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BSP सुप्रिमों मायावती जी का नीला रंग पर राजनित करने वाले को करारा जवाब। 1. सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बी.एस.पी. का शुरु से ही चला आ रहा नीला रंग अब यह इनके गले का गमछा व कपड़े पहनने से तथा स्टेज आदि में भी नीला कपड़ा इस्तेमाल करने से इनकी सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामन्तवादी एवं पूँजीवादी सोच नहीं बदल सकती है तथा ना ही ये लोग दिल से अम्बेडकरवादी होने एवं कहलाने वाले हैं। इसीलिये ’बहुजन समाज’ के वास्तविक हित व कल्याण के प्रति पहले वे अपना दिल व दिमाग़ तो पाक-साफ करें। 2. वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं अर्थात् ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं। ख़ासकर इनके सपा के PDA के मामले में तो इनकी सोच, चाल, चरित्र व चेहरा आदि हमेशा दोग़ला व बईमान ही रहा है, जिसके अनेकों उदाहरण हैं, ये सभी जानते हैं। इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी व अम्बेडकरवादी पार्टी केवल बी.एस.पी. ही है, जो सर्वविदित है। 3. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि अन्य पार्टियों की तरह बी.एस.पी. के जो भी लोग पार्टी में अनुशासनहीनता आदि के कारण समय-समय पर निष्कासित कर दिये जाते हैं तो वे अधिकतर इन्हीं सब कारणों से अब तक कई पार्टी बदल चुके हैं, जो किसी से छिपा नहीं है। इसी से ही अन्दाज़ा लगा लेना चाहिये कि ये लोग पूरे स्वार्थी व अवसरवादी हैं और वे किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते हैं। 4. इतना ही नहीं बल्कि जिनको पार्टी से निकाल दिया जाता है तो उनमें से कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियाँ व संगठन आदि भी बना लेते हैं, जिनसे ’बहुजन समाज’ का सामूहिक हित नहीं हो सकता है, 5. हालांकि ऐसी पार्टियाँ बिना किसी गठबन्धन के भी चुनाव नहीं लड़ सकती हैं तथा किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर सरकार में शामिल हुये बिना भी नहीं रह सकती हैं, जो पार्टी से निकाले हुये लोगों को अक्सर अपनी पार्टी में लेने की बात करते हैं या उन्हें पार्टी बनाने की भी सलाह देते हैं, तो वे पहले अपने गिरेबान में भी झाँककर ज़रूर देख लें। 6. ख़ासकर कांग्रेस पार्टी, जिन निकाले हुये लोगों को अपनी पार्टी में लेने की बात कर रही है, तो ऐसी पार्टी में जो डूबते जहाज़ की तरह है, उसमें भला कौन शामिल होकर अपने भविष्य को अन्धकार में डालेगा, जबकि ख़ासकर इस पार्टी से दूरी बनाने के लिये बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर जी ने अपने जीते-जी बहुजन समाज के लोगों को अगाह (चेताया) भी किया था। इसलिये यह सब वर्तमान हालात में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में बी.एस.पी. के लोगों को जानना व समझना भी बहुत ज़रूरी है तो यह उचित होगा। 7. यहां यह भी बताना बहुत जरूरी है कि जिस दिन बी.एस.पी. ने श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी तो उस दिन इन्होंने इनके उपर काफी दबाव पड़ने के बावजूद भी अपने संन्यास लेने की घोषणा तब तत्काल नहीं की थी। 8. क्योंकि उस दिन यह पूरी रातभर इसे रुकवाने के लिए क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करते रहे जिसमें कामयाबी नहीं मिलने पर, फिर मजबूरी में, अगले दिन यह सोच कर इनको लगभग प्रातः 6ः30 बजे अपने संन्यास की काफी किन्तु-परन्तु वाली घोषणा करनी पड़ी है, कि कहीं ज्यादा देरी होने पर और भी बड़ा नुकसान ना हो जाये, जिसके बारे में सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ ज़रूर बताया जायेगा। Neelam Express रिपोर्टर:- प्रहलाद बौद्ध बात सच की ....

4 hrs ago
user_Prahlad Baudh
Prahlad Baudh
News Anchor गाजीपुर, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश•
4 hrs ago

BSP सुप्रिमों मायावती जी का नीला रंग पर राजनित करने वाले को करारा जवाब। 1. सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बी.एस.पी. का शुरु से ही चला आ रहा नीला रंग अब यह इनके गले का गमछा व कपड़े पहनने से तथा स्टेज आदि में भी नीला कपड़ा इस्तेमाल करने से इनकी सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामन्तवादी एवं पूँजीवादी सोच नहीं बदल सकती है तथा ना ही ये लोग दिल से अम्बेडकरवादी होने एवं कहलाने वाले हैं। इसीलिये ’बहुजन समाज’ के वास्तविक हित व कल्याण के प्रति पहले वे अपना दिल व दिमाग़ तो पाक-साफ करें। 2. वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं अर्थात् ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं। ख़ासकर इनके सपा के PDA के मामले में तो इनकी सोच, चाल, चरित्र व चेहरा आदि हमेशा दोग़ला व बईमान ही रहा है, जिसके अनेकों उदाहरण हैं, ये सभी जानते हैं। इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी व अम्बेडकरवादी पार्टी केवल बी.एस.पी. ही है, जो सर्वविदित है। 3. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि अन्य पार्टियों की तरह बी.एस.पी. के जो भी लोग पार्टी में अनुशासनहीनता आदि के कारण समय-समय पर निष्कासित कर दिये जाते हैं तो वे अधिकतर इन्हीं सब कारणों से अब तक कई पार्टी बदल चुके हैं, जो किसी से छिपा नहीं है। इसी से ही अन्दाज़ा लगा लेना चाहिये कि ये लोग पूरे स्वार्थी व अवसरवादी हैं और वे किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते हैं। 4. इतना ही नहीं बल्कि जिनको पार्टी से निकाल दिया जाता है तो उनमें से कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियाँ व संगठन आदि भी बना लेते हैं, जिनसे ’बहुजन समाज’ का सामूहिक हित नहीं हो सकता है, 5. हालांकि ऐसी पार्टियाँ बिना किसी गठबन्धन के भी चुनाव नहीं लड़ सकती हैं तथा किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर सरकार में शामिल हुये बिना भी नहीं रह सकती हैं, जो पार्टी से निकाले हुये लोगों को अक्सर अपनी पार्टी में लेने की बात करते हैं या उन्हें पार्टी बनाने की भी सलाह देते हैं, तो वे पहले अपने गिरेबान में भी झाँककर ज़रूर देख लें। 6. ख़ासकर कांग्रेस पार्टी, जिन निकाले हुये लोगों को अपनी पार्टी में लेने की बात कर रही है, तो ऐसी पार्टी में जो डूबते जहाज़ की तरह है, उसमें भला कौन शामिल होकर अपने भविष्य को अन्धकार में डालेगा, जबकि ख़ासकर इस पार्टी से दूरी बनाने के लिये बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर जी ने अपने जीते-जी बहुजन समाज के लोगों को अगाह (चेताया) भी किया था। इसलिये यह सब वर्तमान हालात में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में बी.एस.पी. के लोगों को जानना व समझना भी बहुत ज़रूरी है तो यह उचित होगा। 7. यहां यह भी बताना बहुत जरूरी है कि जिस दिन बी.एस.पी. ने श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी तो उस दिन इन्होंने इनके उपर काफी दबाव पड़ने के बावजूद भी अपने संन्यास लेने की घोषणा तब तत्काल नहीं की थी। 8. क्योंकि उस दिन यह पूरी रातभर इसे रुकवाने के लिए क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करते रहे जिसमें कामयाबी नहीं मिलने पर, फिर मजबूरी में, अगले दिन यह सोच कर इनको लगभग प्रातः 6ः30 बजे अपने संन्यास की काफी किन्तु-परन्तु वाली घोषणा करनी पड़ी है, कि कहीं ज्यादा देरी होने पर और भी बड़ा नुकसान ना हो जाये, जिसके बारे में सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ ज़रूर बताया जायेगा। Neelam Express रिपोर्टर:- प्रहलाद बौद्ध बात सच की ....

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  • BSP सुप्रिमों मायावती जी का नीला रंग पर राजनित करने वाले को करारा जवाब। 1. सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बी.एस.पी. का शुरु से ही चला आ रहा नीला रंग अब यह इनके गले का गमछा व कपड़े पहनने से तथा स्टेज आदि में भी नीला कपड़ा इस्तेमाल करने से इनकी सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामन्तवादी एवं पूँजीवादी सोच नहीं बदल सकती है तथा ना ही ये लोग दिल से अम्बेडकरवादी होने एवं कहलाने वाले हैं। इसीलिये ’बहुजन समाज’ के वास्तविक हित व कल्याण के प्रति पहले वे अपना दिल व दिमाग़ तो पाक-साफ करें। 2. वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं अर्थात् ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं। ख़ासकर इनके सपा के PDA के मामले में तो इनकी सोच, चाल, चरित्र व चेहरा आदि हमेशा दोग़ला व बईमान ही रहा है, जिसके अनेकों उदाहरण हैं, ये सभी जानते हैं। इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी व अम्बेडकरवादी पार्टी केवल बी.एस.पी. ही है, जो सर्वविदित है। 3. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि अन्य पार्टियों की तरह बी.एस.पी. के जो भी लोग पार्टी में अनुशासनहीनता आदि के कारण समय-समय पर निष्कासित कर दिये जाते हैं तो वे अधिकतर इन्हीं सब कारणों से अब तक कई पार्टी बदल चुके हैं, जो किसी से छिपा नहीं है। इसी से ही अन्दाज़ा लगा लेना चाहिये कि ये लोग पूरे स्वार्थी व अवसरवादी हैं और वे किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते हैं। 4. इतना ही नहीं बल्कि जिनको पार्टी से निकाल दिया जाता है तो उनमें से कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियाँ व संगठन आदि भी बना लेते हैं, जिनसे ’बहुजन समाज’ का सामूहिक हित नहीं हो सकता है, 5. हालांकि ऐसी पार्टियाँ बिना किसी गठबन्धन के भी चुनाव नहीं लड़ सकती हैं तथा किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर सरकार में शामिल हुये बिना भी नहीं रह सकती हैं, जो पार्टी से निकाले हुये लोगों को अक्सर अपनी पार्टी में लेने की बात करते हैं या उन्हें पार्टी बनाने की भी सलाह देते हैं, तो वे पहले अपने गिरेबान में भी झाँककर ज़रूर देख लें। 6. ख़ासकर कांग्रेस पार्टी, जिन निकाले हुये लोगों को अपनी पार्टी में लेने की बात कर रही है, तो ऐसी पार्टी में जो डूबते जहाज़ की तरह है, उसमें भला कौन शामिल होकर अपने भविष्य को अन्धकार में डालेगा, जबकि ख़ासकर इस पार्टी से दूरी बनाने के लिये बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर जी ने अपने जीते-जी बहुजन समाज के लोगों को अगाह (चेताया) भी किया था। इसलिये यह सब वर्तमान हालात में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में बी.एस.पी. के लोगों को जानना व समझना भी बहुत ज़रूरी है तो यह उचित होगा। 7. यहां यह भी बताना बहुत जरूरी है कि जिस दिन बी.एस.पी. ने श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी तो उस दिन इन्होंने इनके उपर काफी दबाव पड़ने के बावजूद भी अपने संन्यास लेने की घोषणा तब तत्काल नहीं की थी। 8. क्योंकि उस दिन यह पूरी रातभर इसे रुकवाने के लिए क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करते रहे जिसमें कामयाबी नहीं मिलने पर, फिर मजबूरी में, अगले दिन यह सोच कर इनको लगभग प्रातः 6ः30 बजे अपने संन्यास की काफी किन्तु-परन्तु वाली घोषणा करनी पड़ी है, कि कहीं ज्यादा देरी होने पर और भी बड़ा नुकसान ना हो जाये, जिसके बारे में सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ ज़रूर बताया जायेगा। Neelam Express रिपोर्टर:- प्रहलाद बौद्ध बात सच की ....
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    BSP सुप्रिमों मायावती जी का नीला रंग पर राजनित करने वाले को करारा जवाब।
1. सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बी.एस.पी. का शुरु से ही चला आ रहा नीला रंग अब यह इनके गले का गमछा व कपड़े पहनने से तथा स्टेज आदि में भी नीला कपड़ा इस्तेमाल करने से इनकी सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामन्तवादी एवं पूँजीवादी सोच नहीं बदल सकती है तथा ना ही ये लोग दिल से अम्बेडकरवादी होने एवं कहलाने वाले हैं। इसीलिये ’बहुजन समाज’ के वास्तविक हित व कल्याण के प्रति पहले वे अपना दिल व दिमाग़ तो पाक-साफ करें। 
2. वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं अर्थात् ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं। ख़ासकर इनके सपा के PDA के मामले में तो इनकी सोच, चाल, चरित्र व चेहरा आदि हमेशा दोग़ला व बईमान ही रहा है, जिसके अनेकों उदाहरण हैं, ये सभी जानते हैं। इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी व अम्बेडकरवादी पार्टी केवल बी.एस.पी. ही है, जो सर्वविदित है।
3. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि अन्य पार्टियों की तरह बी.एस.पी. के जो भी लोग पार्टी में अनुशासनहीनता आदि के कारण समय-समय पर निष्कासित कर दिये जाते हैं तो वे अधिकतर इन्हीं सब कारणों से अब तक कई पार्टी बदल चुके हैं, जो किसी से छिपा नहीं है। इसी से ही अन्दाज़ा लगा लेना चाहिये कि ये लोग पूरे स्वार्थी व अवसरवादी हैं और वे किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते हैं। 
4. इतना ही नहीं बल्कि जिनको पार्टी से निकाल दिया जाता है तो उनमें से कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियाँ व संगठन आदि भी बना लेते हैं, जिनसे ’बहुजन समाज’ का सामूहिक हित नहीं हो सकता है,
5. हालांकि ऐसी पार्टियाँ बिना किसी गठबन्धन के भी चुनाव नहीं लड़ सकती हैं तथा किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर सरकार में शामिल हुये बिना भी नहीं रह सकती हैं, जो पार्टी से निकाले हुये लोगों को अक्सर अपनी पार्टी में लेने की बात करते हैं या उन्हें पार्टी बनाने की भी सलाह देते हैं, तो वे पहले अपने गिरेबान में भी झाँककर ज़रूर देख लें। 
6. ख़ासकर कांग्रेस पार्टी, जिन निकाले हुये लोगों को अपनी पार्टी में लेने की बात कर रही है, तो ऐसी पार्टी में जो डूबते जहाज़ की तरह है, उसमें भला कौन शामिल होकर अपने भविष्य को अन्धकार में डालेगा, जबकि ख़ासकर इस पार्टी से दूरी बनाने के लिये बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर जी ने अपने जीते-जी बहुजन समाज के लोगों को अगाह (चेताया) भी किया था। इसलिये यह सब वर्तमान हालात में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में बी.एस.पी. के लोगों को जानना व समझना भी बहुत ज़रूरी है तो यह उचित होगा। 
7. यहां यह भी बताना बहुत जरूरी है कि जिस दिन बी.एस.पी. ने श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी तो उस दिन इन्होंने इनके उपर काफी दबाव पड़ने के बावजूद भी अपने संन्यास लेने की घोषणा तब तत्काल नहीं की थी। 
8. क्योंकि उस दिन यह पूरी रातभर इसे रुकवाने के लिए क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करते रहे जिसमें कामयाबी नहीं मिलने पर, फिर मजबूरी में, अगले दिन यह सोच कर इनको लगभग प्रातः 6ः30 बजे अपने संन्यास की काफी किन्तु-परन्तु वाली घोषणा करनी पड़ी है, कि कहीं ज्यादा देरी होने पर और भी बड़ा नुकसान ना हो जाये, जिसके बारे में सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ ज़रूर बताया जायेगा।
Neelam Express
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बात सच की ....
    user_Prahlad Baudh
    Prahlad Baudh
    News Anchor गाजीपुर, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • 11 सूत्रीय मांगों को लेकर मऊ कलेक्ट्रेट में धरना, जन संघर्ष समिति ने उठाई कई अहम मांगें 11 सूत्रीय मांगों को लेकर मऊ कलेक्ट्रेट में धरना, जन संघर्ष समिति ने उठाई कई अहम मांगें वही प्रदर्शन के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंप कर आवश्यक कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।
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    11 सूत्रीय मांगों को लेकर मऊ कलेक्ट्रेट में धरना, जन संघर्ष समिति ने उठाई कई अहम मांगें
11 सूत्रीय मांगों को लेकर मऊ कलेक्ट्रेट में धरना, जन संघर्ष समिति ने उठाई कई अहम मांगें
वही प्रदर्शन के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंप कर आवश्यक कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।
    user_KHABARE ABHI TAK
    KHABARE ABHI TAK
    पत्रकारिता मऊ, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • #बसपा को बड़ा #झटका! #आकाश आनंद के समर्थन में पूर्व #मुहम्मदाबाद गोहना विधानसभा #प्रत्याशी डॉ. धर्म सिंह गौतम ने #छोड़ी #पार्टी
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    #बसपा को बड़ा #झटका! #आकाश आनंद के समर्थन में पूर्व #मुहम्मदाबाद गोहना विधानसभा #प्रत्याशी डॉ. धर्म सिंह गौतम ने #छोड़ी #पार्टी
    user_अब्दुल रहमान इदरीसी पत्रकार
    अब्दुल रहमान इदरीसी पत्रकार
    Media and information sciences faculty मऊ, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • यूपी पुल‍िस के CO अशोक सिंह ने मूंछों पर ताव देते हुए कहा - ये वी‍ड‍ियो अख‍िलेश यादव को दे देना यूपी का चुनाव मजेदार होता जा रहा है प‍िछले द‍िनों मैनपुरी में यूपी पुल‍िस के CO अशोक सिंह ने मूंछों पर ताव देते हुए कहा - ये वी‍ड‍ियो अख‍िलेश यादव को दे देना अख‍िलेश यादव ने इस बात को पकड़ ल‍िया और प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा - "उसकी मूंछें बहुत छोटी थीं" कल अख‍िलेश ने लल‍ितपुर के अपने कार्यकर्ता की तस्‍वीर ट्वीट की और ल‍िखा- "अच्छा लगता है ऐसी मूछों पर ताव.." आज उस कार्यकर्ता को स्‍टेज पर लेकर आए और कार्यकर्ता ने सबके सामने अपनी मूछों पर ताव द‍िया
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    यूपी पुल‍िस के CO अशोक सिंह ने मूंछों पर ताव देते हुए कहा - ये वी‍ड‍ियो अख‍िलेश यादव को दे देना
यूपी का चुनाव मजेदार होता जा रहा है 
प‍िछले द‍िनों मैनपुरी में यूपी पुल‍िस के CO अशोक सिंह ने मूंछों पर ताव देते हुए कहा - ये वी‍ड‍ियो अख‍िलेश यादव को दे देना
अख‍िलेश यादव ने इस बात को पकड़ ल‍िया और प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा - "उसकी मूंछें बहुत छोटी थीं"
कल अख‍िलेश ने लल‍ितपुर के अपने कार्यकर्ता की तस्‍वीर ट्वीट की और ल‍िखा- "अच्छा लगता है ऐसी मूछों पर ताव.."
आज उस कार्यकर्ता को स्‍टेज पर लेकर आए और कार्यकर्ता ने सबके सामने अपनी मूछों पर ताव द‍िया
    user_विनय कुमार श्रीवास्तव
    विनय कुमार श्रीवास्तव
    मऊ, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • चंदौली के बरहनी सैयदराजा विधायक सुशील सिंह ने जन चौपाल लगाकर सुनी ग्रामीणों की समस्याएं : अधिकारियों को मौके पर निस्तारण के दिए निर्देश
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    चंदौली के बरहनी सैयदराजा विधायक सुशील सिंह ने जन चौपाल लगाकर सुनी ग्रामीणों की समस्याएं : अधिकारियों को मौके पर  निस्तारण के दिए निर्देश
    user_Ajay Singh
    Ajay Singh
    Local News Reporter सकलडीहा, चंदौली, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • यूजीसी के कथित काले कानून के विरोध में स्वर्ण एकता मंच का विशाल धरना प्रदर्शन यूजीसी के कथित काले कानून के विरोध में स्वर्ण एकता मंच का विशाल धरना प्रदर्शन मऊ में आज स्वर्ण एकता मंच के बैनर तले यूजीसी के कथित काले कानून को वापस लेने की मांग को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने यूजीसी की नीतियों को लेकर अपना विरोध जताया और सरकार से संबंधित प्रावधानों पर पुनर्विचार करते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन प्रावधानों से समाज के हित प्रभावित हो सकते हैं। धरना स्थल पर वक्ताओं ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया और सरकार से जल्द सकारात्मक कदम उठाने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
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    यूजीसी के कथित काले कानून के विरोध में स्वर्ण एकता मंच का विशाल धरना प्रदर्शन
यूजीसी के कथित काले कानून के विरोध में स्वर्ण एकता मंच का विशाल धरना प्रदर्शन
मऊ में आज स्वर्ण एकता मंच के बैनर तले यूजीसी के कथित काले कानून को वापस लेने की मांग को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने यूजीसी की नीतियों को लेकर अपना विरोध जताया और सरकार से संबंधित प्रावधानों पर पुनर्विचार करते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन प्रावधानों से समाज के हित प्रभावित हो सकते हैं। धरना स्थल पर वक्ताओं ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया और सरकार से जल्द सकारात्मक कदम उठाने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
    user_KHABARE ABHI TAK
    KHABARE ABHI TAK
    पत्रकारिता मऊ, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • बिहार बाढ़ से कराह रहा है। नेता प्रतिपक्ष आवाम के बीच हैं। बिहार बाढ़ से कराह रहा है। नेता प्रतिपक्ष आवाम के बीच हैं। सम्राट जी में इतनी हिम्मत नहीं कि वो प्रधानमंत्री जी से बिहार के लिए फण्ड मांगे? कैसे कठपुतली CM हैं? हम बिहार के लिए थे , हैं और रहेंगे। सम्राट जी गुजरातियों के हाँ में हाँ मिलाते रहें!
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    बिहार बाढ़ से कराह रहा है। नेता प्रतिपक्ष आवाम के बीच हैं।

बिहार बाढ़ से कराह रहा है। नेता प्रतिपक्ष आवाम के बीच हैं।
सम्राट जी में इतनी हिम्मत नहीं कि वो प्रधानमंत्री जी से बिहार के लिए फण्ड मांगे?
कैसे कठपुतली CM हैं?
हम बिहार के लिए थे , हैं और रहेंगे।
सम्राट जी गुजरातियों के हाँ में हाँ मिलाते रहें!
    user_राज रतन
    राज रतन
    Student union बक्सर, बक्सर, बिहार•
    3 hrs ago
  • बलिया स्थित उभांव थाना क्षेत्र के सोनाडीह गांव में पुरानी रंजिश के चलते दबंगों ने दो सगे भाइयों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया यूपी के बलिया स्थित उभांव थाना क्षेत्र के सोनाडीह गांव में पुरानी रंजिश के चलते दबंगों ने दो सगे भाइयों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। खटाल चलाने वाले अमरेश बहादुर सिंह (45) और उनके छोटे भाई मंजेश सिंह (35) देर रात गाली-गलौज का विरोध कर रहे थे, तभी उनके पट्टीदार रामकरण सिंह और उसके परिजनों (पिता, भाई, मां और बहन) ने उन पर जानलेवा हमला बोल दिया। ​पेट में गहरे घाव लगने से दोनों भाई खून से लथपथ हो गए। मऊ में इलाज के दौरान अमरेश बहादुर सिंह की मौत हो गई, जबकि मंजेश सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बीएचयू (वाराणसी) रेफर किया गया है। मृतक की बेटी की तहरीर पर पुलिस ने 5 नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर 3 को हिरासत में ले लिया है। फरार 2 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 3 टीमें गठित की गई हैं और गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। ​#BalliaNews #UPNews #CrimeNews #BalliaPolice #BHU
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    बलिया स्थित उभांव थाना क्षेत्र के सोनाडीह गांव में पुरानी रंजिश के चलते दबंगों ने दो सगे भाइयों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया
यूपी के बलिया स्थित उभांव थाना क्षेत्र के सोनाडीह गांव में पुरानी रंजिश के चलते दबंगों ने दो सगे भाइयों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। खटाल चलाने वाले अमरेश बहादुर सिंह (45) और उनके छोटे भाई मंजेश सिंह (35) देर रात गाली-गलौज का विरोध कर रहे थे, तभी उनके पट्टीदार रामकरण सिंह और उसके परिजनों (पिता, भाई, मां और बहन) ने उन पर जानलेवा हमला बोल दिया।
​पेट में गहरे घाव लगने से दोनों भाई खून से लथपथ हो गए। मऊ में इलाज के दौरान अमरेश बहादुर सिंह की मौत हो गई, जबकि मंजेश सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बीएचयू (वाराणसी) रेफर किया गया है। मृतक की बेटी की तहरीर पर पुलिस ने 5 नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर 3 को हिरासत में ले लिया है। फरार 2 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 3 टीमें गठित की गई हैं और गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
​#BalliaNews #UPNews #CrimeNews #BalliaPolice #BHU
    user_Sadik Ahmad Journalist
    Sadik Ahmad Journalist
    Local News Reporter रसड़ा, बलिया, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
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