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नगपुर में मारपीट के बाद युवक की मौत, दो आरोपी गिरफ्तार, पुलिस कार्रवाई तेज #viral #followers #ambedkarnagarpolice #uppolice #ambedkar_nagar
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नगपुर में मारपीट के बाद युवक की मौत, दो आरोपी गिरफ्तार, पुलिस कार्रवाई तेज #viral #followers #ambedkarnagarpolice #uppolice #ambedkar_nagar
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- घर की घंटी बजते ही झपता पिटबुल दंपती पर किया हमला गम्भीर रूप से घायल पटियाला के घुमन नगर में दहशत—प्रॉपर्टी डीलर के साथ मकान देखने पहुंचे थे पति-पत्नी पटियाला के घुमन नगर इलाके में मकान देखने पहुंचे एक दंपती पर पिटबुल कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया। बताया गया कि पति-पत्नी प्रॉपर्टी डीलर के साथ मकान देखने पहुंचे थे। जैसे ही उन्होंने घर की घंटी बजाई, कुत्ता बाहर निकल आया और दोनों पर झपट पड़ा। अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। दंपती घायल हो गए, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद इलाके में पालतू कुत्तों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। घटना ने एक बार फिर खतरनाक नस्ल के कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित तरीके से रखने की जरूरत को सामने ला दिया है।1
- कांवरियो ं का सेवा का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस । कांवरियो ं का सेवा का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस ।1
- रूप नगर रुदौली जिला बस्ती का यह हालत है मैं यह कहना चाहता हूं यहां पर एक कूड़ा दान रख देना चाहिए उसके बाद इस नहर का साफ सफाई कर देना चाहिए क्योंकि यहां पर साफ सफाई होता है पानी रुका हुआ है सर गंदगी गंधार एकदम से बदबू दे रहा है और यहां पर मच्छर पैदा हो रहे हैं काट लेंगे तो मलेरिया हो जाएगा तो आप लोग का क्या रहा है शेयर करें इस वीडियो को1
- 🚨 देवरिया में बड़ी खबर: तिरंगा यात्रा के दौरान भीषण गर्मी से करीब 80 छात्राओं की बिगड़ी तबीयत! 📍 घटना से जुड़े मुख्य बिंदु: स्थान: पीएमश्री कस्तूरबा गांधी बालिका इंटर कॉलेज, देवरिया। कारण: चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में तिरंगा यात्रा में शामिल होना। स्थिति: यात्रा के दौरान कई छात्राओं को चक्कर और अत्यधिक कमजोरी महसूस हुई। स्कूल लौटने पर कुछ छात्राएं बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। अस्पताल में भर्ती: आनन-फानन में सभी छात्राओं को महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। एक साथ इतनी संख्या में छात्राओं के पहुंचने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया।1
- बस्ती जिला दुबौलिया विकासखंड के गोकुलपुर से नन्हे कुआं होते हुए हो उभाई को जाने वाले मार्ग बस्ती जिला के विकासखंड दुबौलिया के अंतर्गत गोकुलपुर से नई कुआं होते हुए भाई को जाने वाले मार्ग पर लगे दो-दो खम्भे बिना तार वाले खम्भे क्या दर्शा रहा कि ये हटाए जाऐंगे कि नही3
- यह दृश्य जनपद सुल्तानपुर के विकास खण्ड लम्भुआ के केशवपुर ग्रामसभा का है सफाई कर्मी विकास खण्ड के बाबू बने हैं तो कुछ अपनी गृहस्ती के कार्यों में मस्त हैं विकास खण्ड अधिकारी नीलिमा गुप्ता को यह सब झाकना भी मुनासिब नहीं समझती हैं कर्मचारियों से काम कराना इनसे लाखों कोस दूर जनता जिलाधिकारी से यह माँग करती है स्थानांतरण गैर जनपद किया जाय ताकि व्यवस्थाओं में परिवर्तन हो सके1
- भोलेनाथ जी खा रहे हैं समोसे Bholenath khud samosa khate hue... भोलेनाथ जी खा रहे हैं समोसे Bholenath khud samosa khate hue...1
- हमारे यहां देखे हो खूब तेज बारिश हुआ है रुदौली रोड नगर जिला बस्ती में आप लोग यह देख सकते हैं शाम का वक्त है1
- मकान का ताला या मौत का दरवाजा? पिटबुल के आतंक ने छीनी आवासीय सुरक्षा की गारंटी! अजीत मिश्रा (खोजी) पटियाला के घुमन नगर से आई यह खबर रूह कंपा देने वाली है। एक दंपती जो अपने सपनों का आशियाना तलाशने निकला था, उन्हें क्या पता था कि एक घर की घंटी बजाना उनके जीवन का सबसे डरावना अनुभव बन जाएगा। प्रॉपर्टी डीलर के साथ पहुंचे इस जोड़े पर जैसे ही घर का दरवाजा खुला, एक खूंखार पिटबुल कुत्ते ने उन पर ऐसा तांडव मचाया कि दोनों गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल जा पहुंचे। यह सिर्फ पटियाला की एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह उस गंभीर सामाजिक बीमारी का आईना है जो हमारे शहरों और मोहल्लों में तेजी से पैर पसार रही है। क्यों गंभीर खतरा बन रहा है यह 'स्टेटस सिंबल'? आज के दौर में पिटबुल जैसी खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालना लोगों के लिए अपनी 'शान' दिखाने का जरिया बन गया है। लेकिन इस दिखावे की कीमत वे बेकसूर लोग चुका रहे हैं जो गलियों से गुजरते हैं, डिलीवरी बॉय होते हैं या फिर मेहमान बनकर घरों तक पहुंचते हैं। इस पूरी त्रासदी में कुछ कड़वे सच सामने आते हैं: मालिकों की आपराधिक लापरवाही: खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने का शौक तो पाल लिया जाता है, लेकिन उनके स्वभाव को नियंत्रित करने की ट्रेनिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (जैसे मजबूत मज़ल या सही घेराबंदी) करने की जहमत कोई नहीं उठाता। दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़: आवासीय इलाकों में ऐसे आक्रामक जानवरों को खुला छोड़ना या बिना नियंत्रण के रखना सार्वजनिक सुरक्षा पर सीधा हमला है। प्रशासनिक उदासीनता: जब तक कोई खून से लथपथ होकर अस्पताल नहीं पहुंचता, तब तक न तो प्रशासन जागता है और न ही नियमों का सख्ती से पालन होता है। अब चुप्पी तोड़ने का वक्त है घर देखना या खरीदना किसी भी परिवार के लिए एक खुशी का मौका होता है, लेकिन अगर वह पल आईसीयू के बेड पर दर्द से कराहते हुए बीते, तो यह एक सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा है। अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल औपचारिकता न निभाए, बल्कि खतरनाक नस्लों के कुत्तों के पंजीकरण, उनकी ब्रीडिंग और आवासीय क्षेत्रों में उन्हें रखने को लेकर बेहद कड़े और दंडनीय कानून बनाए। जब तक लापरवाही बरतने वाले मालिकों पर भारी जुर्माने और जेल की सजा का डर नहीं होगा, तब तक बेकसूर लोग यूं ही लहूलुहान होते रहेंगे। सुरक्षा का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, किसी के शौक का मोहताज नहीं!1