जुलूस तो निकलेगा, पर इस बार शर्म का! UPSC में फर्जी 113वीं रैंक का दावा करने वाली 'शिखा' की खुली पोल #Apkiawajdigital बुलंदशहर | गुरुवार, 12 मार्च 2026 विशेष संवाददाता यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का दावा करना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन बुलंदशहर की एक शिखा के लिए यह उपलब्धि तब 'हास्यास्पद' बन गई जब उन्होंने बिना रोल नंबर मिलान किए ही अपनी जीत का ढोल पीट दिया। खबर यह है कि जिस शिखा ने बड़े ही धूमधाम से अपना विजय जुलूस निकलवाया था, उनका नाम मेरिट लिस्ट में था ही नहीं। जुलूस अब भी निकलेगा, लेकिन शर्म का! सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे बुलंदशहर की शिखा ने यूपीएससी में 113वीं रैंक आने का दावा कर गाजे-बाजे के साथ अपना जुलूस निकलवाया था। मिठाई बांटी गई, ढोल-नगाड़े बजे और पूरे क्षेत्र में उनकी चर्चा होने लगी। लेकिन, अब जब सच्चाई सामने आई है कि वह मुख्य परीक्षा (Mains) में भी उत्तीर्ण नहीं हो सकी थीं, तो सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग तंज कस रहे हैं कि "जुलूस तो निकलेगा, पर इस बार जीत का नहीं, बल्कि फर्जीवाड़े के शर्म का।" 'नाम की समानता' का लिया सहारा? इस अजीबोगरीब वाकये पर शिखा का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने सफाई दी कि, "उसका भी नाम शिखा है, मेरा भी। मैंने PDF में सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर नहीं।" प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नाम के आधार पर UPSC जैसी परीक्षा में सफलता का दावा करना न केवल लापरवाही है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की गरिमा को कम करने जैसा है। सच्चाई यह है कि 113वीं रैंक हरियाणा की एक अन्य शिखा ने प्राप्त की है, न कि बुलंदशहर की इस शिखा ने। वायरल वीडियो ने खोली पोल सोशल मीडिया पर उनका जश्न मनाते हुए जो वीडियो मंगलवार, 10 मार्च 2026 को वायरल हुआ था, आज वही वीडियो उनकी फजीहत का कारण बना हुआ है। जहाँ पहले लोग उन्हें बधाई दे रहे थे, वहीं अब उनके इस 'झूठे दावे' को लेकर ट्रोलिंग का सिलसिला जारी है। यह घटना उन सभी उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा सबक है जो बिना तथ्यों की पुष्टि किए सोशल मीडिया पर अपनी 'सफलता' का बखान करते हैं। बुलंदशहर की इस घटना ने साबित कर दिया है कि सच्चाई छिपाने से नहीं, बल्कि मेहनत से ही सामने आती है।
जुलूस तो निकलेगा, पर इस बार शर्म का! UPSC में फर्जी 113वीं रैंक का दावा करने वाली 'शिखा' की खुली पोल #Apkiawajdigital बुलंदशहर | गुरुवार, 12 मार्च 2026 विशेष संवाददाता यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का दावा करना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन बुलंदशहर की एक शिखा के लिए यह उपलब्धि तब 'हास्यास्पद' बन गई जब उन्होंने बिना रोल नंबर मिलान किए ही अपनी जीत का ढोल पीट दिया। खबर यह है कि जिस शिखा ने बड़े ही धूमधाम से अपना विजय जुलूस निकलवाया था, उनका नाम मेरिट लिस्ट में था ही नहीं। जुलूस अब भी निकलेगा, लेकिन शर्म का! सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे बुलंदशहर की शिखा ने यूपीएससी में 113वीं रैंक आने का दावा कर गाजे-बाजे के साथ अपना जुलूस निकलवाया था। मिठाई बांटी गई, ढोल-नगाड़े बजे और पूरे क्षेत्र में उनकी चर्चा होने लगी। लेकिन, अब जब सच्चाई सामने आई है कि वह मुख्य परीक्षा (Mains) में भी उत्तीर्ण नहीं हो सकी थीं, तो सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग तंज कस रहे हैं कि "जुलूस तो निकलेगा, पर इस बार जीत का नहीं, बल्कि फर्जीवाड़े के शर्म का।" 'नाम की समानता' का लिया सहारा? इस अजीबोगरीब वाकये पर शिखा का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने सफाई दी कि, "उसका भी नाम शिखा है, मेरा भी। मैंने PDF में सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर नहीं।" प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नाम के आधार पर UPSC जैसी परीक्षा में सफलता का दावा करना न केवल लापरवाही है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की गरिमा को कम करने जैसा है। सच्चाई यह है कि 113वीं रैंक हरियाणा की एक अन्य शिखा ने प्राप्त की है, न कि बुलंदशहर की इस शिखा ने। वायरल वीडियो ने खोली पोल सोशल मीडिया पर उनका जश्न मनाते हुए जो वीडियो मंगलवार, 10 मार्च 2026 को वायरल हुआ था, आज वही वीडियो उनकी फजीहत का कारण बना हुआ है। जहाँ पहले लोग उन्हें बधाई दे रहे थे, वहीं अब उनके इस 'झूठे दावे' को लेकर ट्रोलिंग का सिलसिला जारी है। यह घटना उन सभी उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा सबक है जो बिना तथ्यों की पुष्टि किए सोशल मीडिया पर अपनी 'सफलता' का बखान करते हैं। बुलंदशहर की इस घटना ने साबित कर दिया है कि सच्चाई छिपाने से नहीं, बल्कि मेहनत से ही सामने आती है।
- बांदा कमासिन ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुडवारा की तस्वीर एक ऐसी विडंबना को उजागर करती है, जो हमारे प्राथमिक शिक्षा तंत्र की जमीनी हकीकत को बेनकाब करती है। विद्यालय प्रतिदिन समय से खुलता है—रसोइया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ताला खोल देता है—लेकिन जिन कंधों पर शिक्षा का दायित्व है, वे अध्यापक समयपालन के मूलभूत सिद्धांत से ही विमुख दिखाई देते हैं। यह केवल देरी का प्रश्न नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता के क्षरण का संकेत है। जिन बच्चों के लिए विद्यालय अनुशासन, ज्ञान और प्रेरणा का केंद्र होना चाहिए, वहां उन्हें शिक्षकों की अनुपस्थिति का इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि उनके मन में शिक्षा व्यवस्था के प्रति एक नकारात्मक संदेश भी जाता है। और भी चिंताजनक यह है कि व्यवस्था का निचला स्तर—रसोइया—अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभा रहा है, जबकि मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद शिक्षक ही अपने कर्तव्यों से पीछे हटते नजर आते हैं। यह असंतुलन शिक्षा तंत्र की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।यदि समयपालन जैसी बुनियादी अपेक्षा भी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना कैसे साकार होगी? आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी इस स्थिति को गंभीरता से लें और जवाबदेही तय करते हुए ठोस कदम उठाएं, ताकि विद्यालय केवल भवन न रह जाए, बल्कि वास्तव में शिक्षा और संस्कार का केंद्र बन सके।1
- “पत्नी की हत्या के बाद आरोपी ने लगाई फांसी, बबेरू में डबल क्राइम से सनसनी” #बांदा के बबेरू थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है… जहां ग्राम बगेहटा निवासी 48 वर्षीय मुबिन शेख ने 16 अप्रैल को अपनी पत्नी की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या कर दी थी… जिसके बाद से आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी थी… वहीं आज 20 अप्रैल को आरोपी मुबिन शेख ने थाना बबेरू क्षेत्र के ग्राम गौरीखानपुर में एक पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली… घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है… पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है… इस पूरे घटनाक्रम पर अपर पुलिस अधीक्षक बांदा ने जानकारी दी है… #BandaNews #Baberu #CrimeNews #UPPolice #BreakingNews #DoubleCrime #Justice #HindiNews #followers #highlightseveryone1
- hamare gav rod mare mohalle me pani pareshani hame mohalle me nala bharne se qharo mein pani qhusne lagta hain or hamari bagheta se semaini rod ki halat bahot khasta hain parshasan koi kam nhi kar rha hain5
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | मौदहा (हमीरपुर) मौदहा नगर में भीषण जाम से आमजन बेहाल। सुबह होते ही तहसील मार्ग,मेन मार्केट व पुराना बांदा बस स्टॉप क्षेत्र पूरी तरह जाम की चपेट में। लंबी वाहन कतारों से राहगीरों, स्कूली बच्चों व नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चौंकाने वाली बात—मौके पर न ट्रफिक पुलिस और न ही कोतवाली पुलिस, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ा। नगरवासियों ने प्रशासन से तत्काल जाम खुलवाने और नियमित व्यवस्था की मांग की।1
- Post by Amar Singh patel1
- हो रही जनता के साथ नाइंसाफी के खिलाफ विद्युत विभाग के भ्रष्टाचार के खिलाफ नगर के समाज सेवायों के साथ मिलकर समजसेवी अरशद मामा ने दिया उप जिला अधिकारी को ज्ञापन1
- Post by JSB NEWS UP1
- मौदहा जनगणना को लेकर अध्यापकों का प्रशिक्षण शुरू ➡️ नगरपालिका के मीटिंग हाल में तीन दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ ➡️ शिक्षकों को डोर-टू-डोर सर्वे व प्रपत्र भरने की दी जा रही जानकारी ➡️ मोबाइल एप के माध्यम से डाटा अपलोड करने का भी प्रशिक्षण ➡️ पहली बैच 22 अप्रैल तक, दूसरी बैच 26 अप्रैल से होगी शुरू ➡️ करीब आधा सैकड़ा शिक्षक प्रशिक्षण में शामिल1