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सीधी: जनसुनवाई में कलेक्टर का संवेदनशील रवैया, लोगों को मिला भरोसा सीधी जिले में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर विकास मिश्रा ने आमजन की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और त्वरित समाधान के निर्देश दिए। दूर-दराज से आए लोगों ने प्रशासन के इस बदले रवैये की सराहना की। कलेक्टर ने अधिकारियों को समयबद्ध निराकरण के निर्देश देते हुए जनता से सीधे संवाद कर भरोसा मजबूत किया।

1 hr ago
user_पत्रकार,Kuber Tomar
पत्रकार,Kuber Tomar
पत्रकार, संवाददाता,रिपोर्टर Gopadbanas, Sidhi•
1 hr ago

सीधी: जनसुनवाई में कलेक्टर का संवेदनशील रवैया, लोगों को मिला भरोसा सीधी जिले में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर विकास मिश्रा ने आमजन की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और त्वरित समाधान के निर्देश दिए। दूर-दराज से आए लोगों ने प्रशासन के इस बदले रवैये की सराहना की। कलेक्टर ने अधिकारियों को समयबद्ध निराकरण के निर्देश देते हुए जनता से सीधे संवाद कर भरोसा मजबूत किया।

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  • सीधी: जनसुनवाई में कलेक्टर का संवेदनशील रवैया, लोगों को मिला भरोसा सीधी जिले में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर विकास मिश्रा ने आमजन की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और त्वरित समाधान के निर्देश दिए। दूर-दराज से आए लोगों ने प्रशासन के इस बदले रवैये की सराहना की। कलेक्टर ने अधिकारियों को समयबद्ध निराकरण के निर्देश देते हुए जनता से सीधे संवाद कर भरोसा मजबूत किया।
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    सीधी: जनसुनवाई में कलेक्टर का संवेदनशील रवैया, लोगों को मिला भरोसा
सीधी जिले में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर विकास मिश्रा ने आमजन की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और त्वरित समाधान के निर्देश दिए। दूर-दराज से आए लोगों ने प्रशासन के इस बदले रवैये की सराहना की। कलेक्टर ने अधिकारियों को समयबद्ध निराकरण के निर्देश देते हुए जनता से सीधे संवाद कर भरोसा मजबूत किया।
    user_पत्रकार,Kuber Tomar
    पत्रकार,Kuber Tomar
    पत्रकार, संवाददाता,रिपोर्टर Gopadbanas, Sidhi•
    1 hr ago
  • मध्य प्रदेश के सीधी जिले की इस पावन धरा को कभी "सिद्धभूमि" कहा जाता था। एक ऐसी भूमि जहाँ ऋषि-मुनियों की तपस्या की गूँज थी, जहाँ बीरबल की बुद्धिमानी के किस्से थे और जहाँ सफेद बाघ 'मोहन' की दहाड़ ने पूरी दुनिया में जिले का नाम रौशन किया। लेकिन आज इसी सीधी जिले के सीने पर एक गहरा ज़ख्म है—"सूखा नदी"। वो नदी जिसे कभी 'जीवनदायिनी' कहा जाता था, आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करने वाली यह नदी चुन्हा गांव से निकलकर सोन नदी की गोद में समा जाती है। सालों से एक अटूट मान्यता चली आ रही है कि इसके जल में स्नान करने से बच्चों का कुपोषण और एनीमिया जैसा 'सूखा रोग' जड़ से खत्म हो जाता है। लोग इसे आस्था की धार मानते हैं, लेकिन विज्ञान की कसौटी पर तस्वीर कुछ और ही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जो पानी कभी अमृत था, वो अब सीवेज और कचरे के मिलने से ज़हर बन चुका है। आस्था अपनी जगह है, लेकिन गंदे पानी में मासूमों को नहलाना उन्हें फंगल इन्फेक्शन और बीमारियों के दलदल में धकेलने जैसा है। विडंबना देखिए, जो नदी आस्था का केंद्र थी, उसे विकास की भूख ने 'नाला' बना दिया। और इस बर्बादी की आग में घी डालने का काम किया 'करौंदिया उत्तर टोला' के उन भू-माफियाओं ने, जिन्होंने कानून की आँखों में धूल झोंककर सरकारी तंत्र के साथ ऐसा 'मधुर संबंध' बनाया कि रातों-रात भूगोल ही बदल दिया गया। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो देखिए कि राजस्व विभाग के पटवारी की कलम ने वो जादू दिखाया कि खसरा नंबर 385 से 389 के बीच का वो सार्वजनिक रास्ता, जहाँ से पीढ़ियों का आना-जाना था, उसे सरकारी नक्शे से ही साफ़ कर दिया गया। लाखों की 'सेवा राशि' के बदले आम आदमी के हक को चंद रसूखदारों के हाथों बेच दिया गया और प्रशासनिक तंत्र तमाशबीन बना रहा। यही नहीं, पूर्व कलेक्टर अभिषेक सिंह ने जिस नदी के लिए सौंदर्यीकरण और पक्की सड़कों का सपना बुना था, आज उसी सरकारी निवेश पर माफियाओं की गिद्ध दृष्टि जमी है। प्रशासन लंबे समय तक मौन रहा, लेकिन ये 'मौन व्रत' तब टूटा जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हंटर चला। सीधी के औचक निरीक्षण के दौरान जब मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक ढिलाई देखी, तो उनका पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया और तत्कालीन कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। यह एक सीधा संदेश था कि जनता के हक से खिलवाड़ करने वाले अब बख्शे नहीं जाएंगे। अब जिला प्रशासन की कमान नवागत कलेक्टर विकास मिश्रा के हाथों में है और करौंदिया की जनता टकटकी लगाए देख रही है कि क्या 'विकास' के नाम पर आए ये नए साहब उस 'जादुई नक्शे' के पीछे छिपे पटवारी और रसूखदारों के असली चेहरों को बेनकाब कर पाएंगे? क्षेत्रीय विधायक रीती पाठक ने भी अब ललकार दिया है कि अतिक्रमणकारी चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल आज भी वही खड़ा है कि क्या हमारी आस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी? क्या 'जीवनदायिनी' सूखा नदी फिर से अपनी कल-कल करती स्वच्छ धारा पा सकेगी, या फिर भू-माफियाओं के लालच में एक गंदा नाला बनकर इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी? अब फैसला प्रशासन की इच्छाशक्ति और सीधी की जागरूक जनता को करना है।
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    मध्य प्रदेश के सीधी जिले की इस पावन धरा को कभी "सिद्धभूमि" कहा जाता था। एक ऐसी भूमि जहाँ ऋषि-मुनियों की तपस्या की गूँज थी, जहाँ बीरबल की बुद्धिमानी के किस्से थे और जहाँ सफेद बाघ 'मोहन' की दहाड़ ने पूरी दुनिया में जिले का नाम रौशन किया। लेकिन आज इसी सीधी जिले के सीने पर एक गहरा ज़ख्म है—"सूखा नदी"। वो नदी जिसे कभी 'जीवनदायिनी' कहा जाता था, आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करने वाली यह नदी चुन्हा गांव से निकलकर सोन नदी की गोद में समा जाती है। सालों से एक अटूट मान्यता चली आ रही है कि इसके जल में स्नान करने से बच्चों का कुपोषण और एनीमिया जैसा 'सूखा रोग' जड़ से खत्म हो जाता है। लोग इसे आस्था की धार मानते हैं, लेकिन विज्ञान की कसौटी पर तस्वीर कुछ और ही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जो पानी कभी अमृत था, वो अब सीवेज और कचरे के मिलने से ज़हर बन चुका है। आस्था अपनी जगह है, लेकिन गंदे पानी में मासूमों को नहलाना उन्हें फंगल इन्फेक्शन और बीमारियों के दलदल में धकेलने जैसा है।
विडंबना देखिए, जो नदी आस्था का केंद्र थी, उसे विकास की भूख ने 'नाला' बना दिया। और इस बर्बादी की आग में घी डालने का काम किया 'करौंदिया उत्तर टोला' के उन भू-माफियाओं ने, जिन्होंने कानून की आँखों में धूल झोंककर सरकारी तंत्र के साथ ऐसा 'मधुर संबंध' बनाया कि रातों-रात भूगोल ही बदल दिया गया। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो देखिए कि राजस्व विभाग के पटवारी की कलम ने वो जादू दिखाया कि खसरा नंबर 385 से 389 के बीच का वो सार्वजनिक रास्ता, जहाँ से पीढ़ियों का आना-जाना था, उसे सरकारी नक्शे से ही साफ़ कर दिया गया। लाखों की 'सेवा राशि' के बदले आम आदमी के हक को चंद रसूखदारों के हाथों बेच दिया गया और प्रशासनिक तंत्र तमाशबीन बना रहा। यही नहीं, पूर्व कलेक्टर अभिषेक सिंह ने जिस नदी के लिए सौंदर्यीकरण और पक्की सड़कों का सपना बुना था, आज उसी सरकारी निवेश पर माफियाओं की गिद्ध दृष्टि जमी है। प्रशासन लंबे समय तक मौन रहा, लेकिन ये 'मौन व्रत' तब टूटा जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हंटर चला। सीधी के औचक निरीक्षण के दौरान जब मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक ढिलाई देखी, तो उनका पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया और तत्कालीन कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। यह एक सीधा संदेश था कि जनता के हक से खिलवाड़ करने वाले अब बख्शे नहीं जाएंगे।
अब जिला प्रशासन की कमान नवागत कलेक्टर विकास मिश्रा के हाथों में है और करौंदिया की जनता टकटकी लगाए देख रही है कि क्या 'विकास' के नाम पर आए ये नए साहब उस 'जादुई नक्शे' के पीछे छिपे पटवारी और रसूखदारों के असली चेहरों को बेनकाब कर पाएंगे? क्षेत्रीय विधायक रीती पाठक ने भी अब ललकार दिया है कि अतिक्रमणकारी चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल आज भी वही खड़ा है कि क्या हमारी आस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी? क्या 'जीवनदायिनी' सूखा नदी फिर से अपनी कल-कल करती स्वच्छ धारा पा सकेगी, या फिर भू-माफियाओं के लालच में एक गंदा नाला बनकर इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी? अब फैसला प्रशासन की इच्छाशक्ति और सीधी की जागरूक जनता को करना है।
    user_पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    Local News Reporter गोपदबनास, सीधी, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • यह रहा आपका कंटेंट हिंदी में दमदार और प्रोफेशनल तरीके से रीमेक किया हुआ 👇 --- क्या अब भी बार और कोऑर्डिनेशन कमेटी सो रही है? आज Karkardooma Court के अंदर जो घटना हुई है, उसने पूरे न्यायिक तंत्र की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर कोर्ट परिसर के अंदर ही मुजरिम चाकू लेकर घुस सकते हैं और एक अधिवक्ता पर हमला कर सकते हैं, तो सोचिए— वकील आखिर कहां सुरक्षित हैं? यह केवल एक हमला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की सुरक्षा में बड़ी चूक है। अब समय आ गया है कि बार एसोसिएशन और कोऑर्डिनेशन कमेटी तुरंत जागे और वकीलों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए। ⚖️ वकीलों की सुरक्षा = न्याय की सुरक्षा --- #Hashtags 👇 #KarkardoomaCourt #LawyersSafety #AdvocateUnderAttack #DelhiCourts #JusticeSystem #LegalNews #BarAssociation #CourtSecurity #WakeUpCall #AdvocateLife #LawAndOrder #BreakingNews #Highlight
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    यह रहा आपका कंटेंट हिंदी में दमदार और प्रोफेशनल तरीके से रीमेक किया हुआ 👇
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क्या अब भी बार और कोऑर्डिनेशन कमेटी सो रही है?
आज Karkardooma Court के अंदर जो घटना हुई है, उसने पूरे न्यायिक तंत्र की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर कोर्ट परिसर के अंदर ही मुजरिम चाकू लेकर घुस सकते हैं और एक अधिवक्ता पर हमला कर सकते हैं, तो सोचिए—
वकील आखिर कहां सुरक्षित हैं?
यह केवल एक हमला नहीं, बल्कि
न्याय व्यवस्था की सुरक्षा में बड़ी चूक है।
अब समय आ गया है कि
बार एसोसिएशन और कोऑर्डिनेशन कमेटी तुरंत जागे और वकीलों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए।
⚖️ वकीलों की सुरक्षा = न्याय की सुरक्षा
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#Hashtags 👇
#KarkardoomaCourt #LawyersSafety #AdvocateUnderAttack #DelhiCourts #JusticeSystem #LegalNews #BarAssociation #CourtSecurity #WakeUpCall #AdvocateLife #LawAndOrder #BreakingNews #Highlight
    user_पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    Local News Reporter Mauganj, Rewa•
    1 hr ago
  • गुढ़ ब्रेकिंग रायपुर कर्चुलियान जनपद उपाध्यक्ष ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौता का किया निरीक्षण नदारद मिले हेड मास्टर रीवा जिले के रायपुर कर्चुलियान जनपद उपाध्यक्ष राम लखन सिंह महगना ने सोमवार को औचक निरीक्षण के दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौता में बड़ी लापरवाही पाई,जहाँ हेड मास्टर बाबूलाल बंसल नदारद मिले और विद्यालय का पंजीकृत रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं था। जनपद उपाध्यक्ष ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कई दिनों से हमको शिकायत मिल रही थी कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौता में पदस्थ हेड मास्टर की मनमानी चरम सीमा पर है।हेड मास्टर बाबूलाल बंसल का स्कूल आने जाने का कोई समय सीमा नहीं है वह अपने मनमर्जी से आते हैं और मनमर्जी से जाते हैं कभी कभार तो हेड मास्टर हफ्ते भर से ऊपर भी स्कूल नहीं पहुंचते हैं।यह सभी जानकारियां जनपद पंचायत उपाध्यक्ष ने स्कूल में उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों से संवाद करके मीडिया को अवगत कराया है।बल्कि उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति को इतने बड़े विद्यालय का हेड मास्टर का प्रभार सौंपा गया है अगर उसकी मनमानी नहीं सुधरी तो बहुत जल्द इनकी उच्च अधिकारियों से शिकायत की जाएगी।
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    गुढ़ ब्रेकिंग
रायपुर कर्चुलियान जनपद उपाध्यक्ष ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौता का किया निरीक्षण नदारद मिले हेड मास्टर
रीवा जिले के रायपुर कर्चुलियान जनपद उपाध्यक्ष राम लखन सिंह महगना ने सोमवार को औचक निरीक्षण के दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौता में बड़ी लापरवाही पाई,जहाँ हेड मास्टर बाबूलाल बंसल नदारद मिले और विद्यालय का पंजीकृत रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं था। जनपद उपाध्यक्ष ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कई दिनों से हमको शिकायत मिल रही थी कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौता में पदस्थ हेड मास्टर की मनमानी चरम सीमा पर है।हेड मास्टर बाबूलाल बंसल का स्कूल आने जाने का कोई समय सीमा नहीं है वह अपने मनमर्जी से आते हैं और मनमर्जी से जाते हैं कभी कभार तो हेड मास्टर हफ्ते भर से ऊपर भी स्कूल नहीं पहुंचते हैं।यह सभी जानकारियां जनपद पंचायत उपाध्यक्ष ने स्कूल में उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों से संवाद करके मीडिया को अवगत कराया है।बल्कि उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति को इतने बड़े विद्यालय का हेड मास्टर का प्रभार सौंपा गया है अगर उसकी मनमानी नहीं सुधरी तो बहुत जल्द इनकी उच्च अधिकारियों से शिकायत की जाएगी।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने साप्ताहिक जनसुनवाई में शहडोल जिले के दूर दराज के क्षेत्र से आए लोगों की समस्याएं एवं शिकायतें सुनी तथा निराकरण के निर्देश संबंधी विभाग के अधिकारियों को दिए।
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    कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने साप्ताहिक जनसुनवाई में शहडोल जिले के दूर दराज के क्षेत्र से आए लोगों की समस्याएं एवं शिकायतें सुनी तथा निराकरण के निर्देश संबंधी विभाग के अधिकारियों को दिए।
    user_Durgesh Kumar Gupta
    Durgesh Kumar Gupta
    Electrician Beohari, Shahdol•
    11 min ago
  • Post by Ramraj gupta
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    Post by Ramraj gupta
    user_Ramraj gupta
    Ramraj gupta
    ब्योहारी, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    59 min ago
  • Post by Avi Standing with the truth
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    Post by Avi Standing with the truth
    user_Avi Standing with the truth
    Avi Standing with the truth
    Yoga instructor मंगवां, रीवा, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
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    Post by पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    user_पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह
    Local News Reporter गोपदबनास, सीधी, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
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