सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने परमट विद्यालय प्रकरण में अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई को पूरी तरह से एकतरफा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों की बात सुने बिना ही निर्णय ले लिए, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना को ठेस पहुंची है। बाजपेई के अनुसार, किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस प्रकरण में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों ने सत्ता के दबाव में आकर काम किया, जिसके परिणामस्वरूप जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की उपेक्षा की गई। सपा विधायक ने इस मामले को केवल एक विद्यालय तक सीमित न मानते हुए, इसे विधानसभा और विधायिका की गरिमा से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधियों की बातों को नजरअंदाज किया जाएगा, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। बाजपेई ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी जारी रही, तो समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगी।
सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने परमट विद्यालय प्रकरण में अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई को पूरी तरह से एकतरफा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों की बात सुने बिना ही निर्णय ले लिए, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना को ठेस पहुंची है। बाजपेई के अनुसार, किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस प्रकरण में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों ने सत्ता के दबाव में आकर काम किया, जिसके परिणामस्वरूप जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की उपेक्षा की गई। सपा विधायक ने इस मामले को केवल एक विद्यालय तक सीमित न मानते हुए, इसे विधानसभा और विधायिका की गरिमा से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधियों की बातों को नजरअंदाज किया जाएगा, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। बाजपेई ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी जारी रही, तो समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगी।
- खान सर का नालंदा, बिहारशरीफ और नवादा में भव्य स्वागत किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में जुटे। इस स्वागत के साथ ही, सोशल मीडिया पर @anjanaomkashyap को सीधा संबोधित करते हुए एक तीखा संदेश जारी किया गया है। इस संदेश में, खान सर की लोकप्रियता और प्रभाव को दर्शाते हुए उन्हें 'दो कौड़ी के शिक्षक' कहने वाले लोगों पर कटाक्ष किया गया है। पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अंजना ओम कश्यप जैसे 'चाटुकार' खान सर का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते, उनके भव्य स्वागत को उनकी वास्तविक 'हैसियत' का प्रमाण बताया गया है।1
- सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने परमट विद्यालय प्रकरण में अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई को पूरी तरह से एकतरफा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों की बात सुने बिना ही निर्णय ले लिए, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना को ठेस पहुंची है। बाजपेई के अनुसार, किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस प्रकरण में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों ने सत्ता के दबाव में आकर काम किया, जिसके परिणामस्वरूप जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की उपेक्षा की गई। सपा विधायक ने इस मामले को केवल एक विद्यालय तक सीमित न मानते हुए, इसे विधानसभा और विधायिका की गरिमा से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधियों की बातों को नजरअंदाज किया जाएगा, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। बाजपेई ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी जारी रही, तो समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगी।1
- कानपुर में एक चर्चित दहेज हत्या के मामले को लेकर इन दिनों माहौल गर्म है, जहाँ पीड़ित परिवार न्याय की मांग के साथ सड़क पर उतर आया है। परिजनों ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए इस मामले में नामजद सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। जानकारी के अनुसार, युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उसके परिजनों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि युवती को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, और इसी उत्पीड़न से परेशान होकर उसने आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाया। पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले में नामजद सभी आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इसी को लेकर परिजन और उनके समर्थक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाए जाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों को फांसी की सजा दिए जाने तक की मांग उठाई है। परिवार ने प्रशासन को चेताया है कि यदि शेष आरोपियों की गिरफ्तारी 24 घंटे के भीतर नहीं हुई, तो उनका आंदोलन और तेज किया जाएगा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में लोग न्याय के समर्थन में मौजूद रहे और उन्होंने नारेबाजी भी की। इस पूरे मामले पर पुलिस और प्रशासन अपनी नजर बनाए हुए है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। संबंधित आरोपों और दावों की सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस 24 घंटे की समय-सीमा के भीतर क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है।1
- कानपुर नगर के घाटमपुर कस्बे में लाखों रुपए की लागत से एक बस स्टॉप का सुंदरीकरण कराया गया है, जिसमें रंग-रोगन, टाइलें और बैठने के लिए बेंचें लगाई गई हैं। इस भव्यता के बावजूद, एक गंभीर प्रश्न खड़ा हो गया है जो सीधे अधिकारियों की नीयत और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है: क्या सुंदरता केवल आंखों के लिए होती है, न कि इंसान की बुनियादी जरूरतों के लिए? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में स्थानीय लोगों का दर्द साफ दिखाई देता है, जहाँ वे बताते हैं कि लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी यात्रियों की सबसे अहम ज़रूरत – शौचालय – की व्यवस्था करना भूल गए। आसपास कोई सुलभ शौचालय न होने के कारण प्रतिदिन सैकड़ों यात्री परेशानी झेलते हैं। वीडियो में लोगों ने यह भी बताया कि दूरदराज से आने वाले यात्रियों को मजबूरी में इधर-उधर भटकना पड़ता है, जिससे विशेषकर महिला यात्रियों के साथ-साथ बुजुर्ग और बीमार यात्रियों को भी शर्मिंदगी और असहजता का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह विकास के नाम पर सिर्फ 'दिखावटी खर्च' है, न कि 'जरूरी खर्च'। इस प्रकार, घाटमपुर में लाखों से चमकाया गया यह बस स्टॉप 'सुंदरीकरण' की आड़ में दिखावे की एक मिसाल बन गया है, जिसने इंसान की बुनियादी जरूरत पर ताला लगा दिया है।1
- उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के असरेन्दा में 25 मई 2026 से एक ट्रांसफार्मर जल गया है। बताया गया है कि ट्रांसफार्मर के जल जाने के बावजूद उसे अभी तक बदला नहीं गया है। इस संबंध में जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने की मांग की गई है।1
- उत्तर प्रदेश में, अयोध्या के कथावाचक पवन देव महाराज पर बिहार की एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। महिला के मुताबिक, बिहार में एक कथा के दौरान उसकी मुलाकात कथावाचक से हुई थी, जिसके बाद मोबाइल नंबरों का आदान-प्रदान हुआ और बातचीत शुरू हो गई। उनका कहना है कि धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। महिला ने आरोप लगाया है कि जुलाई 2025 में कथावाचक ने उसे राम मंदिर दर्शन के बहाने अयोध्या बुलाया, जहां एक घर में उसके साथ बलात्कार किया गया। महिला का यह भी कहना है कि मंदिर में उनसे फर्जी शादी की गई और कुछ दिन साथ रखने के बाद उसे वापस भेज दिया गया।1
- बंगाल सीमा पर बाड़बंदी के कार्य को बाधित करने के उद्देश्य से बांग्लादेशी जिहादियों का एक झुंड इकट्ठा हुआ। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने पहले कुछ देर तक स्थिति का जायजा लिया, जिसके बाद जिहादियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। BSF ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उनमें से एक के पैर में गोली चलाई, जिसके बाद पूरा जिहादी झुंड मौके से फरार हो गया; गोली लगने वाले जिहादी को बाद में उठा लिया गया। यह घटना इस धारणा के बीच हुई कि जिहादी यह मानकर आए थे कि 'ममता बनर्जी का राज' होने के कारण जोर से चिल्लाने पर BSF के जवान रुक जाएंगे। हालांकि, पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि अब ऐसा नहीं होगा और भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का अंजाम यही होगा।1