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किरंदुल के वार्ड क्रमांक 01 स्थित रुद्र मंदिर इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। प्रतिदिन सुबह से ही भगवान रुद्रदेव महाकाल के दर्शन, जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण "हर-हर महादेव, जय बाबा भोलेनाथ और जय रुद्रदेव महाकाल" के जयघोष से भक्तिमय और शिवमय हो उठता है। स्थानीय भक्तों के साथ-साथ आसपास के गाँवों और दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव के दरबार में अपनी मनोकामनाएँ लेकर आ रहे हैं। इनमें से कुछ अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, कुछ स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन में सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं, तो कई केवल भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करने आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के चरणों में उन्हें आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई आशा का अनुभव होता है, और सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं, जिससे भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यही अटूट विश्वास रोज़ाना हज़ारों लोगों को इस मंदिर की ओर आकर्षित कर रहा है। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, दीप प्रज्वलन और भक्तों द्वारा किए जाने वाले भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से शाम तक, श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिनके चेहरों पर भक्ति, विश्वास और संतोष की झलक साफ दिखाई देती है। यह रुद्र मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ आने वाले भक्तों को भगवान भोलेनाथ की कृपा से मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इसी कारण दिन-प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, और यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है, जहाँ हर दिन भक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

18 hrs ago
user_Ravi sarkar
Ravi sarkar
बस्तर, बस्तर, छत्तीसगढ़•
18 hrs ago

किरंदुल के वार्ड क्रमांक 01 स्थित रुद्र मंदिर इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। प्रतिदिन सुबह से ही भगवान रुद्रदेव महाकाल के दर्शन, जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण "हर-हर महादेव, जय बाबा भोलेनाथ और जय रुद्रदेव महाकाल" के जयघोष से भक्तिमय और शिवमय हो उठता है। स्थानीय भक्तों के साथ-साथ आसपास के गाँवों और दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव के दरबार में अपनी मनोकामनाएँ लेकर आ रहे हैं। इनमें से कुछ अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, कुछ स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन में सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं, तो कई केवल भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करने आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के चरणों में उन्हें आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई आशा का अनुभव होता है, और सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं, जिससे भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यही अटूट विश्वास रोज़ाना हज़ारों लोगों को इस मंदिर की ओर आकर्षित कर रहा है। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, दीप प्रज्वलन और भक्तों द्वारा किए जाने वाले भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से शाम तक, श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिनके चेहरों पर भक्ति, विश्वास और संतोष की झलक साफ दिखाई देती है। यह रुद्र मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ आने वाले भक्तों को भगवान भोलेनाथ की कृपा से मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इसी कारण दिन-प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, और यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है, जहाँ हर दिन भक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

More news from छत्तीसगढ़ and nearby areas
  • अवॉर्ड मिलने के बावजूद, 30 जून 2025 तक किए गए एक वादे को अब तक पूरा न किए जाने पर सवाल उठाया जा रहा है। यह प्रश्न किया गया है कि आखिर इस वादे को क्यों नहीं निभाया गया है।
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    अवॉर्ड मिलने के बावजूद, 30 जून 2025 तक किए गए एक वादे को अब तक पूरा न किए जाने पर सवाल उठाया जा रहा है। यह प्रश्न किया गया है कि आखिर इस वादे को क्यों नहीं निभाया गया है।
    user_तीसरी आंख 👁️
    तीसरी आंख 👁️
    Voice of people बस्तर, बस्तर, छत्तीसगढ़•
    23 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के केशकाल में विधायक नीलकंठ टेकाम ने बाईपास निर्माण की मांग को लेकर 11.38 किलोमीटर लंबी 'जल-जंगल यात्रा 2.0' निकाली। जंगल और पहाड़ों के बीच निकली इस पदयात्रा में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया, जिसमें ग्रामीणों के साथ-साथ पुलिस, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और स्कूली बच्चों की भी सहभागिता रही। विधायक ने कहा कि अगले डेढ़ साल में केशकाल बाईपास बनने से क्षेत्र की जाम की समस्या दूर होगी और व्यापार व विकास को नई गति मिलेगी।
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    छत्तीसगढ़ के केशकाल में विधायक नीलकंठ टेकाम ने बाईपास निर्माण की मांग को लेकर 11.38 किलोमीटर लंबी 'जल-जंगल यात्रा 2.0' निकाली। जंगल और पहाड़ों के बीच निकली इस पदयात्रा में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया, जिसमें ग्रामीणों के साथ-साथ पुलिस, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और स्कूली बच्चों की भी सहभागिता रही।

विधायक ने कहा कि अगले डेढ़ साल में केशकाल बाईपास बनने से क्षेत्र की जाम की समस्या दूर होगी और व्यापार व विकास को नई गति मिलेगी।
    user_बस्तर लाइव
    बस्तर लाइव
    Media company फरसगाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • हमारे गांव में एक प्रसिद्ध मौसमी फल, जिसे 'राय जान' कहा जाता है, उसकी इन दिनों विशेष मांग है। बच्चे और यहां तक कि पढ़ने-लिखने वाले छात्र भी इसे खूब पसंद कर रहे हैं और खा रहे हैं। इस मौसमी फल की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, ऐसी बात सामने आई है कि इसे हमारे देश का राष्ट्रीय फल कहा जाना चाहिए।
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    हमारे गांव में एक प्रसिद्ध मौसमी फल, जिसे 'राय जान' कहा जाता है, उसकी इन दिनों विशेष मांग है। बच्चे और यहां तक कि पढ़ने-लिखने वाले छात्र भी इसे खूब पसंद कर रहे हैं और खा रहे हैं। इस मौसमी फल की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, ऐसी बात सामने आई है कि इसे हमारे देश का राष्ट्रीय फल कहा जाना चाहिए।
    user_Yadram Sahu
    Yadram Sahu
    Plumber राजिम, गरियाबंद, छत्तीसगढ़•
    19 hrs ago
  • राज्य में जारी खाद संकट पर मार्कफेड अध्यक्ष ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने डीएपी खाद की कमी को स्वीकार किया है। हालांकि, इस सबके बावजूद किसानों को किए जाने वाले भुगतान से जुड़े सवाल अभी भी बरकरार हैं।
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    राज्य में जारी खाद संकट पर मार्कफेड अध्यक्ष ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने डीएपी खाद की कमी को स्वीकार किया है। हालांकि, इस सबके बावजूद किसानों को किए जाने वाले भुगतान से जुड़े सवाल अभी भी बरकरार हैं।
    user_Jaideep Sharma
    Jaideep Sharma
    राजनांदगांव, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़•
    12 hrs ago
  • बिहार के पूर्व डीजीपी अभ्यानंद ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने वायरल वीडियो और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे एनकाउंटर नहीं, बल्कि सीधे-सीधे हत्या बताया है। अभ्यानंद ने चेतावनी दी है कि यदि अदालत में यह साबित हो जाता है कि आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाई गई थी, तो इसमें शामिल पुलिस टीम को अपनी बाकी की जिंदगी सलाखों के पीछे काटनी पड़ सकती है। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर में अब पूर्व डीजीपी अभ्यानंद का नाम भी जुड़ गया है, जिन्होंने सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर चल रहे वीडियो फुटेज को घटना का आधार बताया। उन्होंने कहा कि वीडियो में मृतक भरत तिवारी द्वारा किए जा रहे फेसबुक लाइव और मीडिया क्लिप्स से स्पष्ट होता है कि उस अकेले व्यक्ति ने अपना हथियार नीचे फेंक दिया था, वह निहत्था था और उसकी तरफ से कोई फायरिंग नहीं हो रही थी। पूर्व डीजीपी ने जोर देकर कहा कि जब कोई अपराधी आत्मसमर्पण कर दे या हथियार डाल दे, तो उसे घेरकर गोली मार देना एनकाउंटर नहीं, बल्कि हत्या है। अभ्यानंद ने गंभीर परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ट्रायल के दौरान यह बात अदालत में साबित हो गई, तो गोली मारने वाले पुलिसकर्मी को लोअर कोर्ट से मृत्युदंड मिलेगा और टीम के अन्य पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास भुगतनी पड़ेगी, क्योंकि इस धारा में तीसरी कोई सजा होती ही नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि यह एनकाउंटर नहीं था, यह सरेंडर करने के बाद निहत्थे भरत तिवारी की हत्या की गई है, जिसे संविधान में हत्या कहा जाता है।
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    बिहार के पूर्व डीजीपी अभ्यानंद ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने वायरल वीडियो और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे एनकाउंटर नहीं, बल्कि सीधे-सीधे हत्या बताया है। अभ्यानंद ने चेतावनी दी है कि यदि अदालत में यह साबित हो जाता है कि आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाई गई थी, तो इसमें शामिल पुलिस टीम को अपनी बाकी की जिंदगी सलाखों के पीछे काटनी पड़ सकती है।

बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर में अब पूर्व डीजीपी अभ्यानंद का नाम भी जुड़ गया है, जिन्होंने सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर चल रहे वीडियो फुटेज को घटना का आधार बताया। उन्होंने कहा कि वीडियो में मृतक भरत तिवारी द्वारा किए जा रहे फेसबुक लाइव और मीडिया क्लिप्स से स्पष्ट होता है कि उस अकेले व्यक्ति ने अपना हथियार नीचे फेंक दिया था, वह निहत्था था और उसकी तरफ से कोई फायरिंग नहीं हो रही थी। पूर्व डीजीपी ने जोर देकर कहा कि जब कोई अपराधी आत्मसमर्पण कर दे या हथियार डाल दे, तो उसे घेरकर गोली मार देना एनकाउंटर नहीं, बल्कि हत्या है।

अभ्यानंद ने गंभीर परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ट्रायल के दौरान यह बात अदालत में साबित हो गई, तो गोली मारने वाले पुलिसकर्मी को लोअर कोर्ट से मृत्युदंड मिलेगा और टीम के अन्य पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास भुगतनी पड़ेगी, क्योंकि इस धारा में तीसरी कोई सजा होती ही नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि यह एनकाउंटर नहीं था, यह सरेंडर करने के बाद निहत्थे भरत तिवारी की हत्या की गई है, जिसे संविधान में हत्या कहा जाता है।
    user_Pradeep Singh Rajput 🇮🇳D.N.
    Pradeep Singh Rajput 🇮🇳D.N.
    Voice of people दुर्ग, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • किरंदुल के वार्ड क्रमांक 01 स्थित रुद्र मंदिर इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। प्रतिदिन सुबह से ही भगवान रुद्रदेव महाकाल के दर्शन, जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण "हर-हर महादेव, जय बाबा भोलेनाथ और जय रुद्रदेव महाकाल" के जयघोष से भक्तिमय और शिवमय हो उठता है। स्थानीय भक्तों के साथ-साथ आसपास के गाँवों और दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव के दरबार में अपनी मनोकामनाएँ लेकर आ रहे हैं। इनमें से कुछ अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, कुछ स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन में सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं, तो कई केवल भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करने आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के चरणों में उन्हें आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई आशा का अनुभव होता है, और सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं, जिससे भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यही अटूट विश्वास रोज़ाना हज़ारों लोगों को इस मंदिर की ओर आकर्षित कर रहा है। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, दीप प्रज्वलन और भक्तों द्वारा किए जाने वाले भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से शाम तक, श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिनके चेहरों पर भक्ति, विश्वास और संतोष की झलक साफ दिखाई देती है। यह रुद्र मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ आने वाले भक्तों को भगवान भोलेनाथ की कृपा से मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इसी कारण दिन-प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, और यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है, जहाँ हर दिन भक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
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    किरंदुल के वार्ड क्रमांक 01 स्थित रुद्र मंदिर इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। प्रतिदिन सुबह से ही भगवान रुद्रदेव महाकाल के दर्शन, जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण "हर-हर महादेव, जय बाबा भोलेनाथ और जय रुद्रदेव महाकाल" के जयघोष से भक्तिमय और शिवमय हो उठता है।

स्थानीय भक्तों के साथ-साथ आसपास के गाँवों और दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव के दरबार में अपनी मनोकामनाएँ लेकर आ रहे हैं। इनमें से कुछ अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, कुछ स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन में सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं, तो कई केवल भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करने आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के चरणों में उन्हें आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई आशा का अनुभव होता है, और सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं, जिससे भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यही अटूट विश्वास रोज़ाना हज़ारों लोगों को इस मंदिर की ओर आकर्षित कर रहा है।

मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, दीप प्रज्वलन और भक्तों द्वारा किए जाने वाले भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से शाम तक, श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिनके चेहरों पर भक्ति, विश्वास और संतोष की झलक साफ दिखाई देती है। यह रुद्र मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ आने वाले भक्तों को भगवान भोलेनाथ की कृपा से मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

इसी कारण दिन-प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, और यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है, जहाँ हर दिन भक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
    user_Ravi sarkar
    Ravi sarkar
    बस्तर, बस्तर, छत्तीसगढ़•
    18 hrs ago
  • टीवी इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुँचीं। वे नवकार ज्वेलर्स के एक साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेलिब्रेशन कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में महिला फैंस पहुँचीं, और श्वेता तिवारी के पहुँचते ही फैंस में जबरदस्त उत्साह देखा गया। उनके रायपुर आगमन का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।
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    टीवी इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुँचीं। वे नवकार ज्वेलर्स के एक साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेलिब्रेशन कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में महिला फैंस पहुँचीं, और श्वेता तिवारी के पहुँचते ही फैंस में जबरदस्त उत्साह देखा गया।

उनके रायपुर आगमन का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।
    user_News4u36
    News4u36
    Local News Reporter Raipur, Chhattisgarh•
    16 hrs ago
  • राजिम शहर और आसपास के कई गांवों में सोमवार की सुबह करीब 5:30 बजे लगभग 20 मिनट तक हल्की बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ देर राहत मिली। हालांकि, सुबह 7 बजे से ही तेज धूप और तपिश बढ़ गई। इस नाम मात्र की बारिश के कारण किसानों के खेतों में पर्याप्त नमी नहीं पहुँच पाई है, जिससे धान की बोनी का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। किसान इंद्रदेव की कृपादृष्टि की आस में आसमान की ओर निहार रहे हैं। राजिम क्षेत्र के बकली, परसदा जोशी, अरंड, धमनी, किरवई, भैंसातरा, पोखरा, हथखोज, पीतईबंद, कोमा, कुम्ही, चौबेबांधा, सिंधौरी, बरोंडा, श्यामनगर, सुरसाबांधा, देवरी, पथर्रा, नवाडीह, कौंदकेरा, रावड़, लफंदी, बेलटुकरी सहित अनेक गाँवों के किसान अच्छी और नियमित बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में पड़ी दरारें अभी तक पूरी तरह से नहीं भर पाई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां जरूर तेज हुई हैं, लेकिन किसानों के मन में चिंता बढ़ रही है कि यदि समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो खेती का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है और उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। किसान इस बीच खाद और बीज की व्यवस्था में लगे हुए हैं, जिसके लिए वे सहकारी समितियों में पंजीयन कराकर सामग्री प्राप्त कर रहे हैं। वहीं, निजी कृषि केंद्रों पर भी खाद की बिक्री जारी है, लेकिन किसानों ने आरोप लगाया है कि कुछ निजी दुकानों में खाद निर्धारित दर से लगभग दोगुनी कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसानों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से निजी दुकानों का नियमित निरीक्षण कर खाद की वास्तविक कीमतों की जांच करने और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, डीजल की बढ़ी कीमतों का असर भी कृषि कार्यों पर साफ दिख रहा है, जिससे ट्रैक्टर से जुताई का किराया बढ़कर 1,200 से 1,400 रुपये प्रति घंटा तक पहुँच गया है। बकली के किसानों सियाराम साहू, डॉ. चंद्रिका साहू, त्रिलोचन साहू, जीतराम मिरी, रामपाल मिरी, किसलाल साहू, भारत मिरी, कमल साहू, दिलीप सेन और कामता प्रसाद साहू ने इस बढ़ी हुई लागत पर चिंता व्यक्त की है। गरियाबंद जिले में लगभग 1.04 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है, और मानसून की अनिश्चितता किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून राजिम क्षेत्र सहित पूरे छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर चुका है। विभाग ने 25 से 28 जून तक रुक-रुककर वर्षा और बौछारों का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है, जबकि जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश की तीव्रता बढ़ने का अनुमान है। इन सभी चुनौतियों के बीच, किसान अभी भी खेतों की मेड़ मरम्मत, साफ-सफाई और उन्हें बुवाई योग्य बनाने में जुटे हुए हैं, ताकि पर्याप्त बारिश होते ही समय पर धान की बोनी शुरू की जा सके और खरीफ सीजन की खेती पटरी पर आ सके।
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    राजिम शहर और आसपास के कई गांवों में सोमवार की सुबह करीब 5:30 बजे लगभग 20 मिनट तक हल्की बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ देर राहत मिली। हालांकि, सुबह 7 बजे से ही तेज धूप और तपिश बढ़ गई। इस नाम मात्र की बारिश के कारण किसानों के खेतों में पर्याप्त नमी नहीं पहुँच पाई है, जिससे धान की बोनी का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। किसान इंद्रदेव की कृपादृष्टि की आस में आसमान की ओर निहार रहे हैं।

राजिम क्षेत्र के बकली, परसदा जोशी, अरंड, धमनी, किरवई, भैंसातरा, पोखरा, हथखोज, पीतईबंद, कोमा, कुम्ही, चौबेबांधा, सिंधौरी, बरोंडा, श्यामनगर, सुरसाबांधा, देवरी, पथर्रा, नवाडीह, कौंदकेरा, रावड़, लफंदी, बेलटुकरी सहित अनेक गाँवों के किसान अच्छी और नियमित बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में पड़ी दरारें अभी तक पूरी तरह से नहीं भर पाई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां जरूर तेज हुई हैं, लेकिन किसानों के मन में चिंता बढ़ रही है कि यदि समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो खेती का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है और उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।

किसान इस बीच खाद और बीज की व्यवस्था में लगे हुए हैं, जिसके लिए वे सहकारी समितियों में पंजीयन कराकर सामग्री प्राप्त कर रहे हैं। वहीं, निजी कृषि केंद्रों पर भी खाद की बिक्री जारी है, लेकिन किसानों ने आरोप लगाया है कि कुछ निजी दुकानों में खाद निर्धारित दर से लगभग दोगुनी कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसानों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से निजी दुकानों का नियमित निरीक्षण कर खाद की वास्तविक कीमतों की जांच करने और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, डीजल की बढ़ी कीमतों का असर भी कृषि कार्यों पर साफ दिख रहा है, जिससे ट्रैक्टर से जुताई का किराया बढ़कर 1,200 से 1,400 रुपये प्रति घंटा तक पहुँच गया है। बकली के किसानों सियाराम साहू, डॉ. चंद्रिका साहू, त्रिलोचन साहू, जीतराम मिरी, रामपाल मिरी, किसलाल साहू, भारत मिरी, कमल साहू, दिलीप सेन और कामता प्रसाद साहू ने इस बढ़ी हुई लागत पर चिंता व्यक्त की है। गरियाबंद जिले में लगभग 1.04 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है, और मानसून की अनिश्चितता किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है।

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून राजिम क्षेत्र सहित पूरे छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर चुका है। विभाग ने 25 से 28 जून तक रुक-रुककर वर्षा और बौछारों का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है, जबकि जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश की तीव्रता बढ़ने का अनुमान है। इन सभी चुनौतियों के बीच, किसान अभी भी खेतों की मेड़ मरम्मत, साफ-सफाई और उन्हें बुवाई योग्य बनाने में जुटे हुए हैं, ताकि पर्याप्त बारिश होते ही समय पर धान की बोनी शुरू की जा सके और खरीफ सीजन की खेती पटरी पर आ सके।
    user_तुकाराम कंसारी नवापारा राजिम
    तुकाराम कंसारी नवापारा राजिम
    Artist औदगी, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • अमरवाड़ा (छिंदवाड़ा) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो विकास के दावों के बीच सिस्टम को शर्मसार करती है। क्षेत्र के एक सुदूर गाँव में सड़क, पुल और एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में एक गर्भवती महिला की जान आफत में पड़ गई। महिला की हालत बिगड़ने पर एम्बुलेंस गाँव तक नहीं पहुँच सकी, जिसके चलते ग्रामीणों को मजबूरन उसे खटिया पर लिटाकर जान जोखिम में डालते हुए एक नदी पार करानी पड़ी। इसके बाद, महिला को पथरीले रास्तों से मोटरसाइकिल पर किसी तरह अस्पताल पहुँचाया गया। इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं की दयनीय स्थिति की पोल खोलकर रख दी है।
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    अमरवाड़ा (छिंदवाड़ा) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो विकास के दावों के बीच सिस्टम को शर्मसार करती है। क्षेत्र के एक सुदूर गाँव में सड़क, पुल और एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में एक गर्भवती महिला की जान आफत में पड़ गई। महिला की हालत बिगड़ने पर एम्बुलेंस गाँव तक नहीं पहुँच सकी, जिसके चलते ग्रामीणों को मजबूरन उसे खटिया पर लिटाकर जान जोखिम में डालते हुए एक नदी पार करानी पड़ी। इसके बाद, महिला को पथरीले रास्तों से मोटरसाइकिल पर किसी तरह अस्पताल पहुँचाया गया। इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं की दयनीय स्थिति की पोल खोलकर रख दी है।
    user_Mukesh Awasthi
    Mukesh Awasthi
    Raipur, Chhattisgarh•
    2 hrs ago
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