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हरिद्वार पुलिस ने पकड़ा ‘मगध साइबर गैंग’, 5 गिरफ्तार; 35 ATM कार्ड और 14 पासबुक के साथ करोड़ों की संदिग्ध मनी ट्रेल का खुलासा हरिद्वार पुलिस ने पकड़ा ‘मगध साइबर गैंग’, 5 गिरफ्तार; 35 ATM कार्ड और 14 पासबुक के साथ करोड़ों की संदिग्ध मनी ट्रेल का खुलासा
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हरिद्वार पुलिस ने पकड़ा ‘मगध साइबर गैंग’, 5 गिरफ्तार; 35 ATM कार्ड और 14 पासबुक के साथ करोड़ों की संदिग्ध मनी ट्रेल का खुलासा हरिद्वार पुलिस ने पकड़ा ‘मगध साइबर गैंग’, 5 गिरफ्तार; 35 ATM कार्ड और 14 पासबुक के साथ करोड़ों की संदिग्ध मनी ट्रेल का खुलासा
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- लक्सर भाजपा के नेताओं में रक्षाबंधन को लेकर प्रतिस्पर्धा, पवित्र पर्व को राजनीतिक लूट-खसोट का पर्याय बनाया जा रहा: रविंद्र सिंह आनंद लक्सर। रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और सम्मान का पर्व है, लेकिन लक्सर में भाजपा नेताओं के बीच इस पर्व को लेकर जिस प्रकार की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है, उसने इसकी गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व राज्य मंत्री रविंद्र सिंह आनंद ने भाजपा नेताओं संजय गुप्ता, ओमप्रकाश जमदग्नि और सचिन अग्रवाल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बहनों के सम्मान और अधिकारों के नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके वास्तविक मुद्दों पर काम होना चाहिए। रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे संवेदनशील और पवित्र अवसर को राजनीतिक प्रचार, प्रतिस्पर्धा और कथित रूप से व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि भाजपा नेताओं को वास्तव में लक्सर की बहनों की चिंता है तो उन्हें बताना चाहिए कि महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा, महंगाई और उनके सम्मान के लिए उन्होंने धरातल पर क्या ठोस कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है। एक ओर प्रदेश की बेटी अंकिता भंडारी के मामले में परिवार और प्रदेश की जनता आज भी न्याय की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों के नाम पर बड़े-बड़े दावे और वादे किए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि भाजपा वास्तव में महिलाओं को अपनी बहन मानती है तो फिर उनके न्याय और सम्मान के गंभीर मुद्दों पर इतनी लंबी चुप्पी क्यों? पूर्व राज्य मंत्री ने कहा कि लक्सर की बहनें केवल त्यौहार के दिन किए जाने वाले दिखावटी सम्मान या राजनीतिक आयोजनों की पात्र नहीं हैं। उन्हें सुरक्षा, सम्मान, रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसर चाहिए। चुनावी मौसम या त्यौहार के अवसर पर किए जाने वाले वादों से महिलाओं की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने भाजपा नेताओं से सवाल करते हुए कहा कि रक्षाबंधन के नाम पर बहनों से किए जा रहे वादों का हिसाब भी जनता के सामने रखा जाए। कितने वादे पूरे हुए, कितने रोजगार दिए गए और महिलाओं की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए—इसका जवाब लक्सर की जनता मांग रही है। रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि त्यौहार आस्था और रिश्तों को जोड़ने के लिए होते हैं, राजनीतिक बाजार लगाने के लिए नहीं। भाजपा नेताओं को चाहिए कि वे आपसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा छोड़कर लक्सर की जनता और विशेषकर महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए ईमानदारी से काम करें। उन्होंने कहा कि लक्सर की जनता अब केवल भाषण, फोटो और खोखले वादों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। जनता को काम चाहिए, जवाब चाहिए और अपने अधिकारों का सम्मान चाहिए। “बहनों के हाथ में राखी बांधने से पहले उनके अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया जाए—यही रक्षाबंधन की वास्तविक भावना है।” रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि जनता अब दिखावे और वास्तविक जनसेवा के बीच का अंतर अच्छी तरह समझ चुकी है। लक्सर भाजपा के नेताओं में रक्षाबंधन को लेकर प्रतिस्पर्धा, पवित्र पर्व को राजनीतिक लूट-खसोट का पर्याय बनाया जा रहा: रविंद्र सिंह आनंद लक्सर। रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और सम्मान का पर्व है, लेकिन लक्सर में भाजपा नेताओं के बीच इस पर्व को लेकर जिस प्रकार की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है, उसने इसकी गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व राज्य मंत्री रविंद्र सिंह आनंद ने भाजपा नेताओं संजय गुप्ता, ओमप्रकाश जमदग्नि और सचिन अग्रवाल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बहनों के सम्मान और अधिकारों के नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके वास्तविक मुद्दों पर काम होना चाहिए। रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे संवेदनशील और पवित्र अवसर को राजनीतिक प्रचार, प्रतिस्पर्धा और कथित रूप से व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि भाजपा नेताओं को वास्तव में लक्सर की बहनों की चिंता है तो उन्हें बताना चाहिए कि महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा, महंगाई और उनके सम्मान के लिए उन्होंने धरातल पर क्या ठोस कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है। एक ओर प्रदेश की बेटी अंकिता भंडारी के मामले में परिवार और प्रदेश की जनता आज भी न्याय की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों के नाम पर बड़े-बड़े दावे और वादे किए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि भाजपा वास्तव में महिलाओं को अपनी बहन मानती है तो फिर उनके न्याय और सम्मान के गंभीर मुद्दों पर इतनी लंबी चुप्पी क्यों? पूर्व राज्य मंत्री ने कहा कि लक्सर की बहनें केवल त्यौहार के दिन किए जाने वाले दिखावटी सम्मान या राजनीतिक आयोजनों की पात्र नहीं हैं। उन्हें सुरक्षा, सम्मान, रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसर चाहिए। चुनावी मौसम या त्यौहार के अवसर पर किए जाने वाले वादों से महिलाओं की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने भाजपा नेताओं से सवाल करते हुए कहा कि रक्षाबंधन के नाम पर बहनों से किए जा रहे वादों का हिसाब भी जनता के सामने रखा जाए। कितने वादे पूरे हुए, कितने रोजगार दिए गए और महिलाओं की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए—इसका जवाब लक्सर की जनता मांग रही है। रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि त्यौहार आस्था और रिश्तों को जोड़ने के लिए होते हैं, राजनीतिक बाजार लगाने के लिए नहीं। भाजपा नेताओं को चाहिए कि वे आपसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा छोड़कर लक्सर की जनता और विशेषकर महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए ईमानदारी से काम करें। उन्होंने कहा कि लक्सर की जनता अब केवल भाषण, फोटो और खोखले वादों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। जनता को काम चाहिए, जवाब चाहिए और अपने अधिकारों का सम्मान चाहिए। “बहनों के हाथ में राखी बांधने से पहले उनके अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया जाए—यही रक्षाबंधन की वास्तविक भावना है।” रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि जनता अब दिखावे और वास्तविक जनसेवा के बीच का अंतर अच्छी तरह समझ चुकी है।1
- बहनों की नाराजगी हुई दूर! उपहार लेकर मोहम्मदपुर पहुंचे राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि | लक्सर लक्सर के जमदनी पब्लिक स्कूल में आयोजित रक्षा सूत्र कार्यक्रम के दौरान कुछ बहनें उपहार से वंचित रह गई थीं। इसके बाद बहनों में नाराजगी देखने को मिली। मामले की जानकारी मिलने पर दर्जाधारी राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि खुद उपहार लेकर मोहम्मदपुर गांव पहुंचे। राज्यमंत्री ने बहनों से मुलाकात कर उन्हें अपने हाथों से उपहार वितरित किए। उपहार पाकर बहनों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ नजर आया। वहीं कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में फैल रही अफवाहों पर राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि ने कहा कि अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र कार्यक्रम की सफलता से विरोधी बौखलाए हुए हैं। रिपोर्टर – सचिन कुमार लोकेशन – लक्सर, उत्तराखंड श्रद्धा टीवी | सच्ची खबर, साफ आवाज़ #Laksar #Mohammadpur #OmPrakashJamadagni #RakshaSutra #UttarakhandNews1
- लोकेशन लक्सर से है हुसैनपुर में 'मातृशक्ति आशीर्वाद अभियान': 1000 से अधिक महिलाओं ने भाजपा नेता सचिन अग्रवाल को बांधी राखी। (पत्रकार राजेश लाम्बा) खबर लक्सर से है रक्षाबंधन के पावन पर्व पर लक्सर के हुसैनपुर गांव में आयोजित 'मातृशक्ति आशीर्वाद अभियान' के तहत स्नेह और आत्मीयता की सुंदर तस्वीर देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी सचिन अग्रवाल द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंची लगभग 1,000 महिलाओं ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उन्हें भाई का स्नेह और आशीर्वाद दिया।मिठाई और शगुन राशि देकर किया मातृशक्ति का सम्मान कार्यक्रम के दौरान बहनों का स्वागत करते हुए सचिन अग्रवाल ने सभी महिलाओं को मिठाई और शगुन राशि भेंट कर सम्मानित किया। राखी बांधने के दौरान पूरे आयोजन स्थल पर भारी उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। महिलाओं ने भी अपने भाई सचिन अग्रवाल के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु होने की कामना की।1
- चीन ने किया धोखा नेपाल में जल सैलाब से हजारों घर तबाह उत्तराखंड में भी देखने को मिल सकता है नेपाल से आए नदिया ऊफान पर है1
- #हरिद्वार के ग्राम भोगपुर से हर वर्ष की तरह इस बार भी आपसी हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए जायरीनों का जत्था कलियर शरीफ दरगाह के लिए चादर लेकर रवाना हुआ।1
- मेहवड़ खुर्द उर्फ नागल में ग्राम प्रधान पर अनियमितताओं के आरोप, शिकायत के बाद जांच के आदेश मेहवड़ खुर्द उर्फ नागल में ग्राम प्रधान पर अनियमितताओं के आरोप, शिकायत के बाद जांच के आदेश1
- बिजनौर महात्मा विदुर मेडिकल कालेज जिला अस्पताल के आउट सोर्सिंग कर्मचारियों को पिछले चार महीने से नहीं मिल रहा वेतन। नाराज कर्मियों ने दिया धरना। मेडिकल कालेज प्रशासन समझाने का कर रहा प्रयास। आउट सोर्सिंग कम्पनी कर रही कर्मचारियों का शोषण। कर्मियों ने लगाई सीएम से वेतन दिलाने की गुहार।1
- नेपाल में जलप्रलय: बाढ़ क्या छोड़ गई पीछे? नेपाल में कुदरत ने ऐसी तबाही मचाई है, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठे। रासुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कुछ ही समय में घर, सड़कें, पुल और बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया। भोटेकोशी नदी में आई तेज बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ता गया और कई बस्तियों में भारी तबाही मचा दी। किसी ने अपनी आंखों के सामने अपना घर उजड़ते देखा... किसी ने जिंदगी भर की कमाई को मलबे में तब्दील होते देखा... और कई परिवार ऐसे हैं, जो अब अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि बाढ़ का पानी अपने साथ सिर्फ मिट्टी और पत्थर ही नहीं, बल्कि लोगों की पूरी जिंदगी बहाकर ले गया। कई इलाकों में मकान क्षतिग्रस्त हैं, सड़कें और पुल टूट चुके हैं और जगह-जगह मलबे का ढेर नजर आ रहा है। सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिनके सामने अब सवाल है—घर दोबारा कैसे बनेगा और बिछड़े हुए अपनों का क्या होगा? बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षाबल और बचाव दल मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी रासुवा और आसपास के प्रभावित इलाकों में जरूरी चिकित्सा सामग्री और टेंट भेजकर राहत प्रयासों में सहयोग शुरू किया है। लेकिन सवाल सिर्फ आज का नहीं है... कल जिन घरों में चूल्हा जल रहा था, आज वहां कीचड़ और मलबा है। जिन रास्तों पर जिंदगी दौड़ती थी, वहां अब तबाही के निशान हैं। जिन परिवारों के पास अपना आशियाना था, उनमें से कई अब खुले आसमान के नीचे हैं। ये तस्वीरें सिर्फ नेपाल में आई बाढ़ की कहानी नहीं बता रहीं... ये तस्वीरें बता रही हैं कि जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो इंसान की बनाई मजबूत से मजबूत दीवार भी पलभर में ढह सकती है। देखिए नेपाल की तबाही की ये तस्वीरें... और दुआ कीजिए कि मलबे के बीच से ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां सुरक्षित बाहर निकलें। नेपाल में जलप्रलय: बाढ़ क्या छोड़ गई पीछे? नेपाल में कुदरत ने ऐसी तबाही मचाई है, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठे। रासुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कुछ ही समय में घर, सड़कें, पुल और बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया। भोटेकोशी नदी में आई तेज बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ता गया और कई बस्तियों में भारी तबाही मचा दी। किसी ने अपनी आंखों के सामने अपना घर उजड़ते देखा... किसी ने जिंदगी भर की कमाई को मलबे में तब्दील होते देखा... और कई परिवार ऐसे हैं, जो अब अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि बाढ़ का पानी अपने साथ सिर्फ मिट्टी और पत्थर ही नहीं, बल्कि लोगों की पूरी जिंदगी बहाकर ले गया। कई इलाकों में मकान क्षतिग्रस्त हैं, सड़कें और पुल टूट चुके हैं और जगह-जगह मलबे का ढेर नजर आ रहा है। सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिनके सामने अब सवाल है—घर दोबारा कैसे बनेगा और बिछड़े हुए अपनों का क्या होगा? बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। सुरक्षाबल और बचाव दल मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी रासुवा और आसपास के प्रभावित इलाकों में जरूरी चिकित्सा सामग्री और टेंट भेजकर राहत प्रयासों में सहयोग शुरू किया है। लेकिन सवाल सिर्फ आज का नहीं है... कल जिन घरों में चूल्हा जल रहा था, आज वहां कीचड़ और मलबा है। जिन रास्तों पर जिंदगी दौड़ती थी, वहां अब तबाही के निशान हैं। जिन परिवारों के पास अपना आशियाना था, उनमें से कई अब खुले आसमान के नीचे हैं। ये तस्वीरें सिर्फ नेपाल में आई बाढ़ की कहानी नहीं बता रहीं... ये तस्वीरें बता रही हैं कि जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो इंसान की बनाई मजबूत से मजबूत दीवार भी पलभर में ढह सकती है। देखिए नेपाल की तबाही की ये तस्वीरें... और दुआ कीजिए कि मलबे के बीच से ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां सुरक्षित बाहर निकलें।1