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एसडीएम ने ई-दिशा केंद्र का औचक निरीक्षण किया काउंटरों पर आवश्यक दस्तावेजों की सूची लगाने के निर्देश दिए एसडीएम उचाना रमित यादव ने ई-दिशा केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने काउंटरों पर आवश्यक दस्तावेजों की सूची लगाने के निर्देश दिए ताकि लोगों को बार-बार चक्कर न काटने पड़ें। निरीक्षण के दौरान, एसडीएम ने मैरिज सर्टिफिकेट, लाइसेंस और आरसी से संबंधित काउंटरों पर कर्मचारियों से बात की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक काउंटर के सामने उन सभी कागजातों की स्पष्ट सूची लगाई जाए जो इन सेवाओं के लिए आवश्यक हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद कई लोग आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी लेने के लिए केंद्र आते हैं। यादव ने ई-दिशा केंद्र में आने वाले लोगों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने मौजूदा कुर्सियों के अलावा और कुर्सियां रखने को कहा। इसके अतिरिक्त, केंद्र के पास स्थित शौचालय को सुचारू रूप से चलाने और उपमंडल परिसर में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए। गर्मी के मौसम को देखते हुए, उन्होंने वाटर कूलर में ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया। एसडीएम ने इस दौरान कहा कि सभी अधिकारी और कर्मचारी जनता की सेवा के लिए हैं। उन्होंने जोर दिया कि समस्याओं के समाधान या किसी भी कार्य के लिए आने वाले व्यक्ति का काम तुरंत होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी को बार-बार चक्कर कटवाए गए, तो संबंधित विभाग के अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम ने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को इस उद्देश्य के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए सभी कार्यालयों में इस तरह के औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे।

6 hrs ago
user_BHUPENDER
BHUPENDER
Local News Reporter उचाना, जींद, हरियाणा•
6 hrs ago

एसडीएम ने ई-दिशा केंद्र का औचक निरीक्षण किया काउंटरों पर आवश्यक दस्तावेजों की सूची लगाने के निर्देश दिए एसडीएम उचाना रमित यादव ने ई-दिशा केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने काउंटरों पर आवश्यक दस्तावेजों की सूची लगाने के निर्देश दिए ताकि लोगों को बार-बार चक्कर न काटने पड़ें। निरीक्षण के दौरान, एसडीएम ने मैरिज सर्टिफिकेट, लाइसेंस और आरसी से संबंधित काउंटरों पर कर्मचारियों से बात की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक काउंटर के सामने उन सभी कागजातों की स्पष्ट सूची लगाई जाए जो इन सेवाओं के लिए आवश्यक हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद कई लोग आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी लेने के लिए केंद्र आते हैं। यादव ने ई-दिशा केंद्र में आने वाले लोगों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने मौजूदा कुर्सियों के अलावा और कुर्सियां रखने को कहा। इसके अतिरिक्त, केंद्र के पास स्थित शौचालय को सुचारू रूप से चलाने और उपमंडल परिसर में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए। गर्मी के मौसम को देखते हुए, उन्होंने वाटर कूलर में ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया। एसडीएम ने इस दौरान कहा कि सभी अधिकारी और कर्मचारी जनता की सेवा के लिए हैं। उन्होंने जोर दिया कि समस्याओं के समाधान या किसी भी कार्य के लिए आने वाले व्यक्ति का काम तुरंत होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी को बार-बार चक्कर कटवाए गए, तो संबंधित विभाग के अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम ने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को इस उद्देश्य के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए सभी कार्यालयों में इस तरह के औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे।

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  • तस्वीरें हैं अमरपाली एक्सप्रेस की, जहां यात्रियों ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यात्रियों का कहना है कि ट्रेन में न तो RPF और न ही CRPF का कोई स्टाफ मौजूद था, जिससे सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही सामने आई है। इतना ही नहीं, कोच के गेट को बंद करके उसमें पानी की बोतलें अड़ाकर रखी गई थीं, जिससे यात्रियों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आप खुद देख सकते हैं इन तस्वीरों में—यात्री परेशान हैं, और व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आ रही है।”
    1
    तस्वीरें हैं अमरपाली एक्सप्रेस की, जहां यात्रियों ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
यात्रियों का कहना है कि ट्रेन में न तो RPF और न ही CRPF का कोई स्टाफ मौजूद था, जिससे सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही सामने आई है।
इतना ही नहीं, कोच के गेट को बंद करके उसमें पानी की बोतलें अड़ाकर रखी गई थीं, जिससे यात्रियों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
आप खुद देख सकते हैं इन तस्वीरों में—यात्री परेशान हैं, और व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आ रही है।”
    user_FojiNews24
    FojiNews24
    Court reporter भिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    8 hrs ago
  • Bhiwani
    1
    Bhiwani
    user_JONY KUMAR
    JONY KUMAR
    Local News Reporter भिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    9 hrs ago
  • #संत कबीर आश्रम चरखी दादरी द्वारा सतसंग #श्रीमती शरबती देवी श्रद्धांजलि कार्यक्रम रामनगर
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    #संत कबीर आश्रम चरखी दादरी द्वारा सतसंग #श्रीमती शरबती देवी श्रद्धांजलि कार्यक्रम रामनगर
    user_Dhakad hai haryana
    Dhakad hai haryana
    Media house भिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    12 hrs ago
  • ICOPJournalist Janata ki Awaaz Vishal Sharma journalist ✍🏻 🙏🏻 अन्नदाता के आंसुओं की दास्तां – 'जट दी जून बुरी, तड़प-तड़प मर जाना' ​कुरुक्षेत्र/हरियाणा: ​आज जब आसमान में काले बादल घिरते हैं, तो शहर में रहने वालों को सुहाना मौसम नजर आता है, लेकिन खेत में खड़े उस किसान की रूह कांप जाती है जिसकी साल भर की मेहनत कनक (गेहूं) की शक्ल में कटने को तैयार खड़ी है। हरियाणा के खेतों से आज खुशी की महक नहीं, बल्कि एक अनकहे डर की गूँज सुनाई दे रही है। ​कुदरत की मार और अनिश्चितता का साया एक तरफ फसल की कटाई शुरू हो चुकी है, तो दूसरी तरफ कुदरत अपना कहर बरसाने को बेताब दिखती है। किसान की नजरें बार-बार आसमान की तरफ उठती हैं—ऊपर काले बादलों का साया है और नीचे जेब खाली है। ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने पहले ही फसल को काफी हद तक तबाह कर दिया है। अब किसान इस कशमकश में है कि जो बचा-कुचा अनाज है, उसे समेटे या अपनी किस्मत को रोए? ​मंडियों का हाल और कर्ज का बोझ किसान की दास्तां सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है। फसल कटने के बाद असली परीक्षा मंडियों में शुरू होती है। वहां जाने के बाद फसल की सही कीमत मिलेगी या नहीं, सरकारी खरीद समय पर होगी या नहीं, और क्या पैसा वक्त पर खाते में आएगा? ये वो सवाल हैं जो किसान को रात भर सोने नहीं देते। ​किसान आज एक भयावह गणित के बीच फंसा है: ​आढ़ती का कर्ज: जिससे खाद और बीज के लिए पैसा लिया था। ​कंबाइन का किराया: फसल काटने वाली मशीन के पैसे कहाँ से आएंगे? ​घर की जरूरतें: क्या बच्चों की पढ़ाई और घर का राशन इस बार नसीब होगा? ​दर्द भरी दास्तां: जट दी जून बुरी... हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि किसान यह सोचने पर मजबूर है कि वह घर क्या लेकर जाएगा? क्या वह सिर्फ खाली हाथ और कर्ज की पोटली लेकर लौटेगा? बुजुर्गों की कही वो बात आज हकीकत बनकर सीने में चुभती है कि— 'जट दी जून बुरी, तड़प-तड़प मर जाना'। यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि आज के अन्नदाता की वह कड़वी सच्चाई है जो समाज के हर संवेदनशील व्यक्ति को रोने पर मजबूर कर देती है। ​सरकार से गुहार क्या व्यवस्था को किसान की सिसकियां सुनाई देंगी? क्या सरकार समय रहते कनक की खरीद सुनिश्चित करेगी और किसानों को तत्काल राहत राशि प्रदान करेगी? आज देश का पेट भरने वाला खुद खाली पेट आसमान की ओर देख रहा है। यदि वक्त रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह सोना उगलने वाली मिट्टी किसान की उम्मीदों की कब्रगाह बन जाएगी। ​प्रस्तुति: विशाल शर्मा फ्रीलांस जर्नलिस्ट व शोधकर्ता
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    ICOPJournalist Janata ki Awaaz Vishal Sharma journalist ✍🏻 🙏🏻 
अन्नदाता के आंसुओं की दास्तां – 'जट दी जून बुरी, तड़प-तड़प मर जाना'
​कुरुक्षेत्र/हरियाणा:
​आज जब आसमान में काले बादल घिरते हैं, तो शहर में रहने वालों को सुहाना मौसम नजर आता है, लेकिन खेत में खड़े उस किसान की रूह कांप जाती है जिसकी साल भर की मेहनत कनक (गेहूं) की शक्ल में कटने को तैयार खड़ी है। हरियाणा के खेतों से आज खुशी की महक नहीं, बल्कि एक अनकहे डर की गूँज सुनाई दे रही है।
​कुदरत की मार और अनिश्चितता का साया
एक तरफ फसल की कटाई शुरू हो चुकी है, तो दूसरी तरफ कुदरत अपना कहर बरसाने को बेताब दिखती है। किसान की नजरें बार-बार आसमान की तरफ उठती हैं—ऊपर काले बादलों का साया है और नीचे जेब खाली है। ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने पहले ही फसल को काफी हद तक तबाह कर दिया है। अब किसान इस कशमकश में है कि जो बचा-कुचा अनाज है, उसे समेटे या अपनी किस्मत को रोए?
​मंडियों का हाल और कर्ज का बोझ
किसान की दास्तां सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है। फसल कटने के बाद असली परीक्षा मंडियों में शुरू होती है। वहां जाने के बाद फसल की सही कीमत मिलेगी या नहीं, सरकारी खरीद समय पर होगी या नहीं, और क्या पैसा वक्त पर खाते में आएगा? ये वो सवाल हैं जो किसान को रात भर सोने नहीं देते।
​किसान आज एक भयावह गणित के बीच फंसा है:
​आढ़ती का कर्ज: जिससे खाद और बीज के लिए पैसा लिया था।
​कंबाइन का किराया: फसल काटने वाली मशीन के पैसे कहाँ से आएंगे?
​घर की जरूरतें: क्या बच्चों की पढ़ाई और घर का राशन इस बार नसीब होगा?
​दर्द भरी दास्तां: जट दी जून बुरी...
हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि किसान यह सोचने पर मजबूर है कि वह घर क्या लेकर जाएगा? क्या वह सिर्फ खाली हाथ और कर्ज की पोटली लेकर लौटेगा? बुजुर्गों की कही वो बात आज हकीकत बनकर सीने में चुभती है कि— 'जट दी जून बुरी, तड़प-तड़प मर जाना'। यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि आज के अन्नदाता की वह कड़वी सच्चाई है जो समाज के हर संवेदनशील व्यक्ति को रोने पर मजबूर कर देती है।
​सरकार से गुहार
क्या व्यवस्था को किसान की सिसकियां सुनाई देंगी? क्या सरकार समय रहते कनक की खरीद सुनिश्चित करेगी और किसानों को तत्काल राहत राशि प्रदान करेगी? आज देश का पेट भरने वाला खुद खाली पेट आसमान की ओर देख रहा है। यदि वक्त रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह सोना उगलने वाली मिट्टी किसान की उम्मीदों की कब्रगाह बन जाएगी।
​प्रस्तुति:
विशाल शर्मा 
फ्रीलांस जर्नलिस्ट व शोधकर्ता
    user_IndiaNews 9Live
    IndiaNews 9Live
    Media company Thanesar, Kurukshetra•
    1 hr ago
  • Post by Anoopshukla
    1
    Post by Anoopshukla
    user_Anoopshukla
    Anoopshukla
    Thanesar, Kurukshetra•
    2 hrs ago
  • Post by Sandeep sheoran
    1
    Post by Sandeep sheoran
    user_Sandeep sheoran
    Sandeep sheoran
    News Anchor दादरी, चरखी दादरी, हरियाणा•
    1 hr ago
  • Bhiwani
    1
    Bhiwani
    user_JONY KUMAR
    JONY KUMAR
    Local News Reporter भिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    10 hrs ago
  • Post by FojiNews24
    1
    Post by FojiNews24
    user_FojiNews24
    FojiNews24
    Court reporter भिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    11 hrs ago
  • #संत कबीर आश्रम चरखी दादरी द्वारा सतसंग #श्रीमती शरबती देवी श्रद्धांजलि कार्यक्रम रामनगर
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    #संत कबीर आश्रम चरखी दादरी द्वारा सतसंग #श्रीमती शरबती देवी श्रद्धांजलि कार्यक्रम रामनगर
    user_Dhakad hai haryana
    Dhakad hai haryana
    Media house भिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    12 hrs ago
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