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सोनभद्र जिले की नवगठित ओबरा तहसील के ग्राम पंचायत कोटा (गुरमुरा) में एक आदिवासी की भूमि के क्रय-विक्रय का मामला अत्यंत संवेदनशील मोड़ पर पहुँच गया है। 30 मई 2026 को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत और 31 मई 2026 को स्थानीय समाचारों व सोशल मीडिया पर उभरे जन-आक्रोश ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को गहन संवीक्षा के घेरे में ला दिया है। प्रार्थी पारस गोंड ने वर्तमान सरकार के माननीय राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड और उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसे सत्तापक्ष ने राजनैतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू इसका समय-अंतराल है, जो प्राथमिक जांच का मुख्य बिंदु बनता है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, भूमि का निबंधन 12 अक्टूबर 2022 को हुआ था और प्रार्थी के कथनानुसार, वर्ष 2023 की दीपावली पर इसका भौतिक कब्जा भी प्रतिपक्षी को सौंप दिया गया था, जिसके बाद वहाँ बाउंड्रीवाल बनी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब भूमि हस्तांतरण और कब्जे का यह प्रक्रम वर्ष 2022-23 में पूरा हो गया था, तो पीड़ित पक्ष ने लगभग 3 साल तक, यानी मई 2026 तक, किसी भी सक्षम मंच पर आपत्ति क्यों दर्ज नहीं कराई। आगामी राजनैतिक सरगर्मियों से ठीक पहले इस मामले का अचानक सामने आना, इसके पीछे किसी पूर्व-निर्धारित राजनैतिक बिसात या चुनावी रंजिश की आशंका को बल देता है। यदि प्रार्थी के इस दावे को सही माना जाए कि डीड में उल्लिखित 10 लाख रुपये की प्रतिफल राशि उसके बैंक खाते में नहीं आई, तो यह सीधे तौर पर निबंधन विभाग की शुरुआती जांच प्रणाली की विफलता को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश निबंधन नियमावली के तहत, उप-निबंधक का यह अनिवार्य दायित्व है कि वह निबंधन स्थल पर क्रेता और विक्रेता के बीच वित्तीय संतुष्टि की ऑन-कैमरा पुष्टि करे। ओबरा निबंधन कार्यालय के स्तर पर यह गंभीर तकनीकी चूक दिखती है कि अधिकारी द्वारा डीड में वर्णित ऑनलाइन ट्रांजैक्शन या आरटीजीएस रसीद का भौतिक मिलान क्यों नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त, यदि राजस्व संहिता की स्थापित प्रक्रियाओं और नामान्तरण की नोटिस अवधि का अनुपालन हल्का लेखपाल, कानूनगो और तत्कालीन क्षेत्राधिकारी द्वारा मजबूती से किया गया होता, तो यह विवाद इस स्तर तक नहीं पहुँचता। इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद आम नागरिकों के बीच जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक तंत्र के कथित गठजोड़ को लेकर नकारात्मक धारणा बन रही है। पूर्व की प्रशासनिक विसंगतियों के चलते इस घटना ने स्थानीय स्तर पर आक्रोश को बढ़ावा दिया है। तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के ओबरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सुनील सिंह गोंड की सोशल मीडिया पोस्ट्स का विवरण लगभग 100% एक जैसा है। दो अलग-अलग राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों द्वारा एक ही समय पर एक समान शब्दों और प्रारूप में नैरेटिव स्थापित करना यह दर्शाता है कि इस आदिवासी भूमि प्रकरण को प्रशासनिक सुधार के बजाय एक सोचे-समझे राजनैतिक हथियार के रूप में उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। राजस्व अभिलेखों के संचालन के दौरान ए०आर०ओ० (सहायक रिकॉर्ड अधिकारी) ओबरा के स्तर पर मूल खातेदारों का नाम अलग किए जाने के बाद, प्रार्थी द्वारा विधिक उपचार हेतु दाखिल किया गया पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्र अभी भी लंबित है। प्रशासन की कार्य करने और सत्य तक पहुँचने की क्षमता पर यह एक गंभीर प्रश्नचिह्न है कि इस प्रकार के संवेदनशील और अनुसूचित जनजाति से जुड़े भूमि विवादों की फाइलों को लंबे समय तक लंबित क्यों रखा जाता है। यह प्रशासनिक शिथिलता ही धरातल पर भ्रम और टकराव की स्थिति उत्पन्न करती है। जिला प्रशासन को इस पूरे मामले को दीवानी अदालत की अंतहीन प्रक्रिया में धकेलने के बजाय, प्रशासनिक स्तर पर ही हल करने के लिए निम्नलिखित तीन बिंदुओं पर त्वरित और पारदर्शी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी: पहला, ओबरा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा निबंधन के स्थल पर प्रतिफल राशि के वास्तविक बैंक ट्रांजैक्शन का भौतिक मिलान क्यों नहीं किया गया और इस लापरवाही के लिए उत्तरदायी अधिकारियों पर क्या विभागीय कार्रवाई होगी? दूसरा, यदि वर्ष 2023 से भूमि पर भौतिक कब्जा हस्तांतरित था, तो शिकायत में 3 साल की देरी के मूल कारणों और राजनैतिक दलों के एकसमान सोशल मीडिया नैरेटिव के पीछे की वास्तविक कड़ियों की निष्पक्ष जांच क्या है? तीसरा, ए०आर०ओ० ओबरा के स्तर पर लंबित पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्र पर राजस्व विभाग अपनी विस्तृत आख्या सार्वजनिक कर इस त्रुटिपूर्ण निबंधन की सत्यता को अविलंब स्पष्ट क्यों नहीं करता? सोनभद्र जिला प्रशासन की त्वरित कार्यशैली और निष्पक्ष जांच ही इस राजनैतिक-प्रशासनिक चक्रव्यूह के बीच छिपे वास्तविक सत्य को सामने ला सकती है।

1 hr ago
user_Abhishek agrahari संस्थापक सोन
Abhishek agrahari संस्थापक सोन
Student union ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago
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सोनभद्र जिले की नवगठित ओबरा तहसील के ग्राम पंचायत कोटा (गुरमुरा) में एक आदिवासी की भूमि के क्रय-विक्रय का मामला अत्यंत संवेदनशील मोड़ पर पहुँच गया है। 30 मई 2026 को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत और 31 मई 2026 को स्थानीय समाचारों व सोशल मीडिया पर उभरे जन-आक्रोश ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को गहन संवीक्षा के घेरे में ला दिया है। प्रार्थी पारस गोंड ने वर्तमान सरकार के माननीय राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड और उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसे सत्तापक्ष ने राजनैतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू इसका समय-अंतराल है, जो प्राथमिक जांच का मुख्य बिंदु बनता है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, भूमि का निबंधन 12 अक्टूबर 2022 को हुआ था और प्रार्थी के कथनानुसार, वर्ष 2023 की दीपावली पर इसका भौतिक कब्जा भी प्रतिपक्षी को सौंप दिया गया था, जिसके बाद वहाँ बाउंड्रीवाल बनी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब भूमि हस्तांतरण और कब्जे का यह प्रक्रम वर्ष 2022-23 में पूरा हो गया था, तो पीड़ित पक्ष ने लगभग 3 साल तक, यानी मई 2026

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तक, किसी भी सक्षम मंच पर आपत्ति क्यों दर्ज नहीं कराई। आगामी राजनैतिक सरगर्मियों से ठीक पहले इस मामले का अचानक सामने आना, इसके पीछे किसी पूर्व-निर्धारित राजनैतिक बिसात या चुनावी रंजिश की आशंका को बल देता है। यदि प्रार्थी के इस दावे को सही माना जाए कि डीड में उल्लिखित 10 लाख रुपये की प्रतिफल राशि उसके बैंक खाते में नहीं आई, तो यह सीधे तौर पर निबंधन विभाग की शुरुआती जांच प्रणाली की विफलता को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश निबंधन नियमावली के तहत, उप-निबंधक का यह अनिवार्य दायित्व है कि वह निबंधन स्थल पर क्रेता और विक्रेता के बीच वित्तीय संतुष्टि की ऑन-कैमरा पुष्टि करे। ओबरा निबंधन कार्यालय के स्तर पर यह गंभीर तकनीकी चूक दिखती है कि अधिकारी द्वारा डीड में वर्णित ऑनलाइन ट्रांजैक्शन या आरटीजीएस रसीद का भौतिक मिलान क्यों नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त, यदि राजस्व संहिता की स्थापित प्रक्रियाओं और नामान्तरण की नोटिस अवधि का अनुपालन हल्का लेखपाल, कानूनगो और तत्कालीन क्षेत्राधिकारी द्वारा मजबूती से किया गया होता, तो यह विवाद इस स्तर तक नहीं पहुँचता। इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद आम नागरिकों के बीच जनप्रतिनिधियों

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और प्रशासनिक तंत्र के कथित गठजोड़ को लेकर नकारात्मक धारणा बन रही है। पूर्व की प्रशासनिक विसंगतियों के चलते इस घटना ने स्थानीय स्तर पर आक्रोश को बढ़ावा दिया है। तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के ओबरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सुनील सिंह गोंड की सोशल मीडिया पोस्ट्स का विवरण लगभग 100% एक जैसा है। दो अलग-अलग राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों द्वारा एक ही समय पर एक समान शब्दों और प्रारूप में नैरेटिव स्थापित करना यह दर्शाता है कि इस आदिवासी भूमि प्रकरण को प्रशासनिक सुधार के बजाय एक सोचे-समझे राजनैतिक हथियार के रूप में उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। राजस्व अभिलेखों के संचालन के दौरान ए०आर०ओ० (सहायक रिकॉर्ड अधिकारी) ओबरा के स्तर पर मूल खातेदारों का नाम अलग किए जाने के बाद, प्रार्थी द्वारा विधिक उपचार हेतु दाखिल किया गया पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्र अभी भी लंबित है। प्रशासन की कार्य करने और सत्य तक पहुँचने की क्षमता पर यह एक गंभीर प्रश्नचिह्न है कि इस प्रकार के संवेदनशील और अनुसूचित जनजाति से जुड़े भूमि विवादों की फाइलों को लंबे

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समय तक लंबित क्यों रखा जाता है। यह प्रशासनिक शिथिलता ही धरातल पर भ्रम और टकराव की स्थिति उत्पन्न करती है। जिला प्रशासन को इस पूरे मामले को दीवानी अदालत की अंतहीन प्रक्रिया में धकेलने के बजाय, प्रशासनिक स्तर पर ही हल करने के लिए निम्नलिखित तीन बिंदुओं पर त्वरित और पारदर्शी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी: पहला, ओबरा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा निबंधन के स्थल पर प्रतिफल राशि के वास्तविक बैंक ट्रांजैक्शन का भौतिक मिलान क्यों नहीं किया गया और इस लापरवाही के लिए उत्तरदायी अधिकारियों पर क्या विभागीय कार्रवाई होगी? दूसरा, यदि वर्ष 2023 से भूमि पर भौतिक कब्जा हस्तांतरित था, तो शिकायत में 3 साल की देरी के मूल कारणों और राजनैतिक दलों के एकसमान सोशल मीडिया नैरेटिव के पीछे की वास्तविक कड़ियों की निष्पक्ष जांच क्या है? तीसरा, ए०आर०ओ० ओबरा के स्तर पर लंबित पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्र पर राजस्व विभाग अपनी विस्तृत आख्या सार्वजनिक कर इस त्रुटिपूर्ण निबंधन की सत्यता को अविलंब स्पष्ट क्यों नहीं करता? सोनभद्र जिला प्रशासन की त्वरित कार्यशैली और निष्पक्ष जांच ही इस राजनैतिक-प्रशासनिक चक्रव्यूह के बीच छिपे वास्तविक सत्य को सामने ला सकती है।

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  • सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र की एलसी कॉलोनी में एक बंद कमरे से सीमेंट कंपनी के 40 वर्षीय कर्मचारी मिथिलेश कुमार का शव बरामद किया गया है। यह घटना तब सामने आई जब कमरे से तेज़ दुर्गंध आने लगी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना दी। जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और कमरे का दरवाज़ा तोड़कर शव को बाहर निकाला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस द्वारा इस मामले की गहन जांच जारी है।
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    सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र की एलसी कॉलोनी में एक बंद कमरे से सीमेंट कंपनी के 40 वर्षीय कर्मचारी मिथिलेश कुमार का शव बरामद किया गया है। यह घटना तब सामने आई जब कमरे से तेज़ दुर्गंध आने लगी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना दी।

जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और कमरे का दरवाज़ा तोड़कर शव को बाहर निकाला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस द्वारा इस मामले की गहन जांच जारी है।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • winhamkange marnakchar kashmir hai Aaj sunday.ka hai ⛈️🌪🌫⚡️🌧 winhamkange marnakchar kashmir hai Aaj sunday.ka hai ❌️🌪🌫🌦
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    winhamkange marnakchar kashmir hai Aaj sunday.ka hai ⛈️🌪🌫⚡️🌧
winhamkange marnakchar kashmir hai Aaj sunday.ka hai ❌️🌪🌫🌦
    user_Sunil Bhai
    Sunil Bhai
    रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Tv1 इंडिया न्यूज़ चैनल ने अपने सभी दर्शकों का स्वागत किया है। चैनल ने जानकारी दी है कि पत्रकारिता दिवस से जुड़ी पूरी और विस्तृत रिपोर्ट सोनभद्र से अशोक सिंह द्वारा प्रस्तुत की जाएगी, जिसे दर्शक चैनल पर देख सकते हैं।
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    Tv1 इंडिया न्यूज़ चैनल ने अपने सभी दर्शकों का स्वागत किया है। चैनल ने जानकारी दी है कि पत्रकारिता दिवस से जुड़ी पूरी और विस्तृत रिपोर्ट सोनभद्र से अशोक सिंह द्वारा प्रस्तुत की जाएगी, जिसे दर्शक चैनल पर देख सकते हैं।
    user_पत्रकार अशोक सिंह रेनुकूट
    पत्रकार अशोक सिंह रेनुकूट
    Robertsganj, Sonbhadra•
    8 hrs ago
  • सोनभद्र जिले के करकच्छी गांव में दो दिन पहले बनी 2 किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह से खराब हो गई है। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) पर घटिया पेंटिंग कार्य करने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि PWD द्वारा सड़क पर पेंटिंग का कार्य ठीक से नहीं किया गया, जिसके चलते पेंट की पकड़ मजबूत नहीं है और वह जल्द ही खराब हो जाएगा। इसी कारण, नई बनी सड़क महज दो दिनों के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गई है। इस स्थिति से नाराज ग्रामीणों ने मांग की है कि इस अधूरे कार्य को तुरंत बंद किया जाए और सड़क का निर्माण उचित गुणवत्ता के साथ किया जाए। यह सड़क बभनी मुख्य मार्ग से जुड़ती है और प्रतिदिन हजारों राहगीर व वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, इसलिए इसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
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    सोनभद्र जिले के करकच्छी गांव में दो दिन पहले बनी 2 किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह से खराब हो गई है। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) पर घटिया पेंटिंग कार्य करने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि PWD द्वारा सड़क पर पेंटिंग का कार्य ठीक से नहीं किया गया, जिसके चलते पेंट की पकड़ मजबूत नहीं है और वह जल्द ही खराब हो जाएगा। इसी कारण, नई बनी सड़क महज दो दिनों के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गई है। इस स्थिति से नाराज ग्रामीणों ने मांग की है कि इस अधूरे कार्य को तुरंत बंद किया जाए और सड़क का निर्माण उचित गुणवत्ता के साथ किया जाए। यह सड़क बभनी मुख्य मार्ग से जुड़ती है और प्रतिदिन हजारों राहगीर व वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, इसलिए इसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
    user_Suresh Kumar
    Suresh Kumar
    दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारों ने अपने उदगार व्यक्त किए। इस दौरान उपस्थित सभी पत्रकारों ने अपने मन की बातों को शायराना अंदाज में बयां किया।
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    पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारों ने अपने उदगार व्यक्त किए। इस दौरान उपस्थित सभी पत्रकारों ने अपने मन की बातों को शायराना अंदाज में बयां किया।
    user_संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार Dudhi, Sonbhadra•
    4 hrs ago
  • सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र के पटवध ग्राम पंचायत में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ घाघर नदी में डूबने से 17 वर्षीय किशोरी चांदनी गोंड की मौत हो गई। बताया गया है कि चांदनी गुड़वा-गुड़िया बहाने के लिए नदी में उतरी थी और इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गई, जिससे यह हादसा हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर आगे की जाँच शुरू कर दी है। इस हृदय विदारक घटना के बाद से पीड़ित परिवार में गहरा मातम पसरा है और पूरे गाँव में शोक का माहौल है।
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    सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र के पटवध ग्राम पंचायत में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ घाघर नदी में डूबने से 17 वर्षीय किशोरी चांदनी गोंड की मौत हो गई। बताया गया है कि चांदनी गुड़वा-गुड़िया बहाने के लिए नदी में उतरी थी और इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गई, जिससे यह हादसा हुआ।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर आगे की जाँच शुरू कर दी है। इस हृदय विदारक घटना के बाद से पीड़ित परिवार में गहरा मातम पसरा है और पूरे गाँव में शोक का माहौल है।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र स्थित डाला अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री परिसर में एक सीमेंट कंपनी के कर्मचारी का शव एक बंद कमरे से बरामद किया गया है। मृतक की पहचान 40 वर्षीय मिथिलेश कुमार के रूप में हुई है, जो सिंगरौली का निवासी बताया गया है। यह घटना तब सामने आई जब कमरे से तेज दुर्गंध उठने लगी, जिससे मौत का राज खुला। एक चरवाहे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुँची और कमरे का दरवाजा तोड़कर शव को बरामद किया। पुलिस के अनुसार, शव 4 से 5 दिन पुराना प्रतीत हो रहा है। फिलहाल, पुलिस इस मामले में मौत के कारणों की विस्तृत जाँच में जुटी हुई है।
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    सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र स्थित डाला अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री परिसर में एक सीमेंट कंपनी के कर्मचारी का शव एक बंद कमरे से बरामद किया गया है। मृतक की पहचान 40 वर्षीय मिथिलेश कुमार के रूप में हुई है, जो सिंगरौली का निवासी बताया गया है।

यह घटना तब सामने आई जब कमरे से तेज दुर्गंध उठने लगी, जिससे मौत का राज खुला। एक चरवाहे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुँची और कमरे का दरवाजा तोड़कर शव को बरामद किया। पुलिस के अनुसार, शव 4 से 5 दिन पुराना प्रतीत हो रहा है।

फिलहाल, पुलिस इस मामले में मौत के कारणों की विस्तृत जाँच में जुटी हुई है।
    user_Bharat kumar bharat
    Bharat kumar bharat
    पत्रकार Robertsganj, Sonbhadra•
    4 hrs ago
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