देवघर में संत समाज की ऐतिहासिक घोषणा : कालकानंद गिरी बनीं जमशेदपुर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर, देश-विदेश से मिल रही बधाइयाँ जैन एकता मंच के 15 सूत्रीय उद्देश्यों से समाज में एकता, शिक्षा और सेवा की भावना को मिलेगा बल मुंबई । जैन समाज में एकता, सहयोग और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थापित जैन एकता मंच द्वारा समाज के समग्र विकास के लिए 15 सूत्रीय उद्देश्यों को निर्धारित किया गया है। इन उद्देश्यों में जैन धर्म के मूल सिद्धांतों का संरक्षण, समाज में शिक्षा और स्वास्थ्य के अवसरों का विस्तार, आर्थिक समानता को प्रोत्साहन तथा जैन समाज के विभिन्न पंथों और संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया है। जैन एकता मंच का उद्देश्य जैन समाज को एक सूत्र में बांधते हुए वैश्विक स्तर पर जैन धर्म की पहचान को मजबूत करना है। मंच के माध्यम से यह प्रयास किया जा रहा है कि जैन समाज के सभी लोग अपने नाम के साथ जैन उपनाम का प्रयोग करें, जिससे समाज में एक समान पहचान और एकता की भावना को बढ़ावा मिल सके। मंच के गठन में जैन धर्म गुरुओं, आचार्यों और समाज के वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। अमृत जैन (मेहता कोरा) सहित सहयोगियों के नेतृत्व में इस पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। साथ ही भारत और विदेशों में विराजमान जैन आचार्य गुरुओं के आशीर्वाद से समाज में दया, सहयोग और सद्भाव की भावना को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। जैन एकता मंच द्वारा जैन धर्म के इतिहास और विरासत को सुरक्षित रखने के लिए विशेष योजनाएं बनाई गई हैं। इसके तहत जैन मंदिरों और संस्थाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों, धार्मिक ग्रंथों और दस्तावेजों का संग्रह कर उन्हें सुरक्षित रखने की योजना है। साथ ही पुस्तकालय और अध्ययन केंद्र स्थापित कर नई पीढ़ी को जैन धर्म के इतिहास, सिद्धांतों और संस्कृति से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। मंच का एक प्रमुख उद्देश्य जैन समाज की श्वेतांबर और दिगंबर परंपराओं के बीच समन्वय और एकता को मजबूत करना भी है। इसके अंतर्गत समाज में पारस्परिक सहयोग और सद्भाव का वातावरण तैयार करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर धर्म और संस्कृति के संरक्षण में योगदान दे सकें। जैन एकता मंच ने पर्युषण पर्व को भी समाज में एकता का प्रतीक बनाने का संकल्प लिया है। इसके तहत यह प्रयास किया जा रहा है कि जैन समाज के सभी वर्ग पर्युषण पर्व को एक ही समय पर मनाएं, जिससे समाज में सामंजस्य और एकजुटता की भावना को बल मिल सके। इसके अलावा मंच द्वारा जैन मंदिरों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए भी विशेष पहल की जाएगी। जैन तीर्थों और मंदिरों को व्यवस्थित रूप से विकसित कर उन्हें धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की योजना है। इससे जहां एक ओर जैन धर्म की परंपराओं को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। जैन एकता मंच समाज में दया, शाकाहार और पशु संरक्षण के संदेश को भी व्यापक स्तर पर प्रसारित करने के लिए कार्य करेगा। इसके लिए विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों, शिविरों और सामाजिक अभियानों का आयोजन किया जाएगा, ताकि जैन धर्म के अहिंसा और करुणा के सिद्धांतों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा सके। मंच का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जैन समाज के बच्चों, युवाओं और महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य शिविर, कौशल विकास कार्यक्रम और रोजगार सहायता जैसी योजनाएं संचालित करने की योजना बनाई गई है। जैन एकता मंच समाज के भीतर मौजूद आंतरिक मतभेदों, ईर्ष्या और आर्थिक असमानता को समाप्त करने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। मंच का मानना है कि जब समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर सहयोग की भावना से कार्य करेंगे, तभी जैन समाज सशक्त और संगठित बन सकेगा। मंच का यह भी उद्देश्य है कि जो लोग किसी कारणवश जैन धर्म से दूर हो गए हैं, उन्हें पुनः समाज में सम्मानपूर्वक जोड़ने का प्रयास किया जाए। इसके माध्यम से समाज में समावेश और अपनत्व की भावना को बढ़ावा मिलेगा। जैन एकता मंच ने स्पष्ट किया है कि यह संगठन पूर्णतः गैर-राजनीतिक, निःस्वार्थ और पारदर्शी तरीके से कार्य करेगा। संगठन का उद्देश्य केवल समाज सेवा, धर्म प्रचार और सामाजिक विकास है। इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों को स्थान नहीं दिया जाएगा। मंच की सफलता के लिए जैन आचार्य संतों के आशीर्वाद, समाज के उद्योगपतियों, दानदाताओं और समाजसेवियों के सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया है। इनके सहयोग से विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक योजनाओं को गति प्रदान की जाएगी। जैन एकता मंच भविष्य में भारत सहित विदेशों में भी अपनी शाखाओं का विस्तार करने की योजना बना रहा है। इसके माध्यम से जैन मंदिरों, संघों और सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर एक सुदृढ़ और संगठित नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो समाज के विकास और धर्म प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जैन एकता मंच के इन 15 उद्देश्यों को जैन समाज के लिए एक नई दिशा और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जा रहा है। समाज के प्रबुद्धजनों का मानना है कि यदि इन उद्देश्यों को योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाए तो जैन समाज में एकता, सेवा और समृद्धि का एक नया अध्याय प्रारंभ हो सकता है।
देवघर में संत समाज की ऐतिहासिक घोषणा : कालकानंद गिरी बनीं जमशेदपुर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर, देश-विदेश से मिल रही बधाइयाँ जैन एकता मंच के 15 सूत्रीय उद्देश्यों से समाज में एकता, शिक्षा और सेवा की भावना को मिलेगा बल मुंबई । जैन समाज में एकता, सहयोग और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थापित जैन एकता मंच द्वारा समाज के समग्र विकास के लिए 15 सूत्रीय उद्देश्यों को निर्धारित किया गया है। इन उद्देश्यों में जैन धर्म के मूल सिद्धांतों का संरक्षण, समाज में शिक्षा और स्वास्थ्य के अवसरों का विस्तार, आर्थिक समानता को प्रोत्साहन तथा जैन समाज के विभिन्न पंथों और संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया है। जैन एकता मंच का उद्देश्य जैन समाज को एक सूत्र में बांधते हुए वैश्विक स्तर पर जैन धर्म की पहचान को मजबूत करना है। मंच के माध्यम से यह प्रयास किया जा रहा है कि जैन समाज के सभी लोग अपने नाम के साथ जैन उपनाम का प्रयोग करें, जिससे समाज में एक समान पहचान और एकता की भावना को बढ़ावा मिल सके। मंच के गठन में जैन धर्म गुरुओं, आचार्यों और समाज के वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। अमृत जैन (मेहता कोरा) सहित सहयोगियों के नेतृत्व में इस पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। साथ ही भारत और विदेशों में विराजमान जैन आचार्य गुरुओं के आशीर्वाद से समाज में दया, सहयोग और सद्भाव की भावना को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। जैन एकता मंच द्वारा जैन धर्म के इतिहास और विरासत को सुरक्षित रखने के लिए विशेष योजनाएं बनाई गई हैं। इसके तहत जैन मंदिरों और संस्थाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों, धार्मिक ग्रंथों और दस्तावेजों का संग्रह कर उन्हें सुरक्षित रखने की योजना है। साथ ही पुस्तकालय और अध्ययन केंद्र स्थापित कर नई पीढ़ी को जैन धर्म के इतिहास, सिद्धांतों और संस्कृति से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। मंच का एक प्रमुख उद्देश्य जैन समाज की श्वेतांबर और दिगंबर परंपराओं के बीच समन्वय और एकता को मजबूत करना भी है। इसके अंतर्गत समाज में पारस्परिक सहयोग और सद्भाव का वातावरण तैयार करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर धर्म और संस्कृति के संरक्षण में योगदान दे सकें। जैन एकता मंच ने पर्युषण पर्व को भी समाज में एकता का प्रतीक बनाने का संकल्प लिया है। इसके तहत यह प्रयास किया जा रहा है कि जैन समाज के सभी वर्ग पर्युषण पर्व को एक ही समय पर मनाएं, जिससे समाज में सामंजस्य और एकजुटता की भावना को बल मिल सके। इसके अलावा मंच द्वारा जैन मंदिरों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए भी विशेष पहल की जाएगी। जैन तीर्थों और मंदिरों को व्यवस्थित रूप से विकसित कर उन्हें धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की योजना है। इससे जहां एक ओर जैन धर्म की परंपराओं को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। जैन एकता मंच समाज में दया, शाकाहार और पशु संरक्षण के संदेश को भी व्यापक स्तर पर प्रसारित करने के लिए कार्य करेगा। इसके लिए विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों, शिविरों और सामाजिक अभियानों का आयोजन किया जाएगा, ताकि जैन धर्म के अहिंसा और करुणा के सिद्धांतों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा सके। मंच का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जैन समाज के बच्चों, युवाओं और महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य शिविर, कौशल विकास कार्यक्रम और रोजगार सहायता जैसी योजनाएं संचालित करने की योजना बनाई गई है। जैन एकता मंच समाज के भीतर मौजूद आंतरिक मतभेदों, ईर्ष्या और आर्थिक असमानता को समाप्त करने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। मंच का मानना है कि जब समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर सहयोग की भावना से कार्य करेंगे, तभी जैन समाज सशक्त और संगठित बन सकेगा। मंच का यह भी उद्देश्य है कि जो लोग किसी कारणवश जैन धर्म से दूर हो गए हैं, उन्हें पुनः समाज में सम्मानपूर्वक जोड़ने का प्रयास किया जाए। इसके माध्यम से समाज में समावेश और अपनत्व की भावना को बढ़ावा मिलेगा। जैन एकता मंच ने स्पष्ट किया है कि यह संगठन पूर्णतः गैर-राजनीतिक, निःस्वार्थ और पारदर्शी तरीके से कार्य करेगा। संगठन का उद्देश्य केवल समाज सेवा, धर्म प्रचार और सामाजिक विकास है। इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों को स्थान नहीं दिया जाएगा। मंच की सफलता के लिए जैन आचार्य संतों के आशीर्वाद, समाज के उद्योगपतियों, दानदाताओं और समाजसेवियों के सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया है। इनके सहयोग से विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक योजनाओं को गति प्रदान की जाएगी। जैन एकता मंच भविष्य में भारत सहित विदेशों में भी अपनी शाखाओं का विस्तार करने की योजना बना रहा है। इसके माध्यम से जैन मंदिरों, संघों और सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर एक सुदृढ़ और संगठित नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो समाज के विकास और धर्म प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जैन एकता मंच के इन 15 उद्देश्यों को जैन समाज के लिए एक नई दिशा और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जा रहा है। समाज के प्रबुद्धजनों का मानना है कि यदि इन उद्देश्यों को योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाए तो जैन समाज में एकता, सेवा और समृद्धि का एक नया अध्याय प्रारंभ हो सकता है।
- Post by VAGAD news241
- डूंगरपुर। जनजाति अंचल के डूंगरपुर में मई ओर जून माह से पहले ही मार्च में जहा तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिसके चलते आगामी गर्मी को लेकर जिला प्रशासन पेयजल व्यवस्थाओं को लेकर मुस्तैदी दिखा रहा है। वही दूसरी ओर लचर विभागीय कार्यप्रणाली के चलते हजारों लीटर अमृत जल सड़को ओर नालियों में व्यर्थ बह रहा है। बुधवार को शहर ब्रह्मस्थली कॉलोनी में जलदाय विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है।1
- Post by Devilalmeena Meena1
- साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित डूंगरपुर। जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने पीएचईडी अधीक्षण अभियंता को गर्मियों से पूर्व जिले में पेयजल वितरण के उचित प्रबंधन हेतु समीक्षा बैठक आयोजित कर आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह निर्देश जिला परिषद के ईडीपी सभागार में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में विभाग वार समीक्षा करते हुए दिए। बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की समीक्षा के दौरान पालनहार योजना, पेंशन योजना के तहत सत्यापन आदि की जानकारी दी तथा सीमलवाड़ा, चिखली, गलियाकोट में न्यून प्रगति पर तीव्रता से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान विभिन्न योजनाओं में मार्च पूर्व लक्ष्य के अनुसार स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए। बैठक में पीएचइडी अधीक्षण अभियंता ने पेयजल वितरण, हेड पंप, ट्यूब वेल, विभागीय कार्य एवं योजनाओं की क्रियान्वित के संबंध में जानकारी दी। इसी क्रम में पीडब्ल्यूडी, एवीएनएल, टीएडी, पशुपालन, उद्योग, जल संसाधन, सहकारिता, आईसीडीएस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभागों की समीक्षा करते हुए सभी प्रगतिरत कार्यों को तय समय अवधि में पूर्ण करने तथा न्यून प्रगति वाली योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने संपर्क पोर्टल पर लंबित प्रकरणों के तत्काल निस्तारण करने तथा प्रभावी मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर दिनेश चंद्र धाकड़, मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़ सहित समस्त जिला स्तरीय अधिकारी गण मौजूद रहें।3
- उदयपुर/डूंगरपुर। लोकसभा क्षेत्र उदयपुर के जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने दिल्ली के सदन में पुरजोर आवाज उठाई है। मंगलवार को संसद में नियम 377 के तहत विशेष उल्लेख करते हुए डॉ. रावत ने जिले की पांच महत्वपूर्ण पंचायत समितियों - ओगणा, सुलाव, देवला, नाई और कल्याणपुर में नवीन एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खोलने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी। उन्होंने तर्क दिया कि ये क्षेत्र न केवल भौगोलिक रूप से दुर्गम हैं, बल्कि शिक्षा के संसाधनों के अभाव में यहां की प्रतिभाएं पिछड़ रही हैं। सांसद डॉ. रावत ने सदन को सांख्यिकीय आंकड़ों के साथ अवगत कराया कि ये पांचों पंचायत समितियां पूर्णतः जनजाति बाहुल्य हैं और विद्यालय स्थापना की सभी पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं। उन्होंने 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए बताया कि देवला में 98 प्रतिशत, सुलाव में 95 प्रतिशत, कल्याणपुर में 88 प्रतिशत, नाई में 86 प्रतिशत और ओगणा में 68 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या निवास करती है। वर्तमान में इन क्षेत्रों में एक भी एकलव्य विद्यालय संचालित नहीं होने के कारण यहां के बालक-बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा के लिए भटकना पड़ता है या उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित रहना पड़ता है। डॉ. रावत ने अपने संबोधन में क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुर्गम अरावली पहाड़ियों में बसे इन गांवों के विद्यार्थियों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार करना समय की मांग है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के अंतर्गत विशेष बजट प्रावधान कर इन पांचों स्थानों पर एकलव्य विद्यालयों की स्वीकृति जल्द प्रदान की जाए। सांसद की इस पहल से स्थानीय नागरिकों में हर्ष की लहर है, क्योंकि इन क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षा के इस आधुनिक ढांचे की मांग की जा रही थी। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो इन सुदूर क्षेत्रों के जनजाति विद्यार्थियों को भी समग्र और वैश्विक स्तर की शिक्षा सुलभ हो सकेगी।1
- उदयपुर जिला कलेक्टर नमित मेहता ने मंगलवार को कुराबड़ क्षेत्र का दौरा कर विभिन्न सरकारी कार्यालयों और क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं की मौका निरीक्षण करते हुए प्रगति की समीक्षा की अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।1
- झाड़ोल पुलिस की कार्रवाई: अवैध देशी टोपीदार बंदूक के साथ एक आरोपी गिरफ्तार1
- डूंगरपुर। खेतों me फसल काटने गई युवती की जहरीले जानवर के काटने से तबियत बिगड़ गई। वही युवती का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। पाप जानकारी अनुसार जिले के निकटवर्ती खांड़ी ओबरी गांव निवासी रीना पिता प्रेमशंकर भनात मंगलवार शाम अपने घर के पास खेतों में गेहूं की फसल काटने के लिए गई थी। तभी फसल में छिपे जहरीले जानवर ने युवती के हाथ पर काट लिया। जिसके बाद युवती को चक्कर ओर उल्टी की शिकायत होने पर उसे निजी वाहन से जिला अस्पताल लाया गया। युवती का उपचार चल रहा है।1