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राजस्थान के अरनिया घोड़ा गांव में एक व्यक्ति को पिछले दो साल से फसल बोने से रोका जा रहा था। पीड़ित ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उन्हें लगातार दो साल तक फसल नहीं बोने दी। उन्होंने प्रेमपूर्वक उन लोगों से रास्ते की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई और इसके बजाय गाली-गलौज का सामना करना पड़ा। इस स्थिति के बाद, पीड़ित व्यक्ति ने स्वयं प्रयास करके 15 फीट का रास्ता निकलवाया।
राधाकिशन खाती
राजस्थान के अरनिया घोड़ा गांव में एक व्यक्ति को पिछले दो साल से फसल बोने से रोका जा रहा था। पीड़ित ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उन्हें लगातार दो साल तक फसल नहीं बोने दी। उन्होंने प्रेमपूर्वक उन लोगों से रास्ते की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई और इसके बजाय गाली-गलौज का सामना करना पड़ा। इस स्थिति के बाद, पीड़ित व्यक्ति ने स्वयं प्रयास करके 15 फीट का रास्ता निकलवाया।
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- राजस्थान के अरनिया घोड़ा गांव में एक व्यक्ति को पिछले दो साल से फसल बोने से रोका जा रहा था। पीड़ित ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उन्हें लगातार दो साल तक फसल नहीं बोने दी। उन्होंने प्रेमपूर्वक उन लोगों से रास्ते की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई और इसके बजाय गाली-गलौज का सामना करना पड़ा। इस स्थिति के बाद, पीड़ित व्यक्ति ने स्वयं प्रयास करके 15 फीट का रास्ता निकलवाया।1
- भीलवाड़ा जिले के रायपुर थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है, जहां बिजली के एक ठेकाकर्मी की करंट लगने और फिर खंभे से नीचे गिरने से मौत हो गई। यह घटना तब हुई जब ठेकाकर्मी बिजली के पोल पर चढ़कर लाइन को ठीक कर रहा था। हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। मृतक की पहचान 37 वर्षीय उम्मेदसिंह पुत्र प्रभुदयाल गुर्जर के रूप में हुई है, जो मूल रूप से करौली जिले के ढाणीलादया का निवासी था। उम्मेदसिंह पिछले कुछ समय से भीलवाड़ा के रायपुर बिजली विभाग में ठेकाकर्मी (लाइनमैन) के तौर पर कार्यरत था। मंगलवार दोपहर को वह क्षेत्र के कोट गांव के पास एक बिजली के खंभे पर फॉल्ट निकालने या किसी अन्य तकनीकी कार्य के लिए चढ़ा था। इसी दौरान लाइन में अचानक हाई वोल्टेज करंट आ गया, जिसकी चपेट में आने से उम्मेदसिंह को जोरदार झटका लगा और वह अनियंत्रित होकर सीधे पथरीली जमीन पर आ गिरा। खंभे से गिरते ही आसपास मौजूद ग्रामीणों और साथी कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। लहूलुहान हालत में उम्मेदसिंह को तुरंत रायपुर के राजकीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर रायपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, जिसने शव को कब्जे में लेकर करौली में मृतक के परिजनों को हादसे की जानकारी दी। परिजनों के पहुंचने पर पुलिस ने पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कर शव मृतक के जीजा को सुपुर्द कर दिया। रायपुर थाने के सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) गोपाल सिंह ने मंगलवार शाम करीब 7 बजे इस घटना की पुष्टि की और बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।1
- भीलवाड़ा जिले के मालासेरी डूंगरी में स्थित भगवान देवनारायण की जन्मस्थली पर चल रहे तीर्थ कॉरिडोर निर्माण कार्यों का जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने जायजा लिया। भारत सरकार की प्रसाद स्वदेशी योजना के तहत इस अंतरराष्ट्रीय और विश्व विख्यात तीर्थ स्थल पर विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रगति का अवलोकन किया गया। इस दौरान मालासेरी डूंगरी मंदिर के पुजारी हेमराज पोसवाल ने जिला कलेक्टर को सभी प्रगतिशील निर्माण स्थलों के कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रसाद व स्वदेशी योजना के अंतर्गत यहां देवभक्तों की सुविधाओं और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देते हुए आधारभूत सुविधाओं से संबंधित कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान मालासेरी डूंगरी से जुड़े समग्र विकास के लिए विशिष्ट चर्चाएं भी हुईं। जिला कलेक्टर ने आसिंद के उपखण्ड अधिकारी और तहसीलदार को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।4
- केकड़ी जिले को पुनः बहाल करने की मांग को लेकर 18 मई को सावर से शुरू हुआ पद मार्च आज जयपुर पहुंचा। इस आंदोलन को पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विश्वजीत सिंह द्वारा निकाला गया था। पद मार्च के जयपुर पहुंचने पर, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता सुमेर सिंह चारण इसमें शामिल हुए और आंदोलन को न केवल न्यायसंगत बताया, बल्कि इसे जनभावनाओं के अनुरूप भी करार दिया। सुमेर सिंह चारण ने विश्वजीत सिंह को साफा बांधकर उनका अभिनंदन किया और इस 'पुनीत कार्य' के लिए बधाई देते हुए सफलता की अग्रिम शुभकामनाएँ भी दीं। इस अवसर पर अपने संबोधन में चारण ने सरकार से अपील की कि वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आम जनता की भावनाओं का सम्मान करे और केकड़ी को पुनः जिला घोषित करे।4
- आयुष अस्पताल चित्तौड़गढ़ सभी समाज बंधुओं के स्वास्थ्य को समर्पित है, जो एक स्वस्थ शरीर को सुखी जीवन का आधार मानते हुए निरंतर आयुर्वेद एवं पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहा है। अस्पताल में दैनिक ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) की सुविधा उपलब्ध है, जहाँ अनुभवी चिकित्सक विभिन्न रोगों की जाँच और परामर्श देते हैं। गंभीर तथा लंबे समय से चले आ रहे रोगों के लिए दस बेड का स्वच्छ और आधुनिक सुविधाओं से युक्त आईपीडी (इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) भी है, जहाँ भर्ती होकर उपचार कराया जा सकता है। यहाँ कमर दर्द, सर्वाइकल, सायटिका, घुटनों व जोड़ों का दर्द, लकवा, नसों से संबंधित समस्याएँ, मोटापा, थायरॉइड प्रबंधन, गैस, कब्ज, पेट रोग, त्वचा रोग, एलर्जी, माइग्रेन, सिरदर्द, महिलाओं और वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल जैसी समस्याओं का उपचार किया जाता है। साथ ही, अभ्यंग, स्वेदन, कटि बस्ती, जानू बस्ती सहित अन्य पंचकर्म चिकित्सा सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। आयुष अस्पताल की प्रमुख विशेषताओं में विशुद्ध आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक उपचार, अनुभवी चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टाफ की सेवाएँ शामिल हैं। यह एक NABH सर्टिफाइड आयुर्वेद हॉस्पिटल है, जहाँ मेडिक्लेम पॉलिसी/हेल्थ इंश्योरेंस के अंतर्गत भी उपचार सुविधा उपलब्ध है। यहाँ रोग के मूल कारण पर आधारित सुरक्षित उपचार प्रदान किया जाता है, जिसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सा का समन्वय है। डॉ. C.P. पटेल और उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा रोगी की प्रकृति के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है। यदि आपके परिवार या परिचितों में कोई स्वास्थ्य समस्या से परेशान है, तो सुरक्षित एवं प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार के लिए आकाशवाणी चौराहा, गांधी नगर, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) स्थित इस अस्पताल से संपर्क किया जा सकता है।1
- भीलवाड़ा जिले के मांडल क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहां गलत दिशा से आ रही एक मोटरसाइकिल और कार के बीच टक्कर में तीन युवक घायल हो गए। यह घटना मांडल चौराहा से रायला की ओर जाने वाले सर्विस रोड पर लीलैंड कंपनी के निकट हुई, जब गलत दिशा से आ रही मोटरसाइकिल सीधे कार से टकरा गई। हादसे में मोटरसाइकिल सवार डाबला निवासी 20 वर्षीय प्रदीप पिता जय सिंह भाटी, 21 वर्षीय दलीचंद पिता हरिकिशन गुर्जर और 22 वर्षीय लोकेश पिता किशन प्रजापत गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही बनेड़ा की 108 एंबुलेंस के पायलट प्रकाश चंद्र और ईएमटी रमेश चंद्र तत्काल घटनास्थल पर पहुँचे, जिन्होंने तत्परता से सभी घायल युवकों को महात्मा गांधी जिला अस्पताल में भर्ती कराया।1
- अधिक मास के पावन अवसर पर रामसर पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। इस धार्मिक माहौल के बीच, क्षेत्र में भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भक्ति के रंग में रंग दिया है।1
- भीलवाड़ा के सुभाषनगर थाने से एक बेहद गंभीर और अमानवीय मामला सामने आया है, जहाँ न्याय की गुहार लगाने पहुँचे एक पीड़ित युवक दिलखुश रेगर के साथ पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि उसे मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उससे कहा गया कि "कहीं डूबकर मर जा"। इसके बाद, खाकी के रौब में पुलिस ने पीड़ित को ही धारा 151 के तहत एक झूठे मामले में गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेल दिया। इस तानाशाहीपूर्ण रवैये के खिलाफ मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे पीड़ित दिलखुश रेगर और बड़ी संख्या में लोगों व समर्थकों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचकर एसपी को ज्ञापन सौंपा और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा थाने के सीसीटीवी फुटेज सीज करने की मांग की। दरअसल, हरिओम नगर निवासी दिलखुश रेगर अपने पिता देबी लाल रेगर के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में लंबे समय से इंसाफ के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भू-माफियाओं और आरोपियों ने उनके पिता के जीवित रहते हुए भी उनका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवा लिया, उनके बैंक खाते से मोटी रकम निकाल ली और उनकी बेशकीमती संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया। इस संबंध में सुभाषनगर थाने में एफआईआर संख्या 0316/2025 दर्ज है, लेकिन आरोप है कि सुभाषनगर थाना पुलिस इस गंभीर प्रकरण में लंबे समय से ढुलमुल रवैया अपना रही थी और आरोपियों को संरक्षण दे रही थी। इसी प्रकरण में न्याय की उम्मीद लिए दिलखुश रेगर गत 22 मई 2026 को दोपहर करीब 1:00 बजे उच्च न्यायालय, हाईकोर्ट के आदेश की प्रति लेकर सुभाषनगर थाने पहुँचे थे, क्योंकि पुलिस बार-बार आदेश की कॉपी नहीं मिलने का बहाना बना रही थी। दिलखुश के थाने पहुँचने पर वहाँ पहले से ही आरोपी पक्ष के लोग मौजूद थे। आरोप है कि पीड़ित को देखते ही थाना प्रभारी और वहाँ मौजूद पुलिस अधिकारी आगबबूला हो गए और उन्होंने पीड़ित के साथ अत्यंत अपमानजनक एवं अमानवीय व्यवहार करना शुरू कर दिया। जब पीड़ित ने अपने हक की बात कही, तो एक पुलिस अधिकारी ने मर्यादा की सारी सीमाएं लाँघते हुए उससे कहा कि "डूबकर मर जा"। इस अमानवीय व्यवहार से पीड़ित को गहरा मानसिक आघात लगा। हालात तब और भी बदतर हो गए जब पुलिस ने अपनी नाकामयाबी छिपाने और आरोपी पक्ष को फायदा पहुँचाने के लिए पीड़ित दिलखुश को ही शांति भंग की धारा 151 में गिरफ्तार कर लॉकअप में बंद कर दिया। इस पूरी घटना का वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध होने का दावा किया गया है।1