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अमरोहा के हसनपुर कोतवाली क्षेत्र में दबंगई का एक मामला सामने आया है, जहाँ कुछ युवकों ने एक युवक को रास्ते में रोककर उसके साथ गाली-गलौज की और फिर बेल्टों से बेरहमी से मारपीट की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे इलाके में चर्चा का माहौल है। पीड़ित युवक ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस को लिखित शिकायत दी है। पीड़ित के अनुसार, वह किसी काम से जा रहा था तभी रास्ते में पहले से मौजूद दबंग युवकों ने उसे रोका और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए विवाद शुरू कर दिया। विवाद जल्द ही मारपीट में बदल गया, जहाँ आरोपियों ने युवक पर बेल्टों से ताबड़तोड़ वार किए। पीड़ित का आरोप है कि मारपीट करने वाले युवकों के पास तमंचा भी था और उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी भी दी। घटना से डरा-सहमा पीड़ित तुरंत कोतवाली पहुँचा और न्याय की गुहार लगाई। पुलिस ने बताया है कि उन्हें तहरीर मिल गई है और मामले की जाँच की जा रही है। वायरल वीडियो में मारपीट करते युवक दिख रहे हैं, लेकिन पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता और घटना की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जाँच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। जाँच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

4 hrs ago
user_Mohd aslam
Mohd aslam
Social worker हसनपुर, अमरोहा, उत्तर प्रदेश•
4 hrs ago

अमरोहा के हसनपुर कोतवाली क्षेत्र में दबंगई का एक मामला सामने आया है, जहाँ कुछ युवकों ने एक युवक को रास्ते में रोककर उसके साथ गाली-गलौज की और फिर बेल्टों से बेरहमी से मारपीट की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे इलाके में चर्चा का माहौल है। पीड़ित युवक ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस को लिखित शिकायत दी है। पीड़ित के अनुसार, वह किसी काम से जा रहा था तभी रास्ते में पहले से मौजूद दबंग युवकों ने उसे रोका और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए विवाद शुरू कर दिया। विवाद जल्द ही मारपीट में बदल गया, जहाँ

आरोपियों ने युवक पर बेल्टों से ताबड़तोड़ वार किए। पीड़ित का आरोप है कि मारपीट करने वाले युवकों के पास तमंचा भी था और उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी भी दी। घटना से डरा-सहमा पीड़ित तुरंत कोतवाली पहुँचा और न्याय की गुहार लगाई। पुलिस ने बताया है कि उन्हें तहरीर मिल गई है और मामले की जाँच की जा रही है। वायरल वीडियो में मारपीट करते युवक दिख रहे हैं, लेकिन पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता और घटना की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जाँच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। जाँच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • साधु-संतों ने संसद में गाय हत्या पर प्रतिबंध लगाने और कानून बनाने के लिए गोलियां खाई थीं। आरोप है कि जवाहरलाल नेहरू के दोपहर के भोजन में गाय का मांस शामिल होता था और उन्हें इसका बहुत शौक था। कहा जाता है कि नेहरू का यह 'राजसिक भोजन' था और उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि गाय का मांस बिकना बंद हो गया, तो उनका दोपहर का भोजन भी बंद हो जाएगा। दावा है कि गाय का मांस मुस्लिम लीग द्वारा ही खाया जाता है, क्योंकि वे घास खाने वाले जानवरों को अपना शिकार मानते हैं और उनके लिए यह 'शुद्ध' है। आरोप है कि ये बकरी और गाय जैसे शाकाहारी जानवरों की बलि देते हैं और उनका मांस खाते हैं, इन शाकाहारी जानवरों का रक्त 'बाल' नामक शैतान पर चढ़ाते हैं, जबकि यह 'अल्लाह के रसूल' में नहीं लिखा है। यह भी कहा गया है कि ये अल्लाह के नाम पर लोगों की गर्दनें उड़ाते हैं, जबकि सऊदी अरब में जन्में इस्लाम के प्रमाणों को 'राजसिक प्रवृत्ति' में लाने के लिए आधुनिक यंत्रों जैसे फोन और कंप्यूटर का इस्तेमाल करना उनकी कौम में 'हराम' है। शरीयत के लिए इन्होंने जिहाद शुरू किया है, जिसका सरल तरीका है 'जहां जाओ वहां कब्जा करो'। जहां उनकी संख्या कम हो, वहां प्रेम से काम चलाने और जहां संख्या अधिक हो जाए, वहां 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' करके जमीन कब्जाने, स्त्रियों को नियंत्रित करने तथा देश के लोगों को अन्य वर्गों और जातियों में बांटने का आरोप है। आरोप लगाया गया है कि छतरपुर से कांग्रेस सरकार यही सब सिखाने के लिए मदरसों में पैसा दे रही थी। ये लोग हिंदुओं को भाई बनाकर उन्हें ही 'चारा' बना लेते हैं। इन्हें 'वास्तव में जोंबी' और 'मानव नहीं' बताया गया है। उनकी तुलना अमेरिका की 'एपस्टीन फाइल' के उन सदस्यों से की गई है, जो बच्चों के रक्त के शौकीन होते हैं और 'बाल शैतान' की पूजा करते हैं। दावा है कि नेहरू 'पंडित' नहीं थे, बल्कि उन्होंने स्वयं को 'पारसी पंडित' बताया था। राजनीति की आड़ में उन्होंने 'मोहम्मद दास करीम चंद्र गाजी' को 'महात्मा गांडू' घोषित कर दिया और स्वयं को 'पंडित नेहरू' घोषित कर दिया।
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    साधु-संतों ने संसद में गाय हत्या पर प्रतिबंध लगाने और कानून बनाने के लिए गोलियां खाई थीं। आरोप है कि जवाहरलाल नेहरू के दोपहर के भोजन में गाय का मांस शामिल होता था और उन्हें इसका बहुत शौक था। कहा जाता है कि नेहरू का यह 'राजसिक भोजन' था और उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि गाय का मांस बिकना बंद हो गया, तो उनका दोपहर का भोजन भी बंद हो जाएगा।

दावा है कि गाय का मांस मुस्लिम लीग द्वारा ही खाया जाता है, क्योंकि वे घास खाने वाले जानवरों को अपना शिकार मानते हैं और उनके लिए यह 'शुद्ध' है। आरोप है कि ये बकरी और गाय जैसे शाकाहारी जानवरों की बलि देते हैं और उनका मांस खाते हैं, इन शाकाहारी जानवरों का रक्त 'बाल' नामक शैतान पर चढ़ाते हैं, जबकि यह 'अल्लाह के रसूल' में नहीं लिखा है। यह भी कहा गया है कि ये अल्लाह के नाम पर लोगों की गर्दनें उड़ाते हैं, जबकि सऊदी अरब में जन्में इस्लाम के प्रमाणों को 'राजसिक प्रवृत्ति' में लाने के लिए आधुनिक यंत्रों जैसे फोन और कंप्यूटर का इस्तेमाल करना उनकी कौम में 'हराम' है। शरीयत के लिए इन्होंने जिहाद शुरू किया है, जिसका सरल तरीका है 'जहां जाओ वहां कब्जा करो'। जहां उनकी संख्या कम हो, वहां प्रेम से काम चलाने और जहां संख्या अधिक हो जाए, वहां 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' करके जमीन कब्जाने, स्त्रियों को नियंत्रित करने तथा देश के लोगों को अन्य वर्गों और जातियों में बांटने का आरोप है।

आरोप लगाया गया है कि छतरपुर से कांग्रेस सरकार यही सब सिखाने के लिए मदरसों में पैसा दे रही थी। ये लोग हिंदुओं को भाई बनाकर उन्हें ही 'चारा' बना लेते हैं। इन्हें 'वास्तव में जोंबी' और 'मानव नहीं' बताया गया है। उनकी तुलना अमेरिका की 'एपस्टीन फाइल' के उन सदस्यों से की गई है, जो बच्चों के रक्त के शौकीन होते हैं और 'बाल शैतान' की पूजा करते हैं। दावा है कि नेहरू 'पंडित' नहीं थे, बल्कि उन्होंने स्वयं को 'पारसी पंडित' बताया था। राजनीति की आड़ में उन्होंने 'मोहम्मद दास करीम चंद्र गाजी' को 'महात्मा गांडू' घोषित कर दिया और स्वयं को 'पंडित नेहरू' घोषित कर दिया।
    user_Kaviraj Himanshu Saini Samaj Sevak
    Kaviraj Himanshu Saini Samaj Sevak
    Youth Social Services Organisation Amroha, Uttar Pradesh•
    10 hrs ago
  • अमरोहा के कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए अवैध पैथोलॉजी लैब, क्लीनिक और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने जननी सुरक्षा योजना के तहत आशा कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के लंबित भुगतानों को शीघ्र कराने का भी निर्देश दिया। बैठक में डॉ. गौड़ ने सभी चिकित्सालयों में डॉक्टरों को नेम बैज सहित एप्रन पहनकर आने और मरीजों व उनके तीमारदारों के साथ बेहतर व्यवहार करने पर जोर दिया। साथ ही, रिक्त सब-सेंटरों पर सीएचओ की तैनाती के लिए डिमांड पत्र भेजने और एएनएम की तैनाती संबंधी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने नियमित टीकाकरण का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने और संस्थागत प्रसवों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया। इस समीक्षा बैठक में आरबीएसके, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, ई-संजीवनी ओपीडी, ई-कवच, आभा आईडी, टीबी कार्यक्रम, आशा भुगतान एवं टीकाकरण कार्यक्रमों की प्रगति का भी मूल्यांकन किया गया। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अश्वनी कुमार मिश्र, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमाकांत सागर, सीएमएस डॉ. ए.के. भंडारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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    अमरोहा के कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए अवैध पैथोलॉजी लैब, क्लीनिक और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने जननी सुरक्षा योजना के तहत आशा कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के लंबित भुगतानों को शीघ्र कराने का भी निर्देश दिया।

बैठक में डॉ. गौड़ ने सभी चिकित्सालयों में डॉक्टरों को नेम बैज सहित एप्रन पहनकर आने और मरीजों व उनके तीमारदारों के साथ बेहतर व्यवहार करने पर जोर दिया। साथ ही, रिक्त सब-सेंटरों पर सीएचओ की तैनाती के लिए डिमांड पत्र भेजने और एएनएम की तैनाती संबंधी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने नियमित टीकाकरण का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने और संस्थागत प्रसवों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया। इस समीक्षा बैठक में आरबीएसके, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, ई-संजीवनी ओपीडी, ई-कवच, आभा आईडी, टीबी कार्यक्रम, आशा भुगतान एवं टीकाकरण कार्यक्रमों की प्रगति का भी मूल्यांकन किया गया। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अश्वनी कुमार मिश्र, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमाकांत सागर, सीएमएस डॉ. ए.के. भंडारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
    user_Kapil kumar Chawla Amroha
    Kapil kumar Chawla Amroha
    Local News Reporter Amroha, Uttar Pradesh•
    20 hrs ago
  • बुलंदशहर के दौलतपुर कला में नुमाइश का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर देवेंद्र सिंह लोधी जी ने फीता काटकर इसका शुभारंभ किया।
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    बुलंदशहर के दौलतपुर कला में नुमाइश का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर देवेंद्र सिंह लोधी जी ने फीता काटकर इसका शुभारंभ किया।
    user_Barahbastitv
    Barahbastitv
    Local News Reporter सियाना, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • संभल में डी.पी.आर.ओ. (DPRO) कार्यालय में रिश्वतखोरी के चौंकाने वाले वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। इन वीडियो में डी.पी.आर.ओ. और एकाउंटेंट पर ग्राम प्रधानों और कर्मचारियों को डरा-धमकाकर रिश्वत वसूलने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिलाधिकारी (DM) ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। बीते दिनों वायरल हुए इन वीडियो में डी.पी.आर.ओ. पर कार और कार्यालय के भीतर अलग-अलग जगहों पर रिश्वत लेने का आरोप है। इसके साथ ही, डी.पी.आर.ओ. पर रिश्वत की इसी रकम से करोड़ों रुपये के फ्लैट और महंगी गाड़ियां खरीदने जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) गोरखनाथ भट्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (ADM) की अध्यक्षता में यह जांच कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की गहनता से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी। गौरतलब है कि संभल का डी.पी.आर.ओ. कार्यालय पिछले कई सालों से 'लूट का अड्डा' बना हुआ है। इससे पहले, निवर्तमान डी.पी.आर.ओ. उपेंद्र कुमार पांडेय को भी शासन द्वारा निलंबित किया गया था। मौजूदा डी.पी.आर.ओ. चेतेंद्र पाल सिंह के कार्यकाल में सामने आए ये वायरल वीडियो उनकी 'विकास की आड़' में हो रही गतिविधियों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
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    संभल में डी.पी.आर.ओ. (DPRO) कार्यालय में रिश्वतखोरी के चौंकाने वाले वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। इन वीडियो में डी.पी.आर.ओ. और एकाउंटेंट पर ग्राम प्रधानों और कर्मचारियों को डरा-धमकाकर रिश्वत वसूलने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिलाधिकारी (DM) ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

बीते दिनों वायरल हुए इन वीडियो में डी.पी.आर.ओ. पर कार और कार्यालय के भीतर अलग-अलग जगहों पर रिश्वत लेने का आरोप है। इसके साथ ही, डी.पी.आर.ओ. पर रिश्वत की इसी रकम से करोड़ों रुपये के फ्लैट और महंगी गाड़ियां खरीदने जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं।

मुख्य विकास अधिकारी (CDO) गोरखनाथ भट्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (ADM) की अध्यक्षता में यह जांच कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की गहनता से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी।

गौरतलब है कि संभल का डी.पी.आर.ओ. कार्यालय पिछले कई सालों से 'लूट का अड्डा' बना हुआ है। इससे पहले, निवर्तमान डी.पी.आर.ओ. उपेंद्र कुमार पांडेय को भी शासन द्वारा निलंबित किया गया था। मौजूदा डी.पी.आर.ओ. चेतेंद्र पाल सिंह के कार्यकाल में सामने आए ये वायरल वीडियो उनकी 'विकास की आड़' में हो रही गतिविधियों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
    user_Mubarak Ali
    Mubarak Ali
    संभल, संभल, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • आगरा में एक पति-पत्नी के बीच आपसी झगड़ा हुआ है। इस घटना को एक निजी और आपसी मामला बताया जा रहा है।
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    आगरा में एक पति-पत्नी के बीच आपसी झगड़ा हुआ है। इस घटना को एक निजी और आपसी मामला बताया जा रहा है।
    user_जनाब
    जनाब
    Local News Reporter नौगावां सदात, अमरोहा, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • संभल जिले में एक किसान ने अपने खेतों का वीडियो बनाते हुए मक्के की फसल को लेकर खुशी और उत्साह व्यक्त किया। किसान ने जोर देकर कहा कि यह मक्का ही उनके लिए 'खजाने का राज' बन गया है और किसानों की आय का खजाना है। उन्होंने बताया कि उनके खेतों में चारों तरफ सिर्फ मक्का ही मक्का दिखाई दे रहा है।
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    संभल जिले में एक किसान ने अपने खेतों का वीडियो बनाते हुए मक्के की फसल को लेकर खुशी और उत्साह व्यक्त किया। किसान ने जोर देकर कहा कि यह मक्का ही उनके लिए 'खजाने का राज' बन गया है और किसानों की आय का खजाना है। उन्होंने बताया कि उनके खेतों में चारों तरफ सिर्फ मक्का ही मक्का दिखाई दे रहा है।
    user_Ravindra
    Ravindra
    Speech Therapist संभल, संभल, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • अमरोहा के गजरौला-धनौरा मार्ग स्थित पक्के पुल के पास बृहस्पतिवार को हजरत भूरे शाह की मजार पर आयोजित उर्स के अंतिम दिन हजारों की संख्या में अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इन श्रद्धालुओं ने मजार पर चादरपोशी कर देश में अमन, चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक और श्रद्धा का माहौल बन गया। यह उर्स सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा एक ऐसा सिलसिला है जिससे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। यही कारण है कि हर वर्ष दूर-दराज के क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। इस उर्स की खास बात यह है कि इसमें सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जो गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है। उर्स के अंतिम दिन अकीदतमंदों ने मजार पर चादर और फूल पेश कर अपनी-अपनी मुरादें मांगीं, क्योंकि उनका मानना है कि सच्चे दिल से की गई दुआएँ यहाँ ज़रूर कबूल होती हैं। दिनभर मजार परिसर में जायरीनों की भारी भीड़ रही, जिन्होंने पूरी अकीदत के साथ धार्मिक रस्मों में हिस्सा लिया। उर्स के पूरे आयोजन की व्यवस्था गजरौला बस्ती निवासी भूरे भाई के नेतृत्व में संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि यह धार्मिक परंपरा उनके बुजुर्गों के समय से चली आ रही है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे आयोजन पर कड़ी नजर रखी, जिससे उर्स शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न हो सका। उर्स के समापन पर मजार परिसर में देश की तरक्की, सामाजिक सौहार्द और मानवता की भलाई के लिए विशेष दुआएँ की गईं। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश भी दिया।
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    अमरोहा के गजरौला-धनौरा मार्ग स्थित पक्के पुल के पास बृहस्पतिवार को हजरत भूरे शाह की मजार पर आयोजित उर्स के अंतिम दिन हजारों की संख्या में अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इन श्रद्धालुओं ने मजार पर चादरपोशी कर देश में अमन, चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक और श्रद्धा का माहौल बन गया।

यह उर्स सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा एक ऐसा सिलसिला है जिससे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। यही कारण है कि हर वर्ष दूर-दराज के क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। इस उर्स की खास बात यह है कि इसमें सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जो गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है। उर्स के अंतिम दिन अकीदतमंदों ने मजार पर चादर और फूल पेश कर अपनी-अपनी मुरादें मांगीं, क्योंकि उनका मानना है कि सच्चे दिल से की गई दुआएँ यहाँ ज़रूर कबूल होती हैं। दिनभर मजार परिसर में जायरीनों की भारी भीड़ रही, जिन्होंने पूरी अकीदत के साथ धार्मिक रस्मों में हिस्सा लिया।

उर्स के पूरे आयोजन की व्यवस्था गजरौला बस्ती निवासी भूरे भाई के नेतृत्व में संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि यह धार्मिक परंपरा उनके बुजुर्गों के समय से चली आ रही है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे आयोजन पर कड़ी नजर रखी, जिससे उर्स शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न हो सका।

उर्स के समापन पर मजार परिसर में देश की तरक्की, सामाजिक सौहार्द और मानवता की भलाई के लिए विशेष दुआएँ की गईं। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश भी दिया।
    user_Kapil kumar
    Kapil kumar
    Local News Reporter अमरोहा (खास), अमरोहा, उत्तर प्रदेश•
    20 min ago
  • संभल में हसीना बेगम अस्पताल से जुड़ा एक लंबा विवाद अब समाप्त हो गया है। अस्पताल के निदेशक सेठ कासिम और डॉक्टर तौसीफ अहमद के बीच चल रहा यह मामला आखिरकार सुलझ गया है। यह विवाद कई दिनों से चल रहा था और इसकी गंभीरता इस कदर थी कि यह मामला थाने से लेकर कचहरी तक जा पहुँचा था। दोनों पक्षों के बीच अस्पताल के हिसाब-किताब को लेकर गंभीर मतभेद थे, जिसके परिणामस्वरूप डॉक्टर तौसीफ के खिलाफ एक मुकदमा भी दर्ज किया गया था। हालांकि, अब इस पूरे विवाद का सुखद अंत हो गया है। डॉक्टर तौसीफ अहमद अकेले सेठ कासिम के निवास पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की। दोनों ने बैठकर बातचीत की और सभी गलतफहमियों को दूर कर लिया गया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी लिखित रूप में किया गया, जिसमें भविष्य में ऐसे किसी विवाद से बचने पर सहमति बनी। सबसे खास बात यह रही कि दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर भाईचारे का संदेश दिया। सेठ कासिम ने डॉक्टर तौसीफ को अपने छोटे भाई की तरह माफ कर दिया, जिसके बाद उनके रिश्ते फिर से सामान्य हो गए। डॉक्टर तौसीफ अहमद ने मीडिया के सामने आकर इस पूरे विवाद के खत्म होने और सेठ कासिम के निवास पर अपनी गलती का एहसास करने की बात भी बताई।
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    संभल में हसीना बेगम अस्पताल से जुड़ा एक लंबा विवाद अब समाप्त हो गया है। अस्पताल के निदेशक सेठ कासिम और डॉक्टर तौसीफ अहमद के बीच चल रहा यह मामला आखिरकार सुलझ गया है।

यह विवाद कई दिनों से चल रहा था और इसकी गंभीरता इस कदर थी कि यह मामला थाने से लेकर कचहरी तक जा पहुँचा था। दोनों पक्षों के बीच अस्पताल के हिसाब-किताब को लेकर गंभीर मतभेद थे, जिसके परिणामस्वरूप डॉक्टर तौसीफ के खिलाफ एक मुकदमा भी दर्ज किया गया था।

हालांकि, अब इस पूरे विवाद का सुखद अंत हो गया है। डॉक्टर तौसीफ अहमद अकेले सेठ कासिम के निवास पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की। दोनों ने बैठकर बातचीत की और सभी गलतफहमियों को दूर कर लिया गया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी लिखित रूप में किया गया, जिसमें भविष्य में ऐसे किसी विवाद से बचने पर सहमति बनी।

सबसे खास बात यह रही कि दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर भाईचारे का संदेश दिया। सेठ कासिम ने डॉक्टर तौसीफ को अपने छोटे भाई की तरह माफ कर दिया, जिसके बाद उनके रिश्ते फिर से सामान्य हो गए। डॉक्टर तौसीफ अहमद ने मीडिया के सामने आकर इस पूरे विवाद के खत्म होने और सेठ कासिम के निवास पर अपनी गलती का एहसास करने की बात भी बताई।
    user_Mubarak Ali
    Mubarak Ali
    संभल, संभल, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • सीतापुर जिले के सदरपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब शारदा सहायक नहर में दो नवजात शिशुओं के शव मिलने की सूचना मिली। जानकारी के अनुसार, सुबह नहर किनारे पहुंचे ग्रामीणों की नजर उत्तरी दिशा वाले हिस्से में पड़े दोनों शवों पर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही डायल 112 और सदरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों शव नहर तक कैसे पहुंचे। इस घटना के बाद इलाके में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। प्रभारी निरीक्षक मुकेश वर्मा ने बताया कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों का इंतजार कर रही है।
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    सीतापुर जिले के सदरपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब शारदा सहायक नहर में दो नवजात शिशुओं के शव मिलने की सूचना मिली। जानकारी के अनुसार, सुबह नहर किनारे पहुंचे ग्रामीणों की नजर उत्तरी दिशा वाले हिस्से में पड़े दोनों शवों पर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचित किया।

सूचना मिलते ही डायल 112 और सदरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों शव नहर तक कैसे पहुंचे।

इस घटना के बाद इलाके में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। प्रभारी निरीक्षक मुकेश वर्मा ने बताया कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों का इंतजार कर रही है।
    user_Sharafat saifi
    Sharafat saifi
    हापुड़, हापुड़, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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