बस्ती जैसे मंडल मुख्यालय में आखिर एडीएम का केवल एक ही पद क्यों? अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती जिले में प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक चौंकाने वाली चर्चा तेज है। सवाल यह है कि बस्ती जैसे मंडल मुख्यालय में आखिर एडीएम का केवल एक ही पद क्यों है, और क्यों इस पद पर तैनात अफसर लंबे समय तक जमे रहना चाहते हैं? एडीएम के पास मलाईदार विभागों का प्रभार होने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप। स्थानीय निकाय और बाढ़ विभाग में फर्जी भुगतान के दबाव और करोड़ों के वारे-न्यारे होने का दावा। बस्ती जिले में प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती और उनके कामकाज को लेकर एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों कोई भी एडीएम बस्ती जिले से जल्दी जाना नहीं चाहता है। प्रदेश के अन्य मंडल मुख्यालयों—जैसे कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और आगरा—के जिलों में चार से आठ तक एडीएम तैनात होते हैं, और हाल ही में बनाए गए विंध्याचल व देवीपाटन मंडलों के मुख्यालयों में भी दो-दो एडीएम की तैनाती है। इसके विपरीत, बस्ती एकमात्र ऐसा मंडल मुख्यालय है जहाँ केवल एक ही एडीएम (एडीएम एफआर) का पद है। सामने आई रिपोर्ट में इस विसंगति को भ्रष्टाचार की संभावित वजह के तौर पर देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार - मलाईदार विभागों का केंद्रीकरण: बस्ती में एक ही एडीएम होने से स्थानीय निकाय, बाढ़ खंड, खनन, मंडी समिति, आबकारी, राजस्व वसूली जैसे सभी महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार उसी एक अधिकारी के पास रहता है। अन्य जिलों में ये प्रभार 3-4 एडीएम में बंटे होते हैं। बजट का आकार: इन विभागों का सालाना बजट करोड़ों रुपये का है। बाढ़ विभाग में बोल्डर, बोरियां और कटान रोधी कार्यों के नाम पर हर साल बड़े बजट आते हैं। फर्जी भुगतान और दबाव के आरोप: रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बाढ़ कार्यों में बिना काम के ही फर्जी मस्टरोल और बोल्डर गिराने के बिल लगाकर भुगतान कराने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाया जाता है। इसमें कई पूर्व और वर्तमान अधिकारियों के नामों का उल्लेख कर उदाहरण दिए गए हैं। मलाईदार विभागों का प्रभार और अकूत कमाई रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि बस्ती में एडीएम के पास ही अधिकांश महत्वपूर्ण और मलाईदार विभागों का प्रभार होता है, इसलिए यहाँ भ्रष्टाचार और वित्तीय हिस्सेदारी की गुंजाइश अन्य जिलों की तुलना में बहुत अधिक है। स्थानीय निकाय, बाढ़ विभाग, खनन और मंडी समिति जैसे महकमों का सालाना बजट और उनमें होने वाला कथित खेल करोड़ों रुपये का बताया गया है। दबाव और भुगतान के मामले पूर्व और तत्कालीन अधिकारियों ने किस प्रकार फर्जी भुगतानों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बनाए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, बाढ़ विभाग के कार्यों और बोल्डर गिराए जाने के नाम पर भारी वित्तीय अनियमित्ताओं और फर्जी बिलों के भुगतान का दबाव डालने के आरोप लगाए गए हैं। कार्रवाई की मांग इन तमाम गंभीर शिकायतों और साक्ष्यों के बावजूद धरातल पर प्रभावी कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए गए हैं। आम जनता और मीडिया लगातार भ्रष्ट आचरण में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, तथा इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर मुख्यमंत्री (CM) से सख्त कदम उठाने की मांग की गई है। इतनी गंभीर शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बावजूद अभी तक कोई प्रभावी जांच क्यों नहीं हुई। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि - • बस्ती में भी अन्य मंडल मुख्यालयों की तरह एडीएम के अतिरिक्त पद सृजित किए जाएं, ताकि कार्य का विकेंद्रीकरण हो। • बाढ़ विभाग, खनन और मंडी समिति के पिछले 5 वर्षों के कार्यों की उच्चस्तरीय ऑडिट कराई जाए। • मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शासन बस्ती में ADM (Judicial), ADM (Administration) और ADM (Civil Supply) जैसे पद सृजित करता है, तो न सिर्फ भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी, बल्कि जनता के काम भी तेजी से होंगे। मुख्य बातें एकल पद की व्यवस्था: बस्ती मंडल मुख्यालय का जिला प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जहां प्रशासनिक व्यवस्था के तहत केवल एक ही एडीएम का पद है, जबकि अन्य मंडलों के मुख्यालयों में दो या उससे अधिक एडीएम तैनात होते हैं। मलाईदार विभागों का केंद्रीकरण: एडीएम एफआर के पास स्थानीय निकाय, डूडा, खनन, बाढ़, आपदा, मंडी समिति और कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण और वित्तीय रूप से मजबूत विभागों का प्रभार रहता है। वित्तीय लेन-देन और भ्रष्टाचार के आरोप: लेख में विभिन्न विभागों (विशेषकर स्थानीय निकाय और बाढ़ विभाग) में फर्जी भुगतान के दबाव और करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
बस्ती जैसे मंडल मुख्यालय में आखिर एडीएम का केवल एक ही पद क्यों? अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती जिले में प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक चौंकाने वाली चर्चा तेज है। सवाल यह है कि बस्ती जैसे मंडल मुख्यालय में आखिर एडीएम का केवल एक ही पद क्यों है, और क्यों इस पद पर तैनात अफसर लंबे समय तक जमे रहना चाहते हैं? एडीएम के पास मलाईदार विभागों का प्रभार होने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप। स्थानीय निकाय और बाढ़ विभाग में फर्जी भुगतान के दबाव और करोड़ों के वारे-न्यारे होने का दावा। बस्ती जिले में प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती और उनके कामकाज को लेकर एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों कोई भी एडीएम बस्ती जिले से जल्दी जाना नहीं चाहता है। प्रदेश के अन्य मंडल मुख्यालयों—जैसे कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और आगरा—के जिलों में चार से आठ तक एडीएम तैनात होते हैं, और हाल ही में बनाए गए विंध्याचल व देवीपाटन मंडलों के मुख्यालयों में भी दो-दो एडीएम की तैनाती है। इसके विपरीत, बस्ती एकमात्र ऐसा मंडल मुख्यालय है जहाँ केवल एक ही एडीएम (एडीएम एफआर) का पद है। सामने आई रिपोर्ट में इस विसंगति को भ्रष्टाचार की संभावित वजह के तौर पर देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार - मलाईदार विभागों का केंद्रीकरण: बस्ती में एक ही एडीएम होने से स्थानीय निकाय, बाढ़ खंड, खनन, मंडी समिति, आबकारी, राजस्व वसूली जैसे सभी महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार उसी एक अधिकारी के पास रहता है। अन्य जिलों में ये प्रभार 3-4 एडीएम में बंटे होते हैं। बजट का आकार: इन विभागों का सालाना बजट करोड़ों रुपये का है। बाढ़ विभाग में बोल्डर, बोरियां और कटान रोधी कार्यों के नाम पर हर साल बड़े बजट आते हैं। फर्जी भुगतान और दबाव के आरोप: रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बाढ़ कार्यों में बिना काम के ही फर्जी मस्टरोल और बोल्डर गिराने के बिल लगाकर भुगतान कराने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाया जाता है। इसमें कई पूर्व और वर्तमान अधिकारियों के नामों का उल्लेख कर उदाहरण दिए गए हैं। मलाईदार विभागों का प्रभार और अकूत कमाई रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि बस्ती में एडीएम के पास ही अधिकांश महत्वपूर्ण और मलाईदार विभागों का प्रभार होता है, इसलिए यहाँ भ्रष्टाचार और वित्तीय हिस्सेदारी की गुंजाइश अन्य जिलों की तुलना में बहुत अधिक है। स्थानीय निकाय, बाढ़ विभाग, खनन और मंडी समिति जैसे महकमों का सालाना बजट और उनमें होने वाला कथित खेल करोड़ों रुपये का बताया गया है। दबाव और भुगतान के मामले पूर्व और तत्कालीन अधिकारियों ने किस प्रकार फर्जी भुगतानों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बनाए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, बाढ़ विभाग के कार्यों और बोल्डर गिराए जाने के नाम पर भारी वित्तीय अनियमित्ताओं और फर्जी बिलों के भुगतान का दबाव डालने के आरोप लगाए गए हैं। कार्रवाई की मांग इन तमाम गंभीर शिकायतों और साक्ष्यों के बावजूद धरातल पर प्रभावी कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए गए हैं। आम जनता और मीडिया लगातार भ्रष्ट आचरण में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, तथा इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर मुख्यमंत्री (CM) से सख्त कदम उठाने की मांग की गई है। इतनी गंभीर शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बावजूद अभी तक कोई प्रभावी जांच क्यों नहीं हुई। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि - • बस्ती में भी अन्य मंडल मुख्यालयों की तरह एडीएम के अतिरिक्त पद सृजित किए जाएं, ताकि कार्य का विकेंद्रीकरण हो। • बाढ़ विभाग, खनन और मंडी समिति के पिछले 5 वर्षों के कार्यों की उच्चस्तरीय ऑडिट कराई जाए। • मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शासन बस्ती में ADM (Judicial), ADM (Administration) और ADM (Civil Supply) जैसे पद सृजित करता है, तो न सिर्फ भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी, बल्कि जनता के काम भी तेजी से होंगे। मुख्य बातें एकल पद की व्यवस्था: बस्ती मंडल मुख्यालय का जिला प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जहां प्रशासनिक व्यवस्था के तहत केवल एक ही एडीएम का पद है, जबकि अन्य मंडलों के मुख्यालयों में दो या उससे अधिक एडीएम तैनात होते हैं। मलाईदार विभागों का केंद्रीकरण: एडीएम एफआर के पास स्थानीय निकाय, डूडा, खनन, बाढ़, आपदा, मंडी समिति और कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण और वित्तीय रूप से मजबूत विभागों का प्रभार रहता है। वित्तीय लेन-देन और भ्रष्टाचार के आरोप: लेख में विभिन्न विभागों (विशेषकर स्थानीय निकाय और बाढ़ विभाग) में फर्जी भुगतान के दबाव और करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- 🤼♂️स्वस्थ रहो,मस्त रहो 🤼♀️👍1
- "MOST IMPORTANT"! 👉🏾‼️अति आवश्यक ‼️ शीघ्र अतिशीघ्र शौचालय का निर्माण करवाया जाय! यह समस्या बखिरा उर्फ बाघनगर की है। ➡️ बखिरा उर्फ़ बाघ नगर, ब्लॉक बघौली, पुलिस स्टेशन बखिरा ,तहसील खलीलाबाद, जनपद संत कबीर नगर, परगना मगहर पूर्व,मत्तर प्रदेश के अंतर्गत आता है । 👉🏾 बखिरा उर्फ बाघनगर - मुख्य सड़क मेहदावल से खलीलाबाद जाने वाले मार्ग पर स्थित है । बखिरा उर्फ बाघनगर में भगवान शिव जी का प्राचीन कालीन मंदिर है। जिसे बागेश्वर नाथ ( भगेशरनाथ) जी के नाम से जाना जाता है । इस मंदिर के किनारे प्राचीन काल में स्नान करने के लिए पोखरा बनवाया गया था जिसका नवीनीकरण नगर निगम / नगर परिषद/ नगर पंचायत के अंतर्गत नवीनीकरण किया गया है जो अति सुंदर है । सप्ताह में दो बार बाजार लगता है, शनिवार और मंगलवार को बड़े पैमाने पर बाजार लगता है । दूर-दूर से व्यापारी यहां पर आते हैं । सड़क के दोनों तरफ सघन आबादी है । इसके अलावा बखिरा में श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को मंदिर में भगवान शिव जी को जलाभिषेक करने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है । दूर- दूर से भक्त जन आते हैं । इसके अलावा मंदिर के पोखरा पर दुर्गा पूजा , गणपति, गणेश उत्सव तथा छठ पूजा जैसे विशाल कार्यक्रमों का आयोजन किया जता है । 👉🏾 इन आयोजनों को देखने के लिए दूर - दूर से निवासी आते हैं तथा स्थानिय नीवासियों का तो जमघट लगा ही रहता है। ऐसे में अगर किसी भी व्यक्ति को / स्त्री या पुरुष को शौचालय अथवा पेसाब करने की स्थित बनती है तो उन्हें खुले में काफी दुर जाकर शौच अथवा पेशाब करने की स्थिति उत्पनन हो जाति है ...... तो कहीं भी, जानवर जैसा खड़े होकर पुरुष मूतने लगता है। ➡️ क्या अगर पंचायत के अधिकारियों, कर्मचारियों को यह अच्छा लगता है ⁉️ ➡️ क्या पंचायत के अंदर काम करने वाले अधिकारी यह नहीं देखते ⁉️ ➡️ या उन्हें इसका भान नहीं है की यहां पर शौचालय होना चाहिए ❓ ऐसे हालात को देखते हुऎ, भीड़ को देखते हुऎ, बाजार / मार्केट ,गाड़ियों के आवागमन को देखते हुऎ , पोखरा पर कम से कम 20 व्यक्तियों का एक शौचालय और 15 से 20 लोगों का एक साथ पेशाब करने के लिए मूत्रालय का होना अति अवशयक है । 👉🏾 बखिरा की जनता की मांग है तथा छठ पूजा और गणेश उत्सव में आने वाले लोगों की यह शिकायतें हैं ⁉️ तो नगर पंचायत / नगर परिषद / नगर विकास प्राधिकारण बखिरा को शीघ्र अतिशीघ्र संज्ञान में लेना चाहिए ❗ 🔥 तटकाल शौचालय का निर्माण करवाना चाहिए❗ विशेष ;- केवल दीवारों पर स्लोगन लिखने से नगर स्वच्छ और साफ ,कचरा मुक्त नहीं हो सकता⁉️1
- समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक संपन्न बनी रणनीति समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक संपन्न बनी रणनीति बेलहर,संतकबीरनगर । समाजवादी पार्टी ने आगामी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने हेतु सेक्टर और बूथ प्रभारियों की बैठकें आयोजित कीं। ये बैठकें शनिवार को बेलहर विकास खंड क्षेत्र के बेलवा सेगर चौराहा, मनैतापुर, सियाकटाई और मंझरिया पठान में हुईं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना था। कार्यक्रम का संचालन ओमकार यादव ने किया। बैठकों को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जयराम पांडेय ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों, असहायों और पिछड़े वर्ग की उपेक्षा कर रही है। पांडेय ने यह भी कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने अयोध्या में कथित चंदा चोरी के मुद्दे का भी जिक्र करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। जयराम पांडेय ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। बैठकों को पूर्व विधायक विजय बहादुर यादव, अनवारूल हक, प्रिया पाठक, इसहाक अंसारी, श्याम जी यादव और भावी जिला पंचायत प्रत्याशी वार्ड संख्या-7 राधेश्याम यादव सहित कई अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से संगठन की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने और बूथ स्तर पर मजबूती से काम करने का आग्रह किया। इस दौरान रियाज अहमद, अमित सिंह, उमाशंकर चौधरी, अमर सिंह यादव, राधेश्याम यादव, उमेश कुमार निषाद और संदीप कुमार यादव आर सी कन्नौजिया जैसे कई कार्यकर्ताओं ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।4
- अम्बेडकरनगर में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान, बच्चों ने नुक्कड़ नाटक से दिया संदेश, हेलमेट और नियम पालन की अपील #viral #followers #ambedkarnagarpolice #uppolice #ambedkar_nagar1
- महुडर गांव में खूनी संघर्ष: 29 जुलाई की शाम हुए विवाद में एक पक्ष की 8 महिलाओं के सिर पर आईं गंभीर चोटें, बुजुर्ग महिला का हाथ टूटा। अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती: पुरानी बस्ती पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल, गंभीर चोटों को भी मामूली धाराओं में दबाने का आरोप महुडर गांव में खूनी संघर्ष: 29 जुलाई की शाम हुए विवाद में एक पक्ष की 8 महिलाओं के सिर पर आईं गंभीर चोटें, बुजुर्ग महिला का हाथ टूटा। तहरीर बदलवाने का गंभीर आरोप: पीड़िताओं का दावा, थाने पर पुलिस ने दबाव बनाकर बदलवाई तहरीर और संगीन मामले को किया हल्का। तहसील समाधान दिवस में पहुंचा पीड़िताओं का दर्द: न्याय की गुहार लगाते हुए मुकदमा अपराध संख्या 148/26 में BNS की धारा 109 बढ़ाने की उठी जोरदार मांग। बस्ती: जनपद के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर खासे चर्चा और सवालों के घेरे में है। यहां न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचने वाले फरियादियों को शायद यह नहीं पता होगा कि खाकी के दरबार में न्याय की परिभाषा अब दर्द और सबूतों की गंभीरता से नहीं, बल्कि शायद किसी और पैमाने पर तय होती है। ताजा मामला थाना क्षेत्र के महुडर गांव का है, जहां जमीन विवाद के खूनी संघर्ष में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन पुलिस की मेहरबानी से संगीन मामले को महज मामूली धाराओं में दर्ज कर खानापूर्ति कर ली गई। क्या है पूरा मामला? बीती 29 जुलाई को शाम 4:00 बजे महुडर गांव में जमीन के विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। यह मारपीट इतनी उग्र थी कि इसमें एक पक्ष की 8 महिलाओं के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक बुजुर्ग महिला का हाथ तक टूट गया। खून से लथपथ और दर्द से कराहती ये महिलाएं जब न्याय की आस लेकर पुरानी बस्ती थाने पहुंचीं, तो पुलिस का रवैया देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़िताओं का सीधा आरोप है कि थाने पर उनसे जबरन तहरीर बदलवाई गई और इतनी भीषण मारपीट व गंभीर चोटों के बावजूद पुलिस ने मुकदमे को महज मामूली धाराओं में दर्ज कर आरोपियों को बचाने का खुला रास्ता तैयार कर दिया। तहसील समाधान दिवस में गूंजा दर्द, न्याय की गुहार थानों से नाउम्मीद होने के बाद पीड़ित महिलाएं अपनी टूटी हड्डियों और सिर पर लगे गंभीर जख्मों को लेकर तहसील समाधान दिवस पहुंचीं। वहां उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती सुनाई और न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित पक्ष की साफ और दो टूक मांग है कि मुकदमा अपराध संख्या 148/26 में महज औपचारिकता निभाने वाली धाराओं के बजाय भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (प्रयास या ऐसी चोट जो मृत्यु का कारण बन सके) जैसी गंभीर धाराएं बढ़ाई जाएं, ताकि आरोपियों को उनके किए की सही सजा मिल सके। तीखा सवाल: क्या खाकी के लिए इंसानियत के दर्द के कोई मायने नहीं? यह घटना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर एक बड़ा और गंभीर सवालिया निशान लगाती है— क्या पुरानी बस्ती थाने की पुलिस किसी बड़े दबाव में काम कर रही है? क्या एक बुजुर्ग महिला का हाथ टूटना और 8 महिलाओं के सिर फटना पुलिस की नजर में 'मामूली बात' है? अगर थाने की चौखट पर ही फरियादियों की तहरीर बदलवाकर उनके जख्मों का मजाक उड़ाया जाएगा, तो आम जनता कानून और न्याय व्यवस्था पर कैसे भरोसा करेगी? जिले के उच्चाधिकारियों को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। महुडर गांव के इस प्रकरण में लिप्त लापरवाह पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और मुकदमे में तत्काल गंभीर धाराएं जोड़कर पीड़िताओं को वास्तविक न्याय दिलाया जाना चाहिए, ताकि खाकी की वर्दी पर लगे इस दाग को धोया जा सके।1