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उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के सलैया खालसा गांव में नमामि गंगे हर घर जल योजना की हकीकत कागजों से बिल्कुल अलग है, जहाँ लाखों की लागत से पानी की टंकी तो तैयार हो चुकी है और पाइपलाइन भी बिछाई गई है, लेकिन ग्रामीणों के नलों तक अभी तक पानी नहीं पहुंचा है। स्थिति यह है कि टंकी में प्रदूषित और गंदा पानी भरा है, जिसके कारण भीषण गर्मी में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 'हर घर जल' की योजना केवल कागजों तक ही सीमित है, जबकि वास्तविकता में उनके नल सूखे पड़े हैं। पानी की आपूर्ति ठप होने से वे हैंडपंपों के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर हैं। इस गंभीर पेयजल संकट को देखते हुए सलैया खालसा के ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल नियमित जलापूर्ति की मांग की है और इस योजना की बेअसरता पर सवाल उठाए हैं।
Hari Singh
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के सलैया खालसा गांव में नमामि गंगे हर घर जल योजना की हकीकत कागजों से बिल्कुल अलग है, जहाँ लाखों की लागत से पानी की टंकी तो तैयार हो चुकी है और पाइपलाइन भी बिछाई गई है, लेकिन ग्रामीणों के नलों तक अभी तक पानी नहीं पहुंचा है। स्थिति यह है कि टंकी में प्रदूषित और गंदा पानी भरा है, जिसके कारण भीषण गर्मी में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 'हर घर जल' की योजना केवल कागजों तक ही सीमित है, जबकि वास्तविकता में उनके नल सूखे पड़े हैं। पानी की आपूर्ति ठप होने से वे हैंडपंपों के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर हैं। इस गंभीर पेयजल संकट को देखते हुए सलैया खालसा के ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल नियमित जलापूर्ति की मांग की है और इस योजना की बेअसरता पर सवाल उठाए हैं।
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- हमीरपुर के राठ कोतवाली क्षेत्र के मवई गांव में एक शादी समारोह उस समय मातम में बदल गया, जब गद्दों के ढेर में दबकर एक दो वर्षीय मासूम की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना ने शादी की खुशियों को पलभर में गम में बदल दिया और पूरे परिवार में कोहराम मच गया। मुस्करा थाना क्षेत्र के चंदौरा गांव निवासी मनीष कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी ह्रदेश अपने बच्चों के साथ मवई गांव स्थित अपने मायके में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने आई थीं। गुरुवार को उनका दो वर्षीय पुत्र मृगेंद्र घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान, पास में रखे टेंट-पंडाल के गद्दों का ढेर अचानक उसके ऊपर गिर गया, जिससे वह उसके नीचे दब गया। कुछ देर बाद जब परिजनों को बच्चा नहीं दिखा, तो उन्होंने उसकी तलाश शुरू की और अंततः उसे गद्दों के नीचे दबा हुआ पाया। आनन-फानन में गद्दे हटाकर मृगेंद्र को बाहर निकाला गया और तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राठ ले जाया गया, जहां डॉ. कनिष्क माहु द्वारा जांच करने के बाद भी दो वर्षीय मासूम मृगेंद्र की जान नहीं बचाई जा सकी।1
- बांदा में, चिल्ला पुलिस ने जाली भारतीय मुद्रा के संचरण के एक मामले में कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी तुषार को गिरफ्तार कर लिया है। तुषार पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से फरार चल रहा था।1
- छतरपुर विधायक ने अतिक्रमण के मामले पर कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विधायक ने इस संबंध में अपनी बात रखी और सुनने का आग्रह भी किया।1
- डग्गामार वाहनों का आतंक क्षेत्र में व्याप्त है, जिससे यात्रियों की जान के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है।1
- पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशानुसार चलाए जा रहे वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी अभियान के तहत चिल्ला पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने जाली भारतीय मुद्रा के संचरण करने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी तुषार चन्द्र को बाँदा जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले चार साल से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। तुषार चन्द्र मूल रूप से महोबा के सुरहा, थाना कबरई का निवासी है, जिसका वर्तमान पता बजरंग चौक, कोतवाली महोबा बताया गया है। वर्ष 2021 में एसटीएफ प्रयागराज ने थाना चिल्ला क्षेत्र में जाली नोटों का कारोबार करने वाले एक गिरोह को पकड़ा था, जिसके बाद थाना चिल्ला में संबंधित मामला दर्ज किया गया था। तभी से तुषार चन्द्र, जो इस गिरोह का मुख्य सरगना था, फरार चल रहा था। मुखबिर की सूचना पर चिल्ला पुलिस ने 4 जुलाई 2026 को ग्राम नरी मोड़ के पास से तुषार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से यह जानने के लिए गहन पूछताछ कर रही है कि जेल से छूटने के बाद वह कहाँ-कहाँ रहा और क्या जाली नोटों का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है या नहीं। साथ ही, पुलिस उसके अन्य साथियों के बारे में भी आवश्यक जानकारी जुटा रही है।2
- पनवाड़ी कस्बे में स्वच्छता व्यवस्था की बदहाली से आमजन खासे परेशान हैं, जिसके चलते स्वच्छता अभियान की पोल खुल गई है। कस्बे की कई गलियों और मोहल्लों में कूड़े के ढेर, जाम नालियां और फैली गंदगी ने लोगों के आवागमन को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सफाईकर्मी नियमित रूप से सफाई करने नहीं आते, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। विशेषकर बरसात के मौसम में जलभराव और दुर्गंध के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से इस मामले की जांच कर लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने और कस्बे में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।1