मवई कला के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल! नियामताबाद, चंदौली। प्राथमिक विद्यालय मवई कला में बच्चों के साथ कथित उत्पीड़न और बाल पकड़कर मारने के आरोप सामने आए हैं। इसके अलावा बच्चों से टिफिन साफ कराने तथा विद्युत संबंधी कार्य कराने की शिकायतें भी सामने आई हैं। जिस उम्र में बच्चों के हाथ में किताब और कलम होनी चाहिए, अगर उसी उम्र में वे डर और कथित प्रताड़ना की शिकायत करें, तो यह बेहद गंभीर विषय है। सवाल है—क्या शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार उचित है? अभिभावकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जाए। बच्चों को स्कूल में सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त माहौल मिलना उनका अधिकार है। #मवईकला #नियामताबाद #चंदौली #प्राथमिकविद्यालय #शिक्षाव्यवस्था #बच्चोंकीसुरक्षा #निष्पक्षजांच
मवई कला के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल! नियामताबाद, चंदौली। प्राथमिक विद्यालय मवई कला में बच्चों के साथ कथित उत्पीड़न और बाल पकड़कर मारने के आरोप सामने आए हैं। इसके अलावा बच्चों से टिफिन साफ कराने तथा विद्युत संबंधी कार्य कराने की शिकायतें भी सामने आई हैं। जिस उम्र में बच्चों के हाथ में किताब और कलम होनी चाहिए, अगर उसी उम्र में वे डर और कथित प्रताड़ना की शिकायत करें, तो यह बेहद गंभीर विषय है। सवाल है—क्या शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार उचित है? अभिभावकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जाए। बच्चों को स्कूल में सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त माहौल मिलना उनका अधिकार है। #मवईकला #नियामताबाद #चंदौली #प्राथमिकविद्यालय #शिक्षाव्यवस्था #बच्चोंकीसुरक्षा #निष्पक्षजांच
- "चुनाव आते ही नौकरी का वादा गायब!" Akhilesh Yadav Blasts BJP Over 1 Lakh Jobs1
- बजबजाती नालियों और गंदगी के बीच जिंदगी, 24 वर्षीय युवक की मौत से परिवार में मचा कोहराम संत कबीर नगर जिले के धनघटा थाना क्षेत्र के हैंसर बाजार विकासखंड अंतर्गत पट्टी बड़गो हिस्सा समोगर गांव में इन दिनों गंदगी और जलभराव की स्थिति ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। गांव की गलियों में जगह-जगह बजबजाती नालियां और गंदगी का अंबार लगा होने से संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से साफ-सफाई और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से हालात बदतर होते जा रहे हैं। इसी बीच गांव निवासी 24 वर्षीय रामानंद पुत्र सुधीर प्रसाद की तबीयत खराब होने के बाद मौत हो गई। युवक की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। हालांकि उसकी मौत का सीधा कारण क्या रहा, इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन गांव की बदहाल साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। सबसे मार्मिक स्थिति मृतक के परिवार की है। पिता सुधीर प्रसाद राजमिस्त्री का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि बेटे की मौत के बाद मां का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया। आर्थिक तंगी का आलम यह रहा कि मृतक के अंतिम संस्कार के लिए भी ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया और किसी तरह दाह संस्कार कराया। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से गांव में तत्काल सफाई अभियान चलाने, बजबजाती नालियों की सफाई कराने और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि गंदगी के कारण ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा कम हो सके।1
- अंबेडकरनगर मेडिकल कॉलेज में फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया! OPD से OT तक पहुंचा1
- जिंदगी से हारकर नहीं… बीमारी ने छीनी जान, घर की दहलीज पर बुझ गया एक सहारा।1
- *कुर्सी पर ‘फर्जी डॉक्टर’, असली डॉक्टर कहां? मेडिकल कॉलेज में उठे बड़े सवाल!* _फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया तो खुला ‘कुर्सी कांड’ का सवाल—अगर नकली डॉक्टर डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच गया, तो असली डॉक्टर उस वक्त कहां थे? जांच हुई तो कहीं ‘बलि का बकरा’ तो नहीं बनाया गया?_ अंबेडकरनगर। राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सदरपुर में कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद अब मामला सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। असली सवाल तो अब यह उठ रहा है कि अगर कोई फर्जी व्यक्ति डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर काम कर रहा था, तो उस समय जिम्मेदार असली डॉक्टर कहां थे।फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवालों की नई परत खुलने लगी है। आखिर किसी व्यक्ति को डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने, मरीजों के बीच बैठने अथवा चिकित्सकीय व्यवस्था का हिस्सा बनने का मौका कैसे मिला? क्या व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी? मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कहीं पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर डालकर बाकी जिम्मेदारियों पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं होगी? हालांकि इसकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। *‘फर्जी’ पकड़ा गया, अब असली सवालों की बारी* मेडिकल कॉलेज में कथित फर्जी डॉक्टर की मौजूदगी ने सुरक्षा, पहचान सत्यापन, ड्यूटी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने से पहले संबंधित व्यक्ति की डिग्री, पंजीकरण, पहचान और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। अगर कोई जांच नहीं हुई तो सवाल व्यवस्था पर है और अगर जांच हुई थी तो फिर कथित फर्जी व्यक्ति अंदर तक पहुंचा कैसे? *दावों में ‘सुधार’, जमीन पर ‘उधार’!* राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज पहले से ही विभिन्न अव्यवस्थाओं और शिकायतों को लेकर चर्चाओं में रहा है। ऐसे में कथित फर्जी डॉक्टर का मामला व्यवस्था के लिए एक और बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते रहे हैं। प्राचार्य की ओर से भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सवाल यह है कि सुधार की रफ्तार इतनी तेज थी कि निगरानी व्यवस्था पीछे छूट गई या फिर फाइलों में व्यवस्था पहले ही दुरुस्त हो चुकी थी? *अब जांच बताएगी—फर्जी कौन, जिम्मेदार कौन?* फिलहाल कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत थी या फिर मेडिकल कॉलेज की निगरानी व्यवस्था में भी बड़ी चूक हुई? जांच अगर निष्पक्ष और विस्तृत हुई तो यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रवेश, ड्यूटी अथवा डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच किसने और कैसे दी। साथ ही उस समय संबंधित असली डॉक्टर की ड्यूटी कहां थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या निगरानी की थी। क्योंकि मामला सिर्फ ‘फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया’ कहकर खत्म कर दिया गया तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे। अब जनता यह जानना चाहती है कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति फर्जी था तो व्यवस्था असली कितनी थी? *कुर्सी पर ‘फर्जी डॉक्टर’, असली डॉक्टर कहां? मेडिकल कॉलेज में उठे बड़े सवाल!* _फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया तो खुला ‘कुर्सी कांड’ का सवाल—अगर नकली डॉक्टर डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच गया, तो असली डॉक्टर उस वक्त कहां थे? जांच हुई तो कहीं ‘बलि का बकरा’ तो नहीं बनाया गया?_ अंबेडकरनगर। राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सदरपुर में कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद अब मामला सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। असली सवाल तो अब यह उठ रहा है कि अगर कोई फर्जी व्यक्ति डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर काम कर रहा था, तो उस समय जिम्मेदार असली डॉक्टर कहां थे।फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवालों की नई परत खुलने लगी है। आखिर किसी व्यक्ति को डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने, मरीजों के बीच बैठने अथवा चिकित्सकीय व्यवस्था का हिस्सा बनने का मौका कैसे मिला? क्या व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी? मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कहीं पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर डालकर बाकी जिम्मेदारियों पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं होगी? हालांकि इसकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। *‘फर्जी’ पकड़ा गया, अब असली सवालों की बारी* मेडिकल कॉलेज में कथित फर्जी डॉक्टर की मौजूदगी ने सुरक्षा, पहचान सत्यापन, ड्यूटी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने से पहले संबंधित व्यक्ति की डिग्री, पंजीकरण, पहचान और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। अगर कोई जांच नहीं हुई तो सवाल व्यवस्था पर है और अगर जांच हुई थी तो फिर कथित फर्जी व्यक्ति अंदर तक पहुंचा कैसे? *दावों में ‘सुधार’, जमीन पर ‘उधार’!* राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज पहले से ही विभिन्न अव्यवस्थाओं और शिकायतों को लेकर चर्चाओं में रहा है। ऐसे में कथित फर्जी डॉक्टर का मामला व्यवस्था के लिए एक और बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते रहे हैं। प्राचार्य की ओर से भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सवाल यह है कि सुधार की रफ्तार इतनी तेज थी कि निगरानी व्यवस्था पीछे छूट गई या फिर फाइलों में व्यवस्था पहले ही दुरुस्त हो चुकी थी? *अब जांच बताएगी—फर्जी कौन, जिम्मेदार कौन?* फिलहाल कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत थी या फिर मेडिकल कॉलेज की निगरानी व्यवस्था में भी बड़ी चूक हुई? जांच अगर निष्पक्ष और विस्तृत हुई तो यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रवेश, ड्यूटी अथवा डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच किसने और कैसे दी। साथ ही उस समय संबंधित असली डॉक्टर की ड्यूटी कहां थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या निगरानी की थी। क्योंकि मामला सिर्फ ‘फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया’ कहकर खत्म कर दिया गया तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे। अब जनता यह जानना चाहती है कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति फर्जी था तो व्यवस्था असली कितनी थी?2
- सूर्यांश न्यूज़ 24 हर खबर पर नजर आपका अपना लोकप्रिय चैनल1
- कर्ज से जूझते आमजन को राहत, जिला जज के निर्देश पर फिरतू राम का ऋण कम रकम में निपटाया।1
- अंबेडकरनगर में दुकान का ताला तोड़कर चोरी! ₹50 हजार का माल साफ, CCTV खंगाल रही पुलिस1
- पुलिस पर फायरिंग के बाद जवाबी कार्रवाई में लगी पैर में गोली, दो साथी फरार मऊ। हलधरपुर थाना क्षेत्र में महिला से छिनैती के मामले में वांछित शातिर अपराधी को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। जवाबी फायरिंग में उसके दाहिने पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे उपचार के लिए सीएचसी रतनपुरा में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार, उसके दो साथी अंधेरे और झाड़ियों का फायदा उठाकर फरार हो गए। पुलिस अधीक्षक मऊ कमलेश बहादुर के निर्देशन में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी मधुबन दिनेश दत्त मिश्र के नेतृत्व में हलधरपुर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर जमीन बेरुकी की तरफ घेराबंदी की थी। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने घेराबंदी के दौरान पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। इसमें थानाध्यक्ष बाल-बाल बच गए। आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी फायरिंग में मंयक उर्फ प्रिंस यादव (23) पुत्र ओमप्रकाश यादव, निवासी टेघुनिया गोविंदपुर, थाना घोसी, के दाहिने पैर में गोली लगी। पुलिस ने उसके कब्जे से एक जोड़ी पीली धातु की कान की बाली, 315 बोर का तमंचा, एक खोखा व एक जिंदा कारतूस, एक 9 एमएम खोखा कारतूस, की-पैड मोबाइल तथा घटना में प्रयुक्त होंडा शाइन मोटरसाइकिल बरामद की है। मामले में मु0अ0सं0 195/2026 के तहत धारा 109(1), 3(5) बीएनएस व 3/25 आर्म्स एक्ट में अभियोग दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। फरार आरोपियों राजा राजभर और लाला उर्फ योगेन्द्र राजभर की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।3