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Praveen Kumar
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- बीते तीन-चार दिन पहले 'टोरंटो एक्सप्रेस' ट्रेन में IRTC के कर्मचारियों को ट्रेन के शौचालय में बर्तन धोते हुए देखा गया। सफर कर रहे एक यात्री की इस पर नजर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने तत्काल अपने मोबाइल से घटना का वीडियो बना लिया। इस घटना ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कितने दिनों से इसी तरह शौचालय में धोए गए बर्तनों में यात्रियों को भोजन परोसा जा रहा होगा और कितने लोगों ने ऐसे बर्तनों में खाना खाया होगा, यह एक बड़ा चिंता का विषय है।1
- गौतम बुद्ध नगर के जैचीपियाना खुर्द तिगरी में, सरकारी स्कूल के पास स्पर वाली गली की नाली की कभी सफाई नहीं होती, जिसके कारण वहाँ बहुत ज़्यादा गंदगी रहती है। तिगरी गोल चक्कर के पास स्थित इस क्षेत्र (पिन 201301) के निवासियों ने जल्द से जल्द नाली की सफाई कराने की अपील की है।2
- गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी में बकरीद के दिन सूर्य चौहान नामक एक हिंदू लड़के की हत्या के बाद एक हैरान करने वाली और गंभीर कहानी सामने आई है, जिसे मूल पोस्ट में 'हिंदू लड़के की कुर्बानी' बताया गया है। इस घटना से उपजा मामला लगातार गर्माता जा रहा है। जानकारी में यह भी बताया गया है कि खोड़ा कॉलोनी में जितने भी मुसलमान निवासी हैं, वे सभी बाहर के रहने वाले हैं और स्वयं भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि वे यहां के स्थानीय निवासी नहीं हैं। सूर्य चौहान का शव पोस्टमार्टम के बाद उनके घर पहुँच गया है, लेकिन उनके परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया है। परिवार ने शव को रखने के लिए एक फ्रीजर मंगवाया है और उनका स्पष्ट कहना है कि अंतिम संस्कार सिर्फ तभी होगा जब सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें मौत की सजा मिलेगी। यह देखना होगा कि योगी सरकार इस संवेदनशील मामले में क्या कार्रवाई करती है। यह सिर्फ किसी धर्म विशेष का मामला नहीं है, बल्कि इसमें यह देखना है कि लोग कितनी निर्दयता से एक बच्चे की जान ले सकते हैं और इस जघन्य कृत्य पर प्रशासन कितनी कठोर कार्रवाई करेगा।1
- बुलंदशहर के सिकंदराबाद कोतवाली की निजामपुर चौकी क्षेत्र के सलेमपुर कायस्थ गांव से जुड़े एक मामले में, युवती की फोटो वायरल करने के आरोप में पुलिस चौकी बुलाए गए एक युवक की तबीयत बिगड़ गई। इस घटना के बाद आरोपी युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह मामला गांव की एक युवती की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोपों से जुड़ा है। 112 नंबर पर मिली शिकायत के बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता और आरोपी पक्ष, दोनों को निजामपुर चौकी बुलाया था। आरोपी की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलने पर, सीओ सिकंदराबाद भास्कर कुमार मिश्रा अपने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दावा किया है कि अस्पताल में भर्ती कराए गए आरोपी की स्थिति सामान्य है।1
- बुलंदशहर के जिला चिकित्सालय में संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सीएमएस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इन कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें नियमानुसार मिलने वाली मासिक चार छुट्टियां नहीं दी जा रही हैं। उनका कहना है कि संविदा नियमावली के अनुसार उन्हें महीने में चार अवकाश का अधिकार है, लेकिन अस्पताल प्रशासन द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें नियमानुसार छुट्टियां उपलब्ध कराई जाएं और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और भी तेज़ करेंगे।4
- बिहार में मौसम ने अचानक एक खतरनाक मोड़ ले लिया है, जिसके कारण कई जिलों में तेज आंधी, भारी बारिश और वज्रपात ने भीषण तबाही मचाई है। इस भयावह मौसम के चलते पेड़ गिरने और दीवारें ढहने जैसी घटनाओं से कई लोगों की मौत हो गई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए, मौसम विभाग ने आगामी 30 और 31 मई के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। जनता से अपील की गई है कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें।1
- एक ऑटो चालक द्वारा व्यक्त की गई गहरी निराशा ने देश के लाखों गरीब लोगों की वर्तमान स्थिति को उजागर किया है। ऑटो चालक ने बताया कि वे पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। इस एक वाक्य ने देश के गरीब तबके की पूरी कहानी को बयां कर दिया, जहां आमदनी का मीटर तो बंद पड़ा है, वहीं महंगाई का ब्रेक फेल हो चुका है और सरकार उनकी चिंताओं को सुनने में बहरी बनी हुई है। सीएनजी से लेकर एलपीजी तक, बच्चों की पढ़ाई से लेकर इलाज तक, और दूध से लेकर खाने के तेल तक — हर वस्तु की बढ़ती कीमत गरीबों के बजट और उनकी रसोई पर सीधा वार कर रही है। ऐसे में, 'महंगाई मानव' मोदी जी की यह सलाह कि “पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल कीजिए,” उन लोगों के लिए और भी पीड़ादायक है जो खुद पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रीढ़ हैं और आज महंगाई के बोझ तले पूरी तरह टूट रहे हैं। परिणामस्वरूप, आज इन लोगों की थाली में रोटी-दाल के साथ एक गंभीर सवाल भी है कि कल की रोटी कहाँ से आएगी, जो उनके अनिश्चित भविष्य की चिंता को दर्शाता है।1
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