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दवाई वितरण वृद्ध आश्रम अनूपगढ़ में रह रहे देवतुल्य वृद्धजनों के लिए 9672185366 आप भी सेवा सहयोग करें।
User2307
दवाई वितरण वृद्ध आश्रम अनूपगढ़ में रह रहे देवतुल्य वृद्धजनों के लिए 9672185366 आप भी सेवा सहयोग करें।
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- आप भी सेवा सहयोग करें।1
- radhey radhey join Delhi crimepress 96640940651
- Post by Rajevishnoi rawla1
- Post by Navratan Bhartat 94130-446461
- कोटा में एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह एक पिकअप चालक को धमका रहा है। पुलिसकर्मी ने चालक का गिरेबान पकड़कर कहा कि उसका बेटा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पायलट है। वीडियो में पुलिसकर्मी नशे में भी दिखाई दे रहा है। इस घटना के बाद शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने ट्रैफिकपुलिस कांस्टेबल कैलाश चौधरी को निलंबित कर दिया है। पुलिस का कहना है कि चालक की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं आई है, लेकिन वीडियो की पुष्टि और जांच के बाद कार्रवाई की गई है ।1
- Post by Sakir Husen1983 news reporter 88246157231
- बीकानेर में पुष्करणा समाज के प्रसिद्ध ओलंपिक सावे के दौरान निभाई जा रही रही अनूठी परंपराओं के तहत एक शानदार दृश्य उस वक्त देखने को मिला जब दुल्हन ऐश्वर्या घोड़ी पर सवार होकर गणेश परिक्रमा "छींकी" के लिए अपने ससुराल पहुंची। सोमवार देर रात्रि श्रीमती शकुंतला और नागेंद्र रंगा की सुपुत्री ऐश्वर्या पारंपरिक पीले परिधान में सज धज कर घोड़ी पर चढ़कर परिजनों के साथ वैवाहिक कार्यक्रम स्थल आचार्य बगीची पहुंची। उसकी शादी मंगलवार को वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य के पौत्र और रेणु-कमल आचार्य के पुत्र नकुल के साथ तय हुई है । छींकी लेकर घोड़ी पर पहुंची दुल्हन ऐश्वर्या का पुष्करणा समाज की समृद्ध प्राचीन परंपराओं और रीति रिवाज से ससुराल पक्ष की महिलाओं द्वारा पूर्ण मान मनुहार के साथ जोरदार स्वागत किया गया।ससुराल पक्ष की ओर से वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य, अनिल आचार्य, शिक्षक नेता रवि आचार्य, पार्षद किशोर आचार्य, भाजपा नेता मनीष आचार्य, विनोद आचार्य, निर्मल आचार्य, विमल आचार्य, कमल आचार्य, सुनील बोड़ा, एड. सुरेन्द्र पुरोहित, पीयूष पुरोहित, महेंद्र आचार्य, नवीन व्यास ने वधु पक्ष का स्वागत किया।2
- आईरा स्पेशल न्यूज चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पश्चिम बंगाल में उसके स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को पटरी से उतारने, नाकाम करने और रोकने के लिए जानबूझकर और सुनियोजित कोशिशें की जा रही है. चुनाव आयोग ने एक अतिरिक्त हलफनामे में कहा कि इस मामले में एक गंभीर संवैधानिक चिंता का मामला उठता है. सम्मानपूर्वक यह बताया जाता है कि एसआईआर अभी 12 राज्यों में चल रहा है. इस तरह का विवाद जिसमें राज्य की सत्ताधारी पार्टी बाधा डालने और अधिकारियों को धमकी देने में सक्रिय रूप से शामिल है, वह सिर्फ पश्चिम बंगाल राज्य तक ही सीमित है. अफसोस की बात है कि यह गठबंधन सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है. ये हरकतें दिखाती है कि राज्य के सभी मुख्य लोग इसमें शामिल हैं. इसमें राज्य सरकार, सत्ताधारी पार्टी के कुछ चुने हुए प्रतिनिधि और पार्टी के पदाधिकारी शामिल हैं. हलफनामे में कहा गया है कि एसआईआर प्रक्रिया को रोकने या नाकाम करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, चाहे वह सही तरीके से हो या गलत तरीके से.' चुनाव आयोग ने कहा कि इन रुकावटों का जारी रहना और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा एसआईआर प्रक्रिया को पटरी से उतारने की सुनियोजित कोशिशें सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का सीधा उल्लंघन और गैर-अनुपालन है. हलफनामा में कहा गया, 'रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों से पता चलता है कि सही प्लानिंग और मिलकर की गई कार्रवाई के जरिए, पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे एसआईआर अभियान को पटरी से उतारने, पंगु बनाने और नाकाम करने की जानबूझकर और सिस्टमैटिक कोशिशें की जा रही हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि हालांकि पश्चिम बंगाल ने अपने जवाबी हलफनामे में एसआईआर अभियान में चुनाव आयोग को पूरा सहयोग देने का वादा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत सुप्रीम कोर्ट के सामने दिए गए इस पक्के वादे से बिल्कुल अलग है. चुनाव आयोग ने कहा कि जमीन पर बार-बार असहयोग, रुकावट, डराने-धमकाने और दखलअंदाजी की घटनाएं देखी गई हैं और सुप्रीम कोर्ट के 19.01.2026 के ऊपर बताए गए ऑर्डर के बाद भी ये जारी है. चुनाव आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मौजूदा मुख्यमंत्री, संसद सदस्यों और सत्ताधारी पार्टी के अन्य राजनीतिक पदाधिकारियों ने ऐसे सार्वजनिक बयान, भाषण दिए हैं, जिनका मकसद एसआईआर प्रक्रिया में लगे चुनाव अधिकारियों को डराना है. हलफनामा में कहा गया है कि धमकियों, हिंसा और सुनवाई में जबरदस्ती रुकावट डालने की घटनाएँ भी हुई हैं. इसमें उन ऑफिसों में घुसना शामिल है जहाँ कानूनी सुनवाई हो रही थी, वोटर्स द्वारा जमा किए गए फॉर्म जलाना, और आधिकारिक कागजात को नष्ट करना शामिल है जिनमें एसआईआर प्रोसेस की स्थिति और प्रगति जैसी प्रशासनिक जानकारी दर्ज थी. इसमें कहा गया, 'पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा और मुख्य चुनाव अधिकारी को सुरक्षा देनी पड़ी, जिसकी जरूरत एसआईआर से गुजर रहे किसी दूसरे राज्य में नहीं पड़ी.' चुनाव आयोग ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, तो एसआईआर के खिलाफ असहयोग और रुकावट का एक संगठित अभियान शुरू किया गया. इसका मकसद संवैधानिक कर्तव्य निभा रही एक संवैधानिक संस्था द्वारा किए जा रहे काम को पटरी से उतारना था. ईसीआई ने कहा, 'इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत के चुनाव आयोग के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना की. इसमें ये शामिल हैं- चुनाव अधिकारियों को रोकने या उन पर हमला करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न करना, अधिकारियों के ट्रांसफर/निलंबन के संबंध में ईसीआई के अनुरोधों पर कार्रवाई करने में विफलता, जरूरी रैंक के अधिकारियों की तैनाती से संबंधित बार-बार दिए गए निर्देशों का पालन न करना.' इसमें कहा गया है कि सत्ताधारी दल के सबसे ऊंचे स्तर के नेताओं द्वारा सार्वजनिक भड़काऊ भाषणों से स्थिति और भी खराब हो गई है. इसमें ईसीआई और एसआईआर प्रक्रिया पर खुलेआम हमला किया गया है. हलफनामे में कहा गया, 'इसके बाद स्वाभाविक रूप से सुनवाई केंद्रों पर हमले हुए, सरकारी दफ्तरों में तोड़फोड़ हुई, मतदाताओं/बीएलए द्वारा जमा किए गए कानूनी फॉर्म जलाए गए, माइक्रो-ऑब्जर्वर को धमकियां दी गई और बूथ लेवल अधिकारियों, माइक्रो-ऑब्जर्वर, एईआरओ और सुनवाई में लगे अन्य चुनावी कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा हुई.' चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि चुनाव आयोग के अनुरोध के अनुसार एफआईआर तुरंत दर्ज की जाएं और कंप्लायंस रिपोर्ट दी जाए. इसमें कहा गया,'पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित सभी राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकारी अधिकारियों को ईसीआई के निर्देशों को लागू करने और कंप्लायंस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया जाता है.'1