NMDC पर किरंदुल में भेदभाव और “सामंतशाही” का आरोप लगा है, जहाँ स्थानीय लोगों और बच्चों को एक स्वीमिंग पूल में प्रवेश से वंचित रखा जा रहा है। यह पूल किरंदुल की ज़मीन पर बना है और स्थानीय श्रम से भरा बताया गया है, फिर भी इसके दरवाज़े स्थानीय बच्चों के लिए बंद हैं, जबकि NMDC के दफ़्तर में बैठे अधिकारियों के बच्चे इसका उपयोग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि पूल के पास न तो कोई लाइफ़गार्ड है, न इसे चलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ हैं और न ही कोई आधिकारिक अनुमति है। आरोप लगाया गया कि स्थानीय निवासी, जो खदानें खोदते हैं, शहर में दुकान चलाते हैं और कर देते हैं, उन्हें केवल दर्शक बनकर रहने को मजबूर किया जा रहा है। इस स्थिति को केवल “सुविधा” नहीं, बल्कि “सामंतशाही” का नया रूप बताया गया है, जिसकी वर्दी बदल गई है। इस मुद्दे पर किरंदुल अकेला नहीं खड़ा हुआ। नगर पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी के साथ बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ के प्रतिनिधि भी एकजुट होकर खड़े थे। पत्रकार किशोर रामटेके और रवि सरकार ने भी इस मामले को उजागर किया, ताकि NMDC का यह “भेदभाव” फाइलों में न दबकर अख़बार की सुर्ख़ी बने। जब व्यापारी सड़क पर आए, जनप्रतिनिधि गेट पर आए और पत्रकार कैमरा लेकर पहुँचे, तो NMDC के अधिकारियों ने “समय माँगकर” इस स्थिति से पल्ला झाड़ लिया। NMDC प्रशासन से सवाल पूछा गया है कि जिस ज़मीन का मुआवज़ा आदिवासी समुदाय आज भी माँग रहा है, उसी ज़मीन पर बने पूल में उनके बच्चे क्यों नहीं तैर सकते। यह मामला “तीसरी आंख” द्वारा उठाया गया है, जो प्रश्न पूछने, प्रमाण माँगने और “पक्ष नहीं — सच चुनने” का आह्वान करता है।
NMDC पर किरंदुल में भेदभाव और “सामंतशाही” का आरोप लगा है, जहाँ स्थानीय लोगों और बच्चों को एक स्वीमिंग पूल में प्रवेश से वंचित रखा जा रहा है। यह पूल किरंदुल की ज़मीन पर बना है और स्थानीय श्रम से भरा बताया गया है, फिर भी इसके दरवाज़े स्थानीय बच्चों के लिए बंद हैं, जबकि NMDC के दफ़्तर में बैठे अधिकारियों के बच्चे इसका उपयोग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि पूल के पास न तो कोई लाइफ़गार्ड है, न इसे चलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ हैं और न ही कोई आधिकारिक अनुमति है। आरोप लगाया गया कि स्थानीय निवासी, जो खदानें खोदते हैं, शहर में दुकान चलाते हैं और कर देते हैं, उन्हें केवल दर्शक बनकर रहने को मजबूर किया जा रहा है। इस स्थिति को केवल “सुविधा” नहीं, बल्कि “सामंतशाही” का नया रूप बताया गया है, जिसकी वर्दी बदल गई है। इस मुद्दे पर किरंदुल अकेला नहीं खड़ा हुआ। नगर पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी के साथ बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ के प्रतिनिधि भी एकजुट होकर खड़े थे। पत्रकार किशोर रामटेके और रवि सरकार ने भी इस मामले को उजागर किया, ताकि NMDC का यह “भेदभाव” फाइलों में न दबकर अख़बार की सुर्ख़ी बने। जब व्यापारी सड़क पर आए, जनप्रतिनिधि गेट पर आए और पत्रकार कैमरा लेकर पहुँचे, तो NMDC के अधिकारियों ने “समय माँगकर” इस स्थिति से पल्ला झाड़ लिया। NMDC प्रशासन से सवाल पूछा गया है कि जिस ज़मीन का मुआवज़ा आदिवासी समुदाय आज भी माँग रहा है, उसी ज़मीन पर बने पूल में उनके बच्चे क्यों नहीं तैर सकते। यह मामला “तीसरी आंख” द्वारा उठाया गया है, जो प्रश्न पूछने, प्रमाण माँगने और “पक्ष नहीं — सच चुनने” का आह्वान करता है।
- छत्तीसगढ़ के केशकाल में विधायक नीलकंठ टेकाम ने बाईपास निर्माण की मांग को लेकर 11.38 किलोमीटर लंबी 'जल-जंगल यात्रा 2.0' निकाली। जंगल और पहाड़ों के बीच निकली इस पदयात्रा में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया, जिसमें ग्रामीणों के साथ-साथ पुलिस, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और स्कूली बच्चों की भी सहभागिता रही। विधायक ने कहा कि अगले डेढ़ साल में केशकाल बाईपास बनने से क्षेत्र की जाम की समस्या दूर होगी और व्यापार व विकास को नई गति मिलेगी।1
- नारायणपुर जिले से मात्र 7-8 किलोमीटर दूर स्थित केरलापाल ग्राम पंचायत ने ग्राम सभा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। ग्रामीणों ने एक प्रस्ताव पारित कर ईसाई पादरियों, बाहरी धर्म प्रचारकों और मतांतरण गतिविधियों से जुड़े व्यक्तियों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस निर्णय के बाद गांव के प्रवेश द्वार पर एक सूचना बोर्ड भी लगाया गया है, जिसमें पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध की जानकारी दी गई है। ग्राम सभा में यह फैसला पंचायत द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर लिया गया है, जिसके तहत ईसाई धर्म की प्रार्थनाओं और धार्मिक आयोजनों पर भी रोक लगाई गई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में मतांतरण को लेकर काफी सामाजिक तनाव और विवाद बढ़ा है, और कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। इन परिस्थितियों के चलते, केरलापाल ग्राम पंचायत ने अपनी आस्था और संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से यह प्रस्ताव पारित किया है।1
- हमारे गांव में एक प्रसिद्ध मौसमी फल, जिसे 'राय जान' कहा जाता है, उसकी इन दिनों विशेष मांग है। बच्चे और यहां तक कि पढ़ने-लिखने वाले छात्र भी इसे खूब पसंद कर रहे हैं और खा रहे हैं। इस मौसमी फल की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, ऐसी बात सामने आई है कि इसे हमारे देश का राष्ट्रीय फल कहा जाना चाहिए।1
- राज्य में जारी खाद संकट पर मार्कफेड अध्यक्ष ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने डीएपी खाद की कमी को स्वीकार किया है। हालांकि, इस सबके बावजूद किसानों को किए जाने वाले भुगतान से जुड़े सवाल अभी भी बरकरार हैं।1
- किरंदुल के वार्ड क्रमांक 01 स्थित रुद्र मंदिर इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। प्रतिदिन सुबह से ही भगवान रुद्रदेव महाकाल के दर्शन, जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण "हर-हर महादेव, जय बाबा भोलेनाथ और जय रुद्रदेव महाकाल" के जयघोष से भक्तिमय और शिवमय हो उठता है। स्थानीय भक्तों के साथ-साथ आसपास के गाँवों और दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव के दरबार में अपनी मनोकामनाएँ लेकर आ रहे हैं। इनमें से कुछ अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, कुछ स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन में सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं, तो कई केवल भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करने आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के चरणों में उन्हें आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई आशा का अनुभव होता है, और सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं, जिससे भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यही अटूट विश्वास रोज़ाना हज़ारों लोगों को इस मंदिर की ओर आकर्षित कर रहा है। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, दीप प्रज्वलन और भक्तों द्वारा किए जाने वाले भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से शाम तक, श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिनके चेहरों पर भक्ति, विश्वास और संतोष की झलक साफ दिखाई देती है। यह रुद्र मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ आने वाले भक्तों को भगवान भोलेनाथ की कृपा से मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इसी कारण दिन-प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, और यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है, जहाँ हर दिन भक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है।1
- बिहार के पूर्व डीजीपी अभ्यानंद ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने वायरल वीडियो और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे एनकाउंटर नहीं, बल्कि सीधे-सीधे हत्या बताया है। अभ्यानंद ने चेतावनी दी है कि यदि अदालत में यह साबित हो जाता है कि आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाई गई थी, तो इसमें शामिल पुलिस टीम को अपनी बाकी की जिंदगी सलाखों के पीछे काटनी पड़ सकती है। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर में अब पूर्व डीजीपी अभ्यानंद का नाम भी जुड़ गया है, जिन्होंने सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर चल रहे वीडियो फुटेज को घटना का आधार बताया। उन्होंने कहा कि वीडियो में मृतक भरत तिवारी द्वारा किए जा रहे फेसबुक लाइव और मीडिया क्लिप्स से स्पष्ट होता है कि उस अकेले व्यक्ति ने अपना हथियार नीचे फेंक दिया था, वह निहत्था था और उसकी तरफ से कोई फायरिंग नहीं हो रही थी। पूर्व डीजीपी ने जोर देकर कहा कि जब कोई अपराधी आत्मसमर्पण कर दे या हथियार डाल दे, तो उसे घेरकर गोली मार देना एनकाउंटर नहीं, बल्कि हत्या है। अभ्यानंद ने गंभीर परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ट्रायल के दौरान यह बात अदालत में साबित हो गई, तो गोली मारने वाले पुलिसकर्मी को लोअर कोर्ट से मृत्युदंड मिलेगा और टीम के अन्य पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास भुगतनी पड़ेगी, क्योंकि इस धारा में तीसरी कोई सजा होती ही नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि यह एनकाउंटर नहीं था, यह सरेंडर करने के बाद निहत्थे भरत तिवारी की हत्या की गई है, जिसे संविधान में हत्या कहा जाता है।1
- टीवी इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुँचीं। वे नवकार ज्वेलर्स के एक साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेलिब्रेशन कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में महिला फैंस पहुँचीं, और श्वेता तिवारी के पहुँचते ही फैंस में जबरदस्त उत्साह देखा गया। उनके रायपुर आगमन का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।1
- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। शहर और आसपास के कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। प्रमुख मार्गों पर हुए जलभराव के कारण लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। निचले इलाकों में पानी भरने से वाहन चालकों और पैदल राहगीरों की परेशानियां बढ़ गई हैं, जहाँ कई जगह सड़कें तालाब जैसी दिखाई दे रही हैं। लगातार बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों की कुछ सड़कें भी प्रभावित हुई हैं, जिसके चलते गांवों का मुख्य मार्गों से आंशिक संपर्क टूट गया है। प्रशासन इस स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और संबंधित विभागों को जल निकासी के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी जिले में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सभी नागरिकों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की सलाह दी है।1