मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार (कैग) की रिपोर्ट में राज्य में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार योजना निर्माण, कार्यान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी में कमियों के कारण 'हर घर जल' का लक्ष्य मार्च 2024 तक पूरा नहीं हो सका। विकेंद्रीकृत, मांग आधारित और बॉटम-अप योजना प्रक्रिया के अप्रभावी रहने से कई स्तरों पर विफलताएं सामने आई हैं। कैग रिपोर्ट में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी में गंभीर चूक उजागर हुई है। ड्रिंकिंग वॉटर मॉनिटरिंग एंड सर्विलांस (डीडब्ल्यूएम एंड एस) के लिए निर्धारित 2.0 प्रतिशत निधि में से सरकार ने केवल 0.38 प्रतिशत राशि खर्च की, जबकि 1.62 प्रतिशत राशि निर्माण कार्यों में डायवर्ट कर दी गई। जिला और उप-मंडल स्तर की प्रयोगशालाओं में एनएबीएल मान्यता न होने के कारण ई. कोलाई और कुल कोलीफॉर्म जैसे मानकों की जांच नहीं हो सकी और अधिकांश स्थानों पर आंशिक परीक्षण ही हुए। सितंबर 2024 तक बहु-ग्राम योजनाओं में महज 27 प्रतिशत और एकल ग्राम योजनाओं में 58 प्रतिशत कार्य पूरे हो सके थे। त्रुटिपूर्ण लागत अनुमानों और कार्य में देरी के बावजूद ठेकेदारों से क्षतिपूर्ति की वसूली नहीं की गई, वहीं 28 जांचे गए स्थलों में से सात योजनाएं गैर-कार्यशील पाई गईं। इसके अलावा ई-जल शक्ति पोर्टल पर फर्जी आंकड़े दर्ज करने की बात भी सामने आई है। जिन गांवों में जलापूर्ति शुरू ही नहीं हुई थी, वहां भी परिवारों को लाभार्थी दर्शा दिया गया। प्रदेश में 11 लाख 94 हजार 63 निजी या स्वयं के स्रोत वाले नल कनेक्शनों को मिशन के तहत दिए गए एफएचटीसी के रूप में पोर्टल पर दर्ज किया गया। डैशबोर्ड पर गलत प्रविष्टियों और नियोजित व वास्तविक कनेक्शनों में बड़े अंतर के कारण मिशन की वास्तविक प्रगति का सही आकलन प्रभावित हुआ।
मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार (कैग) की रिपोर्ट में राज्य में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार योजना निर्माण, कार्यान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी में कमियों के कारण 'हर घर जल' का लक्ष्य मार्च 2024 तक पूरा नहीं हो सका। विकेंद्रीकृत, मांग आधारित और बॉटम-अप योजना प्रक्रिया के अप्रभावी रहने से कई स्तरों पर विफलताएं सामने आई हैं। कैग रिपोर्ट में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी में गंभीर चूक उजागर हुई है। ड्रिंकिंग वॉटर मॉनिटरिंग एंड सर्विलांस (डीडब्ल्यूएम एंड एस) के लिए निर्धारित 2.0 प्रतिशत निधि में से सरकार ने केवल 0.38 प्रतिशत राशि खर्च की, जबकि 1.62 प्रतिशत राशि निर्माण कार्यों में डायवर्ट कर दी गई। जिला और उप-मंडल स्तर की प्रयोगशालाओं में एनएबीएल मान्यता न होने के कारण ई. कोलाई और कुल कोलीफॉर्म जैसे मानकों की जांच नहीं
हो सकी और अधिकांश स्थानों पर आंशिक परीक्षण ही हुए। सितंबर 2024 तक बहु-ग्राम योजनाओं में महज 27 प्रतिशत और एकल ग्राम योजनाओं में 58 प्रतिशत कार्य पूरे हो सके थे। त्रुटिपूर्ण लागत अनुमानों और कार्य में देरी के बावजूद ठेकेदारों से क्षतिपूर्ति की वसूली नहीं की गई, वहीं 28 जांचे गए स्थलों में से सात योजनाएं गैर-कार्यशील पाई गईं। इसके अलावा ई-जल शक्ति पोर्टल पर फर्जी आंकड़े दर्ज करने की बात भी सामने आई है। जिन गांवों में जलापूर्ति शुरू ही नहीं हुई थी, वहां भी परिवारों को लाभार्थी दर्शा दिया गया। प्रदेश में 11 लाख 94 हजार 63 निजी या स्वयं के स्रोत वाले नल कनेक्शनों को मिशन के तहत दिए गए एफएचटीसी के रूप में पोर्टल पर दर्ज किया गया। डैशबोर्ड पर गलत प्रविष्टियों और नियोजित व वास्तविक कनेक्शनों में बड़े अंतर के कारण मिशन की वास्तविक प्रगति का सही आकलन प्रभावित हुआ।
- मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार (कैग) की रिपोर्ट में राज्य में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार योजना निर्माण, कार्यान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी में कमियों के कारण 'हर घर जल' का लक्ष्य मार्च 2024 तक पूरा नहीं हो सका। विकेंद्रीकृत, मांग आधारित और बॉटम-अप योजना प्रक्रिया के अप्रभावी रहने से कई स्तरों पर विफलताएं सामने आई हैं। कैग रिपोर्ट में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी में गंभीर चूक उजागर हुई है। ड्रिंकिंग वॉटर मॉनिटरिंग एंड सर्विलांस (डीडब्ल्यूएम एंड एस) के लिए निर्धारित 2.0 प्रतिशत निधि में से सरकार ने केवल 0.38 प्रतिशत राशि खर्च की, जबकि 1.62 प्रतिशत राशि निर्माण कार्यों में डायवर्ट कर दी गई। जिला और उप-मंडल स्तर की प्रयोगशालाओं में एनएबीएल मान्यता न होने के कारण ई. कोलाई और कुल कोलीफॉर्म जैसे मानकों की जांच नहीं हो सकी और अधिकांश स्थानों पर आंशिक परीक्षण ही हुए। सितंबर 2024 तक बहु-ग्राम योजनाओं में महज 27 प्रतिशत और एकल ग्राम योजनाओं में 58 प्रतिशत कार्य पूरे हो सके थे। त्रुटिपूर्ण लागत अनुमानों और कार्य में देरी के बावजूद ठेकेदारों से क्षतिपूर्ति की वसूली नहीं की गई, वहीं 28 जांचे गए स्थलों में से सात योजनाएं गैर-कार्यशील पाई गईं। इसके अलावा ई-जल शक्ति पोर्टल पर फर्जी आंकड़े दर्ज करने की बात भी सामने आई है। जिन गांवों में जलापूर्ति शुरू ही नहीं हुई थी, वहां भी परिवारों को लाभार्थी दर्शा दिया गया। प्रदेश में 11 लाख 94 हजार 63 निजी या स्वयं के स्रोत वाले नल कनेक्शनों को मिशन के तहत दिए गए एफएचटीसी के रूप में पोर्टल पर दर्ज किया गया। डैशबोर्ड पर गलत प्रविष्टियों और नियोजित व वास्तविक कनेक्शनों में बड़े अंतर के कारण मिशन की वास्तविक प्रगति का सही आकलन प्रभावित हुआ।2
- नीमच नगर पालिका चुनाव से पहले वार्ड 20 में एक बैनर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यहाँ 'पार्षद प्रत्याशी' लिखे एक वायरल पोस्टर पर काली स्याही पोत दी गई है। पोस्टर पर स्याही फेरे जाने के बाद क्षेत्र की राजनीति गरमा गई है। इस बैनर को किसने लगाया था और इसे किसने बदला, इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी "नशे से दूरी है जरूरी अभियान 2.0" के तहत नीमच जिले में युवाओं और आम जनमानस को जागरूक करने के लिए लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक श्री राजेश व्यास के निर्देशन में 15 से 30 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में नशामुक्ति से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान के तहत गुरुवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती हेमलता अग्रवाल ने केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, नीमच कैंट में विद्यार्थियों को नशे के सामाजिक, मानसिक और शारीरिक दुष्परिणामों की जानकारी दी। इस अवसर पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों ने नशामुक्त जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ को स्वयं नशे से दूर रहने तथा परिवार, मित्रों और समाज को जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। इस दौरान यातायात थाना प्रभारी रक्षित निरीक्षक सोनू बड़गुर्जर सहित विद्यालय का स्टाफ और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इसी क्रम में 22 और 23 जुलाई को थाना नीमच कैंट के बस स्टैंड, सब्जी मंडी व जिला चिकित्सालय, थाना जावद के बस स्टैंड, थाना सिंगोली के ग्राम रूपपुरिया तथा थाना कुकड़ेश्वर के ग्राम सांकरिया खेड़ी में ग्राम चौपालों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिला पुलिस ने आमजन से इस जनआंदोलन का हिस्सा बनने की अपील करते हुए कहा है कि जनसहभागिता से ही स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त समाज का निर्माण संभव है।4
- नीमच के जमुनिया कलां में गोचर भूमि और तालाबों पर अवैध तरीके से कब्जा करने का मामला सामने आया है। लोगों ने मवेशियों के चरने के लिए तय गोचर भूमि तक को नहीं छोड़ा है और उस पर भी अतिक्रमण कर लिया है। सार्वजनिक संपत्तियों और जल स्रोतों पर लगातार बढ़ रहा यह कब्जा इलाके में अतिक्रमणकारियों के बढ़ते आतंक और ग्राम पंचायत की गंभीर नाकामी को सीधे तौर पर उजागर कर रहा है।1
- कपासन में आयोजित तीन दिवसीय 85वें उर्स मेले के शुभारंभ समारोह के दौरान कव्वाली कार्यक्रम में भाजपा विधायक अर्जुनलाल जीनगर की कही गई एक कहावत ने क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। मंच से विधायक ने कहा कि "तुर्कियों के बीच में आंधी झाड़ा आ जाता है।" इस कहावत का सामान्य अर्थ माना जाता है कि जब साधारण या छोटे लोगों के बीच अचानक कोई बहुत प्रभावशाली, ताकतवर या बड़े कद का व्यक्ति आ जाए, तो उसका प्रभाव सब पर भारी पड़ता है और बाकी लोग उसके सामने गौण हो जाते हैं। हालांकि, विधायक ने यह कहावत कहने के तुरंत बाद यह भी जोड़ा कि "ऐसा भी नहीं होना चाहिए।" कार्यक्रम समाप्त होने के बाद से ही चाय की थड़ियों से लेकर राजनीतिक बैठकों और सोशल मीडिया पर इस बयान के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। विपक्षी खेमे में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और सवाल उठ रहे हैं कि विधायक का इशारा किस ओर था तथा उनके अनुसार "छोटे" कौन थे और "बड़ा" किसे माना गया। वहीं विधायक समर्थकों का कहना है कि एक सामान्य कहावत को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और विधायक की मंशा जाने बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। फिलहाल विधायक जीनगर की ओर से इस टिप्पणी पर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है और यह बयान पूरे क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा और अटकलों का केंद्र बना हुआ है।1
- चित्तौड़गढ़ में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में अपने 18 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कमलेश सोमानी ने भव्य समारोह की जगह समाज सेवा का मार्ग चुना है। अपनी इस 18 वर्षों की यात्रा को यादगार बनाने के लिए 'रक्तदान महादान' के संकल्प के साथ 26 जुलाई को एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है।1
- डूंगला क्षेत्र के निपानिया बस स्टैंड पर मोटर वायरिंग का काम करते हुए एक मिस्त्री का वीडियो बनाया गया। इस दौरान मिस्त्री को बेहतरीन तरीके से अपना काम करता हुआ पाया गया।1