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पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर अंतर्गत सीताराम डेरा नेहरू कॉलोनी, स्लग रोड स्थित मां काली मंदिर के सामने रहने वाले बस्ती के लोगों का हाल बेहाल है। इस बस्ती के निवासी बारिश के पानी और टाटा कंपनी के गंदे पानी के नालों की समस्या के कारण भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस विकट समस्या से जूझ रहे लोगों के सामने अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर उनकी इस समस्या का समाधान कौन कर सकता है।

14 hrs ago
user_जी गोपी कुमार
जी गोपी कुमार
Pujari गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
14 hrs ago

पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर अंतर्गत सीताराम डेरा नेहरू कॉलोनी, स्लग रोड स्थित मां काली मंदिर के सामने रहने वाले बस्ती के लोगों का हाल बेहाल है। इस बस्ती के निवासी बारिश के पानी और टाटा कंपनी के गंदे पानी के नालों की समस्या के कारण भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस विकट समस्या से जूझ रहे लोगों के सामने अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर उनकी इस समस्या का समाधान कौन कर सकता है।

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  • पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर अंतर्गत सीताराम डेरा नेहरू कॉलोनी, स्लग रोड स्थित मां काली मंदिर के सामने रहने वाले बस्ती के लोगों का हाल बेहाल है। इस बस्ती के निवासी बारिश के पानी और टाटा कंपनी के गंदे पानी के नालों की समस्या के कारण भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस विकट समस्या से जूझ रहे लोगों के सामने अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर उनकी इस समस्या का समाधान कौन कर सकता है।
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    पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर अंतर्गत सीताराम डेरा नेहरू कॉलोनी, स्लग रोड स्थित मां काली मंदिर के सामने रहने वाले बस्ती के लोगों का हाल बेहाल है। इस बस्ती के निवासी बारिश के पानी और टाटा कंपनी के गंदे पानी के नालों की समस्या के कारण भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस विकट समस्या से जूझ रहे लोगों के सामने अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर उनकी इस समस्या का समाधान कौन कर सकता है।
    user_जी गोपी कुमार
    जी गोपी कुमार
    Pujari गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
    14 hrs ago
  • झारखंड के घाटशिला क्षेत्र के लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग आखिरकार आज पूरी हो गई है। फुलडुंगरी एनएच-18 से झाटीझरना (भाया बुरूडीह) तक लगभग 24.01 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य का विधिवत भूमि पूजन समारोह बड़े ही उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में सांसद विद्युत वरण महतो और घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन के कर कमलों द्वारा इस महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया गया। इस सड़क परियोजना के पूरा होने से घाटशिला और उसके आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर आवागमन की सुविधा से क्षेत्र में व्यापार को गति मिलेगी और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच काफी आसान हो जाएगी। इस सड़क के बनने से किसान अपनी उपज को आसानी से बाजार तक पहुंचा पाएंगे, छात्रों को स्कूल-कॉलेज जाने में बड़ी सुविधा होगी और आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में समय की बचत होगी। कार्यक्रम में पहुंचे क्षेत्रवासियों ने इस विकास कार्य के लिए खुशी जताते हुए सांसद और विधायक का फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया और उनका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर घाटशिला जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष दुर्गा चरण मुर्मू, भाजपा नेता दिनेश साहू, विजय पांडे, संजय माहाकुड, काली पोदो गोराई, काजल डॅन, गौर पात्र, जगदीश भगत के अलावा सैकड़ों की संख्या में स्थानीय महिला और पुरुष उपस्थित थे।
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    झारखंड के घाटशिला क्षेत्र के लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग आखिरकार आज पूरी हो गई है। फुलडुंगरी एनएच-18 से झाटीझरना (भाया बुरूडीह) तक लगभग 24.01 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य का विधिवत भूमि पूजन समारोह बड़े ही उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में सांसद विद्युत वरण महतो और घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन के कर कमलों द्वारा इस महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया गया।

इस सड़क परियोजना के पूरा होने से घाटशिला और उसके आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर आवागमन की सुविधा से क्षेत्र में व्यापार को गति मिलेगी और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच काफी आसान हो जाएगी। इस सड़क के बनने से किसान अपनी उपज को आसानी से बाजार तक पहुंचा पाएंगे, छात्रों को स्कूल-कॉलेज जाने में बड़ी सुविधा होगी और आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में समय की बचत होगी।

कार्यक्रम में पहुंचे क्षेत्रवासियों ने इस विकास कार्य के लिए खुशी जताते हुए सांसद और विधायक का फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया और उनका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर घाटशिला जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष दुर्गा चरण मुर्मू, भाजपा नेता दिनेश साहू, विजय पांडे, संजय माहाकुड, काली पोदो गोराई, काजल डॅन, गौर पात्र, जगदीश भगत के अलावा सैकड़ों की संख्या में स्थानीय महिला और पुरुष उपस्थित थे।
    user_DALMA NEWS live
    DALMA NEWS live
    आदित्यपुर (गमहरिया), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    14 hrs ago
  • सरायकेला में आयोजित ऐतिहासिक भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के दूसरे दिन पूरा शहर "जय जगन्नाथ" के जयघोष से भक्तिमय हो उठा। भगवान श्री जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर सवार होकर पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने मौसी के घर पहुंचे। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा मार्ग भजन-कीर्तन, झांझ, मृदंग तथा हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि से गुंजायमान रहा। श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव से रथ खींचकर भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते नजर आए। जगह-जगह लोगों ने भगवान का भव्य स्वागत किया और सुख-समृद्धि की कामना की। इस भव्य रथ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया। सरायकेला थाना प्रभारी विनय कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल ने पूरे यात्रा मार्ग पर तैनात रहकर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहद प्रभावी ढंग से संभाला। थाना प्रभारी स्वयं लगातार मार्ग का निरीक्षण और मॉनिटरिंग करते रहे, जिससे पूरी यात्रा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। आस्था और उत्साह से सराबोर इस यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं के बीच लड्डू और फल जैसे प्रसाद का भोग लगाकर वितरण किया गया, जिसने सरायकेला की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
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    सरायकेला में आयोजित ऐतिहासिक भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के दूसरे दिन पूरा शहर "जय जगन्नाथ" के जयघोष से भक्तिमय हो उठा। भगवान श्री जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर सवार होकर पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने मौसी के घर पहुंचे। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा मार्ग भजन-कीर्तन, झांझ, मृदंग तथा हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि से गुंजायमान रहा। श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव से रथ खींचकर भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते नजर आए। जगह-जगह लोगों ने भगवान का भव्य स्वागत किया और सुख-समृद्धि की कामना की।

इस भव्य रथ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया। सरायकेला थाना प्रभारी विनय कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल ने पूरे यात्रा मार्ग पर तैनात रहकर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहद प्रभावी ढंग से संभाला। थाना प्रभारी स्वयं लगातार मार्ग का निरीक्षण और मॉनिटरिंग करते रहे, जिससे पूरी यात्रा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। आस्था और उत्साह से सराबोर इस यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं के बीच लड्डू और फल जैसे प्रसाद का भोग लगाकर वितरण किया गया, जिसने सरायकेला की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
    user_Ravi Gupta
    Ravi Gupta
    सरायकेला, सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    13 hrs ago
  • झारखंड राज्य के निर्माताओं में से एक और झारखंड पीपुल्स पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सूर्य सिंह बेसरा ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को एक त्राहिमाम संदेश भेजकर पर्यावरणविद् और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के आमरण अनशन पर तत्काल संज्ञान लेने और हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। सोनम वांगचुक के अनशन का आज 20वां दिन है और उनकी शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। इस बेहद संवेदनशील स्थिति को देखते हुए, पूर्व विधायक बेसरा ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन और उनकी मांगों का पुरजोर समर्थन किया है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से अविलंब अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है। आजसू के संस्थापक सूर्य सिंह बेसरा ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि लोकतंत्र के महानायक सोनम वांगचुक ने अपने प्राण त्याग दिए, तो पूरे देश के युवाओं में गुस्से की चिंगारी भड़क उठेगी और इसके प्रतिवाद का गंभीर परिणाम नरेंद्र मोदी सरकार को भुगतना होगा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भी स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह 1952 में आंध्र के स्वतंत्रता सेनानी पुट्टी श्रीरामुलू ने 56 दिनों के अनशन के बाद प्राण त्याग दिए थे, जिसके फलस्वरूप 1993 में भाषा के आधार पर आंध्र प्रदेश का गठन हुआ और 1956 में पहली बार राज्य पुनर्गठन आयोग बना, ठीक वैसे ही परिणाम आज भी देखने को मिल सकते हैं। झारखंड रत्न और साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा संथाली भाषा में पुरस्कृत महाकवि सूर्य सिंह बेसरा ने देश के करोड़ों युवाओं से अपील की है कि वे कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का समर्थन कर सोनम वांगचुक की जान बचाएं। उन्होंने देश की संविधान आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए वर्ष 1974 में जयप्रकाश नारायण द्वारा किए गए संपूर्ण क्रांति के आह्वान की तर्ज पर सत्ता और व्यवस्था परिवर्तन के आंदोलन में कूदने का आह्वान किया है। उन्होंने 'इंकलाब जिंदाबाद', 'सोनम वांगचुक जिंदाबाद', 'कॉकरोच जनता पार्टी जिंदाबाद' और 'अभिजीत दीपके जिंदाबाद' के नारों के साथ झारखंड की जनता की ओर से हूलगुलान जोहार का संदेश दिया है।
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    झारखंड राज्य के निर्माताओं में से एक और झारखंड पीपुल्स पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सूर्य सिंह बेसरा ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को एक त्राहिमाम संदेश भेजकर पर्यावरणविद् और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के आमरण अनशन पर तत्काल संज्ञान लेने और हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। सोनम वांगचुक के अनशन का आज 20वां दिन है और उनकी शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। इस बेहद संवेदनशील स्थिति को देखते हुए, पूर्व विधायक बेसरा ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन और उनकी मांगों का पुरजोर समर्थन किया है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से अविलंब अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है।

आजसू के संस्थापक सूर्य सिंह बेसरा ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि लोकतंत्र के महानायक सोनम वांगचुक ने अपने प्राण त्याग दिए, तो पूरे देश के युवाओं में गुस्से की चिंगारी भड़क उठेगी और इसके प्रतिवाद का गंभीर परिणाम नरेंद्र मोदी सरकार को भुगतना होगा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भी स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह 1952 में आंध्र के स्वतंत्रता सेनानी पुट्टी श्रीरामुलू ने 56 दिनों के अनशन के बाद प्राण त्याग दिए थे, जिसके फलस्वरूप 1993 में भाषा के आधार पर आंध्र प्रदेश का गठन हुआ और 1956 में पहली बार राज्य पुनर्गठन आयोग बना, ठीक वैसे ही परिणाम आज भी देखने को मिल सकते हैं।

झारखंड रत्न और साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा संथाली भाषा में पुरस्कृत महाकवि सूर्य सिंह बेसरा ने देश के करोड़ों युवाओं से अपील की है कि वे कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का समर्थन कर सोनम वांगचुक की जान बचाएं। उन्होंने देश की संविधान आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए वर्ष 1974 में जयप्रकाश नारायण द्वारा किए गए संपूर्ण क्रांति के आह्वान की तर्ज पर सत्ता और व्यवस्था परिवर्तन के आंदोलन में कूदने का आह्वान किया है। उन्होंने 'इंकलाब जिंदाबाद', 'सोनम वांगचुक जिंदाबाद', 'कॉकरोच जनता पार्टी जिंदाबाद' और 'अभिजीत दीपके जिंदाबाद' के नारों के साथ झारखंड की जनता की ओर से हूलगुलान जोहार का संदेश दिया है।
    user_NUNU RAM MAHATO
    NUNU RAM MAHATO
    Local News Reporter गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    14 hrs ago
  • पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला में भूमिपूजन से पहले सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों की मांग थी कि भूमिपूजन से पहले सड़क का निर्माण कार्य कराया जाए। इसके बाद, आश्वासन मिलने पर ग्रामीणों ने जाम हटा दिया।
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    पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला में भूमिपूजन से पहले सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों की मांग थी कि भूमिपूजन से पहले सड़क का निर्माण कार्य कराया जाए। इसके बाद, आश्वासन मिलने पर ग्रामीणों ने जाम हटा दिया।
    user_Siddharth Kumar
    Siddharth Kumar
    Local News Reporter घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
    12 hrs ago
  • झारखंड के सरायकेला में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा पूरी श्रद्धा, आस्था और भक्ति के माहौल में शुरू हुई। महाप्रभु जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर सवार होकर हजारों श्रद्धालुओं के बीच से मौसी बाड़ी के लिए रवाना हुए। इस पावन अवसर पर राज्य के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और विधायक चंपई सोरेन ने इस रथयात्रा में हिस्सा लिया और हजारों श्रद्धालुओं के साथ मिलकर भक्तिभाव से महाप्रभु के रथ की रस्सी खींची। पूरा शहर जय जगन्नाथ के गगनभेदी जयघोष, ढोल-नगाड़ों, हरि संकीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चारण से पूरी तरह भक्तिमय हो गया, जहां राधा-कृष्ण के नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। रथयात्रा प्रारंभ होने से पहले मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद विधि-विधान के साथ विग्रहों को रथ पर विराजमान कराया गया। परंपरा का पालन करते हुए सरायकेला राजपरिवार के राजा प्रताप आदित्य सिंह देव ने स्वर्ण झाड़ू से मार्ग साफ करने की पारंपरिक 'छेरा-पहरा' की रस्म निभाई और रथ की पूजा-अर्चना की। परंपरा के अनुसार, सबसे पहले भगवान बलभद्र, फिर भगवान जगन्नाथ और अंत में देवी सुभद्रा को रथ पर स्थापित किया गया। पुजारी के संकेत के बाद श्रद्धालुओं ने रथ खींचना शुरू किया। गुरुवार की रात महाप्रभु का रथ गोपबन्धु चौक पर विश्राम करेगा, जिसके बाद शुक्रवार को यात्रा पुनः शुरू होकर रथ गुंडीचा मंदिर (मौसी बड़ी) पहुंचेगा, जहां भगवान नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे। सरायकेला राजपरिवार के राजा प्रताप आदित्य सिंह देव ने बताया कि सरायकेला का श्री जगन्नाथ मंदिर 300 वर्ष पुराना है और यहां उड़ीसा के पुरी की परंपरा के अनुसार ही रथयात्रा का आयोजन होता है। पुरी के बाद इसे पूर्वी भारत की सबसे प्राचीन और प्रमुख रथयात्राओं में गिना जाता है। इस पावन अवसर पर आयोजित होने वाले नौ दिवसीय विशाल मेले में आसपास और दूर-दराज के क्षेत्रों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रथयात्रा के सफल आयोजन को लेकर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा और विधि व्यवस्था के कड़े और व्यापक इंतजाम किए गए थे।
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    झारखंड के सरायकेला में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा पूरी श्रद्धा, आस्था और भक्ति के माहौल में शुरू हुई। महाप्रभु जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर सवार होकर हजारों श्रद्धालुओं के बीच से मौसी बाड़ी के लिए रवाना हुए। इस पावन अवसर पर राज्य के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और विधायक चंपई सोरेन ने इस रथयात्रा में हिस्सा लिया और हजारों श्रद्धालुओं के साथ मिलकर भक्तिभाव से महाप्रभु के रथ की रस्सी खींची। पूरा शहर जय जगन्नाथ के गगनभेदी जयघोष, ढोल-नगाड़ों, हरि संकीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चारण से पूरी तरह भक्तिमय हो गया, जहां राधा-कृष्ण के नृत्य ने सभी का मन मोह लिया।

रथयात्रा प्रारंभ होने से पहले मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद विधि-विधान के साथ विग्रहों को रथ पर विराजमान कराया गया। परंपरा का पालन करते हुए सरायकेला राजपरिवार के राजा प्रताप आदित्य सिंह देव ने स्वर्ण झाड़ू से मार्ग साफ करने की पारंपरिक 'छेरा-पहरा' की रस्म निभाई और रथ की पूजा-अर्चना की। परंपरा के अनुसार, सबसे पहले भगवान बलभद्र, फिर भगवान जगन्नाथ और अंत में देवी सुभद्रा को रथ पर स्थापित किया गया। पुजारी के संकेत के बाद श्रद्धालुओं ने रथ खींचना शुरू किया। गुरुवार की रात महाप्रभु का रथ गोपबन्धु चौक पर विश्राम करेगा, जिसके बाद शुक्रवार को यात्रा पुनः शुरू होकर रथ गुंडीचा मंदिर (मौसी बड़ी) पहुंचेगा, जहां भगवान नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे।

सरायकेला राजपरिवार के राजा प्रताप आदित्य सिंह देव ने बताया कि सरायकेला का श्री जगन्नाथ मंदिर 300 वर्ष पुराना है और यहां उड़ीसा के पुरी की परंपरा के अनुसार ही रथयात्रा का आयोजन होता है। पुरी के बाद इसे पूर्वी भारत की सबसे प्राचीन और प्रमुख रथयात्राओं में गिना जाता है। इस पावन अवसर पर आयोजित होने वाले नौ दिवसीय विशाल मेले में आसपास और दूर-दराज के क्षेत्रों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रथयात्रा के सफल आयोजन को लेकर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा और विधि व्यवस्था के कड़े और व्यापक इंतजाम किए गए थे।
    user_NUNU RAM MAHATO
    NUNU RAM MAHATO
    Local News Reporter गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    17 hrs ago
  • पूर्वी सिंहभूम के साकची बाजार में फल व्यापारी सत्यनारायण केसरी के कर्मचारी माधव चातर से कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मोहम्मद फहीम को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस द्वारा इस पूरे मामले की जांच की जा रही है।
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    पूर्वी सिंहभूम के साकची बाजार में फल व्यापारी सत्यनारायण केसरी के कर्मचारी माधव चातर से कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मोहम्मद फहीम को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस द्वारा इस पूरे मामले की जांच की जा रही है।
    user_Madhusudan Singh
    Madhusudan Singh
    पत्रकार गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
    13 hrs ago
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