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उदयपुर जिले के जयसमंद क्षेत्र में एक मगरमच्छ दिखाई दिया है। वहां मौजूद एक यात्री ने इस मगरमच्छ को देखकर उसका वीडियो बना लिया।
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उदयपुर जिले के जयसमंद क्षेत्र में एक मगरमच्छ दिखाई दिया है। वहां मौजूद एक यात्री ने इस मगरमच्छ को देखकर उसका वीडियो बना लिया।
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- उदयपुर जिले के जयसमंद क्षेत्र में एक मगरमच्छ दिखाई दिया है। वहां मौजूद एक यात्री ने इस मगरमच्छ को देखकर उसका वीडियो बना लिया।1
- राजनगर में महिलाओं को रोजगार के नए अवसर देने और उन्हें चारदीवारी से बाहर निकालने के उद्देश्य से तेरापंथ महिला मंडल द्वारा 'श्री उत्सव' का आयोजन किया गया। राजसमंद के भिक्षु निलियम में रविवार को आयोजित इस एक दिवसीय मेले का मुख्य लक्ष्य महिलाओं द्वारा तैयार किए गए घरेलू उत्पादों और हाथ से बनी सामग्रियों को बढ़ावा देकर उन्हें एक बेहतर मंच प्रदान करना है। मेले में खाने-पीने के सामान, कपड़े, ज्वेलरी, मेकअप और खिलौने जैसी स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री और विपणन किया गया। तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष ऋतु धोखा ने बताया कि इस उत्सव में राजसमंद के साथ-साथ आसपास के जिलों की महिलाओं ने भी हिस्सा लिया और अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया। छुट्टी के दिन आयोजित इस मेले में ग्राहकों ने स्वदेशी सामानों की जमकर खरीदारी की। मेले में पहुंचे युवाओं ने हस्तनिर्मित सामग्रियों में गहरी रुचि दिखाई। उनका कहना था कि आम तौर पर बाजारों में एक जैसा ही सामान मिलता है, लेकिन यहाँ हाथ की बनी अनूठी स्वदेशी वस्तुएं उपलब्ध हैं, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर होने का सीधा मौका मिलेगा। इस आयोजन में युवा मेलार्थी गौरी सिंह और मंडल अध्यक्ष ऋतु धोखा ने भी अपने विचार साझा किए।4
- Post by फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांद1
- राजसमंद के रेलमगरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बनेडिया में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत एक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग एवं सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने गांव के मुख्य मार्गों से जागरूकता रैली निकालकर नशामुक्ति का संदेश दिया। इस दौरान छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। इसके साथ ही निबंध, पोस्टर और नारा लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन कर विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने की प्रेरणा दी गई। कार्यक्रम के संयोजक और मास्टर ट्रेनर प्रेम सिंह राणावत ने गतिविधियों की जानकारी साझा की। मुख्य वक्ता और प्रधानाचार्य सुनीता खंडेलवाल ने नशे के दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। इसके अलावा, व्याख्याता गोपाललाल शर्मा ने नशे की रोकथाम के उपायों के बारे में बताया, जबकि धर्मवीर कसाना ने विभिन्न प्रकार के नशे और उनसे होने वाले शारीरिक, मानसिक व सामाजिक नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस विशेष अवसर पर मनोज कुमार शर्मा, प्रकाश चौधरी, पुखराज सिंह, प्रियंका भंडारी, शेली शर्मा, प्रेम सोनी, रामचंद्र सेन, गणेशलाल कुमावत, गिर्राज प्रसाद मीणा, गायत्री टांक, मीरा सोनी, सुरेश कुमार और रोशन नाई सहित विद्यालय का पूरा स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।2
- पाली के बाली में सांप और कुत्ते के बीच एक अजब-गजब भिड़ंत का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सांप और कुत्ते के बीच एक हैरान कर देने वाली भिड़ंत देखने को मिल रही है।1
- सिरोही के जेतावड़ा में मानसून की शानदार दस्तक हुई है, जिससे पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस बारिश से खेतों में हरियाली छा गई है और किसानों के चेहरों पर मुस्कान आ गई है। जेतावड़ा के इस मानसून को प्रकृति का एक सुंदर उपहार माना जा रहा है, जिसे लेकर सतीश पंडित ने हर्ष व्यक्त किया है।1
- डूंगरपुर के पुनाली गांव में स्थित मां अंबे मंदिर और शिव शक्ति धाम श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। इस भव्य मां अंबे मंदिर की स्थापना नीलकंठ मित्र मंडल जय अंबे पदयात्रा संघ के सानिध्य में 18 वर्षों की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद ग्राम वासियों ने मिलकर की थी। वर्तमान में इस मंदिर में सुबह-शाम नियम से आरती की जाती है और हर पूर्णिमा को विशेष हवन का आयोजन होता है, जिसमें सैकड़ों भक्त अपनी मन्नतें पूरी होने पर शामिल होकर हवन का लाभ उठाते हैं। इसी के समीप स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर शिव शक्ति धाम की स्थापना भी देश के 22 संतों और समस्त ग्रामीणों के सहयोग से हुई थी, जिसमें लोगों की गहरी श्रद्धा बसी हुई है। इस पावन मंदिर परिसर में गणपति दादा की मूर्ति भी विराजमान है, जिसकी स्थापना स्वर्गीय नीता बहन की इच्छा के अनुसार की गई थी। इसके साथ ही, जय अंबे संघ डूंगरपुर द्वारा कई वर्षों से बिछीवाड़ा रोड पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन, दवाई और रात्रि विश्राम की पूरी व्यवस्था की जाती है। सभी भक्तों से एक बार यहाँ पधारकर दर्शन का लाभ उठाने का आग्रह किया गया है।1
- राजसमंद में एक परिवार ने अपने घर पैदा हुई पहली बेटी का बेहद अनोखा स्वागत किया है। बेटी के गृह प्रवेश से पहले परिवार ने उसे सजी-धजी गाड़ियों में बिठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया। पुराने समय में केवल बेटे के जन्म पर छत पर चढ़कर ताली बजाने का रिवाज था, जिसे बोलचाल की भाषा में ढिंढोरा पीटना कहा जाता है। लेकिन आज के समय में बेटा-बेटी की समानता का संदेश देते हुए इस परिवार ने बेटी के जन्म पर वाहनों का जुलूस निकालकर इस सोच को बदला है। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे इस जुलूस में करीब सात-आठ सजी-धजी गाड़ियां शामिल थीं। इनमें से प्रत्येक गाड़ी के पीछे 'बेटी हुई है' लिखा हुआ था और एक गाड़ी में नवजात बेटी को उसकी माँ के साथ बिठाया गया था। वाहनों के इस काफिले और अनोखे नजारे ने राह चलते हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया।1