सुल्तानपुर के लम्भुआ स्थित डकाही गांव के पास वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्कूली बच्चों को सुरक्षित सड़क पार कराने की कोशिश कर रहे एक बस चालक की दर्दनाक मौत हो गई, जिसने पूरे स्कूल परिवहन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में मोटरसाइकिल सवार दंपति भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, और प्रत्यक्षदर्शियों व स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि स्कूलों की मनमानी, परिवहन विभाग की चुप्पी और प्रशासन की घोर लापरवाही का सीधा नतीजा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रतिदिन कई निजी स्कूलों की बसें राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खड़ी होकर बच्चों को उतारती हैं, जिससे बच्चे तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पार करने को मजबूर होते हैं, जबकि थोड़ी दूरी पर सुरक्षित कट उपलब्ध है जिसका उपयोग नहीं किया जाता। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कई बसों में क्षमता से कहीं अधिक, लगभग 75 से 80 बच्चों को बैठाया जाता है, जो मोटर वाहन नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस पर परिवहन विभाग की औचक निरीक्षण और कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही, सुबह से दोपहर तक हाईवे किनारे स्कूल बसों की लंबी कतारों को देखकर राष्ट्रीय राजमार्ग को पार्किंग स्थल बनने देने और एनएचएआई, परिवहन विभाग व स्थानीय पुलिस की कथित अनदेखी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगे हैं। इस घटना को केवल एक बस चालक की मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी की कहानी बताते हुए, जनता अब जवाब चाहती है। मांग की गई है कि जिला प्रशासन सभी निजी स्कूल बसों का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण करे, ओवरलोडिंग करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे, हाईवे पर बच्चों को उतारने पर तत्काल रोक लगाए और इस हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही तय करे।
सुल्तानपुर के लम्भुआ स्थित डकाही गांव के पास वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्कूली बच्चों को सुरक्षित सड़क पार कराने की कोशिश कर रहे एक बस चालक की दर्दनाक मौत हो गई, जिसने पूरे स्कूल परिवहन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में मोटरसाइकिल सवार दंपति भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, और प्रत्यक्षदर्शियों व स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि स्कूलों की मनमानी, परिवहन विभाग की चुप्पी और प्रशासन की घोर लापरवाही का सीधा नतीजा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रतिदिन कई निजी स्कूलों की बसें राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खड़ी होकर बच्चों को उतारती हैं, जिससे बच्चे तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पार करने को मजबूर होते हैं, जबकि थोड़ी दूरी पर सुरक्षित कट उपलब्ध है जिसका उपयोग नहीं किया जाता। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कई बसों में क्षमता
से कहीं अधिक, लगभग 75 से 80 बच्चों को बैठाया जाता है, जो मोटर वाहन नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस पर परिवहन विभाग की औचक निरीक्षण और कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही, सुबह से दोपहर तक हाईवे किनारे स्कूल बसों की लंबी कतारों को देखकर राष्ट्रीय राजमार्ग को पार्किंग स्थल बनने देने और एनएचएआई, परिवहन विभाग व स्थानीय पुलिस की कथित अनदेखी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगे हैं। इस घटना को केवल एक बस चालक की मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी की कहानी बताते हुए, जनता अब जवाब चाहती है। मांग की गई है कि जिला प्रशासन सभी निजी स्कूल बसों का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण करे, ओवरलोडिंग करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे, हाईवे पर बच्चों को उतारने पर तत्काल रोक लगाए और इस हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही तय करे।
- सुल्तानपुर के लम्भुआ स्थित डकाही गांव के पास वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्कूली बच्चों को सुरक्षित सड़क पार कराने की कोशिश कर रहे एक बस चालक की दर्दनाक मौत हो गई, जिसने पूरे स्कूल परिवहन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में मोटरसाइकिल सवार दंपति भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, और प्रत्यक्षदर्शियों व स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि स्कूलों की मनमानी, परिवहन विभाग की चुप्पी और प्रशासन की घोर लापरवाही का सीधा नतीजा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रतिदिन कई निजी स्कूलों की बसें राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खड़ी होकर बच्चों को उतारती हैं, जिससे बच्चे तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पार करने को मजबूर होते हैं, जबकि थोड़ी दूरी पर सुरक्षित कट उपलब्ध है जिसका उपयोग नहीं किया जाता। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कई बसों में क्षमता से कहीं अधिक, लगभग 75 से 80 बच्चों को बैठाया जाता है, जो मोटर वाहन नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस पर परिवहन विभाग की औचक निरीक्षण और कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही, सुबह से दोपहर तक हाईवे किनारे स्कूल बसों की लंबी कतारों को देखकर राष्ट्रीय राजमार्ग को पार्किंग स्थल बनने देने और एनएचएआई, परिवहन विभाग व स्थानीय पुलिस की कथित अनदेखी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगे हैं। इस घटना को केवल एक बस चालक की मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी की कहानी बताते हुए, जनता अब जवाब चाहती है। मांग की गई है कि जिला प्रशासन सभी निजी स्कूल बसों का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण करे, ओवरलोडिंग करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे, हाईवे पर बच्चों को उतारने पर तत्काल रोक लगाए और इस हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही तय करे।2
- नई दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज चौधरी के निजी आवास पर अवध क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश त्रिवेदी के साथ एक शिष्टाचार मुलाकात हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा आगामी चुनावों की तैयारियों एवं रणनीति को लेकर सकारात्मक और सार्थक चर्चा की गई। इस अवसर पर सुल्तानपुर के संयुक्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष के.पी. बाबा ने भी भेंट की और संगठनात्मक विषयों पर अपने विचार साझा किए। यह बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें जनसंपर्क को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के समन्वय स्थापित करने और आगामी चुनावों में संगठन की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक के समापन पर, सभी उपस्थित सदस्यों ने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता भी जताई।1
- सुल्तानपुर जनपद के लंभुआ कोतवाली क्षेत्र में एक स्कूली बस चालक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। यह घटना तब हुई जब चालक स्कूल से छुट्टी होने के बाद बच्चों को सड़क पार करवा रहे थे। इसी दौरान अचानक एक मोटरसाइकिल पर सवार लोगों ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी, जिससे चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में इस सड़क दुर्घटना में स्कूली बस चालक की मौत हो गई, जिसके संबंध में क्षेत्राधिकारी लंभुआ ने जानकारी दी है।1
- धार्मिक नगरी अयोध्या में हाल ही में हुई एक बड़ी चोरी की घटना के बाद स्थानीय जनजीवन और व्यापार पर इसका बेहद गहरा असर देखने को मिल रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं में उपजे डर के कारण मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या में अचानक भारी कमी आ गई है। व्यापारियों ने बताया है कि चोरी की इस वारदात के बाद से मुख्य बाजारों और मंदिर परिसरों के पास सन्नाटा पसरा हुआ है, जिससे श्रद्धालुओं के न आने के कारण उनका व्यापार पूरी तरह ठप हो चुका है।1
- उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में तहसील दिवस के दौरान एक दरोगा जी का वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो में दरोगा जी अपनी टोपी में मोबाइल छिपाकर उसे देखते हुए नजर आ रहे हैं। बताया गया है कि किसी व्यक्ति ने यह वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है।1
- सुल्तानपुर जिले के लम्भुआ तहसील और विकास खण्ड लम्भुआ क्षेत्र की ग्राम पंचायत नौगवां में राशन वितरण के लिए बनाए जा रहे अन्नपूर्णा भवन का बारजा बनते ही भरभरा कर गिर गया। यह हादसा सोमवार दोपहर बारजे का शटरिंग या स्लैब खोलते समय हुआ। इस घटना में वहां काम कर रहा एक मजदूर बाल-बाल बच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद गिरे हुए बारजे के मलबे को जेसीबी लगाकर हटवाया गया और सब कुछ सामान्य दिखाने का प्रयास आनन-फानन में किया गया। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और ठेकेदार की लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।1
- सुल्तानपुर के लम्भुआ कोतवाली क्षेत्र में वाराणसी-लखनऊ हाईवे पर बुधवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूली बस के चालक की मौत हो गई, जबकि मोटरसाइकिल सवार दंपति गंभीर रूप से घायल हो गए। डकाही गांव के पास हुए इस हादसे में आल सेंट्स इंग्लिश स्कूल की बस छुट्टी के बाद बच्चों को उतारकर सड़क की उलटी दिशा में छोड़ने जा रही थी। तभी लम्भुआ से हनुमानगंज जा रहे रमाशंकर गुप्ता की मोटरसाइकिल बस चालक दयाशंकर पाण्डेय से टकरा गई। इस टक्कर से बस चालक दयाशंकर पाण्डेय को गंभीर चोटें आईं और वह गिर पड़े, वहीं मोटरसाइकिल सवार रमाशंकर और 35 वर्षीय जयमाला पत्नी प्रदीप कुमार को भी गहरी चोटें आईं। एंबुलेंस से तीनों को सीएससी लम्भुआ ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बस चालक दयाशंकर पाण्डेय पुत्र बुद्धिराम पाण्डेय को मृत घोषित कर दिया। मोटरसाइकिल चालक रमाशंकर की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें और जयमाला को जिला चिकित्सालय सुल्तानपुर रेफर कर दिया गया। इस घटना के बाद स्कूल प्रशासन, पुलिस और सड़क परिवहन अधिकारियों की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, स्कूल बस में सीमा से अधिक लगभग 75 से 80 बच्चे मौजूद थे, जिस पर न तो स्कूल प्रशासन, न पुलिस और न ही सड़क परिवहन अधिकारियों द्वारा कोई औचक निरीक्षण किया जाता है। जानकारों का कहना है कि यह बड़ी घटना टाली जा सकती थी यदि कट का सहारा लेते हुए बच्चों को सड़क पार कराया जाता या बस को आगे के कट से घुमाकर सही दिशा में ले जाया जाता। दुर्घटना स्थल पर सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक स्कूली बसों की लंबी कतार लगी रहती है और वे सड़क किनारे ही पार्क की जाती हैं, जिस पर एनएचआई, पुलिस या परिवहन विभाग कोई ध्यान नहीं देता। इस स्थिति को बड़ी दुर्घटनाओं को न्योता देने वाला बताया जा रहा है, और पूछा जा रहा है कि क्या यह सभी संबंधित विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।4