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पांगी में ट्राउट मछली उत्पादन की दिशा में मिली सफलता, पशुपालन विभाग की वर्षों की मेहनत ला रही रंग PANGI NEWS 24 दुर्गम पांगी घाटी में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। वर्षों से चल रही मत्स्य विकास पहल के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। पांगी जैसे दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र में एक समय ऐसा था जब यहां मछली उत्पादन की कोई परंपरा या व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में पशुपालन विभाग ने एक नई पहल करते हुए क्षेत्र में ट्राउट मछली उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया। इसके तहत कई वर्षों से सैचू नाला, महालू नाला, धरवास नाला और पूर्ती नाला जैसे ठंडे जल स्रोतों में ट्राउट मछली के बीज छोड़े जा रहे हैं, ताकि यहां प्राकृतिक रूप से मछलियों की संख्या बढ़ सके। अब इन प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विभाग के अनुसार महालू नाला के हुड़ान और सैचू क्षेत्र में ट्राउट मछलियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। इससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में पांगी घाटी मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकती है। पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि विभाग कई वर्षों से लगातार प्रयास कर रहा है और अब इसके अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पांगी के ठंडे और स्वच्छ जल स्रोत ट्राउट मछली के लिए अनुकूल हैं, इसलिए भविष्य में यहां मत्स्य उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों से इस परियोजना के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त बजट का प्रावधान नहीं हो पा रहा है, जिससे कार्यों के विस्तार में कुछ कठिनाइयां आ रही हैं। इसके बावजूद विभाग सीमित संसाधनों में प्रयास जारी रखे हुए है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ स्थानीय लोग नालों में मछलियों को पकड़ना या मारना शुरू कर देते हैं, जिससे इनकी संख्या बढ़ाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है। इस समस्या के समाधान के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की गई थी, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई ठोस अमल नहीं हो पाया है। पशुपालन विभाग का मानना है कि यदि स्थानीय लोगों का सहयोग मिले और परियोजना को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो आने वाले समय में पांगी घाटी में ट्राउट मछली उत्पादन को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।

3 hrs ago
user_PANGI NEWS 24
PANGI NEWS 24
Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
3 hrs ago

पांगी में ट्राउट मछली उत्पादन की दिशा में मिली सफलता, पशुपालन विभाग की वर्षों की मेहनत ला रही रंग PANGI NEWS 24 दुर्गम पांगी घाटी में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। वर्षों से चल रही मत्स्य विकास पहल के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। पांगी जैसे दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र में एक समय ऐसा था जब यहां मछली उत्पादन की कोई परंपरा या व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में पशुपालन विभाग ने एक नई पहल करते हुए क्षेत्र में ट्राउट मछली उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया। इसके तहत कई वर्षों से सैचू नाला, महालू नाला, धरवास नाला और पूर्ती नाला जैसे ठंडे जल स्रोतों में ट्राउट मछली के बीज छोड़े जा रहे हैं, ताकि यहां प्राकृतिक रूप से मछलियों की संख्या बढ़ सके। अब इन प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विभाग के अनुसार महालू नाला के हुड़ान और सैचू क्षेत्र में ट्राउट मछलियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। इससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में पांगी घाटी मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकती है। पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि विभाग कई वर्षों से लगातार प्रयास कर रहा है और अब इसके अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पांगी के ठंडे और स्वच्छ जल स्रोत ट्राउट मछली के लिए अनुकूल हैं, इसलिए भविष्य में यहां मत्स्य उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों से इस परियोजना के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त बजट का प्रावधान नहीं हो पा रहा है, जिससे कार्यों के विस्तार में कुछ कठिनाइयां आ रही हैं। इसके बावजूद विभाग सीमित संसाधनों में प्रयास जारी रखे हुए है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ स्थानीय लोग नालों में मछलियों को पकड़ना या मारना शुरू कर देते हैं, जिससे इनकी संख्या बढ़ाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है। इस समस्या के समाधान के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की गई थी, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई ठोस अमल नहीं हो पाया है। पशुपालन विभाग का मानना है कि यदि स्थानीय लोगों का सहयोग मिले और परियोजना को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो आने वाले समय में पांगी घाटी में ट्राउट मछली उत्पादन को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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  • अटल टनल रोहतांग का नॉर्थ पोर्टल बना आकर्षण का केंद्र हिमाचल प्रदेश के लाहौल क्षेत्र में स्थित Atal Tunnel का नॉर्थ पोर्टल इन दिनों पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सिस्सू के समीप स्थित यह प्रवेश द्वार लाहौल घाटी की सुंदरता को और भी निखार देता है। बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं और चंद्रा नदी के मनमोहक दृश्यों के बीच यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। करीब 9.02 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा किया गया है, जिसने मनाली से लाहौल-स्पीति और आगे लेह-लद्दाख तक की दूरी को काफी कम कर दिया है। इस सुरंग के निर्माण से रोहतांग दर्रे से होकर गुजरने वाली कठिन यात्रा से राहत मिली है और अब पूरे वर्ष लाहौल घाटी का संपर्क बना रहता है। नॉर्थ पोर्टल समुद्र तल से लगभग 3071 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से बाहर निकलते ही पर्यटकों को सिस्सू झरने, बर्फीली चोटियों और विस्तृत घाटी का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। सर्दियों के मौसम में यहां बर्फबारी के कारण यह स्थान और भी मनोहारी हो जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस सुरंग के निर्माण से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिली है और लाहौल घाटी देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर रही है।
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    अटल टनल रोहतांग का नॉर्थ पोर्टल बना आकर्षण का केंद्र
हिमाचल प्रदेश के लाहौल क्षेत्र में स्थित Atal Tunnel का नॉर्थ पोर्टल इन दिनों पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सिस्सू के समीप स्थित यह प्रवेश द्वार लाहौल घाटी की सुंदरता को और भी निखार देता है। बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं और चंद्रा नदी के मनमोहक दृश्यों के बीच यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।
करीब 9.02 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा किया गया है, जिसने मनाली से लाहौल-स्पीति और आगे लेह-लद्दाख तक की दूरी को काफी कम कर दिया है। इस सुरंग के निर्माण से रोहतांग दर्रे से होकर गुजरने वाली कठिन यात्रा से राहत मिली है और अब पूरे वर्ष लाहौल घाटी का संपर्क बना रहता है।
नॉर्थ पोर्टल समुद्र तल से लगभग 3071 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से बाहर निकलते ही पर्यटकों को सिस्सू झरने, बर्फीली चोटियों और विस्तृत घाटी का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। सर्दियों के मौसम में यहां बर्फबारी के कारण यह स्थान और भी मनोहारी हो जाता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस सुरंग के निर्माण से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिली है और लाहौल घाटी देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर रही है।
    user_PANGI NEWS TODAY
    PANGI NEWS TODAY
    Insurance Agent पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    36 min ago
  • पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के साथ ही जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में एक बार फिर बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है, जबकि निचले क्षेत्रों में हल्की बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम के इस बदलाव से जहां ठंड का असर बढ़ गया है, वहीं किसानों और बागवानों के चेहरों पर उम्मीद की नई किरण भी दिखाई देने लगी है। गौरतलब है कि पांगी घाटी में जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में अच्छी बर्फबारी हुई थी, लेकिन इसके बाद पूरे फरवरी महीने में लगातार तेज धूप खिलने से मौसम अपेक्षाकृत शुष्क बना रहा। धूप निकलने से लोगों को कड़ाके की ठंड से कुछ राहत तो जरूर मिली, लेकिन पर्याप्त बर्फबारी न होने के कारण किसानों और बागवानों में चिंता बढ़ने लगी थी। स्थानीय किसानों का कहना है कि पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान होने वाली बर्फबारी और बारिश खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे जमीन में नमी बनी रहती है, जो आगामी सीजन की फसलों के लिए लाभदायक होती है। कम बर्फबारी के कारण कई स्थानों पर खेतों में फसल की बुवाई का कार्य भी प्रभावित हो रहा था। हालांकि अब पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम ने करवट ली है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में हल्की बारिश शुरू होने से किसानों को उम्मीद है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो जमीन में पर्याप्त नमी बनेगी और खेती-किसानी के कार्यों को गति मिलेगी। फिलहाल क्षेत्र के लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश और बर्फबारी होगी, जिससे फसलों और बागवानी को लाभ मिलेगा। अब देखना यह होगा कि मौसम का यह बदला हुआ मिजाज कितने दिन तक बना रहता है या फिर एक बार फिर तेज धूप खिलने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरता है।
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    पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के साथ ही जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में एक बार फिर बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है, जबकि निचले क्षेत्रों में हल्की बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम के इस बदलाव से जहां ठंड का असर बढ़ गया है, वहीं किसानों और बागवानों के चेहरों पर उम्मीद की नई किरण भी दिखाई देने लगी है।
गौरतलब है कि पांगी घाटी में जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में अच्छी बर्फबारी हुई थी, लेकिन इसके बाद पूरे फरवरी महीने में लगातार तेज धूप खिलने से मौसम अपेक्षाकृत शुष्क बना रहा। धूप निकलने से लोगों को कड़ाके की ठंड से कुछ राहत तो जरूर मिली, लेकिन पर्याप्त बर्फबारी न होने के कारण किसानों और बागवानों में चिंता बढ़ने लगी थी।
स्थानीय किसानों का कहना है कि पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान होने वाली बर्फबारी और बारिश खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे जमीन में नमी बनी रहती है, जो आगामी सीजन की फसलों के लिए लाभदायक होती है। कम बर्फबारी के कारण कई स्थानों पर खेतों में फसल की बुवाई का कार्य भी प्रभावित हो रहा था।
हालांकि अब पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम ने करवट ली है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में हल्की बारिश शुरू होने से किसानों को उम्मीद है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो जमीन में पर्याप्त नमी बनेगी और खेती-किसानी के कार्यों को गति मिलेगी।
फिलहाल क्षेत्र के लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश और बर्फबारी होगी, जिससे फसलों और बागवानी को लाभ मिलेगा। अब देखना यह होगा कि मौसम का यह बदला हुआ मिजाज कितने दिन तक बना रहता है या फिर एक बार फिर तेज धूप खिलने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरता है।
    user_PANGI NEWS 24
    PANGI NEWS 24
    Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by Surender Thakur
    1
    Post by Surender Thakur
    user_Surender Thakur
    Surender Thakur
    Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    4 hrs ago
  • भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ की मासिक बैठक आज लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह चंबा में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता महासंघ के अध्यक्ष डीके सोनी ने की। बैठक के दौरान पेंशनरों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें पेंशन संबंधी सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य लंबित मामलों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। महासंघ के अध्यक्ष डीके सोनी ने कहा कि पेंशनरों की समस्याओं को संबंधित विभागों और सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा, ताकि उनका समयबद्ध समाधान हो सके। उन्होंने सभी पेंशनरों से संगठन के साथ जुड़े रहने और एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान भी किया। बैठक में जिले के कई पेंशनर सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने अपने सुझाव भी साझा किए। बाइट: डीके सोनी, अध्यक्ष – भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ
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    भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ की मासिक बैठक आज लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह चंबा में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता महासंघ के अध्यक्ष डीके सोनी ने की।
बैठक के दौरान पेंशनरों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें पेंशन संबंधी सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य लंबित मामलों को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
महासंघ के अध्यक्ष डीके सोनी ने कहा कि पेंशनरों की समस्याओं को संबंधित विभागों और सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा, ताकि उनका समयबद्ध समाधान हो सके। उन्होंने सभी पेंशनरों से संगठन के साथ जुड़े रहने और एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान भी किया।
बैठक में जिले के कई पेंशनर सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने अपने सुझाव भी साझा किए।
बाइट: डीके सोनी, अध्यक्ष – भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ
    user_Ajay Himachal News
    Ajay Himachal News
    चौराह, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    3 hrs ago
  • Himachal Road Transport Corporation ने गगल एयरपोर्ट से धर्मशाला व मैकलोडगंज तक पर्यटकों के लिए टेंपो ट्रैवलर सेवा शुरू की है। इसका शुभारंभ निगम के उपाध्यक्ष Ajay Verma ने किया। उन्होंने बताया कि यह सेवा हर फ्लाइट के समय के अनुसार चलाई जाएगी, जिससे पर्यटकों को सीधा धर्मशाला व मैकलोडगंज पहुंचने में सुविधा मिलेगी। धर्मशाला का किराया 60 रुपये और मैकलोडगंज का 100 रुपये तय किया गया है। इस सुविधा से कांगड़ा आने वाले पर्यटकों को काफी लाभ मिलेगा।
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    Himachal Road Transport Corporation ने गगल एयरपोर्ट से धर्मशाला व मैकलोडगंज तक पर्यटकों के लिए टेंपो ट्रैवलर सेवा शुरू की है। इसका शुभारंभ निगम के उपाध्यक्ष Ajay Verma ने किया। उन्होंने बताया कि यह सेवा हर फ्लाइट के समय के अनुसार चलाई जाएगी, जिससे पर्यटकों को सीधा धर्मशाला व मैकलोडगंज पहुंचने में सुविधा मिलेगी। धर्मशाला का किराया 60 रुपये और मैकलोडगंज का 100 रुपये तय किया गया है। इस सुविधा से कांगड़ा आने वाले पर्यटकों को काफी लाभ मिलेगा।
    user_HBK
    HBK
    its A Digital news website and web tv कांगड़ा, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश•
    3 hrs ago
  • Jay Mata di
    1
    Jay Mata di
    user_Ratan singh
    Ratan singh
    Kangra, Himachal Pradesh•
    7 hrs ago
  • Post by Shivinder singh Bhadwal
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    Post by Shivinder singh Bhadwal
    user_Shivinder singh Bhadwal
    Shivinder singh Bhadwal
    Farmer कठुआ, कठुआ, जम्मू और कश्मीर•
    15 min ago
  • दुर्गम पांगी घाटी में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। वर्षों से चल रही मत्स्य विकास पहल के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। पांगी जैसे दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र में एक समय ऐसा था जब यहां मछली उत्पादन की कोई परंपरा या व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में पशुपालन विभाग ने एक नई पहल करते हुए क्षेत्र में ट्राउट मछली उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया। इसके तहत कई वर्षों से सैचू नाला, महालू नाला, धरवास नाला और पूर्ती नाला जैसे ठंडे जल स्रोतों में ट्राउट मछली के बीज छोड़े जा रहे हैं, ताकि यहां प्राकृतिक रूप से मछलियों की संख्या बढ़ सके। अब इन प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विभाग के अनुसार महालू नाला के हुड़ान और सैचू क्षेत्र में ट्राउट मछलियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। इससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में पांगी घाटी मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकती है। पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि विभाग कई वर्षों से लगातार प्रयास कर रहा है और अब इसके अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पांगी के ठंडे और स्वच्छ जल स्रोत ट्राउट मछली के लिए अनुकूल हैं, इसलिए भविष्य में यहां मत्स्य उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों से इस परियोजना के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त बजट का प्रावधान नहीं हो पा रहा है, जिससे कार्यों के विस्तार में कुछ कठिनाइयां आ रही हैं। इसके बावजूद विभाग सीमित संसाधनों में प्रयास जारी रखे हुए है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ स्थानीय लोग नालों में मछलियों को पकड़ना या मारना शुरू कर देते हैं, जिससे इनकी संख्या बढ़ाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है। इस समस्या के समाधान के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की गई थी, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई ठोस अमल नहीं हो पाया है। पशुपालन विभाग का मानना है कि यदि स्थानीय लोगों का सहयोग मिले और परियोजना को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो आने वाले समय में पांगी घाटी में ट्राउट मछली उत्पादन को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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    दुर्गम पांगी घाटी में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। वर्षों से चल रही मत्स्य विकास पहल के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।
पांगी जैसे दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र में एक समय ऐसा था जब यहां मछली उत्पादन की कोई परंपरा या व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में पशुपालन विभाग ने एक नई पहल करते हुए क्षेत्र में ट्राउट मछली उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया। इसके तहत कई वर्षों से सैचू नाला, महालू नाला, धरवास नाला और पूर्ती नाला जैसे ठंडे जल स्रोतों में ट्राउट मछली के बीज छोड़े जा रहे हैं, ताकि यहां प्राकृतिक रूप से मछलियों की संख्या बढ़ सके।
अब इन प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विभाग के अनुसार महालू नाला के हुड़ान और सैचू क्षेत्र में ट्राउट मछलियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। इससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में पांगी घाटी मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकती है।
पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि विभाग कई वर्षों से लगातार प्रयास कर रहा है और अब इसके अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पांगी के ठंडे और स्वच्छ जल स्रोत ट्राउट मछली के लिए अनुकूल हैं, इसलिए भविष्य में यहां मत्स्य उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों से इस परियोजना के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त बजट का प्रावधान नहीं हो पा रहा है, जिससे कार्यों के विस्तार में कुछ कठिनाइयां आ रही हैं। इसके बावजूद विभाग सीमित संसाधनों में प्रयास जारी रखे हुए है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ स्थानीय लोग नालों में मछलियों को पकड़ना या मारना शुरू कर देते हैं, जिससे इनकी संख्या बढ़ाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है। इस समस्या के समाधान के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की गई थी, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई ठोस अमल नहीं हो पाया है।
पशुपालन विभाग का मानना है कि यदि स्थानीय लोगों का सहयोग मिले और परियोजना को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो आने वाले समय में पांगी घाटी में ट्राउट मछली उत्पादन को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।
    user_PANGI NEWS 24
    PANGI NEWS 24
    Social Media Manager पांगी, चंबा, हिमाचल प्रदेश•
    3 hrs ago
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