मेरठ। दीन-ए-इस्लाम की दुनिया से एक बेहद सम्मानित और प्रभावशाली शख्सियत मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब के इंतकाल की खबर ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। 90 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, जिससे उनके चाहने वालों और शागिर्दों में शोक की लहर दौड़ गई। उन्हें इल्म, सादगी और रहनुमाई का प्रतीक माना जाता था। अजराड़ा से ताल्लुक रखने वाले मौलाना साहब ने अपनी पूरी जिंदगी दीन की खिदमत, इंसानियत की भलाई और समाज को सही राह दिखाने में गुज़ार दी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों मदरसों को उनकी सरपरस्ती हासिल थी, जहां से बड़ी संख्या में तलबा ने तालीम हासिल कर समाज में अपनी पहचान बनाई। उनके इंतकाल को एक ऐसे दौर का अंत माना जा रहा है, जिसने इल्म और अखलाक की मजबूत नींव रखी। मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब का पलवाड़ा स्थित मदरसे से विशेष जुड़ाव रहा। वह समय-समय पर यहां आते रहते थे और स्थानीय लोगों के बीच उनका गहरा सम्मान था। उनकी मौजूदगी से इलाके में एक अलग ही रौनक और रूहानी माहौल बना रहता था।
मेरठ। दीन-ए-इस्लाम की दुनिया से एक बेहद सम्मानित और प्रभावशाली शख्सियत मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब के इंतकाल की खबर ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। 90 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, जिससे उनके चाहने वालों और शागिर्दों में शोक की लहर दौड़ गई। उन्हें इल्म, सादगी और रहनुमाई का प्रतीक माना जाता था। अजराड़ा से ताल्लुक रखने वाले मौलाना साहब ने अपनी पूरी जिंदगी दीन की खिदमत, इंसानियत की भलाई और समाज को सही राह दिखाने में गुज़ार दी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों मदरसों को उनकी सरपरस्ती हासिल थी, जहां से बड़ी संख्या में तलबा ने तालीम हासिल कर समाज में अपनी पहचान बनाई। उनके इंतकाल को एक ऐसे दौर का अंत माना जा रहा है, जिसने इल्म और अखलाक की मजबूत नींव रखी। मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब का पलवाड़ा स्थित मदरसे से विशेष जुड़ाव रहा। वह समय-समय पर यहां आते रहते थे और स्थानीय लोगों के बीच उनका गहरा सम्मान था। उनकी मौजूदगी से इलाके में एक अलग ही रौनक और रूहानी माहौल बना रहता था।
- उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक बड़ा हादसा उस समय टल गया जब बच्चों से भरी स्कूल बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। बस में करीब 35 बच्चे सवार थे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई, लेकिन आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तुरंत मदद करते हुए बस के शीशे तोड़कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायल बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। यह घटना स्कूल बस सुरक्षा और लापरवाही पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।1
- गाजियाबाद मोदीनगर पुलिस ने गैंगस्टर राहुल पर हमला करने वालो को मुठभेड़ के बाद किया गिरफ्तार1
- मेरठ में बच्चों से भरी स्कूल बस पलटी, 35 छोटे-छोटे बच्चे थे सवार, मची चीख-पुकार उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बुधवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। दौराला-लावड़ मार्ग पर बच्चों से भरी एक निजी स्कूल की बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। बस पलटते ही इलाके ही कोहराम मच गया। बस में 35 बच्चे सवार थे। हादसे होते ही चीख-पुकार मच गई। शीशा तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला गया। बाहर निकालने जाने के बाद भी दहशत के मारे बच्चे रोते ही रहे। जानकारी के अनुसार, दौराला स्थित सेंट मैरी स्कूल की बस बुधवार सुबह ग्रामीण इलाकों से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। जैसे ही बस दौराला-लावड़ मार्ग पर पहुंची, चालक ने अचानक बस पर से नियंत्रण खो दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, बस की रफ्तार काफी तेज थी और सड़क किनारे ढलान होने के कारण वह पूरी तरह से पलट गई। बस के पलटते ही अंदर फंसे बच्चों की चीखें सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके की ओर दौड़े। ग्रामीणों ने देवदूत बनकर बचाई जान बस के दरवाजे लॉक हो जाने के कारण बच्चे अंदर ही फंस गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तत्काल ईंट और पत्थरों की मदद से बस के शीशे और खिड़कियां तोड़नी शुरू कीं। इसके बाद एक-एक करके रोते-बिलखते बच्चों को बाहर निकाला गया। बाहर निकाले जाने के बाद भी बच्चों के चेहरों पर खौफ साफ देखा जा सकता था। बाहर भी बच्चे रोते-बिलखते रहे। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एम्बुलेंस की टीम मौके पर पहुंची। चोटिल बच्चों को पास के अस्पताल में भेजा गया है।1
- गाजियाबाद मोदीनगर सुबह सवेरे कस्बा रोड बड़ी मस्जिद के पास एक विवादित अतिक्रमण को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिए। पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर मौजूद रहा। लगातार अवैध निर्माण की शिकायतें और हिंदू संगठनों लगातार कार्यवाही की मांग कर रहे थे। जिसको कानून प्रक्रिया कै तहत अवैध अतिक्रमण ध्वस्त किया गया।2
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- यदि लव जिहाद, लैंड जिहाद, ड्रग जिहाद, घुसपैठ जिहाद, धर्मांतरण जिहाद, जनसंख्या जिहाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ तत्काल कठोर कानून नहीं बना तथा मजहब के आधार पर बना नियम कानून आयोग मंत्रालय बोर्ड ट्रिब्यूनल स्कूल कॉलेज और लोन वजीफा बंद नहीं हुआ तो जो 1947 में हुआ वह 2047 में भी होगा | Ashwini Upadhyay1
- मेरठ। दीन-ए-इस्लाम की दुनिया से एक बेहद सम्मानित और प्रभावशाली शख्सियत मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब के इंतकाल की खबर ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। 90 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, जिससे उनके चाहने वालों और शागिर्दों में शोक की लहर दौड़ गई। उन्हें इल्म, सादगी और रहनुमाई का प्रतीक माना जाता था। अजराड़ा से ताल्लुक रखने वाले मौलाना साहब ने अपनी पूरी जिंदगी दीन की खिदमत, इंसानियत की भलाई और समाज को सही राह दिखाने में गुज़ार दी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों मदरसों को उनकी सरपरस्ती हासिल थी, जहां से बड़ी संख्या में तलबा ने तालीम हासिल कर समाज में अपनी पहचान बनाई। उनके इंतकाल को एक ऐसे दौर का अंत माना जा रहा है, जिसने इल्म और अखलाक की मजबूत नींव रखी। मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब का पलवाड़ा स्थित मदरसे से विशेष जुड़ाव रहा। वह समय-समय पर यहां आते रहते थे और स्थानीय लोगों के बीच उनका गहरा सम्मान था। उनकी मौजूदगी से इलाके में एक अलग ही रौनक और रूहानी माहौल बना रहता था।1