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ऑस्ट्रेलिया ने तीन पुरानी भारतीय कलाकृतियां भारत को लौटाने का निर्णय लिया है। इनमें देवी भद्रकाली का एक कांसे का त्रिशूल, नंदी की एक ग्रेनाइट मूर्ति और कार्तिकेय की एक बेसाल्ट मूर्ति शामिल हैं। ये सभी कलाकृतियां 11वीं-12वीं सदी की हैं और मूल रूप से तमिलनाडु के ऐतिहासिक मंदिरों से लाई गई थीं। इस महत्वपूर्ण वापसी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान की गई, जिसने दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।
MUKESH NATH
ऑस्ट्रेलिया ने तीन पुरानी भारतीय कलाकृतियां भारत को लौटाने का निर्णय लिया है। इनमें देवी भद्रकाली का एक कांसे का त्रिशूल, नंदी की एक ग्रेनाइट मूर्ति और कार्तिकेय की एक बेसाल्ट मूर्ति शामिल हैं। ये सभी कलाकृतियां 11वीं-12वीं सदी की हैं और मूल रूप से तमिलनाडु के ऐतिहासिक मंदिरों से लाई गई थीं। इस महत्वपूर्ण वापसी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान की गई, जिसने दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।
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- ऑस्ट्रेलिया ने तीन पुरानी भारतीय कलाकृतियां भारत को लौटाने का निर्णय लिया है। इनमें देवी भद्रकाली का एक कांसे का त्रिशूल, नंदी की एक ग्रेनाइट मूर्ति और कार्तिकेय की एक बेसाल्ट मूर्ति शामिल हैं। ये सभी कलाकृतियां 11वीं-12वीं सदी की हैं और मूल रूप से तमिलनाडु के ऐतिहासिक मंदिरों से लाई गई थीं। इस महत्वपूर्ण वापसी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान की गई, जिसने दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।1
- झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा की गुमला जिला कमेटी ने पार्टी को मजबूत करने के संबंध में अपनी बात रखी है। इस दौरान यह सवाल उठाया गया है कि क्या आगामी चुनावों में जयराम महतो मुख्यमंत्री बनेंगे, जिसके साथ आदिवासी समाज की ओर से एक बड़ा दावा भी किया गया है।1
- JLKM पार्टी ने अपने संगठनात्मक कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके तहत एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पहल के अंतर्गत, पार्टी ने राज्य के पाँच जिलों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है।1
- भारतीय जनता पार्टी के लातेहार विधायक प्रकाश राम ने झारखंड सरकार पर विकास कार्यों की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विकास का मुद्दा केवल लातेहार जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड से जुड़ा है। विधायक प्रकाश राम के अनुसार, वर्तमान राज्य सरकार के पास विकास के लिए कोई स्पष्ट विजन नहीं है और सरकार से जुड़े लोग केवल "लूट-खसोट" में व्यस्त हैं। विधायक प्रकाश राम ने जेएमएम और कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर झारखंड को पर्याप्त विकास राशि उपलब्ध न कराने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविकता इसके विपरीत है, क्योंकि केंद्र सरकार सभी योजनाओं की राशि राज्य को समय पर उपलब्ध करा रही है। हालांकि, विधायक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र से मिली विकास योजनाओं की राशि पर "कुंडली मारकर बैठी हुई है", जिसके परिणामस्वरूप सड़क, पुल, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित अन्य बुनियादी विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि यदि केंद्र से प्राप्त राशि का पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए, तो झारखंड के साथ-साथ लातेहार जिले का भी तेजी से विकास संभव है। प्रकाश राम ने राज्य सरकार से विकास कार्यों में तेजी लाने और केंद्र सरकार से प्राप्त धनराशि का जनहित में प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता अब विकास चाहती है और सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर राज्य के हित में काम करना चाहिए।1
- नितिन गडकरी एथेनॉल-पेट्रोल के विषय पर अपनी सफाई दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने साल 2070 का जिक्र भी किया।1
- लातेहार प्रखंड के नेवारी पंचायत अंतर्गत कैमा गांव आज भी विकास की राह देख रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2022 के बाद से सड़क सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। गांव की जर्जर सड़क के कारण स्थानीय लोगों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि कैमा गांव की सड़क का निर्माण शीघ्र कराया जाए, ताकि उन्हें इस समस्या से राहत मिल सके।1
- चतरा को कथित 'राजनीतिक गुलामी' से आज़ाद कराने के उद्देश्य से, भूतपूर्व और भावी प्रत्याशी डॉ. अभिषेक सिंह ने 'जन सेवा जन जागरण राजनीतिक सजकता अभियान' का अनौपचारिक शंखनाद किया है। डॉ. सिंह ने चतरा के मतदाताओं के सामने एक सीधा और कड़ा सवाल रखा है कि इस बार उन्हें जनता का सांसद चाहिए या किसी पार्टी का 'बंधुआ प्रतिनिधि'। उनके अनुसार, पिछले 35 सालों से चतरा की जनता जिस 'अच्छे दिनों' और सुंदर जिंदगी का इंतजार कर रही है, उसके रास्ते में 'पार्टी के प्रतिनिधि रूपी सांसद' ही रोड़ा बनकर खड़े हैं। मिशन 2029 की यह शुरुआत मनिका के बंधुवा पंचायत से हुई है, जिसका बड़ा लक्ष्य चतरा लोकसभा के 35 लाख लोगों की जिंदगी को सही दिशा देना है। इस अभियान के लिए नया नारा दिया गया है: "पार्टी का चमचा नहीं, जनता का सच्चा प्रतिनिधि चुनो।" हालांकि चुनाव अभी दूर है, डॉ. अभिषेक सिंह ने साफ कर दिया है कि चतरा के लोग अब 35 साल पुराना इंतजार और नहीं करेंगे। अब देखना यह है कि इस 'जन जागरण' से बाकी के पारंपरिक राजनीतिक सूरमाओं की नींद कितनी जल्दी टूटती है, क्योंकि चतरा लोकसभा में 2029 की चुनावी 'खिचड़ी' अभी से पकनी शुरू हो गई है और सवाल यह है कि क्या इस बार 'पार्टी वाले सांसद जी' की विदाई तय है।1
- प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में, एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत रक्षा सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एक समुद्री सुरक्षा रोडमैप तैयार किया गया, और भारतीय तटरक्षक बल तथा ऑस्ट्रेलिया के समुद्री सीमा कमांड के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर हुए। यह भी तय किया गया कि 2028-29 के लिए ऑस्ट्रेलियन डिफेंस कॉलेज में एक भारतीय सैन्य प्रशिक्षक को आमंत्रित किया जाएगा। ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर, ऊर्जा सुरक्षा पर एक संयुक्त बयान जारी किया गया। असैन्य परमाणु समझौते के लिए एक प्रशासनिक व्यवस्था भी स्थापित की गई, जबकि एक रूफटॉप सोलर ट्रेनिंग एकेडमी की शुरुआत की गई। साइबर सुरक्षा, आवश्यक प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए एक नई साझेदारी भी शुरू की गई। शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में, फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी (बेंगलुरु कैंपस) और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के लिए लेटर ऑफ इंटेंट/अप्रूवल जारी किए गए। एसआरएफटीआई और ग्रिफिथ के बीच फिल्म स्कूल समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, और भारतीय कलाकृतियों को वापस लाने में भी सहायता मिली। खनन और विज्ञान के क्षेत्र में, खनन में उत्कृष्टता केंद्र बनाने पर सहमति बनी, और भूवैज्ञानिक एजेंसियों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। ऑस्ट्रेलिया को भारत की पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी तक पहुंच भी प्रदान की गई। इस दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री से अंडर-16 बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन के विषय पर बात करते हुए कहा कि भारत इस मामले में ऑस्ट्रेलिया से सीख रहा है। यह टिप्पणी एक बड़ा संकेत दे रही है कि क्या पीएम मोदी भविष्य के लिए कोई बड़ा इशारा कर रहे हैं।1