महाकौशल जन जागृति शायरी संगठन ने अपने छठे स्थापना दिवस को बालाघाट, सिवनी, और महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के सैकड़ों कलाकारों के महाकुंभ के रूप में भव्यता और उत्साह से मनाया, जहाँ कलाकारों के सम्मान और पेंशन मानदेय की मांग ज़ोर-शोर से उठाई गई। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कलाकारों का सम्मान नहीं किया गया तो संस्कृति का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। संगठन के अध्यक्ष श्री गौरी शंकर मोहरे जी ने बताया कि संगठन को स्थापित हुए 6 साल पूरे होने वाले हैं, जिसकी नींव कोरोना काल जैसी महामारी के दौरान पड़ी थी जब सब अपने घरों में थे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संगठन का पंजीयन कराया गया और इसे छह महीने पूर्ण हुए हैं। श्री मोहरे जी ने कलाकारों के लिए पेंशन मानदेय की मांग करते हुए कहा कि कलाकार किसी भी शुभ कार्य या कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्वागत गीत और सरस्वती वंदना जैसे प्रदर्शनों से शुरुआत करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद और विधायक उनकी बात सदन तक नहीं पहुंचा रहे हैं और कलेक्टर साहब को ज्ञापन सौंपने के बावजूद उनकी आवाज़ को दबा दिया गया है, जिससे उनकी मांगों का कोई निष्कर्ष नहीं निकला। श्री मोहरे जी ने चेतावनी दी कि यदि आगामी समय तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे मीडिया का सहारा लेकर धरना, रैली और रोड-शो के ज़रिए उग्र आंदोलन करेंगे। इसी कड़ी में, संगठन के सचिव श्री दादू लाल जी कटरे ने बताया कि महाकौशल योजना जागृति संघ बालाघाट को 14 जून 2026 को छह वर्ष पूरे हो गए हैं। उन्होंने कोरोना काल में कलाकारों को खाने के भी लाले पड़ने का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र सरकार के कलाकारों को पेंशन मानदेय देने के कार्य की सराहना की और अपनी सरकार से भी इसी तरह की मांग की। श्री कटरे ने कलाकारों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे गांव-गांव जाकर गीत, नृत्य और वादन के माध्यम से नशा मुक्ति, भ्रूण हत्या, नसबंदी, चुनाव प्रचार-प्रसार और देश की विभिन्न सांस्कृतिक कलाओं को लेकर जागरूकता फैलाते हैं तथा शासन के कार्यों का नियमित पालन करते हैं, जिसमें नाटक, ड्रामा, डंडार और भजन मंडल जैसी कलाएं शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास स्थानीय जनप्रतिनिधियों जैसे सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक और सांसद द्वारा दिए गए लगभग 50 प्रमाण पत्र हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब कलाकार बुजुर्ग होकर आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं, तो उन्हें पेंशन मानदेय से जीवन का सहारा मिलने की आस रहती है। यदि सरकार पेंशन नहीं देती है, तो वे आगामी समय में धरना के माध्यम से और मीडिया का सहारा लेकर आंदोलन करने का प्रयास करेंगे। इस भव्य स्थापना दिवस समारोह में गायन, वादन, नृत्य और शायरी की शानदार प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े गीत व शायरियों ने यह साबित किया कि ग्रामीण अंचलों में संस्कृति की जड़ें आज भी बेहद मजबूत हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि पिछले छह वर्षों से वे कलाकारों को एक मंच पर लाने, उनकी प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और उनके हितों की आवाज़ बुलंद करने का कार्य कर रहे हैं, साथ ही अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाकर लोक संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास किया है। कलाकारों की सबसे बड़ी चिंता आर्थिक सुरक्षा और वृद्धावस्था में पेंशन की व्यवस्था को लेकर सामने आई, जिसके लिए पदाधिकारियों ने सांसद और विधायक के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की बात कही। वक्ताओं ने यह मुद्दा उठाया कि किसान, मजदूर, कर्मचारी और अन्य वर्गों के लिए कई योजनाएं हैं, लेकिन लोक कलाकारों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिन कलाकारों ने अपना जीवन कला साधना में समर्पित कर दिया, उन्हें बुढ़ापे में रोजी-रोटी का संकट न झेलना पड़े और उन्हें सामाजिक सुरक्षा व पेंशन का अधिकार मिलना चाहिए। सभी कलाकारों ने एक स्वर में कहा कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कृति को संरक्षित रखने का एक सशक्त माध्यम है, और यदि कलाकारों को संरक्षण नहीं मिला तो लोक कलाएं विलुप्त हो जाएंगी। समारोह के अंत में, सभी कलाकारों ने कला, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में मिलकर काम करने तथा अपने सम्मान व अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाने का संकल्प लिया, इस संदेश के साथ कि कलाकार समाज और संस्कृति की आत्मा हैं, और उनके सुरक्षित व सम्मानित रहने पर ही सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकेगी।
महाकौशल जन जागृति शायरी संगठन ने अपने छठे स्थापना दिवस को बालाघाट, सिवनी, और महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के सैकड़ों कलाकारों के महाकुंभ के रूप में भव्यता और उत्साह से मनाया, जहाँ कलाकारों के सम्मान और पेंशन मानदेय की मांग ज़ोर-शोर से उठाई गई। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कलाकारों का सम्मान नहीं किया गया तो संस्कृति का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। संगठन के अध्यक्ष श्री गौरी शंकर मोहरे जी ने बताया कि संगठन को स्थापित हुए 6 साल पूरे होने वाले हैं, जिसकी नींव कोरोना काल जैसी महामारी के दौरान पड़ी थी जब सब अपने घरों में थे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संगठन का पंजीयन कराया गया और इसे छह महीने पूर्ण हुए हैं। श्री मोहरे जी ने कलाकारों के लिए पेंशन मानदेय की मांग करते हुए कहा कि कलाकार किसी भी शुभ कार्य या कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्वागत गीत और सरस्वती वंदना जैसे प्रदर्शनों से शुरुआत करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद और विधायक उनकी बात सदन तक नहीं पहुंचा रहे हैं और कलेक्टर साहब को ज्ञापन सौंपने के बावजूद उनकी आवाज़ को दबा दिया गया है, जिससे उनकी मांगों का कोई निष्कर्ष नहीं निकला। श्री मोहरे जी ने चेतावनी दी कि यदि आगामी समय तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे मीडिया का सहारा लेकर धरना, रैली और रोड-शो के ज़रिए उग्र आंदोलन करेंगे। इसी कड़ी में, संगठन के सचिव श्री दादू लाल जी कटरे ने बताया कि महाकौशल योजना जागृति संघ बालाघाट को 14 जून 2026 को छह वर्ष पूरे हो गए हैं। उन्होंने कोरोना काल में कलाकारों को खाने के भी लाले पड़ने का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र सरकार के कलाकारों को पेंशन मानदेय देने के कार्य की सराहना की और अपनी सरकार से भी इसी तरह की मांग की। श्री कटरे ने कलाकारों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे गांव-गांव जाकर गीत, नृत्य और वादन के माध्यम से नशा मुक्ति, भ्रूण हत्या, नसबंदी, चुनाव प्रचार-प्रसार और देश की विभिन्न सांस्कृतिक कलाओं को लेकर जागरूकता फैलाते हैं तथा शासन के कार्यों का नियमित पालन करते हैं, जिसमें नाटक, ड्रामा, डंडार और भजन मंडल जैसी कलाएं शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास स्थानीय जनप्रतिनिधियों जैसे सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक और सांसद द्वारा दिए गए लगभग 50 प्रमाण पत्र हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब कलाकार बुजुर्ग होकर आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं, तो उन्हें पेंशन मानदेय से जीवन का सहारा मिलने की आस रहती है। यदि सरकार पेंशन नहीं देती है, तो वे आगामी समय में धरना के माध्यम से और मीडिया का सहारा लेकर आंदोलन करने का प्रयास करेंगे। इस भव्य स्थापना दिवस समारोह में गायन, वादन, नृत्य और शायरी की शानदार प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े गीत व शायरियों ने यह साबित किया कि ग्रामीण अंचलों में संस्कृति की जड़ें आज भी बेहद मजबूत हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि पिछले छह वर्षों से वे कलाकारों को एक मंच पर लाने, उनकी प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और उनके हितों की आवाज़ बुलंद करने का कार्य कर रहे हैं, साथ ही अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाकर लोक संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास किया है। कलाकारों की सबसे बड़ी चिंता आर्थिक सुरक्षा और वृद्धावस्था में पेंशन की व्यवस्था को लेकर सामने आई, जिसके लिए पदाधिकारियों ने सांसद और विधायक के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की बात कही। वक्ताओं ने यह मुद्दा उठाया कि किसान, मजदूर, कर्मचारी और अन्य वर्गों के लिए कई योजनाएं हैं, लेकिन लोक कलाकारों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिन कलाकारों ने अपना जीवन कला साधना में समर्पित कर दिया, उन्हें बुढ़ापे में रोजी-रोटी का संकट न झेलना पड़े और उन्हें सामाजिक सुरक्षा व पेंशन का अधिकार मिलना चाहिए। सभी कलाकारों ने एक स्वर में कहा कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कृति को संरक्षित रखने का एक सशक्त माध्यम है, और यदि कलाकारों को संरक्षण नहीं मिला तो लोक कलाएं विलुप्त हो जाएंगी। समारोह के अंत में, सभी कलाकारों ने कला, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में मिलकर काम करने तथा अपने सम्मान व अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाने का संकल्प लिया, इस संदेश के साथ कि कलाकार समाज और संस्कृति की आत्मा हैं, और उनके सुरक्षित व सम्मानित रहने पर ही सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकेगी।
- महाकौशल जन जागृति शायरी संगठन ने अपने छठे स्थापना दिवस को बालाघाट, सिवनी, और महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के सैकड़ों कलाकारों के महाकुंभ के रूप में भव्यता और उत्साह से मनाया, जहाँ कलाकारों के सम्मान और पेंशन मानदेय की मांग ज़ोर-शोर से उठाई गई। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कलाकारों का सम्मान नहीं किया गया तो संस्कृति का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। संगठन के अध्यक्ष श्री गौरी शंकर मोहरे जी ने बताया कि संगठन को स्थापित हुए 6 साल पूरे होने वाले हैं, जिसकी नींव कोरोना काल जैसी महामारी के दौरान पड़ी थी जब सब अपने घरों में थे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संगठन का पंजीयन कराया गया और इसे छह महीने पूर्ण हुए हैं। श्री मोहरे जी ने कलाकारों के लिए पेंशन मानदेय की मांग करते हुए कहा कि कलाकार किसी भी शुभ कार्य या कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्वागत गीत और सरस्वती वंदना जैसे प्रदर्शनों से शुरुआत करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद और विधायक उनकी बात सदन तक नहीं पहुंचा रहे हैं और कलेक्टर साहब को ज्ञापन सौंपने के बावजूद उनकी आवाज़ को दबा दिया गया है, जिससे उनकी मांगों का कोई निष्कर्ष नहीं निकला। श्री मोहरे जी ने चेतावनी दी कि यदि आगामी समय तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे मीडिया का सहारा लेकर धरना, रैली और रोड-शो के ज़रिए उग्र आंदोलन करेंगे। इसी कड़ी में, संगठन के सचिव श्री दादू लाल जी कटरे ने बताया कि महाकौशल योजना जागृति संघ बालाघाट को 14 जून 2026 को छह वर्ष पूरे हो गए हैं। उन्होंने कोरोना काल में कलाकारों को खाने के भी लाले पड़ने का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र सरकार के कलाकारों को पेंशन मानदेय देने के कार्य की सराहना की और अपनी सरकार से भी इसी तरह की मांग की। श्री कटरे ने कलाकारों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे गांव-गांव जाकर गीत, नृत्य और वादन के माध्यम से नशा मुक्ति, भ्रूण हत्या, नसबंदी, चुनाव प्रचार-प्रसार और देश की विभिन्न सांस्कृतिक कलाओं को लेकर जागरूकता फैलाते हैं तथा शासन के कार्यों का नियमित पालन करते हैं, जिसमें नाटक, ड्रामा, डंडार और भजन मंडल जैसी कलाएं शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास स्थानीय जनप्रतिनिधियों जैसे सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक और सांसद द्वारा दिए गए लगभग 50 प्रमाण पत्र हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब कलाकार बुजुर्ग होकर आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं, तो उन्हें पेंशन मानदेय से जीवन का सहारा मिलने की आस रहती है। यदि सरकार पेंशन नहीं देती है, तो वे आगामी समय में धरना के माध्यम से और मीडिया का सहारा लेकर आंदोलन करने का प्रयास करेंगे। इस भव्य स्थापना दिवस समारोह में गायन, वादन, नृत्य और शायरी की शानदार प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े गीत व शायरियों ने यह साबित किया कि ग्रामीण अंचलों में संस्कृति की जड़ें आज भी बेहद मजबूत हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि पिछले छह वर्षों से वे कलाकारों को एक मंच पर लाने, उनकी प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और उनके हितों की आवाज़ बुलंद करने का कार्य कर रहे हैं, साथ ही अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाकर लोक संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास किया है। कलाकारों की सबसे बड़ी चिंता आर्थिक सुरक्षा और वृद्धावस्था में पेंशन की व्यवस्था को लेकर सामने आई, जिसके लिए पदाधिकारियों ने सांसद और विधायक के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की बात कही। वक्ताओं ने यह मुद्दा उठाया कि किसान, मजदूर, कर्मचारी और अन्य वर्गों के लिए कई योजनाएं हैं, लेकिन लोक कलाकारों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिन कलाकारों ने अपना जीवन कला साधना में समर्पित कर दिया, उन्हें बुढ़ापे में रोजी-रोटी का संकट न झेलना पड़े और उन्हें सामाजिक सुरक्षा व पेंशन का अधिकार मिलना चाहिए। सभी कलाकारों ने एक स्वर में कहा कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कृति को संरक्षित रखने का एक सशक्त माध्यम है, और यदि कलाकारों को संरक्षण नहीं मिला तो लोक कलाएं विलुप्त हो जाएंगी। समारोह के अंत में, सभी कलाकारों ने कला, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में मिलकर काम करने तथा अपने सम्मान व अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाने का संकल्प लिया, इस संदेश के साथ कि कलाकार समाज और संस्कृति की आत्मा हैं, और उनके सुरक्षित व सम्मानित रहने पर ही सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकेगी।1
- मैंगनीज खदान में की गई भारी ब्लास्टिंग के कारण आस-पास के कई मकानों में दरारें आ गई हैं। इस मामले में एक कर्मचारी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।1
- बालाघाट के कान्हा टाइगर रिजर्व के नकटी घाटी रेंज कक्ष क्रमांक 136 में रविवार को एक सुरक्षा श्रमिक 29 वर्षीय लखन सिंह की बाघ के अचानक हमले में दुखद मौत हो गई। यह घटना गश्ती के दौरान हुई। मृतक लखन सिंह बालाघाट जिले के ग्राम आमगहन का निवासी था। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के उच्च अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। कान्हा प्रबंधन ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और तत्काल आर्थिक सहायता राशि प्रदान की है। इसके साथ ही, कान्हा प्रबंधन ने शासकीय नियमानुसार देय शेष राशि जल्द उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। कान्हा टाइगर रिजर्व परिवार ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।1
- सिवनी के कुरई वन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जिलापुर में रविवार को एक महिला पर बाघ ने हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। जिलापुर निवासी 55 वर्षीय शांति बाई कुमरे, जो रोशन कुमरे की पत्नी थीं, गांव से लगे जंगल में गुल्ली (वन उपज) बीनने गई थीं। जब वे लंबे समय तक घर वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। बाद में परिजनों और ग्रामीणों को खेत से लगे जंगल में शांति बाई का शव मिला। घटनास्थल की परिस्थितियों के आधार पर महिला की मौत बाघ के हमले से होना बताया जा रहा है, और इस घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला तुरंत मौके पर पहुंचा और मामले की जांच शुरू कर दी। एसडीओ योगेश पटेल ने शांति बाई कुमरे की मृत्यु की पुष्टि करते हुए बताया कि वन विभाग नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर रहा है और मामले की जांच जारी है। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया तथा शासन की विभिन्न सहायता योजनाओं के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता एवं अन्य लाभ दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही, ग्रामीणों से जंगल में अकेले न जाने और वन्यजीवों की गतिविधियों को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की अपील भी की गई है। इस घटना के बाद जिलापुर सहित आसपास के गांवों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में लगातार निगरानी बढ़ाने तथा बाघ की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। वहीं, वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएं, समूह में ही वन उपज संग्रह करें तथा किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें। बाघ की मौजूदगी को देखते हुए क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।1
- सिवनी जिले में बाघ के दोहरे हमले से हड़कंप मच गया है, जहाँ कुरई और बरघाट क्षेत्रों में हुई अलग-अलग घटनाओं में बाघ के हमलों से दो महिलाओं की जान चली गई। इस भयावह घटना के बाद से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।1
- चौरई नगर स्थित जोड़ा हनुमान मंदिर परिसर में सोमवती अमावस्या के पावन और पुण्यदायी अवसर पर राम नाम संकीर्तन ग्रुप द्वारा एक दिवसीय अखंड संकीर्तन का भव्य आयोजन किया जा रहा है। सुबह से ही मंदिर परिसर में "राम नाम" की मधुर स्वर लहरियां गूंज रही हैं, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा है। प्रातः 7 बजे से शुरू हुए इस अखंड संकीर्तन में ग्रुप के सदस्य संगीत और भक्ति के समन्वय से भगवान के नाम का गुणगान कर रहे हैं। संकीर्तन की मधुर प्रस्तुति श्रद्धालुओं के मन को आकर्षित कर रही है, साथ ही लोगों को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचकर संकीर्तन का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।1
- स्थानीय ग्रामीणों को हाल ही में अतिक्रमण के नोटिस मिले हैं, जिसके बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इन नोटिसों से प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी समस्या के समाधान के लिए एसडीएम से गुहार लगाई है।1
- बालाघाट जिले के सरेखा ओवरब्रिज पर एक मोड़ पर बड़ा हादसा टल गया, जब एक ट्रक ने एक कार को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण टक्कर में कार पूरी तरह से चकनाचूर हो गई, लेकिन कार चालक चमत्कारिक रूप से बाल-बाल बच गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।1