ब्रेकिंग न्यूज़ जनपद बलरामपुर उत्तर प्रदेश देवीपाटन मंडल मानसिकता न्यूज़ सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल: करोड़ों की जल जीवन मिशन योजना, सामुदायिक शौचालय और कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था बनी शोपीस! बलरामपुर। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इन योजनाओं की जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां करती नजर आ रही है। जल जीवन मिशन, सामुदायिक शौचालय और कूड़ा प्रबंधन जैसी योजनाओं को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकार का दावा है कि जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से गांवों में पानी की टंकियों का निर्माण भी कराया गया है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर टंकी का निर्माण पूरा होने के बावजूद आज तक नियमित रूप से पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में घर-घर कनेक्शन और पानी की सप्लाई दिखाई जा रही है, जबकि मौके पर कई परिवार अभी भी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि प्रत्येक गांव में पानी की टंकी के बजाय जरूरत के हिसाब से कई बोरिंग कराई जातीं, तो किसानों और ग्रामीण परिवारों को पानी की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती थी। सामुदायिक शौचालयों पर भी उठे सवाल सरकार द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों की स्थिति भी जांच का विषय बनी हुई है। मौके पर कई शौचालयों में ताला लगा हुआ दिखाई देने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के मुताबिक, शौचालय बनने के बाद से उसका नियमित उपयोग नहीं हुआ। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि शौचालयों की देखरेख के लिए नियुक्त कर्मचारियों/केयरटेकर का भुगतान किया जा रहा है और रखरखाव के नाम पर भी धनराशि खर्च हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सामुदायिक शौचालय का उपयोग ही नहीं हो रहा है, तो उसके रखरखाव और केयरटेकर की व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है? कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों और कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था भी की गई है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नियमित रूप से नहीं पहुंचतीं और कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था भी प्रभावी नजर नहीं आती। ऐसे में सरकारी योजनाओं पर खर्च होने वाली बड़ी धनराशि और उसके वास्तविक लाभ को लेकर ग्रामीणों में सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही का इंतजार एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बड़े स्तर पर योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ यदि योजनाओं का लाभ जमीन पर लोगों तक नहीं पहुंच रहा है तो इसकी जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है। क्या जल जीवन मिशन के तहत वास्तव में घर-घर पानी पहुंच रहा है? क्या सामुदायिक शौचालयों का नियमित उपयोग हो रहा है? क्या केयरटेकर और रखरखाव के नाम पर खर्च होने वाली धनराशि का सही उपयोग हो रहा है? क्या कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नियमित रूप से संचालित हो रही हैं? ये तमाम सवाल अब जांच की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल जीवन मिशन, सामुदायिक शौचालय और कूड़ा प्रबंधन योजनाओं का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हैं या फिर सरकारी योजनाओं की यह जमीनी हकीकत कागजों में ही दुरुस्त दिखाई देती रहेगी।
ब्रेकिंग न्यूज़ जनपद बलरामपुर उत्तर प्रदेश देवीपाटन मंडल मानसिकता न्यूज़ सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल: करोड़ों की जल जीवन मिशन योजना, सामुदायिक शौचालय और कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था बनी शोपीस! बलरामपुर। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इन योजनाओं की जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां करती नजर आ रही है। जल जीवन मिशन, सामुदायिक शौचालय और कूड़ा प्रबंधन जैसी योजनाओं को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकार का दावा है कि जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से गांवों में पानी की टंकियों का निर्माण भी कराया गया है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर टंकी का निर्माण पूरा होने के बावजूद आज तक नियमित रूप से पानी की सप्लाई
शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में घर-घर कनेक्शन और पानी की सप्लाई दिखाई जा रही है, जबकि मौके पर कई परिवार अभी भी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि प्रत्येक गांव में पानी की टंकी के बजाय जरूरत के हिसाब से कई बोरिंग कराई जातीं, तो किसानों और ग्रामीण परिवारों को पानी की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती थी। सामुदायिक शौचालयों पर भी उठे सवाल सरकार द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों की स्थिति भी जांच का विषय बनी हुई है। मौके पर कई शौचालयों में ताला लगा हुआ दिखाई देने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के मुताबिक, शौचालय बनने के बाद से उसका नियमित उपयोग नहीं हुआ। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि शौचालयों की देखरेख के लिए नियुक्त कर्मचारियों/केयरटेकर का भुगतान किया जा रहा है और रखरखाव के
नाम पर भी धनराशि खर्च हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सामुदायिक शौचालय का उपयोग ही नहीं हो रहा है, तो उसके रखरखाव और केयरटेकर की व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है? कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों और कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था भी की गई है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नियमित रूप से नहीं पहुंचतीं और कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था भी प्रभावी नजर नहीं आती। ऐसे में सरकारी योजनाओं पर खर्च होने वाली बड़ी धनराशि और उसके वास्तविक लाभ को लेकर ग्रामीणों में सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही का इंतजार एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बड़े स्तर पर योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ यदि योजनाओं का लाभ जमीन पर लोगों तक
नहीं पहुंच रहा है तो इसकी जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है। क्या जल जीवन मिशन के तहत वास्तव में घर-घर पानी पहुंच रहा है? क्या सामुदायिक शौचालयों का नियमित उपयोग हो रहा है? क्या केयरटेकर और रखरखाव के नाम पर खर्च होने वाली धनराशि का सही उपयोग हो रहा है? क्या कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नियमित रूप से संचालित हो रही हैं? ये तमाम सवाल अब जांच की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल जीवन मिशन, सामुदायिक शौचालय और कूड़ा प्रबंधन योजनाओं का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हैं या फिर सरकारी योजनाओं की यह जमीनी हकीकत कागजों में ही दुरुस्त दिखाई देती रहेगी।
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- ब्रेकिंग न्यूज़ जनपद बलरामपुर देवी पाटन मंडल उत्तर प्रदेश मानसिकता न्यूज़ सावन के दूसरे सोमवार के दिन श्री काशी विश्वनाथ धाम के परिक्षेत्र में प्रशासन की चपे चपे पर नजर रखी जा रही है1
- मिशन शक्ति अभियान में महिलाओं व बालिकाओं को सुरक्षा के प्रति किया जागरूक श्रावस्ती। महिलाओं, बालिकाओं एवं छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के उद्देश्य से जनपद में मिशन शक्ति फेज-5.0 (द्वितीय चरण) के तहत जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक चंद्रकेश सिंह एवं क्षेत्राधिकारीगण के पर्यवेक्षण में शक्ति मोबाइल टीम गांवों, कस्बों और बाजारों में चौपाल व संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है।अभियान के दौरान महिलाओं एवं बालिकाओं को गुड टच-बैड टच, महिला सुरक्षा कानून, आत्मरक्षा, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ और साइबर अपराध से बचाव की जानकारी दी जा रही है। किशोरियों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, सड़क सुरक्षा तथा किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों से भी अवगत कराया गया।साइबर जागरूकता के तहत फर्जी लिंक, फिशिंग कॉल से बचने, ओटीपी व बैंकिंग जानकारी गोपनीय रखने तथा साइबर ठगी की स्थिति में 1930 पर सूचना देने की जानकारी दी गई। साथ ही 1090, 112, 108, 1098, 102, 181 और 1076 हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देकर इनके उपयोग के लिए जागरूक किया गया। कार्यक्रमों में जागरूकता पंपलेट भी वितरित किए गए।1
- Breking news :- बलरामपुर कलेक्ट्रेट ऑफिस में जहरीला साप निकलने से हड़कंप Breking news :- बलरामपुर कलेक्ट्रेट ऑफिस में जहरीला साप निकलने से हड़कंप1
- कराची में मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी, देश भर में फूटा गुस्सा। कराची के कय्यूमाबाद इलाके में एक 18 महीने की मासूम बच्ची (अज़ल) के साथ उसके ही एक रिश्तेदार ने हैवानियत की हदें पार कर दीं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए समाज में जागरूकता और सख्त से सख्त सजा की जरूरत है। #Karachi #JusticeForAzal #ChildSafety कराची में मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी, देश भर में फूटा गुस्सा। कराची के कय्यूमाबाद इलाके में एक 18 महीने की मासूम बच्ची (अज़ल) के साथ उसके ही एक रिश्तेदार ने हैवानियत की हदें पार कर दीं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए समाज में जागरूकता और सख्त से सख्त सजा की जरूरत है। #Karachi #JusticeForAzal #ChildSafety1