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लातेहार सदर प्रखंड की ईचाक पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से हो रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर दर्जनों ग्रामीणों ने पंचायत समिति सदस्य पर सरकारी धन का निजी हित में उपयोग करने का आरोप लगाते हुए उपायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य ग्रामीणों ने दावा किया है कि उनसे धोखे से ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए, जिनका संबंध इस शिकायत से था। उपायुक्त लातेहार को सौंपे गए पहले आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नाली का निर्माण पंचायत समिति सदस्य के घर के पास किया जा रहा है, जिससे मुख्य रूप से एक निजी परिसर को लाभ मिल रहा है, जबकि इसका उद्देश्य आम जनता को सुविधा देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का उपयोग जनहित के बजाय निजी हित साधने के लिए हो रहा है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित योजना की प्रशासनिक स्वीकृति, प्राक्कलन, कार्यस्थल, निर्माण गुणवत्ता और आवश्यकता की जांच की मांग की है, साथ ही अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील भी की है। शिकायतकर्ताओं में हकीम अंसारी, मोहम्मद खुर्शीद अंसारी, मोहम्मद अख्तर, मोहम्मद अब्दुल मोबिन, नौशाद आलम, अब्बास अंसारी, तजमुल अंसारी और ताईबुल अंसारी सहित कई ग्रामीण शामिल हैं, और इस आवेदन की प्रतिलिपि उप विकास आयुक्त और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी भेजी गई है। इस बीच, मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने उपायुक्त को एक और आवेदन सौंपकर बताया कि लातेहार कचहरी में उन्हें गांव के ही खुर्शीद अंसारी पिता इसरायल अंसारी ने जमीन संबंधी दस्तावेज बताकर धोखे से हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान ले लिए थे। इन ग्रामीणों ने कहा कि वे पढ़े-लिखे नहीं होने के कारण दस्तावेज की वास्तविक प्रकृति को समझ नहीं पाए। उन्हें बाद में पता चला कि जिन कागजातों पर उन्होंने हस्ताक्षर किए थे, वे 15वें वित्त आयोग की योजना से संबंधित शिकायत पत्र थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पंचायत समिति सदस्य रवि कौशल के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से कोई संबंध नहीं है और न ही उन्होंने स्वयं कोई शिकायत की है। इन ग्रामीणों ने उपायुक्त से उनके नाम से किए गए हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान को निरस्त करने और इस बात की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है कि किन परिस्थितियों में उनके हस्ताक्षरों का उपयोग शिकायत पत्र में किया गया। नाली निर्माण में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और शिकायत पत्रों पर धोखे से हस्ताक्षर कराने के इन परस्पर विरोधी दावों के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। जिला प्रशासन को दोनों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नाली निर्माण को लेकर लगाए गए आरोप सही हैं या शिकायत पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है। ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

5 hrs ago
user_Nihit Kumar
Nihit Kumar
Latehar, Jharkhand•
5 hrs ago

लातेहार सदर प्रखंड की ईचाक पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से हो रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर दर्जनों ग्रामीणों ने पंचायत समिति सदस्य पर सरकारी धन का निजी हित में उपयोग करने का आरोप लगाते हुए उपायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य ग्रामीणों ने दावा किया है कि उनसे धोखे से ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए, जिनका संबंध इस शिकायत से था। उपायुक्त लातेहार को सौंपे गए पहले आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नाली का निर्माण पंचायत समिति सदस्य के घर के पास किया जा रहा है, जिससे मुख्य रूप से एक निजी परिसर को लाभ मिल रहा है, जबकि इसका उद्देश्य आम जनता को सुविधा देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का उपयोग जनहित के बजाय निजी हित साधने के लिए हो रहा है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित योजना की प्रशासनिक स्वीकृति, प्राक्कलन, कार्यस्थल, निर्माण गुणवत्ता और आवश्यकता की जांच की मांग की है, साथ ही अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील भी की है। शिकायतकर्ताओं में हकीम अंसारी, मोहम्मद खुर्शीद अंसारी, मोहम्मद अख्तर, मोहम्मद अब्दुल मोबिन, नौशाद आलम, अब्बास अंसारी, तजमुल अंसारी और ताईबुल अंसारी सहित कई ग्रामीण शामिल हैं, और इस आवेदन की प्रतिलिपि उप विकास आयुक्त और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी भेजी गई है। इस बीच, मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब कुछ ग्रामीणों

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ने उपायुक्त को एक और आवेदन सौंपकर बताया कि लातेहार कचहरी में उन्हें गांव के ही खुर्शीद अंसारी पिता इसरायल अंसारी ने जमीन संबंधी दस्तावेज बताकर धोखे से हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान ले लिए थे। इन ग्रामीणों ने कहा कि वे पढ़े-लिखे नहीं होने के कारण दस्तावेज की वास्तविक प्रकृति को समझ नहीं पाए। उन्हें बाद में पता चला कि जिन कागजातों पर उन्होंने हस्ताक्षर किए थे, वे 15वें वित्त आयोग की योजना से संबंधित शिकायत पत्र थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पंचायत समिति सदस्य रवि कौशल के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से कोई संबंध नहीं है और न ही उन्होंने स्वयं कोई शिकायत की है। इन ग्रामीणों ने उपायुक्त से उनके नाम से किए गए हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान को निरस्त करने और इस बात की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है कि किन परिस्थितियों में उनके हस्ताक्षरों का उपयोग शिकायत पत्र में किया गया। नाली निर्माण में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और शिकायत पत्रों पर धोखे से हस्ताक्षर कराने के इन परस्पर विरोधी दावों के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। जिला प्रशासन को दोनों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नाली निर्माण को लेकर लगाए गए आरोप सही हैं या शिकायत पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है। ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

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  • लातेहार सदर प्रखंड की ईचाक पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से हो रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर दर्जनों ग्रामीणों ने पंचायत समिति सदस्य पर सरकारी धन का निजी हित में उपयोग करने का आरोप लगाते हुए उपायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य ग्रामीणों ने दावा किया है कि उनसे धोखे से ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए, जिनका संबंध इस शिकायत से था। उपायुक्त लातेहार को सौंपे गए पहले आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नाली का निर्माण पंचायत समिति सदस्य के घर के पास किया जा रहा है, जिससे मुख्य रूप से एक निजी परिसर को लाभ मिल रहा है, जबकि इसका उद्देश्य आम जनता को सुविधा देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का उपयोग जनहित के बजाय निजी हित साधने के लिए हो रहा है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित योजना की प्रशासनिक स्वीकृति, प्राक्कलन, कार्यस्थल, निर्माण गुणवत्ता और आवश्यकता की जांच की मांग की है, साथ ही अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील भी की है। शिकायतकर्ताओं में हकीम अंसारी, मोहम्मद खुर्शीद अंसारी, मोहम्मद अख्तर, मोहम्मद अब्दुल मोबिन, नौशाद आलम, अब्बास अंसारी, तजमुल अंसारी और ताईबुल अंसारी सहित कई ग्रामीण शामिल हैं, और इस आवेदन की प्रतिलिपि उप विकास आयुक्त और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी भेजी गई है। इस बीच, मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने उपायुक्त को एक और आवेदन सौंपकर बताया कि लातेहार कचहरी में उन्हें गांव के ही खुर्शीद अंसारी पिता इसरायल अंसारी ने जमीन संबंधी दस्तावेज बताकर धोखे से हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान ले लिए थे। इन ग्रामीणों ने कहा कि वे पढ़े-लिखे नहीं होने के कारण दस्तावेज की वास्तविक प्रकृति को समझ नहीं पाए। उन्हें बाद में पता चला कि जिन कागजातों पर उन्होंने हस्ताक्षर किए थे, वे 15वें वित्त आयोग की योजना से संबंधित शिकायत पत्र थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पंचायत समिति सदस्य रवि कौशल के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से कोई संबंध नहीं है और न ही उन्होंने स्वयं कोई शिकायत की है। इन ग्रामीणों ने उपायुक्त से उनके नाम से किए गए हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान को निरस्त करने और इस बात की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है कि किन परिस्थितियों में उनके हस्ताक्षरों का उपयोग शिकायत पत्र में किया गया। नाली निर्माण में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और शिकायत पत्रों पर धोखे से हस्ताक्षर कराने के इन परस्पर विरोधी दावों के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। जिला प्रशासन को दोनों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नाली निर्माण को लेकर लगाए गए आरोप सही हैं या शिकायत पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है। ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
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    लातेहार सदर प्रखंड की ईचाक पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से हो रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर दर्जनों ग्रामीणों ने पंचायत समिति सदस्य पर सरकारी धन का निजी हित में उपयोग करने का आरोप लगाते हुए उपायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य ग्रामीणों ने दावा किया है कि उनसे धोखे से ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए, जिनका संबंध इस शिकायत से था।

उपायुक्त लातेहार को सौंपे गए पहले आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नाली का निर्माण पंचायत समिति सदस्य के घर के पास किया जा रहा है, जिससे मुख्य रूप से एक निजी परिसर को लाभ मिल रहा है, जबकि इसका उद्देश्य आम जनता को सुविधा देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का उपयोग जनहित के बजाय निजी हित साधने के लिए हो रहा है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित योजना की प्रशासनिक स्वीकृति, प्राक्कलन, कार्यस्थल, निर्माण गुणवत्ता और आवश्यकता की जांच की मांग की है, साथ ही अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील भी की है। शिकायतकर्ताओं में हकीम अंसारी, मोहम्मद खुर्शीद अंसारी, मोहम्मद अख्तर, मोहम्मद अब्दुल मोबिन, नौशाद आलम, अब्बास अंसारी, तजमुल अंसारी और ताईबुल अंसारी सहित कई ग्रामीण शामिल हैं, और इस आवेदन की प्रतिलिपि उप विकास आयुक्त और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी भेजी गई है।

इस बीच, मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने उपायुक्त को एक और आवेदन सौंपकर बताया कि लातेहार कचहरी में उन्हें गांव के ही खुर्शीद अंसारी पिता इसरायल अंसारी ने जमीन संबंधी दस्तावेज बताकर धोखे से हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान ले लिए थे। इन ग्रामीणों ने कहा कि वे पढ़े-लिखे नहीं होने के कारण दस्तावेज की वास्तविक प्रकृति को समझ नहीं पाए। उन्हें बाद में पता चला कि जिन कागजातों पर उन्होंने हस्ताक्षर किए थे, वे 15वें वित्त आयोग की योजना से संबंधित शिकायत पत्र थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पंचायत समिति सदस्य रवि कौशल के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से कोई संबंध नहीं है और न ही उन्होंने स्वयं कोई शिकायत की है। इन ग्रामीणों ने उपायुक्त से उनके नाम से किए गए हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान को निरस्त करने और इस बात की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है कि किन परिस्थितियों में उनके हस्ताक्षरों का उपयोग शिकायत पत्र में किया गया।

नाली निर्माण में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और शिकायत पत्रों पर धोखे से हस्ताक्षर कराने के इन परस्पर विरोधी दावों के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। जिला प्रशासन को दोनों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नाली निर्माण को लेकर लगाए गए आरोप सही हैं या शिकायत पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है। ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
    user_Nihit Kumar
    Nihit Kumar
    Latehar, Jharkhand•
    5 hrs ago
  • झारखंड के लातेहार जिले के कैमा क्षेत्र में ग्रामीण, विशेषकर आदिवासी, अपने जल, जंगल और जमीन पर किसी भी तरह के कब्जे को रोकने के लिए एकजुट हो गए हैं। उनकी आवाज बुलंद हो गई है और उन्होंने अपने हक की लड़ाई को तेज कर दिया है। ग्रामीण स्पष्ट रूप से पुकार कर रहे हैं: "जंगल-जमीन बचाओ"। यह लड़ाई उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अतिक्रमण के खिलाफ है, जिसमें ग्रामीण और आदिवासी दृढ़ता से खड़े हैं। वे यह सुनिश्चित करने पर आमादा हैं कि उनके पारंपरिक जल, जंगल और जमीन पर कोई भी बाहरी शक्ति कब्जा न कर सके। उनकी एकजुटता और संघर्ष से यह संदेश दिया जा रहा है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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    झारखंड के लातेहार जिले के कैमा क्षेत्र में ग्रामीण, विशेषकर आदिवासी, अपने जल, जंगल और जमीन पर किसी भी तरह के कब्जे को रोकने के लिए एकजुट हो गए हैं। उनकी आवाज बुलंद हो गई है और उन्होंने अपने हक की लड़ाई को तेज कर दिया है। ग्रामीण स्पष्ट रूप से पुकार कर रहे हैं: "जंगल-जमीन बचाओ"।

यह लड़ाई उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अतिक्रमण के खिलाफ है, जिसमें ग्रामीण और आदिवासी दृढ़ता से खड़े हैं। वे यह सुनिश्चित करने पर आमादा हैं कि उनके पारंपरिक जल, जंगल और जमीन पर कोई भी बाहरी शक्ति कब्जा न कर सके। उनकी एकजुटता और संघर्ष से यह संदेश दिया जा रहा है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
    user_Yuva team jharkhand
    Yuva team jharkhand
    Latehar, Jharkhand•
    14 hrs ago
  • लातेहार में युवा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा बाइपास रोड स्थित होटल हिल में "युवा संवाद चौपाल यात्रा" का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश युवा राजद अध्यक्ष रंजन कुमार ने किया, जिसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष दीपक यादव ने की और संचालन दामोदर यादव ने किया। चौपाल यात्रा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को संगठन से जोड़ना, आपसी सौहार्द बढ़ाना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना बताया गया। कार्यक्रम के अतिथियों को अंगवस्त्र और बुके देकर सम्मानित किया गया। प्रदेश युवा राजद अध्यक्ष रंजन कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को नए अनुभव प्राप्त करने और अपनी क्षमता पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं। इसी दौरान उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जब सत्ता निरंकुश हो जाती है तो युवाओं को सड़कों पर उतरना पड़ता है। उन्होंने विशेष रूप से नीट परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार को विफल करार दिया। प्रदेश सचिव रंजीत यादव ने भी चौपाल को सीखने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नए रिश्ते स्थापित करने का एक बेहतर मंच बताया। इस युवा संवाद चौपाल यात्रा में मोहर यादव, संतोष यादव, बल्ली यादव, सुरेश पासवान, भोला सिंह, निजाम अंसारी, कमलेश यादव, दीक्षित कुमार समेत कई युवा राजद कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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    लातेहार में युवा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा बाइपास रोड स्थित होटल हिल में "युवा संवाद चौपाल यात्रा" का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश युवा राजद अध्यक्ष रंजन कुमार ने किया, जिसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष दीपक यादव ने की और संचालन दामोदर यादव ने किया। चौपाल यात्रा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को संगठन से जोड़ना, आपसी सौहार्द बढ़ाना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना बताया गया। कार्यक्रम के अतिथियों को अंगवस्त्र और बुके देकर सम्मानित किया गया।

प्रदेश युवा राजद अध्यक्ष रंजन कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को नए अनुभव प्राप्त करने और अपनी क्षमता पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं। इसी दौरान उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जब सत्ता निरंकुश हो जाती है तो युवाओं को सड़कों पर उतरना पड़ता है। उन्होंने विशेष रूप से नीट परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार को विफल करार दिया। प्रदेश सचिव रंजीत यादव ने भी चौपाल को सीखने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नए रिश्ते स्थापित करने का एक बेहतर मंच बताया।

इस युवा संवाद चौपाल यात्रा में मोहर यादव, संतोष यादव, बल्ली यादव, सुरेश पासवान, भोला सिंह, निजाम अंसारी, कमलेश यादव, दीक्षित कुमार समेत कई युवा राजद कार्यकर्ता मौजूद रहे।
    user_Ram Kumar
    Ram Kumar
    Photographer लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    16 hrs ago
  • महुआडार प्रखंड के अकसी ग्राम पंचायत में रविवार दोपहर 3:00 बजे जनजातीय समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य विषय जाति जनगणना में अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे से कथित छेड़छाड़ का मुद्दा था। उपस्थित लोगों में राज्य सरकार के प्रति गहरा आक्रोश देखा गया, जो एसटी दर्जे से छेड़छाड़ की आशंका को लेकर था। इस बैठक में जनजातीय समाज ने सर्वसम्मति से एक बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने एसटी दर्जे में छेड़छाड़ के विरोध में महुआडार प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल पदाधिकारी का घेराव करने का संकल्प लिया।
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    महुआडार प्रखंड के अकसी ग्राम पंचायत में रविवार दोपहर 3:00 बजे जनजातीय समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य विषय जाति जनगणना में अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे से कथित छेड़छाड़ का मुद्दा था। उपस्थित लोगों में राज्य सरकार के प्रति गहरा आक्रोश देखा गया, जो एसटी दर्जे से छेड़छाड़ की आशंका को लेकर था।

इस बैठक में जनजातीय समाज ने सर्वसम्मति से एक बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने एसटी दर्जे में छेड़छाड़ के विरोध में महुआडार प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल पदाधिकारी का घेराव करने का संकल्प लिया।
    user_Manoj dutt dev
    Manoj dutt dev
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    1 day ago
  • बरवाडीह प्रखंड के पोखरी कला गाँव में SIR से संबंधित एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को सत्यापन का लाभ प्राप्त हुआ।
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    बरवाडीह प्रखंड के पोखरी कला गाँव में SIR से संबंधित एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को सत्यापन का लाभ प्राप्त हुआ।
    user_Shamsher Alam
    Shamsher Alam
    Local News Reporter मनिका, लातेहार, झारखंड•
    55 min ago
  • लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत बालू ग्राम में एक भुईयां परिवार ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आने के बाद प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। परिवार का आरोप है कि कुछ दबंगों ने उनकी पूर्वजों की भूमि पर कब्जा कर लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौजा बालू स्थित खाता संख्या 106 के प्लॉट संख्या 2214, 2215 और 2216 (कुल 51 डिसमिल) पूर्व में बैजू भुईयां के नाम दर्ज थी। बाद में राजस्व अभिलेखों में यह भूमि खाता संख्या 267 में दर्ज की गई, जिसमें प्लॉट संख्या 3458 (21 डिसमिल), 3456 (31 डिसमिल), 3457 (1 डिसमिल) और 3459 (1 डिसमिल) शामिल हैं। वर्तमान में यह भूमि बैजू भुईयां के पौत्र पुसन भुईयां और घसन भुईयां के नाम पर दर्ज बताई जाती है। भुईयां परिवार का आरोप है कि कुछ व्यक्तियों ने भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया है, और रामेश्वर प्रसाद साव तथा बलराम साव के नाम से लगान रसीदें भी कटवाई जा रही हैं। परिवार का कहना है कि भूमि के बड़े हिस्से पर मकान बनाकर स्थायी कब्जा कर लिया गया है, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि अभी भी भुईयां परिवार के नाम पर दर्ज है। पीड़ित परिवार ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) को कई बार आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने, कथित रूप से गलत तरीके से किए गए म्यूटेशन और लगान रसीदों को निरस्त करने, अपनी पुश्तैनी भूमि वापस दिलाने और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। भुईयां परिवार ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उन्हें शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण लेने को विवश होंगे। यह मामला ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष एवं त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। 'जोहार झारखंड' ने कहा है कि इस मामले पर प्रशासनिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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    लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत बालू ग्राम में एक भुईयां परिवार ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आने के बाद प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। परिवार का आरोप है कि कुछ दबंगों ने उनकी पूर्वजों की भूमि पर कब्जा कर लिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौजा बालू स्थित खाता संख्या 106 के प्लॉट संख्या 2214, 2215 और 2216 (कुल 51 डिसमिल) पूर्व में बैजू भुईयां के नाम दर्ज थी। बाद में राजस्व अभिलेखों में यह भूमि खाता संख्या 267 में दर्ज की गई, जिसमें प्लॉट संख्या 3458 (21 डिसमिल), 3456 (31 डिसमिल), 3457 (1 डिसमिल) और 3459 (1 डिसमिल) शामिल हैं। वर्तमान में यह भूमि बैजू भुईयां के पौत्र पुसन भुईयां और घसन भुईयां के नाम पर दर्ज बताई जाती है।

भुईयां परिवार का आरोप है कि कुछ व्यक्तियों ने भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया है, और रामेश्वर प्रसाद साव तथा बलराम साव के नाम से लगान रसीदें भी कटवाई जा रही हैं। परिवार का कहना है कि भूमि के बड़े हिस्से पर मकान बनाकर स्थायी कब्जा कर लिया गया है, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि अभी भी भुईयां परिवार के नाम पर दर्ज है।

पीड़ित परिवार ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) को कई बार आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने, कथित रूप से गलत तरीके से किए गए म्यूटेशन और लगान रसीदों को निरस्त करने, अपनी पुश्तैनी भूमि वापस दिलाने और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। भुईयां परिवार ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उन्हें शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण लेने को विवश होंगे। यह मामला ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष एवं त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। 'जोहार झारखंड' ने कहा है कि इस मामले पर प्रशासनिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
    user_Satish Kumar
    Satish Kumar
    Local News Reporter बालूमाथ, लातेहार, झारखंड•
    3 hrs ago
  • लोहरदगा जिले से जुड़ी सभी खबरों को अपलोड तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
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    लोहरदगा जिले से जुड़ी सभी खबरों को अपलोड तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    4 hrs ago
  • चतरा जिले में सड़कों पर आम लोगों की जान को खतरे में डालने वाले कोयला वाहनों के खतरनाक स्टंट और ओवरटेक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अश्लील गानों के साथ वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर कोयला ढोने वाले हाइवा वाहन बेलगाम रफ्तार से दौड़ते और खतरनाक स्टंट करते हुए ओवरटेक करते दिख रहे हैं, जहाँ एक वाहन अनियंत्रित होकर पलटने से बाल-बाल बचा। इस वायरल वीडियो की पुष्टि हालांकि खबर नहीं करती, लेकिन इसे चतरा जिले के टंडवा-सिमरिया रोड का बताया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक नियमों की घोर अनदेखी और लोगों की जान से खिलवाड़ का मामला सामने आ रहा है। वायरल वीडियो पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में भारी वाहन चालक सड़कों को रेसिंग ट्रैक समझकर दौड़ रहे हैं, और क्या कुछ चालक जानबूझकर सोशल मीडिया पर रील व वीडियो वायरल करने के लिए लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों लोगों की मौत होने के बावजूद भी आखिर सिस्टम क्यों चुप है, और शाम होते ही कई मार्गों पर भारी वाहनों का ऐसा दबदबा हो जाता है कि आम लोग डर के साये में सफर करने को मजबूर हो जाते हैं। जिले में आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जानें जा रही हैं, फिर भी तेज रफ्तार और खतरनाक ओवरटेकिंग पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। जिले के जिम्मेदार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से लोग सवाल कर रहे हैं कि और कितनी जानें जाने के बाद सड़कों पर गति नियंत्रण, निगरानी और सख्त कार्रवाई की व्यवस्था होगी। लोगों की मांग है कि भारी वाहनों की गति पर निगरानी के लिए स्पीड कैमरे लगाए जाएं, नियम तोड़ने वालों पर कठोर कार्रवाई हो, और सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि सड़कें हर नागरिक की सुरक्षा और आवाजाही के लिए होती हैं।
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    चतरा जिले में सड़कों पर आम लोगों की जान को खतरे में डालने वाले कोयला वाहनों के खतरनाक स्टंट और ओवरटेक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अश्लील गानों के साथ वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर कोयला ढोने वाले हाइवा वाहन बेलगाम रफ्तार से दौड़ते और खतरनाक स्टंट करते हुए ओवरटेक करते दिख रहे हैं, जहाँ एक वाहन अनियंत्रित होकर पलटने से बाल-बाल बचा। इस वायरल वीडियो की पुष्टि हालांकि खबर नहीं करती, लेकिन इसे चतरा जिले के टंडवा-सिमरिया रोड का बताया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक नियमों की घोर अनदेखी और लोगों की जान से खिलवाड़ का मामला सामने आ रहा है।

वायरल वीडियो पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में भारी वाहन चालक सड़कों को रेसिंग ट्रैक समझकर दौड़ रहे हैं, और क्या कुछ चालक जानबूझकर सोशल मीडिया पर रील व वीडियो वायरल करने के लिए लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों लोगों की मौत होने के बावजूद भी आखिर सिस्टम क्यों चुप है, और शाम होते ही कई मार्गों पर भारी वाहनों का ऐसा दबदबा हो जाता है कि आम लोग डर के साये में सफर करने को मजबूर हो जाते हैं। जिले में आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जानें जा रही हैं, फिर भी तेज रफ्तार और खतरनाक ओवरटेकिंग पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।

जिले के जिम्मेदार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से लोग सवाल कर रहे हैं कि और कितनी जानें जाने के बाद सड़कों पर गति नियंत्रण, निगरानी और सख्त कार्रवाई की व्यवस्था होगी। लोगों की मांग है कि भारी वाहनों की गति पर निगरानी के लिए स्पीड कैमरे लगाए जाएं, नियम तोड़ने वालों पर कठोर कार्रवाई हो, और सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि सड़कें हर नागरिक की सुरक्षा और आवाजाही के लिए होती हैं।
    user_Satish Kumar
    Satish Kumar
    Local News Reporter बालूमाथ, लातेहार, झारखंड•
    12 hrs ago
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