सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनीं नगमा खातून, जीता फ्री उमराह पैकेज व ट्राफी। सीरतुन्नबी, कुरआन और साइंस के तालमेल पर हुआ विशेष व्याख्यान। कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम भी शुरू, दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पेश की। सेराज अहमद कुरैशी रिपोर्टर; इम्तियाज फोनवेल की खास रिपोर्ट पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और बच्चों व युवाओं में धार्मिक, नैतिक एवं शैक्षिक जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से मियां साहब इस्लामिया (एमएसआई) इंटर कॉलेज, बक्शीपुर के ऑडिटोरियम में सीरतुन्नबी सेमिनार व सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 का पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। आयोजन अल कलम ट्रस्ट व तहरीक उलमा-ए-हिंद की ओर से किया गया। अतिथियों का स्वागत हाफिज रहमत अली निजामी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद व नेहाल अहमद ने किया। अतिथियों ने सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन के सफल प्रतिभागियों को ट्राफी, शील्ड और पुरस्कार प्रदान किए। कॉम्पिटिशन में कॉलेज ग्रुप की नगमा खातून ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनने का गौरव हासिल किया। उन्हें ट्रैवल प्वाइंट की ओर से फ्री उमराह पैकेज का विशेष पुरस्कार और ट्राफी प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन व अल कलम ट्रस्ट के कार्यों पर सफरनामा प्रस्तुत किया गया। कॉम्पिटिशन के विभिन्न चरणों और प्रतिभागियों की गतिविधियों को वीडियो व अन्य माध्यमों से लोगों के सामने रखा गया। बच्चों द्वारा लिखी गई कॉम्पिटिशन की कॉपियां भी दिखाई गईं। इससे प्रतिभागियों की मेहनत, अध्ययन और सीरत के प्रति उनकी रुचि का परिचय मिला। समारोह के दौरान कलमा शरीफ पढ़ने की एक विशेष मुहिम भी शुरू की गई। आयोजकों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को कलमा शरीफ पढ़ने की तरफ प्रेरित करना और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों से इस मुहिम से जुड़ने और अधिक से अधिक लोगों तक इसका संदेश पहुंचाने की अपील की गई। संचालन कर रहे कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि सीरतुन्नबी से जुड़े कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल कॉम्पिटिशन और पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं, धार्मिक मूल्यों और नेक अमल से जोड़ना भी है। इसी क्रम में कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। मुख्य अतिथि तहरीक उलमा-ए-हिंद के चेयरमैन डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने सीरत, कुरआन और साइंस के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए ज्ञान की अहमियत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुरआन इंसान को ज्ञान हासिल करने, कायनात पर गौर-ओ-फिक्र करने और सृष्टि में मौजूद निशानियों पर विचार करने की प्रेरणा देता है। विज्ञान प्राकृतिक घटनाओं और कायनात के विभिन्न पहलुओं को समझने का माध्यम है, जबकि धार्मिक शिक्षा इंसान को ज्ञान के सही इस्तेमाल के लिए नैतिक दिशा प्रदान करती है। मुफ्ती खालिद ने अल कलम ट्रस्ट की ओर से आयोजित सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन और उससे जुड़ी विभिन्न पहलों को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को सीरत के अध्ययन से जोड़ने के लिए इस तरह के कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों में पढ़ने, लिखने और सीखने की रुचि पैदा होती है तथा उन्हें पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी और शिक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सीरत-ए-पाक के अध्ययन के साथ शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहिए। बच्चों में किताब पढ़ने, सवाल करने, खोज करने और नई चीजें सीखने की आदत विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन कायम करके समाज के लिए बेहतर भविष्य तैयार किया जा सकता है। विशिष्ट वक्ता हैदराबाद यूनिवर्सिटी के अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ. गौस मुहम्मद अजहरी ने अपने व्याख्यान में कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत मानव जीवन के लिए व्यापक मार्गदर्शन का स्रोत है। उन्होंने कहा कि सीरत का अध्ययन केवल प्रतियोगिता में सफलता हासिल करने या जानकारी बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे इंसान को अपने जीवन, व्यवहार और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही सीरत, कुरआन और अच्छे अखलाक से जोड़ने की जरूरत है। नई पीढ़ी अगर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी का अध्ययन करेगी तो उसे सच्चाई, अमानतदारी, इंसाफ, सब्र, रहमदिली और इंसानियत जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा हासिल करने पर भी जोर दिया। समारोह में सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन से जुड़े एक विशेष पहलू का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि कॉम्पिटिशन और इससे जुड़े प्रयासों के दौरान दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पढ़कर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में पेश किया गया। हाफिज रहमत अली निजामी व मुजफ्फर हसनैन रूमी ने बताया कि कॉम्पिटिशन का उद्देश्य केवल बच्चों को पुरस्कार दिलाना नहीं था, बल्कि उन्हें सीरत-ए-पाक के अध्ययन से जोड़ना और उनके अंदर पढ़ने-लिखने की रुचि पैदा करना भी था। कॉम्पिटिशन में विभिन्न आयु और शैक्षिक वर्गों के बच्चों सहित बड़ों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कॉम्पिटिशन के सफरनामे की प्रस्तुति के साथ प्रतिभागियों की लिखी हुई कॉपियां भी प्रदर्शित की गईं। इससे अभिभावकों और मौजूद लोगों को बच्चों की मेहनत को करीब से देखने का अवसर मिला। सफल प्रतिभागियों को मंच पर बुलाकर ट्राफी, शील्ड और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। हिफ्ज ग्रुप में इकरा अंसारी, सलमान अंसारी, मुहम्मद शाद, मुहम्मद साकिब अंसारी और रहमत अली ने पुरस्कार हासिल किए। आलिम ग्रुप में रौनक फातिमा, मुहम्मद कासिम, सदफ हया, सानिया बानो और ऐनुन जारिया सफल रहे। स्कूल ग्रुप में इनाया फातिमा, यसरा खान, यास्ना साकिब, उजमा नूर और सुमैरा वारसी को पुरस्कार मिला। कॉलेज ग्रुप में नगमा खातून, फौजिया तबस्सुम, मरियम शाहीन, सदफ फातिमा और शारीबा कौसर कामयाब रहीं। इसी ग्रुप में नगमा खातून ने प्रथम स्थान हासिल कर प्रतियोगिता की विजेता बनने के साथ फ्री उमराह पैकेज का विशेष पुरस्कार प्राप्त किया। फ्री ग्रुप में करीमा हुसैन, सद्दाम हुसैन निजामी, आहू चश्म निजामी, मेहनाज जहां और सोफिया खातून को पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन के उद्देश्य और इसके सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों को सीरत-ए-पाक से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है। कॉम्पिटिशन के माध्यम से बच्चों में अध्ययन, लेखन और सीरत के प्रति रुचि पैदा करने का प्रयास किया गया है। कुरआन-ए-पाक की तिलावत हाफिज रहमत अली निजामी ने की। इसके बाद हम्द-ओ-नात पेश की गई। समारोह में प्रधानाचार्य मुख्तार अहमद, प्रधानाचार्या शम्सा अंसारी, अरबाज नक्शबंदी, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती अजहर शम्सी, हाजी फैज अहमद खान, शहबाज सिद्दीकी, सैयद जव्वाद अली सब्जपोश, महबूब आलम, कारी शराफत हुसैन, हाफिज आफताब आलम, हाफिज रजी, मौलाना महमूद रजा, मौलाना जहांगीर अहमद, ताबिश सिद्दीकी, शीराज सिद्दीकी, प्रिंस, जीशान, मुहम्मद आजम, नवेद आलम, शादाब सिद्दीकी, सैयद नदीम अहमद, शीरीन आसिफ, ज्या वारसी, आयशा फसीही, आयशा खातून, आस्मां खातून, अली अहमद, समीर अली, जैद, हाजी सेराज अहमद, सैयद जफर हसन, प्रधानाचार्य कारी नसीमुल्लाह, मुफ्तिया कहकशां फिरदौस, सेराज अहमद कुरैशी, आलिमा अरबिया इस्माईली, मौलाना दानिश, प्रधानाचार्य मुहम्मद सिद्दीक, एडवोकेट मुहम्मद आजम, काशिफ महमूद, सैयद आसिम, आसिफ अंसारी, रहमत अली, रुशान, शाद, जीशान, बेलाल अहमद, सैयद शहाबुद्दीन आदि मौजूद रहे। आयोजकों ने कहा कि सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत से जोड़ने के साथ उनमें अध्ययन, लेखन और ज्ञान की रुचि पैदा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे और नई पीढ़ी सीरत, कुरआन, शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्रों में आगे बढ़कर समाज और देश की तरक्की में अपना योगदान देगी।
सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनीं नगमा खातून, जीता फ्री उमराह पैकेज व ट्राफी। सीरतुन्नबी, कुरआन और साइंस के तालमेल पर हुआ विशेष व्याख्यान। कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम भी शुरू, दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पेश की। सेराज अहमद कुरैशी रिपोर्टर; इम्तियाज फोनवेल की खास रिपोर्ट पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और बच्चों व युवाओं में धार्मिक, नैतिक एवं शैक्षिक जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से मियां साहब इस्लामिया (एमएसआई) इंटर कॉलेज, बक्शीपुर के ऑडिटोरियम में सीरतुन्नबी सेमिनार व सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 का पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। आयोजन अल कलम ट्रस्ट व तहरीक उलमा-ए-हिंद की ओर से किया गया। अतिथियों का स्वागत हाफिज रहमत अली निजामी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद व नेहाल अहमद ने किया। अतिथियों ने सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन के सफल प्रतिभागियों को ट्राफी, शील्ड और पुरस्कार प्रदान किए। कॉम्पिटिशन में कॉलेज ग्रुप की नगमा खातून ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनने का गौरव हासिल किया। उन्हें ट्रैवल प्वाइंट की ओर से फ्री उमराह पैकेज का विशेष पुरस्कार और ट्राफी प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन व अल कलम ट्रस्ट के कार्यों पर सफरनामा प्रस्तुत किया गया। कॉम्पिटिशन के विभिन्न चरणों और प्रतिभागियों की गतिविधियों को वीडियो व अन्य माध्यमों से लोगों के सामने रखा गया। बच्चों द्वारा लिखी गई कॉम्पिटिशन की कॉपियां भी दिखाई गईं। इससे प्रतिभागियों की मेहनत, अध्ययन और सीरत के प्रति उनकी रुचि का परिचय मिला। समारोह के दौरान कलमा शरीफ पढ़ने की एक विशेष मुहिम भी शुरू की गई। आयोजकों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को कलमा शरीफ पढ़ने की तरफ प्रेरित करना और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों से इस मुहिम से जुड़ने और अधिक से अधिक लोगों तक इसका संदेश पहुंचाने की अपील की गई। संचालन कर रहे कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि सीरतुन्नबी से जुड़े कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल कॉम्पिटिशन और पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं, धार्मिक मूल्यों और नेक अमल से जोड़ना भी है। इसी क्रम में कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। मुख्य अतिथि तहरीक उलमा-ए-हिंद के चेयरमैन डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने सीरत, कुरआन और साइंस के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए ज्ञान की अहमियत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुरआन इंसान को ज्ञान हासिल करने, कायनात पर गौर-ओ-फिक्र करने और सृष्टि में मौजूद निशानियों पर विचार करने की प्रेरणा देता है। विज्ञान प्राकृतिक घटनाओं और कायनात के विभिन्न पहलुओं को समझने का माध्यम है, जबकि धार्मिक शिक्षा इंसान को ज्ञान के सही इस्तेमाल के लिए नैतिक दिशा प्रदान करती है। मुफ्ती खालिद ने अल कलम ट्रस्ट की ओर से आयोजित सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन और उससे जुड़ी विभिन्न पहलों को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को सीरत के अध्ययन से जोड़ने के लिए इस तरह के कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों में पढ़ने, लिखने और सीखने की रुचि पैदा होती है तथा उन्हें पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी और शिक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सीरत-ए-पाक के अध्ययन के साथ शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहिए। बच्चों में किताब पढ़ने, सवाल करने, खोज करने और नई चीजें सीखने की आदत विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन कायम करके समाज के लिए बेहतर भविष्य तैयार किया जा सकता है। विशिष्ट वक्ता हैदराबाद यूनिवर्सिटी के अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ. गौस मुहम्मद अजहरी ने अपने व्याख्यान में कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत मानव जीवन के लिए व्यापक मार्गदर्शन का
स्रोत है। उन्होंने कहा कि सीरत का अध्ययन केवल प्रतियोगिता में सफलता हासिल करने या जानकारी बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे इंसान को अपने जीवन, व्यवहार और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही सीरत, कुरआन और अच्छे अखलाक से जोड़ने की जरूरत है। नई पीढ़ी अगर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी का अध्ययन करेगी तो उसे सच्चाई, अमानतदारी, इंसाफ, सब्र, रहमदिली और इंसानियत जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा हासिल करने पर भी जोर दिया। समारोह में सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन से जुड़े एक विशेष पहलू का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि कॉम्पिटिशन और इससे जुड़े प्रयासों के दौरान दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पढ़कर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में पेश किया गया। हाफिज रहमत अली निजामी व मुजफ्फर हसनैन रूमी ने बताया कि कॉम्पिटिशन का उद्देश्य केवल बच्चों को पुरस्कार दिलाना नहीं था, बल्कि उन्हें सीरत-ए-पाक के अध्ययन से जोड़ना और उनके अंदर पढ़ने-लिखने की रुचि पैदा करना भी था। कॉम्पिटिशन में विभिन्न आयु और शैक्षिक वर्गों के बच्चों सहित बड़ों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कॉम्पिटिशन के सफरनामे की प्रस्तुति के साथ प्रतिभागियों की लिखी हुई कॉपियां भी प्रदर्शित की गईं। इससे अभिभावकों और मौजूद लोगों को बच्चों की मेहनत को करीब से देखने का अवसर मिला। सफल प्रतिभागियों को मंच पर बुलाकर ट्राफी, शील्ड और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। हिफ्ज ग्रुप में इकरा अंसारी, सलमान अंसारी, मुहम्मद शाद, मुहम्मद साकिब अंसारी और रहमत अली ने पुरस्कार हासिल किए। आलिम ग्रुप में रौनक फातिमा, मुहम्मद कासिम, सदफ हया, सानिया बानो और ऐनुन जारिया सफल रहे। स्कूल ग्रुप में इनाया फातिमा, यसरा खान, यास्ना साकिब, उजमा नूर और सुमैरा वारसी को पुरस्कार मिला। कॉलेज ग्रुप में नगमा खातून, फौजिया तबस्सुम, मरियम शाहीन, सदफ फातिमा और शारीबा कौसर कामयाब रहीं। इसी ग्रुप में नगमा खातून ने प्रथम स्थान हासिल कर प्रतियोगिता की विजेता बनने के साथ फ्री उमराह पैकेज का विशेष पुरस्कार प्राप्त किया। फ्री ग्रुप में करीमा हुसैन, सद्दाम हुसैन निजामी, आहू चश्म निजामी, मेहनाज जहां और सोफिया खातून को पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन के उद्देश्य और इसके सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों को सीरत-ए-पाक से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है। कॉम्पिटिशन के माध्यम से बच्चों में अध्ययन, लेखन और सीरत के प्रति रुचि पैदा करने का प्रयास किया गया है। कुरआन-ए-पाक की तिलावत हाफिज रहमत अली निजामी ने की। इसके बाद हम्द-ओ-नात पेश की गई। समारोह में प्रधानाचार्य मुख्तार अहमद, प्रधानाचार्या शम्सा अंसारी, अरबाज नक्शबंदी, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती अजहर शम्सी, हाजी फैज अहमद खान, शहबाज सिद्दीकी, सैयद जव्वाद अली सब्जपोश, महबूब आलम, कारी शराफत हुसैन, हाफिज आफताब आलम, हाफिज रजी, मौलाना महमूद रजा, मौलाना जहांगीर अहमद, ताबिश सिद्दीकी, शीराज सिद्दीकी, प्रिंस, जीशान, मुहम्मद आजम, नवेद आलम, शादाब सिद्दीकी, सैयद नदीम अहमद, शीरीन आसिफ, ज्या वारसी, आयशा फसीही, आयशा खातून, आस्मां खातून, अली अहमद, समीर अली, जैद, हाजी सेराज अहमद, सैयद जफर हसन, प्रधानाचार्य कारी नसीमुल्लाह, मुफ्तिया कहकशां फिरदौस, सेराज अहमद कुरैशी, आलिमा अरबिया इस्माईली, मौलाना दानिश, प्रधानाचार्य मुहम्मद सिद्दीक, एडवोकेट मुहम्मद आजम, काशिफ महमूद, सैयद आसिम, आसिफ अंसारी, रहमत अली, रुशान, शाद, जीशान, बेलाल अहमद, सैयद शहाबुद्दीन आदि मौजूद रहे। आयोजकों ने कहा कि सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत से जोड़ने के साथ उनमें अध्ययन, लेखन और ज्ञान की रुचि पैदा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे और नई पीढ़ी सीरत, कुरआन, शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्रों में आगे बढ़कर समाज और देश की तरक्की में अपना योगदान देगी।
- सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनीं नगमा खातून, जीता फ्री उमराह पैकेज व ट्राफी। सीरतुन्नबी, कुरआन और साइंस के तालमेल पर हुआ विशेष व्याख्यान। कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम भी शुरू, दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पेश की। सेराज अहमद कुरैशी रिपोर्टर; इम्तियाज फोनवेल की खास रिपोर्ट पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और बच्चों व युवाओं में धार्मिक, नैतिक एवं शैक्षिक जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से मियां साहब इस्लामिया (एमएसआई) इंटर कॉलेज, बक्शीपुर के ऑडिटोरियम में सीरतुन्नबी सेमिनार व सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 का पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। आयोजन अल कलम ट्रस्ट व तहरीक उलमा-ए-हिंद की ओर से किया गया। अतिथियों का स्वागत हाफिज रहमत अली निजामी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद व नेहाल अहमद ने किया। अतिथियों ने सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन के सफल प्रतिभागियों को ट्राफी, शील्ड और पुरस्कार प्रदान किए। कॉम्पिटिशन में कॉलेज ग्रुप की नगमा खातून ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन सीजन-2 की विजेता बनने का गौरव हासिल किया। उन्हें ट्रैवल प्वाइंट की ओर से फ्री उमराह पैकेज का विशेष पुरस्कार और ट्राफी प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन व अल कलम ट्रस्ट के कार्यों पर सफरनामा प्रस्तुत किया गया। कॉम्पिटिशन के विभिन्न चरणों और प्रतिभागियों की गतिविधियों को वीडियो व अन्य माध्यमों से लोगों के सामने रखा गया। बच्चों द्वारा लिखी गई कॉम्पिटिशन की कॉपियां भी दिखाई गईं। इससे प्रतिभागियों की मेहनत, अध्ययन और सीरत के प्रति उनकी रुचि का परिचय मिला। समारोह के दौरान कलमा शरीफ पढ़ने की एक विशेष मुहिम भी शुरू की गई। आयोजकों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को कलमा शरीफ पढ़ने की तरफ प्रेरित करना और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों से इस मुहिम से जुड़ने और अधिक से अधिक लोगों तक इसका संदेश पहुंचाने की अपील की गई। संचालन कर रहे कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि सीरतुन्नबी से जुड़े कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल कॉम्पिटिशन और पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं, धार्मिक मूल्यों और नेक अमल से जोड़ना भी है। इसी क्रम में कलमा शरीफ पढ़ने की मुहिम को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। मुख्य अतिथि तहरीक उलमा-ए-हिंद के चेयरमैन डॉ. मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने सीरत, कुरआन और साइंस के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए ज्ञान की अहमियत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुरआन इंसान को ज्ञान हासिल करने, कायनात पर गौर-ओ-फिक्र करने और सृष्टि में मौजूद निशानियों पर विचार करने की प्रेरणा देता है। विज्ञान प्राकृतिक घटनाओं और कायनात के विभिन्न पहलुओं को समझने का माध्यम है, जबकि धार्मिक शिक्षा इंसान को ज्ञान के सही इस्तेमाल के लिए नैतिक दिशा प्रदान करती है। मुफ्ती खालिद ने अल कलम ट्रस्ट की ओर से आयोजित सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन और उससे जुड़ी विभिन्न पहलों को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को सीरत के अध्ययन से जोड़ने के लिए इस तरह के कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों में पढ़ने, लिखने और सीखने की रुचि पैदा होती है तथा उन्हें पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी और शिक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सीरत-ए-पाक के अध्ययन के साथ शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहिए। बच्चों में किताब पढ़ने, सवाल करने, खोज करने और नई चीजें सीखने की आदत विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन कायम करके समाज के लिए बेहतर भविष्य तैयार किया जा सकता है। विशिष्ट वक्ता हैदराबाद यूनिवर्सिटी के अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ. गौस मुहम्मद अजहरी ने अपने व्याख्यान में कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत मानव जीवन के लिए व्यापक मार्गदर्शन का स्रोत है। उन्होंने कहा कि सीरत का अध्ययन केवल प्रतियोगिता में सफलता हासिल करने या जानकारी बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे इंसान को अपने जीवन, व्यवहार और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही सीरत, कुरआन और अच्छे अखलाक से जोड़ने की जरूरत है। नई पीढ़ी अगर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी का अध्ययन करेगी तो उसे सच्चाई, अमानतदारी, इंसाफ, सब्र, रहमदिली और इंसानियत जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा हासिल करने पर भी जोर दिया। समारोह में सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन से जुड़े एक विशेष पहलू का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि कॉम्पिटिशन और इससे जुड़े प्रयासों के दौरान दो करोड़ 39 लाख 58 हजार 838 दुरूद शरीफ पढ़कर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में पेश किया गया। हाफिज रहमत अली निजामी व मुजफ्फर हसनैन रूमी ने बताया कि कॉम्पिटिशन का उद्देश्य केवल बच्चों को पुरस्कार दिलाना नहीं था, बल्कि उन्हें सीरत-ए-पाक के अध्ययन से जोड़ना और उनके अंदर पढ़ने-लिखने की रुचि पैदा करना भी था। कॉम्पिटिशन में विभिन्न आयु और शैक्षिक वर्गों के बच्चों सहित बड़ों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कॉम्पिटिशन के सफरनामे की प्रस्तुति के साथ प्रतिभागियों की लिखी हुई कॉपियां भी प्रदर्शित की गईं। इससे अभिभावकों और मौजूद लोगों को बच्चों की मेहनत को करीब से देखने का अवसर मिला। सफल प्रतिभागियों को मंच पर बुलाकर ट्राफी, शील्ड और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। हिफ्ज ग्रुप में इकरा अंसारी, सलमान अंसारी, मुहम्मद शाद, मुहम्मद साकिब अंसारी और रहमत अली ने पुरस्कार हासिल किए। आलिम ग्रुप में रौनक फातिमा, मुहम्मद कासिम, सदफ हया, सानिया बानो और ऐनुन जारिया सफल रहे। स्कूल ग्रुप में इनाया फातिमा, यसरा खान, यास्ना साकिब, उजमा नूर और सुमैरा वारसी को पुरस्कार मिला। कॉलेज ग्रुप में नगमा खातून, फौजिया तबस्सुम, मरियम शाहीन, सदफ फातिमा और शारीबा कौसर कामयाब रहीं। इसी ग्रुप में नगमा खातून ने प्रथम स्थान हासिल कर प्रतियोगिता की विजेता बनने के साथ फ्री उमराह पैकेज का विशेष पुरस्कार प्राप्त किया। फ्री ग्रुप में करीमा हुसैन, सद्दाम हुसैन निजामी, आहू चश्म निजामी, मेहनाज जहां और सोफिया खातून को पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन के उद्देश्य और इसके सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों को सीरत-ए-पाक से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है। कॉम्पिटिशन के माध्यम से बच्चों में अध्ययन, लेखन और सीरत के प्रति रुचि पैदा करने का प्रयास किया गया है। कुरआन-ए-पाक की तिलावत हाफिज रहमत अली निजामी ने की। इसके बाद हम्द-ओ-नात पेश की गई। समारोह में प्रधानाचार्य मुख्तार अहमद, प्रधानाचार्या शम्सा अंसारी, अरबाज नक्शबंदी, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती अजहर शम्सी, हाजी फैज अहमद खान, शहबाज सिद्दीकी, सैयद जव्वाद अली सब्जपोश, महबूब आलम, कारी शराफत हुसैन, हाफिज आफताब आलम, हाफिज रजी, मौलाना महमूद रजा, मौलाना जहांगीर अहमद, ताबिश सिद्दीकी, शीराज सिद्दीकी, प्रिंस, जीशान, मुहम्मद आजम, नवेद आलम, शादाब सिद्दीकी, सैयद नदीम अहमद, शीरीन आसिफ, ज्या वारसी, आयशा फसीही, आयशा खातून, आस्मां खातून, अली अहमद, समीर अली, जैद, हाजी सेराज अहमद, सैयद जफर हसन, प्रधानाचार्य कारी नसीमुल्लाह, मुफ्तिया कहकशां फिरदौस, सेराज अहमद कुरैशी, आलिमा अरबिया इस्माईली, मौलाना दानिश, प्रधानाचार्य मुहम्मद सिद्दीक, एडवोकेट मुहम्मद आजम, काशिफ महमूद, सैयद आसिम, आसिफ अंसारी, रहमत अली, रुशान, शाद, जीशान, बेलाल अहमद, सैयद शहाबुद्दीन आदि मौजूद रहे। आयोजकों ने कहा कि सीरतुन्नबी कॉम्पिटिशन का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत से जोड़ने के साथ उनमें अध्ययन, लेखन और ज्ञान की रुचि पैदा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे और नई पीढ़ी सीरत, कुरआन, शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्रों में आगे बढ़कर समाज और देश की तरक्की में अपना योगदान देगी।2
- आगामी पर्व-त्योहारों को लेकर नवादा पुलिस सतर्क, अश्रु गैस और वाटर कैनन से मॉक ड्रिल आगामी पर्व-त्योहारों को लेकर नवादा पुलिस सतर्क, अश्रु गैस और वाटर कैनन से मॉक ड्रिल नवादा। आगामी पर्व-त्योहारों को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने को लेकर नवादा पुलिस पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है। किसी भी विशेष परिस्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस केंद्र, नवादा में अश्रु गैस एवं वाटर कैनन का मॉक ड्रिल कराया गया। मॉक ड्रिल के दौरान पुलिसकर्मियों को आपात स्थिति में भीड़ नियंत्रण, अश्रु गैस के इस्तेमाल तथा वाटर कैनन के संचालन से संबंधित आवश्यक अभ्यास कराया गया। इसका उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने पर पुलिस बल द्वारा त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। पुलिस प्रशासन की ओर से पर्व-त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ असामाजिक तत्वों एवं उपद्रवी गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखी जाएगी। नवादा पुलिस ने लोगों से पर्व-त्योहारों को आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाने तथा किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांति एवं कानून-व्यवस्था भंग करने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।1
- नवादा में दुर्गापूजा से पहले पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रही है। रविवार को पुलिस केंद्र नवादा में एसपी अभिनव धीमान के निर्देश पर विशेष मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें पुलिस जवानों ने भीड़ नियंत्रण और आपात स्थिति से निपटने का अभ्यास किया। ड्रिल के दौरान अश्रु गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। जवानों को बताया गया कि अगर किसी जगह भीड़ बेकाबू होती है या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बनती है, तो किस तरह तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करनी है। एसपी अभिनव धीमान ने कहा कि दुर्गापूजा और अन्य आने वाले पर्व-त्योहारों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के लिए पुलिस पूरी तरह तैयार है। संवेदनशील इलाकों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और पूजा पंडालों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। साथ ही असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रहेगी। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि सभी पर्व शांति, सुरक्षा और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हों, यही प्रशासन की प्राथमिकता है। नवादा में दुर्गापूजा से पहले पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रही है। रविवार को पुलिस केंद्र नवादा में एसपी अभिनव धीमान के निर्देश पर विशेष मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें पुलिस जवानों ने भीड़ नियंत्रण और आपात स्थिति से निपटने का अभ्यास किया। ड्रिल के दौरान अश्रु गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। जवानों को बताया गया कि अगर किसी जगह भीड़ बेकाबू होती है या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बनती है, तो किस तरह तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करनी है। एसपी अभिनव धीमान ने कहा कि दुर्गापूजा और अन्य आने वाले पर्व-त्योहारों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के लिए पुलिस पूरी तरह तैयार है। संवेदनशील इलाकों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और पूजा पंडालों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। साथ ही असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रहेगी। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि सभी पर्व शांति, सुरक्षा और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हों, यही प्रशासन की प्राथमिकता है।1
- सोनसा पंचायत के सिंघौली गांव निवासी कैलास महतो का निधन संजय वर्मा हिसुआ (नवादा)। हिसुआ प्रखंड क्षेत्र के सोनसा पंचायत अंतर्गत सिंघौली गांव निवासी कैलास महतो का करीब 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव एवं आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। कैलास महतो अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन पर परिजनों, रिश्तेदारों एवं ग्रामीणों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। ग्रामीणों के अनुसार कैलास महतो सरल एवं मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ गांव के लोगों को भी अपूरणीय क्षति हुई है। उनका अंतिम संस्कार हिसुआ तिलैया घाट, तामसा घाट पर पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ किया गया। अंतिम संस्कार में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार एवं शुभचिंतक शामिल हुए और नम आंखों से कैलास महतो को अंतिम विदाई दी। मौके पर4
- #पटना शिक्षक MLC चुनाव #जनसुराज के कैंडिडेट डॉ दिव्या ज्योति ने कहा #हम ही हैं विकल्प #शिक्षक बदलाव चाहते हैं #हमें उनका सम्मान लौटाना है...!2
- रजौली थाना के 7 एएसआई को मिली प्रोन्नति, एसआई बनने पर थाना परिसर में खुशी1
- ब्रजेश पाठक की युवाओं को सलाह! नौकरी छोड़कर ई-रिक्शा या टैक्सी चलाएं? उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने युवाओं को नौकरी की तलाश छोड़कर ई-रिक्शा या टैक्सी चलाने की सलाह दी है। उनके इस बयान पर आपकी क्या राय है? क्या युवाओं के लिए यह सही सलाह है? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं। 🗣️1
- बिहार राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका कर्मचारी संघ का सातवां जिला सम्मेलन संपन्न, नई जिला कमेटी का गठन बिहार राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका कर्मचारी संघ का सातवां जिला सम्मेलन संपन्न, नई जिला कमेटी का गठन संजय कुमार संजू नवादा। बिहार राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका कर्मचारी संघ नवादा जिला का सातवां जिला सम्मेलन रविवार को नवादा में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम टीएस कॉलेज के समीप स्थित किशोरी मैरिज हॉल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य संरक्षक एवं वरिष्ठ नेता रामजतन सिंह और राज्य कमेटी की अनीता झा के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडलीय अध्यक्ष अनीता झा, विजय प्रसाद सिंह, रविंद्र कुमार और रोशना काजमी ने की, जबकि मंच संचालन विजय प्रसाद सिंह ने किया। सम्मेलन में मुख्य रूप से सीटू बिहार के महासचिव सिंटू कुमार, उपाध्यक्ष रविंद्र कुमार, राज्य महासचिव नीलम कुमारी, राज्य उपाध्यक्ष मंटू कुमारी, छात्र संगठन के सहयोगी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। वक्ताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका काफी कम मानदेय पर दिन-रात काम करती हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है। मानदेय बढ़ोतरी, सरकारी कर्मचारी का दर्जा, पेंशन और अन्य सुविधाओं की मांग प्रमुखता से उठाई गई। सम्मेलन में जिला कमेटी के चुनाव भी संपन्न कराए गए। सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। नई जिला कमेटी में चुनाव संपन्न *जिला अध्यक्ष - विजय प्रसाद सिंह, जिला मंत्री - प्रभादेवी (हिसुआ), कोषाध्यक्ष - सुनीता कुमारी (नवादा सदर)* को चुना गया। वहीं कोर कमेटी में अध्यक्ष - विजय कुमार सिंह, सचिव - रोशना काजमी, उपाध्यक्ष - सुविधा देवी (अकबरपुर), सहायक सचिव - प्रभा देवी (हिसुआ), संयुक्त सचिव - सरोज कुमारी (रजौली) एवं गीता शर्मा (नारदीगंज), कोषाध्यक्ष - सुनीता कुमारी, सहयोगी कोषाध्यक्ष - सिद्धांता देवी, जिला कमेटी के सदस्य। पम्मी कुमारी (रजौली) को चुना गया। इसके अलावा जिला कमेटी सदस्य के रूप में विमला देवी (नवादा सदर), रंजू देवी (काशीचक), मंजू देवी (मेसकौर), अंजलि कुमारी मेसकोर संगीता देवी (नरहट), सुमन कुमारी (वारिसलीगंज), अजय कुमार( रोह) अनिल कुमार (कौवाकोल), रीता कुमारी (सिरदला), उषा कुमारी (गोविंदपुर), नीलू राय (पकरी बरावां), रंजय कुमार विद्यार्थी (हिसुआ) और विमला देवी (रोह) सहित अन्य को शामिल किया गया। अंत में नवनिर्वाचित कमेटी ने संगठन को मजबूत करने और आंगनबाड़ी कर्मियों के हक की लड़ाई को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।1