi he1
- शौच मुक्त भारत दिखता कागजो में जमीनी हकीकत वर्षो से नही खुला ग्राम पंचायत सिक्तिःवा शौचालय का ताला सोच मुक्त अभियान भले ही कागजों में दौड़ रहा है लेकिन धरातल की तस्वीरों से अंदाजा लगा सकते है कि लाखों खर्च के बाद भी सामुदायिक शौचालय में वर्षो से ताला लगा हुआ की जानकारी ग्रामीणों ने दी है जबकि इसके निर्माण में लगभग 7 लाख 2021,22 में खर्च और मरम्मत 2022,23 में 3 लाख की जानकारी मिल रही उसके बाद भी सिक्तिःवा ग्राम पंचायत में ग्रामीणों को शौच के लिए आज भी खेतो में जाना पड़ता है फिर कैसे हो शौच मुक्क्त भारत का सपना साकार जब इस प्रकार से ग्राम प्रधान और सचिव के द्वारा सिर्फ कागजो में ही विकास करवाया गया हो जिसकी पुष्टि खण्ड विकास अधिकारी तुलसीपुर से बात करने पर भी की जाती है कि हमारे जांच में भी शौचालय बन्द मिला है जबकि जिम्मेदार द्वारा दावा किया जाता है कि खुलता है ।1
- गौरा चौराहा क्षेत्र में बालक का शव मिलने से सनसनी, पुलिस जांच में जुटी गौरा चौराहा क्षेत्र में बालक का शव मिलने से सनसनी, पुलिस जांच में जुटी बलरामपुर जिले के थाना गौरा चौराहा क्षेत्र में एक बालक का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।1
- बलरामपुर जिले में यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर कौन है जो किसी खास उम्मीदवार या व्यक्ति को लगातार समर्थन दे रहा है। यह बात मतदाताओं के बीच जिज्ञासा पैदा कर रही है।1
- सिरसिया पुलिस की दबंगई: सिविल ड्रेस में टैंपो थाने में खड़ी की, सवाल पूछने पर पत्रकार को दी 'देख लेने' की धमकी श्रावस्ती। जनपद के सिरसिया थाने में तैनात पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जहाँ जिले के पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी लगातार पुलिस को 'मित्र पुलिस' बनाने और जनता के साथ न्यायसंगत व्यवहार करने की सीख दे रहे हैं, वहीं सिरसिया थाने के कुछ दरोगा इन निर्देशों को ठेंगे पर रखकर खाकी की छवि धूमिल कर रहे हैं। ताजा मामला सिविल ड्रेस में दो दरोगाओं द्वारा एक टेंपो चालक के उत्पीड़न और कवरेज कर रहे पत्रकार को धमकाने का प्रकाश में आया है। नियम ताक पर: बिना वर्दी वसूली का प्रयास? प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिरसिया थाने में तैनात दरोगा साहब राव और मनोज कुमार बिना वर्दी (सिविल ड्रेस) के एक टेंपो चालक पर दबाव बनाकर उसे जबरन थाने ले जाने का प्रयास कर रहे थे। पीड़ित चालक का दावा है कि उसके पास वाहन के सभी वैध दस्तावेज (इंश्योरेंस, फिटनेस आदि) मौजूद थे, इसके बावजूद पुलिसकर्मी उसे प्रताड़ित कर रहे थे। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला मौके पर मौजूद एक पत्रकार ने जब नियम विरुद्ध हो रही इस कार्रवाई पर सवाल उठाया और चालक को परेशान करने का कारण जानना चाहा, तो वर्दी के अहंकार में डूबे दरोगा आगबबूला हो गए। दरोगाओं ने पत्रकार के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि सरेआम 'देख लेने' और फर्जी कार्रवाई करने की धमकी तक दे डाली। कानूनी पहलू: नियमानुसार, बिना वर्दी के कोई भी पुलिसकर्मी वाहन चेकिंग या चालान की कार्रवाई नहीं कर सकता। लेकिन यहाँ सरेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं। आरोप है कि पुलिसकर्मी नियमानुसाार कार्रवाई के बजाय अवैध वसूली के उद्देश्य से चालक पर दबाव बना रहे थे। वीडियो बनते ही नरम पड़े तेवर पुलिसिया रौब तब कम हुआ जब वहां मौजूद एक युवक ने इस पूरी घटना का मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। कैमरे की जद में आते ही दरोगाओं के तेवर अचानक बदल गए और वे अपनी सफाई पेश करने लगे। यह घटना साबित करती है कि कुछ पुलिसकर्मियों के मन में कानून का नहीं, बल्कि केवल साक्ष्यों (वीडियो) का डर शेष रह गया है। कप्तान की मेहनत पर फिर रहा पानी एक तरफ कप्तान राहुल भाटी पुलिस की छवि सुधारने के लिए रात-दिन प्रयासरत हैं, वहीं सिरसिया पुलिस का यह 'अमानवीय' चेहरा प्रशासन के दावों की पोल खोल रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या कागजात पूरे होने के बाद भी गरीबों का उत्पीड़न ही आधुनिक पुलिस की पहचान है? और क्या अब पत्रकार को सच दिखाने और सवाल पूछने पर धमकियां दी जाएंगी? क्षेत्रीय जनता अब इस मामले में उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रही है।1
- उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में "बहू-बेटी सम्मेलन" आयोजित कर महिलाओं को सशक्तिकरण का संदेश दिया गया। इसमें सरकारी योजनाओं, साइबर सुरक्षा, घरेलू हिंसा से बचाव और आत्मरक्षा के बारे में जागरूक कर आत्मनिर्भर बनने को प्रेरित किया गया। यह पहल महिलाओं को निर्भीक होकर समाज में अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी।1
- सरकारी दावों की खुली पोल 10 साल, लाखों का खर्च, फिर भी ग्रामीण खेतों में जाने को मजबूर! सरकारी दावों की खुली पोल 10 साल, लाखों का खर्च, फिर भी ग्रामीण खेतों में जाने को मजबूर! बलरामपुर के विकासखंड तुलसीपुर की ग्राम पंचायत सिकटीहिवा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत लाखों रुपये खर्च कर सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले 10 वर्षों से इस पर ताला लटका हुआ है। दावे बनाम हकीकत ग्रामीणों का आरोप: ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि निर्माण के बाद से आज तक एक दिन के लिए भी यह शौचालय नहीं खोला गया। महिलाएं और बुजुर्ग आज भी खुले में शौच जाने को विवश हैं। अधिकारी का तर्क: ग्राम पंचायत विकास अधिकारी का दावा है कि शौचालय सुबह 5:00 से 9:00 बजे तक खुलता है। जमीनी स्थिति: शौचालय की छत पर रखी पानी की टंकियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त और बदहाल हैं। जब पानी की व्यवस्था ही नहीं है, तो शौचालय का उपयोग कैसे संभव है? यह स्थिति अधिकारी के दावों को पूरी तरह कागजी साबित करती है। "क्या स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य सिर्फ इमारतें खड़ी करना है या जनता को सुविधा देना? लाखों के बजट का बंदरबांट आखिर कब तक चलेगा?" शासन-प्रशासन से अनुरोध है कि इस मामले का संज्ञान लें और दोषियों पर कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को उनके अधिकार की सुविधा उपलब्ध कराएं। ग्राम पंचायत सिकटीहिवा, विकासखंड तुलसीपुर, बलरामपुर 2