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अवॉर्ड मिलने के बावजूद, 30 जून 2025 तक किए गए एक वादे को अब तक पूरा न किए जाने पर सवाल उठाया जा रहा है। यह प्रश्न किया गया है कि आखिर इस वादे को क्यों नहीं निभाया गया है।
तीसरी आंख 👁️
अवॉर्ड मिलने के बावजूद, 30 जून 2025 तक किए गए एक वादे को अब तक पूरा न किए जाने पर सवाल उठाया जा रहा है। यह प्रश्न किया गया है कि आखिर इस वादे को क्यों नहीं निभाया गया है।
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- NMDC पर किरंदुल में भेदभाव और “सामंतशाही” का आरोप लगा है, जहाँ स्थानीय लोगों और बच्चों को एक स्वीमिंग पूल में प्रवेश से वंचित रखा जा रहा है। यह पूल किरंदुल की ज़मीन पर बना है और स्थानीय श्रम से भरा बताया गया है, फिर भी इसके दरवाज़े स्थानीय बच्चों के लिए बंद हैं, जबकि NMDC के दफ़्तर में बैठे अधिकारियों के बच्चे इसका उपयोग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि पूल के पास न तो कोई लाइफ़गार्ड है, न इसे चलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ हैं और न ही कोई आधिकारिक अनुमति है। आरोप लगाया गया कि स्थानीय निवासी, जो खदानें खोदते हैं, शहर में दुकान चलाते हैं और कर देते हैं, उन्हें केवल दर्शक बनकर रहने को मजबूर किया जा रहा है। इस स्थिति को केवल “सुविधा” नहीं, बल्कि “सामंतशाही” का नया रूप बताया गया है, जिसकी वर्दी बदल गई है। इस मुद्दे पर किरंदुल अकेला नहीं खड़ा हुआ। नगर पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी के साथ बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ के प्रतिनिधि भी एकजुट होकर खड़े थे। पत्रकार किशोर रामटेके और रवि सरकार ने भी इस मामले को उजागर किया, ताकि NMDC का यह “भेदभाव” फाइलों में न दबकर अख़बार की सुर्ख़ी बने। जब व्यापारी सड़क पर आए, जनप्रतिनिधि गेट पर आए और पत्रकार कैमरा लेकर पहुँचे, तो NMDC के अधिकारियों ने “समय माँगकर” इस स्थिति से पल्ला झाड़ लिया। NMDC प्रशासन से सवाल पूछा गया है कि जिस ज़मीन का मुआवज़ा आदिवासी समुदाय आज भी माँग रहा है, उसी ज़मीन पर बने पूल में उनके बच्चे क्यों नहीं तैर सकते। यह मामला “तीसरी आंख” द्वारा उठाया गया है, जो प्रश्न पूछने, प्रमाण माँगने और “पक्ष नहीं — सच चुनने” का आह्वान करता है।1
- किरंदुल के वार्ड क्रमांक 01 में स्थित रुद्र मंदिर इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। प्रतिदिन प्रातःकाल से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान रुद्रदेव महाकाल के दर्शन, जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती के लिए मंदिर परिसर पहुँच रहे हैं। 'हर-हर महादेव, जय बाबा भोलेनाथ और जय रुद्रदेव महाकाल' के जयघोष से यहाँ का पूरा वातावरण भक्तिमय और शिवमय हो उठता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ आसपास के गांवों और दूर-दराज़ के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुँच रहे हैं। कोई अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन में सफलता की कामना कर रहा है, तो कोई केवल भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करने के लिए आता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के चरणों में उन्हें आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई आशा का अनुभव होता है। उनकी यह अटूट मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं और भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करते हैं, यही विश्वास हज़ारों कदमों को प्रतिदिन मंदिर की ओर खींच रहा है। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, दीप प्रज्वलन और भक्तों द्वारा किए जाने वाले भजन-कीर्तन से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिनके चेहरों पर भक्ति, विश्वास और संतोष की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। रुद्र मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से उन्हें मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इसी कारण दिन-प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। यह बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है, जहाँ हर दिन भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जहाँ हर श्रद्धालु अपने आराध्य के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति और मंगलमय जीवन की कामना करता है।1
- जगदलपुर के असना रोड नेशनल 30 पर एक घंटे से भी अधिक समय तक झमाझम बारिश हुई, जिससे भीषण गर्मी से लोगों को कुछ राहत मिली है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्हें इस बारिश का लंबे समय से इंतज़ार था। इस वर्षा से न केवल गर्मी से राहत मिली है, बल्कि खेती-किसानी के कामों में भी कुछ मदद मिलने की उम्मीद है।1
- सुकमा जिला अब नक्सल मुक्त होकर नवविकास की राह पर अग्रसर है। इसी क्रम में, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े नक्सली कमांडर हिड़मा के गांव पूवर्ती पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बन गई हैं, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। कभी नक्सल प्रभाव का गढ़ रहे सुदूर अंचलों में अब विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई इबारत लिखी जा रही है, जहाँ ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा जिले के जगरगुंडा, चिंतलनार, पूवर्ती और सिलगेर का दौरा किया। ये वे इलाके थे जहाँ कभी नक्सलियों का राज चलता था और उनकी मर्जी के बिना कोई नहीं जा सकता था। श्रीमती राजवाड़े सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनकर उभरीं, जिसने वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में विकास और शासन की संवेदनशील उपस्थिति को दर्शाया। अपने दौरे के दौरान, मंत्री ने पूवर्ती और सिलगेर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने अन्नप्राशन और गोदभराई कार्यक्रमों में शामिल होकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। बच्चों के साथ आत्मीयता से समय बिताने के अलावा, उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया और विभिन्न शासकीय योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। इसी प्रवास के तहत, मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जगरगुंडा में कृतिका महिला संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) भवन का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से उनकी आजीविका और आर्थिक गतिविधियों पर चर्चा की, संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए, और 'सेवा एक्सप्रेस' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। श्रीमती राजवाड़े ने इस बात पर बल दिया कि जो क्षेत्र कभी असुरक्षा और हिंसा के कारण जाने जाते थे, वे आज महिला सशक्तिकरण, स्वावलंबन, शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास के केंद्र बन रहे हैं, जहाँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। ग्रामीण महिलाओं ने इस क्षण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कोई महिला मंत्री सड़क मार्ग से सीधे उनके गांव आकर उनकी समस्याएँ सुनने और संवाद करने आई हैं, जिससे शासन के प्रति उनका विश्वास और गहरा हुआ है। मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर के अंतिम छोर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के राज्य सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसमर्थन और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के प्रयासों से सुकमा में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का नया वातावरण बना है, जिसकी सशक्त पहचान बच्चों की मुस्कान, महिलाओं का बढ़ता आत्मविश्वास और विकास की नई संभावनाएँ हैं।2
- कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड की ग्राम पंचायत मादागांव में 360 मीटर लंबी सीसी सड़क निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। यह परियोजना ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा कर रही है, जिसे केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम की पहल पर साकार किया जा रहा है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सरपंच संतोष राणा, देवेंद्र सेटिया, कमलेश नाग, रोहित राणा, युवराज प्रधान और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1
- नारायणपुर जिले से मात्र 7-8 किलोमीटर दूर स्थित केरलापाल ग्राम पंचायत ने ग्राम सभा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। ग्रामीणों ने एक प्रस्ताव पारित कर ईसाई पादरियों, बाहरी धर्म प्रचारकों और मतांतरण गतिविधियों से जुड़े व्यक्तियों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस निर्णय के बाद गांव के प्रवेश द्वार पर एक सूचना बोर्ड भी लगाया गया है, जिसमें पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध की जानकारी दी गई है। ग्राम सभा में यह फैसला पंचायत द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर लिया गया है, जिसके तहत ईसाई धर्म की प्रार्थनाओं और धार्मिक आयोजनों पर भी रोक लगाई गई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में मतांतरण को लेकर काफी सामाजिक तनाव और विवाद बढ़ा है, और कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। इन परिस्थितियों के चलते, केरलापाल ग्राम पंचायत ने अपनी आस्था और संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से यह प्रस्ताव पारित किया है।1
- किरंदुल के वार्ड क्रमांक 01 स्थित रुद्र मंदिर इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिदिन सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान रुद्रदेव महाकाल के दर्शन, जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और आरती के लिए मंदिर परिसर में पहुँच रहे हैं। मंदिर में गूंजते "हर-हर महादेव, जय बाबा भोलेनाथ और जय रुद्रदेव महाकाल" के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय और शिवमय हो उठता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ आसपास के गाँवों और दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव के दरबार में अपनी मनोकामनाएँ लेकर पहुँच रहे हैं; कोई परिवार की सुख-समृद्धि, कोई स्वास्थ्य, रोज़गार और जीवन में सफलता, तो कोई केवल आत्मिक शांति के लिए दर्शन करने आ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के चरणों में पहुँचकर उन्हें आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई आशा का अनुभव होता है। उनकी मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं तथा भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करते हैं। इसी अटूट विश्वास के कारण प्रतिदिन हज़ारों श्रद्धालु रुद्र मंदिर की ओर खिंचे चले आते हैं। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, दीप प्रज्वलन और भक्तों द्वारा किए जाने वाले भजन-कीर्तन से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालु अनुशासित ढंग से भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जहाँ उनके चेहरों पर भक्ति, विश्वास और संतोष की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। यह रुद्र मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है, जहाँ आने वाले श्रद्धालु मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। इसी कारण दिन-प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, और यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भगवान रुद्रदेव महाकाल के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास लगातार मज़बूत हो रहा है।1
- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। शहर और आसपास के कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। प्रमुख मार्गों पर हुए जलभराव के कारण लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। निचले इलाकों में पानी भरने से वाहन चालकों और पैदल राहगीरों की परेशानियां बढ़ गई हैं, जहाँ कई जगह सड़कें तालाब जैसी दिखाई दे रही हैं। लगातार बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों की कुछ सड़कें भी प्रभावित हुई हैं, जिसके चलते गांवों का मुख्य मार्गों से आंशिक संपर्क टूट गया है। प्रशासन इस स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और संबंधित विभागों को जल निकासी के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी जिले में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सभी नागरिकों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की सलाह दी है।1