तिल्दा-नेवरा से लगे ग्राम बिलाड़ी में मांदर की थाप से जसगीत गाते मां दुर्गा को दी भावभीनी विदाई, सांग प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र ग्राम बिलाड़ी में नम आंखों से मां दुर्गा को दी गई विदाई, मांदर और जसगीतों के साथ निकली भव्य विसर्जन शोभायात्रा नौ दिनों तक भक्ति और उल्लास में डूबा रहा गांव, पारंपरिक सांग प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र; जयकारों के बीच गतवा तालाब में किया गया प्रतिमाओं का विसर्जन तिल्दा-नेवरा। तिल्दा नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में शारदीय नवरात्र पर्व नौ दिनों तक श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। पूरे नवरात्र के दौरान देवी मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भक्तों की आवाजाही बनी रही। जगह-जगह माता रानी की पूजा-अर्चना, जसगीतों और धार्मिक आयोजनों से वातावरण भक्तिमय रहा। नवरात्र के समापन के अवसर पर सोमवार को तिल्दा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बिलाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमाओं की भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता रानी को विदाई दी और अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना की। ग्राम बिलाड़ी में नवरात्र पर्व के दौरान स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं के समक्ष श्रद्धालुओं ने नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार, गांव और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। नवरात्र के अंतिम दिन प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर दुर्गा समितियों के सदस्यों और ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। वहीं, माता रानी की विदाई के भावुक क्षणों में श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भव्य शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह मां दुर्गा की विदाई के लिए ग्राम बिलाड़ी में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें जय मां शक्ति बिलाड़ी समिति, बैगा दुर्गोत्सव समिति सहित अन्य दुर्गा समितियों के सदस्यों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। शोभायात्रा के दौरान माता रानी के जयकारों से पूरा गांव गूंज उठा। गांव की आराध्य मां शक्ति दाई एवं महामाया माता के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था शोभायात्रा में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए माता रानी की प्रतिमाओं के साथ आगे बढ़ते रहे। शोभायात्रा में मांदर और झांझ की थाप पर गाए जा रहे जसगीतों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। जसगीतों की मधुर धुन पर श्रद्धालु नाचते-झूमते हुए माता रानी की आराधना करते नजर आए। गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरती शोभायात्रा में जगह-जगह भक्तिभाव और उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाई। पारंपरिक सांग प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र ग्राम बिलाड़ी की विसर्जन शोभायात्रा में पारंपरिक सांग प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। सांग धारण किए श्रद्धालुओं ने अपनी धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रदर्शन किया। मांदर की थाप और जसगीतों की धुन पर सांग धारण किए भक्तों को नृत्य करते देखकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। इस पारंपरिक धार्मिक आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। सांग प्रदर्शन ने शोभायात्रा की रौनक बढ़ाई और लोगों का ध्यान आकर्षित किया। माता रानी के जयकारों, जसगीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा गांव भक्तिरस में डूबा नजर आया। ग्राम बिलाड़ी में धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए श्रद्धालुओं ने नवरात्र के अंतिम दिन माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस आयोजन ने गांव की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता की झलक प्रस्तुत की। महामाया मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद गतवा तालाब की ओर बढ़ी शोभायात्रा विसर्जन शोभायात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए महामाया मंदिर पहुंची। यहां दुर्गा समितियों के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने मां महामाया की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं को लेकर शोभायात्रा गतवा तालाब की ओर आगे बढ़ी। तालाब पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माता रानी से अपने परिवार की खुशहाली, गांव में सुख-शांति, समृद्धि और क्षेत्र की उन्नति की कामना की। धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा संपन्न होने के बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ-साथ माता रानी से बिछड़ने का भावुक क्षण भी देखने को मिला। नौ दिनों तक माता की सेवा और आराधना में जुटे भक्तों ने विसर्जन के समय मां को अंतिम प्रणाम कर अगले वर्ष फिर से पधारने की प्रार्थना की। नम आंखों से दी विदाई, अगले वर्ष फिर आने की कामना मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय और भावुक हो गया। श्रद्धालु माता रानी के जयकारे लगाते हुए विसर्जन में शामिल हुए। किसी ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की, तो किसी ने गांव में खुशहाली और शांति बनाए रखने की प्रार्थना की। माता रानी की विदाई के साथ ही नौ दिनों तक चले शारदीय नवरात्र उत्सव का समापन हुआ। हालांकि, विसर्जन के बाद भी श्रद्धालुओं के मन में माता रानी के प्रति आस्था और भक्ति का भाव बना रहा। ग्रामीणों ने मां दुर्गा से अगले वर्ष पुनः ग्राम बिलाड़ी में विराजमान होने की प्रार्थना की। इस अवसर पर जय मां शक्ति बिलाड़ी समिति, बैगा दुर्गोत्सव समिति सहित अन्य समितियों के सदस्य और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आयोजन में सहभागिता निभाई और श्रद्धा के साथ मां दुर्गा को विदाई दी। ग्राम बिलाड़ी में संपन्न हुआ यह विसर्जन आयोजन धार्मिक आस्था, पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण एकजुटता का प्रतीक बना। मांदर की थाप, जसगीतों की गूंज, पारंपरिक सांग प्रदर्शन और माता रानी के जयकारों के बीच संपन्न हुई विदाई ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और भावनाओं की अमिट छाप छोड़ी।
तिल्दा-नेवरा से लगे ग्राम बिलाड़ी में मांदर की थाप से जसगीत गाते मां दुर्गा को दी भावभीनी विदाई, सांग प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र ग्राम बिलाड़ी में नम आंखों से मां दुर्गा को दी गई विदाई, मांदर और जसगीतों के साथ निकली भव्य विसर्जन शोभायात्रा नौ दिनों तक भक्ति और उल्लास में डूबा रहा गांव, पारंपरिक सांग प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र; जयकारों के बीच गतवा तालाब में किया गया प्रतिमाओं का विसर्जन तिल्दा-नेवरा। तिल्दा नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में शारदीय नवरात्र पर्व नौ दिनों तक श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। पूरे नवरात्र के दौरान देवी मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भक्तों की आवाजाही बनी रही। जगह-जगह माता रानी की पूजा-अर्चना, जसगीतों और धार्मिक आयोजनों से वातावरण भक्तिमय रहा। नवरात्र के समापन के अवसर पर सोमवार को तिल्दा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बिलाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमाओं की भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता रानी को विदाई दी और अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना की। ग्राम बिलाड़ी में नवरात्र पर्व के दौरान स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं के समक्ष श्रद्धालुओं ने नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार, गांव और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। नवरात्र के अंतिम दिन प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर दुर्गा समितियों के सदस्यों और ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को
मिला। वहीं, माता रानी की विदाई के भावुक क्षणों में श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भव्य शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह मां दुर्गा की विदाई के लिए ग्राम बिलाड़ी में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें जय मां शक्ति बिलाड़ी समिति, बैगा दुर्गोत्सव समिति सहित अन्य दुर्गा समितियों के सदस्यों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। शोभायात्रा के दौरान माता रानी के जयकारों से पूरा गांव गूंज उठा। गांव की आराध्य मां शक्ति दाई एवं महामाया माता के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था शोभायात्रा में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए माता रानी की प्रतिमाओं के साथ आगे बढ़ते रहे। शोभायात्रा में मांदर और झांझ की थाप पर गाए जा रहे जसगीतों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। जसगीतों की मधुर धुन पर श्रद्धालु नाचते-झूमते हुए माता रानी की आराधना करते नजर आए। गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरती शोभायात्रा में जगह-जगह भक्तिभाव और उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाई। पारंपरिक सांग प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र ग्राम बिलाड़ी की विसर्जन शोभायात्रा में पारंपरिक सांग प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। सांग धारण किए श्रद्धालुओं ने अपनी धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रदर्शन किया। मांदर की थाप और जसगीतों की धुन पर सांग धारण किए भक्तों को नृत्य करते देखकर
ग्रामीणों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। इस पारंपरिक धार्मिक आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। सांग प्रदर्शन ने शोभायात्रा की रौनक बढ़ाई और लोगों का ध्यान आकर्षित किया। माता रानी के जयकारों, जसगीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा गांव भक्तिरस में डूबा नजर आया। ग्राम बिलाड़ी में धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए श्रद्धालुओं ने नवरात्र के अंतिम दिन माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस आयोजन ने गांव की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता की झलक प्रस्तुत की। महामाया मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद गतवा तालाब की ओर बढ़ी शोभायात्रा विसर्जन शोभायात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए महामाया मंदिर पहुंची। यहां दुर्गा समितियों के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने मां महामाया की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं को लेकर शोभायात्रा गतवा तालाब की ओर आगे बढ़ी। तालाब पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माता रानी से अपने परिवार की खुशहाली, गांव में सुख-शांति, समृद्धि और क्षेत्र की उन्नति की कामना की। धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा संपन्न होने के बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ-साथ माता रानी से बिछड़ने का भावुक क्षण भी देखने को मिला। नौ दिनों तक माता की सेवा और आराधना
में जुटे भक्तों ने विसर्जन के समय मां को अंतिम प्रणाम कर अगले वर्ष फिर से पधारने की प्रार्थना की। नम आंखों से दी विदाई, अगले वर्ष फिर आने की कामना मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय और भावुक हो गया। श्रद्धालु माता रानी के जयकारे लगाते हुए विसर्जन में शामिल हुए। किसी ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की, तो किसी ने गांव में खुशहाली और शांति बनाए रखने की प्रार्थना की। माता रानी की विदाई के साथ ही नौ दिनों तक चले शारदीय नवरात्र उत्सव का समापन हुआ। हालांकि, विसर्जन के बाद भी श्रद्धालुओं के मन में माता रानी के प्रति आस्था और भक्ति का भाव बना रहा। ग्रामीणों ने मां दुर्गा से अगले वर्ष पुनः ग्राम बिलाड़ी में विराजमान होने की प्रार्थना की। इस अवसर पर जय मां शक्ति बिलाड़ी समिति, बैगा दुर्गोत्सव समिति सहित अन्य समितियों के सदस्य और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आयोजन में सहभागिता निभाई और श्रद्धा के साथ मां दुर्गा को विदाई दी। ग्राम बिलाड़ी में संपन्न हुआ यह विसर्जन आयोजन धार्मिक आस्था, पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण एकजुटता का प्रतीक बना। मांदर की थाप, जसगीतों की गूंज, पारंपरिक सांग प्रदर्शन और माता रानी के जयकारों के बीच संपन्न हुई विदाई ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और भावनाओं की अमिट छाप छोड़ी।
- तिल्दा-नेवरा से लगे ग्राम बिलाड़ी में मांदर की थाप से जसगीत गाते मां दुर्गा को दी भावभीनी विदाई, सांग प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र ग्राम बिलाड़ी में नम आंखों से मां दुर्गा को दी गई विदाई, मांदर और जसगीतों के साथ निकली भव्य विसर्जन शोभायात्रा नौ दिनों तक भक्ति और उल्लास में डूबा रहा गांव, पारंपरिक सांग प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र; जयकारों के बीच गतवा तालाब में किया गया प्रतिमाओं का विसर्जन तिल्दा-नेवरा। तिल्दा नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में शारदीय नवरात्र पर्व नौ दिनों तक श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। पूरे नवरात्र के दौरान देवी मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भक्तों की आवाजाही बनी रही। जगह-जगह माता रानी की पूजा-अर्चना, जसगीतों और धार्मिक आयोजनों से वातावरण भक्तिमय रहा। नवरात्र के समापन के अवसर पर सोमवार को तिल्दा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बिलाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमाओं की भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता रानी को विदाई दी और अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना की। ग्राम बिलाड़ी में नवरात्र पर्व के दौरान स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं के समक्ष श्रद्धालुओं ने नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार, गांव और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। नवरात्र के अंतिम दिन प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर दुर्गा समितियों के सदस्यों और ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। वहीं, माता रानी की विदाई के भावुक क्षणों में श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भव्य शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह मां दुर्गा की विदाई के लिए ग्राम बिलाड़ी में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें जय मां शक्ति बिलाड़ी समिति, बैगा दुर्गोत्सव समिति सहित अन्य दुर्गा समितियों के सदस्यों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। शोभायात्रा के दौरान माता रानी के जयकारों से पूरा गांव गूंज उठा। गांव की आराध्य मां शक्ति दाई एवं महामाया माता के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था शोभायात्रा में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए माता रानी की प्रतिमाओं के साथ आगे बढ़ते रहे। शोभायात्रा में मांदर और झांझ की थाप पर गाए जा रहे जसगीतों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। जसगीतों की मधुर धुन पर श्रद्धालु नाचते-झूमते हुए माता रानी की आराधना करते नजर आए। गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरती शोभायात्रा में जगह-जगह भक्तिभाव और उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाई। पारंपरिक सांग प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र ग्राम बिलाड़ी की विसर्जन शोभायात्रा में पारंपरिक सांग प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। सांग धारण किए श्रद्धालुओं ने अपनी धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रदर्शन किया। मांदर की थाप और जसगीतों की धुन पर सांग धारण किए भक्तों को नृत्य करते देखकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। इस पारंपरिक धार्मिक आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। सांग प्रदर्शन ने शोभायात्रा की रौनक बढ़ाई और लोगों का ध्यान आकर्षित किया। माता रानी के जयकारों, जसगीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा गांव भक्तिरस में डूबा नजर आया। ग्राम बिलाड़ी में धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए श्रद्धालुओं ने नवरात्र के अंतिम दिन माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस आयोजन ने गांव की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता की झलक प्रस्तुत की। महामाया मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद गतवा तालाब की ओर बढ़ी शोभायात्रा विसर्जन शोभायात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए महामाया मंदिर पहुंची। यहां दुर्गा समितियों के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने मां महामाया की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं को लेकर शोभायात्रा गतवा तालाब की ओर आगे बढ़ी। तालाब पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माता रानी से अपने परिवार की खुशहाली, गांव में सुख-शांति, समृद्धि और क्षेत्र की उन्नति की कामना की। धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा संपन्न होने के बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ-साथ माता रानी से बिछड़ने का भावुक क्षण भी देखने को मिला। नौ दिनों तक माता की सेवा और आराधना में जुटे भक्तों ने विसर्जन के समय मां को अंतिम प्रणाम कर अगले वर्ष फिर से पधारने की प्रार्थना की। नम आंखों से दी विदाई, अगले वर्ष फिर आने की कामना मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय और भावुक हो गया। श्रद्धालु माता रानी के जयकारे लगाते हुए विसर्जन में शामिल हुए। किसी ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की, तो किसी ने गांव में खुशहाली और शांति बनाए रखने की प्रार्थना की। माता रानी की विदाई के साथ ही नौ दिनों तक चले शारदीय नवरात्र उत्सव का समापन हुआ। हालांकि, विसर्जन के बाद भी श्रद्धालुओं के मन में माता रानी के प्रति आस्था और भक्ति का भाव बना रहा। ग्रामीणों ने मां दुर्गा से अगले वर्ष पुनः ग्राम बिलाड़ी में विराजमान होने की प्रार्थना की। इस अवसर पर जय मां शक्ति बिलाड़ी समिति, बैगा दुर्गोत्सव समिति सहित अन्य समितियों के सदस्य और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आयोजन में सहभागिता निभाई और श्रद्धा के साथ मां दुर्गा को विदाई दी। ग्राम बिलाड़ी में संपन्न हुआ यह विसर्जन आयोजन धार्मिक आस्था, पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण एकजुटता का प्रतीक बना। मांदर की थाप, जसगीतों की गूंज, पारंपरिक सांग प्रदर्शन और माता रानी के जयकारों के बीच संपन्न हुई विदाई ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और भावनाओं की अमिट छाप छोड़ी।4
- खम्हरिया लवन में 22 अक्टूबर से सात दिवसीय संत ग्रंथ गुरु गद्दी पुजा प्रारंभ खम्हरिया लवन में 22 अक्टूबर से सात दिवसीय संत ग्रंथ गुरु गद्दी पुजा प्रारंभ |1
- विजयादशमी पर 51 फीट ऊंचे रावण का दहन, बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश रामलीला के जीवंत मंचन ने बांधा समां, आतिशबाजी से जगमगाया आसमान; हजारों की संख्या में उमड़े दर्शक नवापारा-राजिम। असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व नवापारा नगर में मंगलवार को हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। दशहरा उत्सव समिति नवापारा के तत्वावधान में हाईस्कूल मैदान में आयोजित भव्य दशहरा उत्सव में भगवान श्रीराम की लीला का सजीव मंचन किया गया। इसके पश्चात भगवान श्रीराम के हाथों 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। रावण दहन के साथ ही पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम में रामलीला के कलाकारों ने भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध के प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे ही रावण के पुतले में आग लगी, पूरा मैदान रोशनी से नहा उठा। इस दौरान हुई आकर्षक आतिशबाजी ने दशहरा उत्सव की रौनक में चार चांद लगा दिए। लगभग 20 मिनट तक हुई आतिशबाजी को देखने के लिए दर्शक मैदान में डटे रहे। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान कार्यक्रम में अभनपुर विधायक इंद्र कुमार साहू एवं पूर्व विधायक धनेंद्र साहू अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने नगरवासियों को विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दशहरा पर्व हमें सिखाता है कि अहंकार, अन्याय और बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और अच्छाई की ही होती है। रावण दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प भी है। जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में नागरिक हुए शामिल दशहरा उत्सव में नगर पालिका अध्यक्ष ओमकुमारी संजय साहू, भाजपा मंडल अध्यक्ष नागेंद्र वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, दशहरा उत्सव समिति के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। नगर के विभिन्न वार्डों से बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित आयोजन में पहुंचे। भव्य आयोजन, आकर्षक रामलीला और रंग-बिरंगी आतिशबाजी के बीच पूरा नगर उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया।2
- 21 October ka Tamilnadu mein Tej barish 60% ki barish Khatarnak 50 khabron ki jankari1
- बोड़ला में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी का पर्व: रथ पर सवार होकर निकले राम-लक्ष्मण, रावण वध के साथ अधर्म पर धर्म की हुई विजय बोड़ला। नगर में विजयादशमी का पावन पर्व अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर में विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। पर्व के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी भव्य रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। जगह-जगह नगरवासियों ने पुष्प वर्षा कर और आरती उतारकर रथ यात्रा का आत्मीय स्वागत किया। पूरा नगर "जय श्री राम" के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। नगर भ्रमण के पश्चात रावण वध का मंचन किया गया, जहाँ प्रभु श्री राम ने अहंकारी रावण का वध कर असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया। ज्योत कलश व जवारा विसर्जन नवरात्र के समापन पर नगर के देवी मंदिरों में स्थापित मनोकामना ज्योत कलश एवं माता के जवारा का पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ विसर्जन किया गया। श्रद्धालु जन बाजे-गाजे के साथ माता की भक्ति में लीन होकर जवारा विसर्जन यात्रा में शामिल हुए और क्षेत्र की समृद्धि व शांति की कामना की। दशहरा उत्सव के दौरान सुरक्षा एवं व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम रहे और पूरे नगर में उत्सव व उल्लास का माहौल बना रहा।1
- बिल्हा में धूमधाम से मना विजयादशमी पर्व, 40 हजार दर्शकों के बीच पूर्व विधानसभा अ बिल्हा में धूमधाम से मना विजयादशमी पर्व, 40 हजार दर्शकों के बीच पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक रामलिला कार्यक्रम में हुए शामिल, सत्य की जीत का दिया संदेश मंगलवार की रात 10:00 बजे बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक जी के निज सचिव से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयादशमी पर्व पर नगर पंचायत बिल्हा के अग्रसेन महाविद्यालय के खेलकूद मैदान (ग्राउंड) में भव्य रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामय अवसर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मैदान में पूरे शहर से उमड़ी जनता का जबरदस्त जनसैलाब देखने को मिला। आयोजन समिति के अनुसार लगभग 40,000 से अधिक लोगों की भीड़ ने इस ऐतिहासिक क्षण को देखा। कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोजन समिति द्वारा श्री धरमलाल कौशिक जी का तिलक लगाकर एवं पुष्पहार पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात श्री कौशिक ने भगवान श्री राम की आरती की और विधिवत पूजा कर रावण दहन की शुरुआत की। *इस अवसर पर श्री कौशिक ने कहा -* विजयादशमी का पर्व हमें सिखाता है कि अहंकार और बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अंत में जीत सत्य, धर्म और अच्छाई की ही होती है। भगवान श्री राम ने मर्यादा और आदर्शों से रावण जैसे शक्तिशाली अहंकारी का वध किया। आज के समय में हमें भी अपने भीतर के क्रोध, द्वेष और बुराई रूपी रावण का दहन करना है।" "बिल्हा की इस पावन धरती पर 40 हजार लोगों की उपस्थिति यह बताती है कि हमारे संस्कार और हमारी संस्कृति कितनी जीवंत है। मैं समस्त क्षेत्रवासियों को दशहरा पर्व की हृदय से बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ।" उन्होंने सभी को प्रेम, सद्भाव और एकता के साथ रहने का संदेश दिया। उन्होंने आयोजन समिति को इस भव्य और सफल आयोजन के लिए बधाई दी, जिन्होंने अनुशासन के साथ इतनी बड़ी भीड़ का प्रबंधन किया। इस अवसर पर क्रेडा अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी जी विशेष रूप से उपस्थित रहे उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम की आरती में भाग लिया और क्षेत्रवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दी। श्री सवन्नी ने कहा कि यह पर्व हमें धर्म के मार्ग पर चलने और समाज में एकता बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा और बढ़ गई, आयोजन समिति ने उनका भी आत्मीय स्वागत किया। जिला मंत्री भाजपा, बिलासपुर डॉ देवेन्द्र कौशिक श्रीमती वंदना जेंड्रे अध्यक्ष नगर पंचायत बिल्हा श्री सतीश शर्मा उपाध्यक्ष श्रीमती पुनीता डहरिया श्री विष्णु बिंदल सहित, नगर पंचायत अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, भाजपा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं नगर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।1
- बिलासपुर जिला के ग्राम पंचायत हरदीकला मे विजयदशमी के पावन पर्व पर रावण दहन किया गया । #ravandahan #vijaydashmi #hardikalabilaspur #bilaspurnews बिलासपुर जिला के ग्राम पंचायत हरदीकला मे विजयदशमी के पावन पर्व पर रावण दहन किया गया । #ravandahan #vijaydashmi #hardikalabilaspur #bilaspurnews1
- शीतलापारा के रावणभांठा में रामलीला का भव्य मंचन, अंगद-रावण संवाद ने बांधा समां रावण वध के साथ गूंजे जय श्रीराम के जयघोष, रामलीला देखने उमड़े श्रद्धालु गोबरा नवापारा। नगर के शीतलापारा स्थित रावण भाठा में पारंपरिक दशहरा उत्सव श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। राधा-कृष्ण मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कुहरापारा रामलीला मंडली ने रामायण के प्रमुख प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के लिए 25 फीट ऊंचे सीमेंट निर्मित रावण के समीप स्थायी रंगमंच तैयार किया गया था। मंच पर अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, कुंभकर्ण वध और राम-रावण युद्ध के दृश्यों का सजीव चित्रण किया गया। कलाकारों के शानदार अभिनय और प्रभावशाली संवादों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। रावण वध के साथ ही पूरे परिसर में जय श्रीराम और सीताराम के जयघोष गूंज उठे। रामलीला के दौरान माता सीता की वापसी के लिए भगवान श्रीराम ने अंगद को रावण के दरबार में दूत बनाकर भेजा। अंगद के रूप में लोकेश मेहर, रावण के रूप में जितेंद्र चक्रधारी, लक्ष्मण के रूप में भागवत चक्रधारी, सुग्रीव के रूप में चंदन चौहान तथा बजरंगबली की भूमिका में बंटी प्रजापति ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। अंगद-रावण संवाद ने बढ़ाया रोमांच रावण के दरबार में अंगद और रावण के बीच हुए तीखे संवादों ने वातावरण को रोमांच से भर दिया। अंगद ने अपना पैर जमीन पर जमा दिया, जिसे रावण की सेना के योद्धा तक हिला नहीं सके। इसके बाद युद्ध के प्रसंग में लक्ष्मण और मेघनाद के बीच भीषण मुकाबला हुआ, जिसमें लक्ष्मण मूर्छित हो गए। आगे के प्रसंग में लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया। अपनी सेना को कमजोर पड़ता देख रावण ने कुंभकर्ण को युद्ध के लिए भेजा, जिसका अंत रामदल के हाथों हुआ। रामलीला के माध्यम से कलाकारों ने सत्य, धर्म और न्याय की विजय का संदेश दिया। आयोजन ने नगरवासियों को धार्मिक परंपराओं से जोड़ने के साथ ही रामायण के आदर्शों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी।इस अवसर पर काफी संख्या में नगर वासी उपस्थित थे1