*मानवता हुई शर्मसार: मां-बहन की लाश ठेले में, सिस्टम देखता रह गया* नईगढ़ी में आज सुबह एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर संवेदनशील इंसान का दिल झकझोर कर रख दिया। सड़क हादसे में जान गंवाने वाली एक महिला के शव को पोस्टमार्टम के बाद जिस तरह ले जाया गया, वह इंसानियत पर एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि मृतक महिला नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 15 की निवासी थी और आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखती थी। हादसे के बाद उसका पोस्टमार्टम किया गया, लेकिन इसके बाद न तो एंबुलेंस मिली, न ही शव वाहन। मजबूर परिजन... बेबस आंखें... और सामने अपनों का निर्जीव शरीर— इन सबके बीच आखिरकार परिजनों को महिला के शव को तीन पहिया ठेले में रखकर ले जाना पड़ा। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामी और संवेदनहीनता की जीती-जागती मिसाल है। स्थानीय लोग बताते हैं कि नईगढ़ी नगर में वाहनों की भीड़ और अव्यवस्थित यातायात के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। लेकिन हादसों के बाद भी हालात नहीं बदलते—न समय पर मदद, न ही बुनियादी सुविधाएं। आज एक गरीब परिवार की बेबसी सबके सामने है… सवाल यह है कि अगर समय पर सुविधा मिलती, तो क्या यह दर्द इतना गहरा होता? क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और कम से कम अंतिम सम्मान के लिए जरूरी व्यवस्था तो सुनिश्चित की जाए।
*मानवता हुई शर्मसार: मां-बहन की लाश ठेले में, सिस्टम देखता रह गया* नईगढ़ी में आज सुबह एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर संवेदनशील इंसान का दिल झकझोर कर रख दिया। सड़क हादसे में जान गंवाने वाली एक महिला के शव को पोस्टमार्टम के बाद जिस तरह ले जाया गया, वह इंसानियत पर एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि मृतक महिला नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 15 की निवासी थी और आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखती थी। हादसे के बाद उसका पोस्टमार्टम किया गया, लेकिन इसके बाद न तो एंबुलेंस मिली, न ही शव वाहन। मजबूर परिजन... बेबस आंखें... और सामने अपनों का निर्जीव शरीर— इन सबके बीच आखिरकार परिजनों को महिला के शव को तीन पहिया ठेले में रखकर ले जाना पड़ा। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामी और संवेदनहीनता की जीती-जागती मिसाल है। स्थानीय लोग बताते हैं कि नईगढ़ी नगर में वाहनों की भीड़ और अव्यवस्थित यातायात के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। लेकिन हादसों के बाद भी हालात नहीं बदलते—न समय पर मदद, न ही बुनियादी सुविधाएं। आज एक गरीब परिवार की बेबसी सबके सामने है… सवाल यह है कि अगर समय पर सुविधा मिलती, तो क्या यह दर्द इतना गहरा होता? क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और कम से कम अंतिम सम्मान के लिए जरूरी व्यवस्था तो सुनिश्चित की जाए।
- Post by उमेश पाठक सेमरिया रीवा1
- प्रयाग राज इटारसी ट्रेन में जनरल कोच पर सीट को लेकर यात्रियों में बड़ा बावल किया औरतों की इस लड़ाई में बात बात पर बात इतनी बढ़ गई कि युवक दूसरे युवक के साथ हाथ पाई करने लगा बात यह तक बढ़ गई कि ट्रेन को lagargawa स्टेशन पर रोककर लड़ाई रोकने के लिए rpf का साथ लेना पड़ेगा1
- Post by Prakash Pathak Satna1
- साथियों यह मन्दिर जो आप लोग देख रहे हैं ग्राम पुरवा में है जोकि रीवा से करीब 29 किलो मीटर दूर है यहां सबसे बड़ी बात है धनुष धारी भगवान की अद्भुत मूर्ति जोकि इतनी बड़ी प्रतिमा पूरे भारत में नहीं है ऐसा कहना यह के पुजारी जी का है1
- मथुरा वृंदावन नाव हादशे में 13 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, हादशे की घटना क्षेत्र से 20km दूर तक खोजबीन की जा रही है,1
- Post by अपना विंध्य प्रदेश1
- Post by Bolti Divare1
- Post by उमेश पाठक सेमरिया रीवा1