गढ़वा जिले के चिनिया मुख्यालय निवासी प्रभात खबर के स्थानीय पत्रकार महमुद अंसारी ने अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता से दो एकड़ बंजर भूमि को हरे-भरे आम बागान में बदलकर एक नई मिसाल कायम की है। उनका यह अनूठा प्रयास आज न सिर्फ फल दे रहा है, बल्कि क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। मामू अंसारी ने बताया कि करीब छह वर्ष पूर्व उन्होंने अपनी इस बंजर भूमि पर आम की बागवानी शुरू की थी। शुरुआत में जमीन तैयार करने से लेकर पौधों की देखभाल तक कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। इसी लगन और समर्पण का परिणाम है कि आज उनके बागान में सैकड़ों आम के पेड़ लहलहा रहे हैं और स्वादिष्ट विभिन्न किस्मों के आम के फल देना शुरू कर चुके हैं। बागान में लगाए गए आम के पौधों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों ही बेहतर हैं, और आने वाले वर्षों में यह एक बड़ा आय का स्रोत बनने वाला है। शुक्रवार को प्रखंड क्षेत्र के कई पत्रकारों ने इस बागवानी स्थल का निरीक्षण किया और महमुद अंसारी के इस कमाल की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस भूमि को लोग अनुपयोगी मानते थे, उसी पर आज हरियाली और सफलता की नई कहानी लिखी जा रही है। दैनिक जागरण के पत्रकार मनोज प्रसाद ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि महमूद अंसारी का यह कार्य दर्शाता है कि इच्छाशक्ति और मेहनत से बंजर जमीन भी सोना उगल सकती है। उन्होंने किसानों और युवाओं से इस मॉडल से प्रेरणा लेकर अपनी खाली पड़ी भूमि का सदुपयोग करने, बागवानी और आधुनिक खेती से रोजगार के अवसर पैदा करने तथा लाखों रुपये की आय अर्जित करने की अपील की। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि मामू अंसारी ने पत्रकारिता के साथ-साथ कृषि के क्षेत्र में भी अपनी एक नई पहचान बनाई है। उनका यह आम बागान आज इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मेहनत और धैर्य से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है, जहाँ कलम के साथ खेती का यह कमाल लाखों की उम्मीद जगा रहा है।
गढ़वा जिले के चिनिया मुख्यालय निवासी प्रभात खबर के स्थानीय पत्रकार महमुद अंसारी ने अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता से दो एकड़ बंजर भूमि को हरे-भरे आम बागान में बदलकर एक नई मिसाल कायम की है। उनका यह अनूठा प्रयास आज न सिर्फ फल दे रहा है, बल्कि क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। मामू अंसारी ने बताया कि करीब छह वर्ष पूर्व उन्होंने अपनी इस बंजर भूमि पर आम की बागवानी शुरू की थी। शुरुआत में जमीन तैयार करने से लेकर पौधों की देखभाल तक कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। इसी लगन और समर्पण का परिणाम है कि आज उनके बागान में सैकड़ों आम के पेड़ लहलहा रहे हैं और स्वादिष्ट विभिन्न किस्मों के आम के फल देना शुरू कर चुके हैं। बागान में लगाए गए आम के पौधों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों ही बेहतर हैं, और आने वाले वर्षों में यह एक बड़ा आय का स्रोत बनने वाला है। शुक्रवार को प्रखंड क्षेत्र के कई पत्रकारों ने इस बागवानी स्थल का निरीक्षण किया और महमुद अंसारी के इस कमाल की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस भूमि को लोग अनुपयोगी मानते थे, उसी पर आज हरियाली और सफलता की नई कहानी लिखी जा रही है। दैनिक जागरण के पत्रकार मनोज प्रसाद ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि महमूद अंसारी का यह कार्य दर्शाता है कि इच्छाशक्ति और मेहनत से बंजर जमीन भी सोना उगल सकती है। उन्होंने किसानों और युवाओं से इस मॉडल से प्रेरणा लेकर अपनी खाली पड़ी भूमि का सदुपयोग करने, बागवानी और आधुनिक खेती से रोजगार के अवसर पैदा करने तथा लाखों रुपये की आय अर्जित करने की अपील की। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि मामू अंसारी ने पत्रकारिता के साथ-साथ कृषि के क्षेत्र में भी अपनी एक नई पहचान बनाई है। उनका यह आम बागान आज इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मेहनत और धैर्य से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है, जहाँ कलम के साथ खेती का यह कमाल लाखों की उम्मीद जगा रहा है।
- मंगलवार को चिनिया थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती गांव परशुखाड़ में थाना प्रभारी बीकू कुमार रजक के नेतृत्व में पुलिस द्वारा एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को विभिन्न सामाजिक बुराइयों और अपराधों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को सड़क सुरक्षा नियमों, नशा मुक्ति, डायल-112 की उपयोगिता, डायन-भूत जैसी अंधविश्वासी कुरीतियों से बचाव, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम तथा बाल विवाह निषेध कानून की विस्तार से जानकारी दी गई। थाना प्रभारी बीकू कुमार रजक ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि समाज में फैली कुरीतियों और अपराधों के खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने लोगों से किसी भी आपात स्थिति या अपराध की सूचना तत्काल डायल-112 पर देने का आग्रह किया। साथ ही, नशे से दूर रहने और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से समाप्त करने में प्रशासन का सहयोग करने का आह्वान किया। इस जन-जागरूकता अभियान में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष और थाना के सशस्त्र बल के जवान उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए मांग की कि ऐसे कार्यक्रमों को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।1
- गढ़वा जिले के कल्याणपुर में स्थित एक चिकित्सा केंद्र सभी बीमारियों के इलाज का दावा करता है, जिसके चलते यह अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस केंद्र पर दूर-दूर से मरीज अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहाँ मरीजों को बेहतर परामर्श और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।1
- ज्ञान बिंदु कोचिंग (Gyan Bindu GS Academy) के संचालक रौशन आनंद का मर्डर नहीं हुआ है; बल्कि उनके छोटे भाई प्रिंस यादव की नेपाल के एक होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। प्रिंस यादव, जो कि पहले खान सर के कोचिंग (Khan Global Studies) विवाद में आरोपी थे, की नेपाल के एक होटल में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हुई है। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद, ज्ञान बिंदु के निदेशक रौशन आनंद ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि उनके भाई की हत्या एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। उन्होंने खुले तौर पर खान सर (Faisal Khan) और किसान कोल्ड स्टोरेज के मालिक आरएस प्रसाद पर अपने भाई की हत्या का आरोप लगाया है। नेपाल पुलिस ने अभी तक प्रिंस की मौत के कारणों की पुष्टि नहीं की है और वे पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं। इस दुखद घटना के बाद, रौशन आनंद पटना में लोगों को संबोधित करते हुए भी देखे गए।1
- झारखंड के गढ़वा जिले के लिए यह गौरव और खुशी की बात है कि स्थानीय फिल्म "लॉकडाउन के गोद में" को प्रतिष्ठित चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। इस उपलब्धि से जिले के फिल्म प्रेमियों, कलाकारों और युवाओं में उत्साह का माहौल है। यह फिल्म लॉकडाउन काल की संवेदनशील परिस्थितियों और आम लोगों के संघर्ष की कहानी को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत करती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे महज 20 वर्षीय युवा फिल्मकार विजय हिंद ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद मोबाइल फोन से शूट किया। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी (डीओपी) में नीरज कुमार, रवि रंजन और रमेश बाबू का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जबकि अजय बाबू समेत पूरी टीम ने निर्माण कार्य में अहम भूमिका निभाई। इस फिल्म का निर्माण गढ़वा के वरिष्ठ फिल्म निर्माता दयाशंकर गुप्ता द्वारा किया गया है। निर्माता दयाशंकर गुप्ता ने इस चयन पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे झारखंड से आई सैकड़ों फिल्मों के बीच गढ़वा की फिल्म का चुना जाना जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गढ़वा में फिल्म निर्माण के लिए आधुनिक संसाधनों और सुविधाओं की कमी के बावजूद, यहां के युवा कलाकार अपनी प्रतिभा, मेहनत और जुनून से लगातार नई पहचान बना रहे हैं, जिसका उदाहरण विजय हिंद जैसे युवा फिल्मकार हैं जो दर्शाते हैं कि लगन और समर्पण से सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। "लॉकडाउन के गोद में" ने अपने प्रदर्शन के दौरान दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की थी और लॉकडाउन के दौरान आम लोगों की पीड़ा, संघर्ष व भावनात्मक पहलुओं को दर्शाने वाली इस फिल्म को एक प्रमुख न्यूज चैनल पर लगभग 20 लाख दर्शकों ने देखा था, जिसकी कहानी और प्रस्तुति को खूब सराहा गया। जानकारी के अनुसार, यह फिल्म 26 जून से 28 जून तक रांची स्थित सरला बिरला यूनिवर्सिटी में आयोजित चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की जाएगी। इस आयोजन में बॉलीवुड के कई प्रसिद्ध कलाकार, लेखक, निर्देशक और निर्माता शामिल होंगे, और ऐसे मंच पर गढ़वा की फिल्म का प्रदर्शन जिले के लिए सम्मान की बात मानी जा रही है। फिल्म के चयन की खबर मिलते ही गढ़वा जिले में खुशी का माहौल है, जहां कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों ने इसे स्थानीय प्रतिभाओं की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि जिले के अन्य युवा कलाकारों को भी प्रेरणा देगी और क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान प्राप्त होगी। वहीं, युवा फिल्मकार विजय हिंद की हालिया फिल्म "हॉस्पिटल" भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, जो दर्द, संघर्ष और रोमांच से भरपूर है। इसमें विजय हिंद मुख्य भूमिका में हैं, जबकि अभिनेत्री रौनक तिवारी ने अपने प्रभावशाली अभिनय से कहानी को मजबूत बनाया है। निर्माता दयाशंकर गुप्ता ने "हॉस्पिटल" के अंतिम क्लाइमैक्स की विशेष प्रशंसा की है, जिसे वे दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ने वाला मानते हैं। विजय हिंद ने दर्शकों के प्यार, स्नेह और आशीर्वाद को बेहतर फिल्में बनाने की प्रेरणा बताया है, यह कहते हुए कि उनका सपना है कि गढ़वा की फिल्मों को राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पहचान मिले। गढ़वा की इस उपलब्धि को क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। फिल्म प्रेमियों का मानना है कि स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और समर्पण आने वाले समय में गढ़वा को झारखंड के महत्वपूर्ण फिल्म केंद्रों में शामिल कर सकता है, और "लॉकडाउन के गोद में" का चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में चयन जिले की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय प्रतिभाओं के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बन गया है।1
- सोनभद्र के दुद्धी स्थित सरकारी अस्पताल से एक घायल व्यक्ति को निजी अस्पताल ले जाने और फिर बाइक से उसका शव वापस सरकारी अस्पताल में छोड़ जाने के एक गंभीर मामले का उच्चाधिकारियों ने संज्ञान लिया है। इस घटना के बाद, दुद्धी में एसीएमओ ने मामले की जांच की। जांच पूरी होने पर, एसीएमओ ने स्थानीय थाने में एक तहरीर दी है और इस पूरे प्रकरण पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है।1
- बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड में प्रशासन ने छात्रावास की भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राजस्व, वन और पुलिस विभाग की एक संयुक्त टीम, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में, अवैध कब्जा हटाने का अभियान चला रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उन मकानों पर की जा रही है जो छात्रावास की भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए थे। इस अभियान के तहत, खबर लिखे जाने तक, लगभग 9 मकानों को बुलडोजर चलाकर कब्जामुक्त कराया जा चुका है। कुल 17 मकानों से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया अभी भी जारी है। मौके पर रामानुजगंज के एसडीएम, तहसीलदार, तथा राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहकर पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह कार्रवाई केवल छात्रावास की भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रावास की भूमि सहित तीन गांवों में चिन्हित अन्य अतिक्रमणों पर भी की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।2
- बलरामपुर में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव के दौरान बच्चों का आत्मीयता से स्वागत किया गया।1
- गढ़वा के चर्चित समाजसेवी विकास माली का गया स्थित कार्यालय इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि इस कार्यालय से विभिन्न सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन किया जाता है। कार्यालय की व्यवस्था और उसकी कार्यशैली को देखकर लोग काफी प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहीं से कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रभावी ढंग से निगरानी की जाती है। यह कार्यालय अपनी खासियत और कामकाज के तरीके के कारण लोगों के बीच लोकप्रियता बटोर रहा है।1