चंबा: उपमंडल स्तर पर पहुंचे सेब के पौधे, बर्फबारी के बाद बागवानों को मिली बड़ी राहत। चंबा: उपमंडल स्तर पर पहुंचे सेब के पौधे, बर्फबारी के बाद बागवानों को मिली बड़ी राहत। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिले के विभिन्न उपमंडलों में सेब के पौधों की खेप पहुंचने से बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद जहां मौसम में ठंड बढ़ गई थी, वहीं अब सेब के पौधे समय पर उपलब्ध होने से बागवानी कार्यों को गति मिल गई है। जानकारी के अनुसार कृषि एवं बागवानी विभाग द्वारा उपमंडल स्तर पर सेब के उन्नत किस्मों के पौधे उपलब्ध करवाए गए हैं, जिससे स्थानीय बागवानों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पौधों के वितरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि अधिक से अधिक किसानों और बागवानों को इसका लाभ मिल सके। बागवानों का कहना है कि बर्फबारी के बाद भूमि में पर्याप्त नमी होने के कारण पौधारोपण के लिए यह समय बेहद उपयुक्त है। ऐसे में पौधों की समय पर आपूर्ति से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और भविष्य में आर्थिक रूप से भी लाभ होगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष बागवानी को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सेब सहित अन्य फलदार पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही बागवानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है ताकि पौधारोपण सही तरीके से किया जा सके। सेब के पौधे पहुंचने से क्षेत्र में बागवानी गतिविधियां तेज होंगी और बागवानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी है। बाइट डॉ प्रमोद शाह उद्यान उपनिदेशक चंबा।
चंबा: उपमंडल स्तर पर पहुंचे सेब के पौधे, बर्फबारी के बाद बागवानों को मिली बड़ी राहत। चंबा: उपमंडल स्तर पर पहुंचे सेब के पौधे, बर्फबारी के बाद बागवानों को मिली बड़ी राहत। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिले के विभिन्न उपमंडलों में सेब के पौधों की खेप पहुंचने से बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद जहां मौसम में ठंड बढ़ गई थी, वहीं अब सेब के पौधे समय पर उपलब्ध होने से बागवानी कार्यों को गति मिल गई है। जानकारी के अनुसार कृषि एवं बागवानी विभाग द्वारा उपमंडल स्तर पर सेब के उन्नत किस्मों के पौधे उपलब्ध करवाए गए हैं, जिससे स्थानीय बागवानों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पौधों के वितरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि अधिक से अधिक किसानों और बागवानों को इसका लाभ मिल सके। बागवानों का कहना है कि बर्फबारी के बाद भूमि में पर्याप्त नमी होने के कारण पौधारोपण के लिए यह समय बेहद उपयुक्त है। ऐसे में पौधों की समय पर आपूर्ति से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और भविष्य में आर्थिक रूप से भी लाभ होगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष बागवानी को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सेब सहित अन्य फलदार पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही बागवानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है ताकि पौधारोपण सही तरीके से किया जा सके। सेब के पौधे पहुंचने से क्षेत्र में बागवानी गतिविधियां तेज होंगी और बागवानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी है। बाइट डॉ प्रमोद शाह उद्यान उपनिदेशक चंबा।
- चंबा: सनसनीखेज वारदात: लोथल में पति-पत्नी की मौत, पुलिस जांच में जुटी। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश चंबा । भरमौर विधानसभा क्षेत्र की उपतहसील धरवाला के अंतर्गत ग्राम पंचायत लोथल के गांव लोथल में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक व्यक्ति द्वारा पत्नी की हत्या करने के बाद स्वयं आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत और सनसनी फैल गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान सरवन कुमार पुत्र तानी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि देर रात पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ, जो काफी बढ़ गया। इसी दौरान महिला की मौत हो गई और बाद में व्यक्ति ने भी फांसी लगाकर जान दे दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। साथ ही फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार व्यक्ति का व्यवहार अक्सर हिंसक रहता था और वह पत्नी के साथ मारपीट करता था। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।2
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- चम्बा - 18 फरवरी चम्बा जिले मैहला के लोथल गांव में पति ने पत्नी की हत्या कर खुद पेड़ से लटककर दी जान यह घटना देर रात को दिया वारदात को अंजाम,घर में थे केवल पति-पत्नी सुरेंद्र ठाकुर चम्बा जिले के विकास खंड मैहला की ग्राम पंचायत के लोथल गांव में मंगलवार देर रात दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की तेजधार हथियार से हत्या करने के बाद घर के आंगन में पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलते ही गेहरा पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और दोनों शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। लोथल निवासी सरवन कुमार पुत्र तनी राम ने मंगलवार देर रात अपनी पत्नी अंजू देवी पर तेजधार हथियार से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद सरवन कुमार ने घर के आंगन में लगे पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली। घटना का खुलासा बुधवार सुबह उस समय हुआ जब सरवन कुमार के भाई का बेटा खच्चरों को घास डालने के लिए गोशाला गया। वहां उसने आंगन में पेड़ से लटका शव देखा और परिजनों को सूचना दी। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत गेहरा पुलिस चौकी को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू की। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने फोरेंसिक टीम को भी बुलाया, जिसने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि घटना के समय घर में केवल पति-पत्नी ही मौजूद थे। सरवन कुमार के तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि करीब 16 वर्षीय बेटा उस समय अपने रिश्तेदार के घर गया हुआ था । जिससे वह इस घटना से बाल-बाल बच गया। पुलिस के अनुसार हत्या और आत्महत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस आसपास के लोगों और रिश्तेदारों से पूछताछ कर रही है । गेहरा पुलिस चौकी ने मामला दर्ज कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा फोरेंसिक जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और सनसनी का माहौल है।1
- विधानसभा के शून्य काल में विधायक डॉ. जनक राज ने उठाया गंभीर मुद्दा। पांगी घाटी में करोड़ों की 33KV विद्युत लाइन परियोजना बिना Forest Clearance के शुरू करने का प्रयास — काम बीच में रुका। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग। ⚡ पांगी जैसे दुर्गम जनजातीय क्षेत्र में बिजली जीवनरेखा है। ⚡ प्रशासनिक लापरवाही से जनता को भुगतनी पड़ रही है कीमत। ⚡ विधायक ने दी चेतावनी — जरूरत पड़ी तो मुद्दा सदन से सड़क तक जाएगा।1
- किलाड़ (पांगी घाटी): जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में बुधवार को पंगवाल समुदाय का प्रमुख लोकपर्व ‘जुकारू’ एवं ‘पड़ीद’ पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। अमावस्या की रात्रि को ‘सिल्ल’ के रूप में जुकारू उत्सव की शुरुआत होती है, जबकि अमावस्या के अगले दिन चंद्रमा की प्रथम तिथि को पड़ीद मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित माना जाता है। सूर्य अर्घ्य से होता है पड़ीद का शुभारंभ पड़ीद के दिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात लोग भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का शुभारंभ करते हैं। इसके बाद छोटे सदस्य घर के बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं। चरण स्पर्श से पहले ‘जेवरा’ के फूल एक-दूसरे को भेंट करने की परंपरा निभाई जाती है। जेवरा गेहूं या मक्की के दानों से तैयार की गई कोमल कलियां होती हैं, जिन्हें जुकारू से लगभग 10–15 दिन पूर्व विशेष विधि से उगाया जाता है। घर का मुखिया ‘राजावली’ के समक्ष माथा टेककर प्रार्थना करता है कि समस्त नकारात्मक शक्तियां नाग लोक को प्रस्थान करें और धरती पर सुख-शांति बनी रहे। पितरों की पूजा और सूर्य अर्घ्य के बाद पशुधन को भी पकवान खिलाकर जुकारू किया जाता है। घर लौटते समय शुभ वचन कहे जाते हैं, जिनका उत्तर गृहलक्ष्मी ‘शगुन’ के रूप में देती हैं। पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव पर्व के अवसर पर पूरा परिवार एक-दूसरे के चरण स्पर्श कर गले मिलता है। घर में तैयार घी मंडे और अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्य, गृहस्वामिनी को छोड़कर, भोजपत्र में पकवान सजाकर गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के घर ‘जुकारू भेंट’ लेकर जाते हैं। जेवरा के फूल अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। मेजबान परिवार अतिथियों का स्वागत पारंपरिक पकवानों, मांस और स्थानीय पेय से करता है। किलाड़ में रात दो बजे से परंपरा पांगी मुख्यालय किलाड़ में पड़ीद उत्सव की शुरुआत रात दो बजे से ही हो जाती है। प्रातःकाल लोग समीपवर्ती प्राचीन शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ और नाग देवता को जुकारू भेंट अर्पित करते हैं। परंपरा के अनुसार, मंदिर में पूजा के बाद चौकी किलाड़ स्थित ऐतिहासिक राजकोठी में जाकर राजा को भी जुकारू भेंट किया जाता है। यह परंपरा राजतंत्र काल से चली आ रही है। मान्यता है कि पूर्व समय में धरवास और किरयूनी क्षेत्र के लोग भी इस अवसर पर किलाड़ पहुंचते थे, किंतु एक बार भारी हिमपात के कारण वे शामिल नहीं हो सके। तब से किलाड़ के लोगों ने इस परंपरा को अपने स्तर पर निरंतर बनाए रखा है। जेवरा फूल का विशेष महत्व जुकारू पर्व में ‘जेवरा’ का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। माघ पूर्णिमा के तीसरे दिन मिट्टी में भेड़-बकरियों के बारीक गोबर को मिलाकर उसमें गेहूं और मक्की के बीज डाले जाते हैं। लगभग 10–12 दिनों में तैयार हुई इन कलियों का उपयोग 12 दिनों तक फूल के रूप में किया जाता है। स्थानीय पुजारी जयराम के अनुसार, जेवरा की कलियां जितनी अच्छी और शीघ्र तैयार होती हैं, उसे आने वाले वर्ष में अच्छी फसल का संकेत माना जाता है। पड़ीद के दिन सूर्य भगवान को भोग लगाने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। पौराणिक और लोकमान्यताएं जुकारू पर्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार में महादानी राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। राजा बलि के त्याग से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान दिया कि माघ और फाल्गुन मास की विशेष अमावस्याओं पर पृथ्वी पर उनकी पूजा होगी। पांगी का जुकारू पर्व इसी मान्यता से जुड़ा माना जाता है। एक अन्य लोककथा के अनुसार, क्षेत्र में राणा और ठाकुरों के बीच लंबे समय तक संघर्ष रहता था। आपसी वैमनस्य को समाप्त करने और सामाजिक मेल-मिलाप को बढ़ावा देने के लिए वर्ष में कुछ विशेष दिन आपसी मिलन के लिए निर्धारित किए गए, जिन्हें बाद में ‘जुकारू’ नाम दिया गया। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कड़ाके की सर्दियों में सामाजिक संपर्क सीमित होने के कारण, विशेषकर विवाहित बेटियों को मायके आने का अवसर देने के उद्देश्य से यह पर्व प्रारंभ हुआ। आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक जुकारू और पड़ीद केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पंगवाल समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, पारिवारिक एकता और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। पितरों की श्रद्धा, देव पूजन, पारिवारिक मिलन और सामूहिक उत्सव की यह परंपरा आज भी पांगी घाटी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे। #पांगीघाटी #किलाड़ #जुकारू #पड़ीद #पंगवालसमुदाय #जनजातीयसंस्कृति #हिमाचलप्रदेश #हिमाचलकीसंस्कृति #लोकपर्व #पारंपरिकत्योहार #देवसंस्कृति #सूर्यअर्घ्य #पितृसमर्पण #संस्कृतिकीझलक #IncredibleHimachal लेख एवं प्रस्तुति कृष्ण चंद राणा लेखक देवभूमि पांगी दर्शन एवं सम्पादक पांगी न्यूज़ टुडे।1
- प्रदेश सरकार पर हमलावार हुए भाजपा विधायक प्रकाश राणा, बोले- आप कर्ज लेकर घी पी रहे, हम आपके साथ क्यों चलें?1
- सुजानपुर सुजानपुर के ऐतिहासिक मैदान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय होली महोत्सव की तैयारीया शुरू हो गई है यहां मैदान में सजने वाली दुकानदारी के लिए मार्किंग का कार्य सुजानपुर प्रशासन ने शुरू करवाया है बताते चले कि मैदान के भीतर दुकानदारी सजाने के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं जिसमें खान-पान की दुकानों के साथ-साथ अन्य फूड स्टॉल कहां लगाए जाएंगे रोजमर्रा की वस्तुएं कहां पर बिक्री होगी अन्य उत्पाद कहां बेचे जाएंगे इसके साथ-साथ दुकानों के मध्य और दुकानदारी के बीच आने-जाने के लिए रास्ता जितना निर्धारित किया गया है उसे हिसाब से यह मार्किंग करवाई जा रही है मेला ग्राउंड के भीतर आपातकाल की स्थिति के दौरान रोगी वाहन दमकल वाहन की बड़ी और छोटी गाड़ियां कूड़ा करकट उठाने वाली गाड़ियां आसानी से प्रवेश कर सके जिस रास्ते से यह गाड़ियां आनी है उन रास्तों की व्यवस्था सही हो उनके मध्य किसी भी तरह की दुकानदारी को ना सजाया जाए किसी भी तरह का अतिक्रमण न हो तमाम बातों को ध्यान में रखकर तमाम कार्रवाई करवाई जा रही है मेला ग्राउंड के भीतर झूले कहां लगाए जाएंगे डोम बाजार कहां सजेगा अन्य क्राफ्ट मेले कहां लगाए जाएंगे विभागीय प्रदर्शनी कहां लगेगी सांस्कृतिक कार्यक्रम कहां पर होंगे अन्य क्राकरी बाजार कहां सजेगा पुरानी संस्कृति के तहत बिकने वाले मिट्टी के उत्पाद कहां पर बिक्री होंगे तमाम स्थान मार्क करवाए जा रहे हैं पार्किंग स्थल का एरिया कहां से कहां तक होगा यहां वाहन किस तरफ से आएंगे और किस तरफ से बाहर जाएंगे इसको लेकर भी व्यवस्था करवाई जा रही है मेले के दौरान हर तरफ मोबाइल टॉयलेट स्थापित करवाने की व्यवस्था करवाई जा रही है यह सभी टॉयलेट सीवरेज के साथ कनेक्ट होंगे तमाम बातों को लेकर तैयारियां शुरू की गई है। उधर मेला ग्राउंड की दुकानदारी के लिए प्लाट बेचने का कार्य भी शुरू हो गया है उपमंडल कार्यालय के रूम नंबर 105 में जिस व्यक्ति ने मेला ग्राउंड की बोली को अपने नाम किया है उनके कर्मी वहां पर बैठकर प्लाट आवंटन का कार्य कर रहे हैं1
- चंबा: बोर्ड परीक्षा को लेकर डीसी मुकेश रेप्सवाल ने विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं, उज्ज्वल भविष्य की कामना। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिला चंबा में बोर्ड परीक्षाओं के शुभारंभ को लेकर उपायुक्त चंबा मुकेश रेप्सवाल ने सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाएं विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती हैं, जिसमें मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से सफलता प्राप्त की जा सकती है। उपायुक्त ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे परीक्षा के दौरान तनावमुक्त रहकर सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा दें और समय का सही प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि माता-पिता एवं शिक्षक भी बच्चों का मनोबल बढ़ाएं ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें। डीसी मुकेश रेप्सवाल ने सभी परीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा परीक्षा संचालन को शांतिपूर्ण एवं सुचारू ढंग से संपन्न करवाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि ईमानदारी और लगन से किया गया प्रयास ही सफलता की कुंजी है। बाइट डीसी चंबा मुकेश रेप्सवाल।1