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बगेश्वर के बैजनाथ मंदिर के पास बनी कृत्रिम झील इन दिनों पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बन गई है। सैलानी यहां नौकायन और मछलियों को दाना खिलाने का लुत्फ उठा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
Jc pandey
बगेश्वर के बैजनाथ मंदिर के पास बनी कृत्रिम झील इन दिनों पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बन गई है। सैलानी यहां नौकायन और मछलियों को दाना खिलाने का लुत्फ उठा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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- बगेश्वर के बैजनाथ मंदिर के पास बनी कृत्रिम झील इन दिनों पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बन गई है। सैलानी यहां नौकायन और मछलियों को दाना खिलाने का लुत्फ उठा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।1
- बागेश्वर में स्वास्थ्य विभाग ने मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को उनकी सेहत और सुरक्षित प्रसव से जुड़ी अहम जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाना है।1
- चंपावत कांड में 'यू-टर्न': रातभर की पुलिस कस्टडी के बाद बदले पिता के सुर, क्या सच को डराकर चुप करा दिया गया? इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट: उत्तराखंड बीपीपी मीडिया] चंपावत: चंपावत की उस 16 साल की बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई में आज एक ऐसा मोड़ आया जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। जिस पिता ने अपनी बेटी के लिए इंसाफ की गुहार लगाई थी, वही पिता अब कह रहे हैं कि "ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं और खबरें गलत फैलाई गई हैं।" लेकिन सवाल यह है कि एक रात में ऐसा क्या हुआ कि पिता का पक्ष पूरी तरह बदल गया? पुलिस की भूमिका और 'रातभर' का रहस्य खबरों के मुताबिक, पीड़ित लड़की के पिता को रातभर थाने में रखा गया था। बड़ा सवाल यह है कि क्या एक डरे हुए पिता को सत्ता और खाकी के जोर पर चुप कराया गया? जब न्याय की आवाज उठाने वाले समर्थकों को पुलिस उठाकर ले जाती है और पीड़ित परिवार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है, तो यह 'जांच' नहीं बल्कि 'क्लीन चिट' की पटकथा ज्यादा लगती है। दबाव, डर या 'सेटलमेंट' का भारी बैग? समाज के बीच कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं: क्या डराया गया? क्या एक गरीब पिता को उसके परिवार की सुरक्षा का डर दिखाकर बयान बदलने पर मजबूर किया गया? पैसे का खेल? क्या सत्ता के रसूख ने नोटों की गूँज से मासूम की चीखों को दबा दिया? समर्थकों पर कार्रवाई क्यों? जो लोग बेटी को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर उतरे, पुलिस उन्हें थाने क्यों ले गई? क्या यह जनता की आवाज को कुचलने की कोशिश है? न्याय प्रणाली की साख पर सबसे बड़ा प्रहार अगर पिता के बयान को दबाव में बदला गया है, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और कानून-व्यवस्था के लिए सबसे काला दिन है। जब रसूखदार आरोपियों को बचाने के लिए खुद पीड़ित परिवार को ही "झूठा" साबित होने पर मजबूर कर दिया जाए, तो आम आदमी का सिस्टम से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।1
- अल्मोड़ा में जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने एक दुकान पर कार्रवाई करते हुए नाबालिग को सिगरेट बेचते हुए दुकानदार को रंगे हाथों पकड़ा। उन्होंने एक बच्चे को ग्राहक बनाकर स्टिंग ऑपरेशन किया और तुरंत पुलिस बुलाकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने सभी व्यापारियों को बच्चों को तंबाकू उत्पाद न बेचने की कड़ी चेतावनी दी है।1
- उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिला प्रशासन ने जनगणना को सरल बनाने के लिए बड़ी डिजिटल पहल की है। अब बेवर नगर पंचायत में नागरिक घर बैठे ऑनलाइन अपनी जनगणना खुद कर सकते हैं। पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए 21 मई तक सहायता कैंप भी लगाए गए हैं।1
- देहरादून में धार्मिक गीत बजाने को लेकर हुए विवाद में एक परिवार पर हमला किया गया। इस घटना में एक महिला घायल हो गई, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।1
- नैनीताल में पिछले पांच दिनों से लगातार बारिश का सिलसिला जारी है, जिससे तापमान में गिरावट आई है। लगातार वर्षा के कारण ठंड बढ़ गई है और पर्यटकों को ऊनी कपड़ों में लिपटने पर मजबूर होना पड़ा।4
- बागेश्वर शहर में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। अब सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े वाहनों पर बुलडोजर चलाया जाएगा ताकि सड़कों को साफ किया जा सके।1