भूपालसागर क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जाशमा में जर्जर भवन का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते 21 मई की रात को विद्यालय के बरामदे की छत ढह गई थी, और अब आज सुबह उसी क्षतिग्रस्त हिस्से के पास से दो और पट्टियां टूटकर नीचे लटक गईं। गनीमत यह रही कि दोनों घटनाएं छुट्टियों के दौरान हुईं, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। इस लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने बताया कि 21 मई की घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षा विभाग ने मौके का मुआयना तो किया था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, संस्था प्रधान ने पहले ही क्रैक वाले हिस्से में रस्सी बांधकर उसे 'नो-गो ज़ोन' घोषित कर दिया था, जिसके चलते आज सुबह कोई व्यक्ति उस जगह के नीचे नहीं गया और एक बड़ा हादसा टल गया। जाशमा के ग्रामीणों की प्रशासन से पुरजोर मांग है कि विद्यालय के इस जर्जर भवन को तुरंत जमींदोज कर यहां एक नया और सुरक्षित ब्लॉक बनाया जाए, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में झालावाड़ जैसी किसी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो। समाजसेवी दिलीप कुमार जैन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते नए भवन का निर्माण नहीं कराया, तो जाशमा ग्रामवासी उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
भूपालसागर क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जाशमा में जर्जर भवन का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते 21 मई की रात को विद्यालय के बरामदे की छत ढह गई थी, और अब आज सुबह उसी क्षतिग्रस्त हिस्से के पास से दो और पट्टियां टूटकर नीचे लटक गईं। गनीमत यह रही कि दोनों घटनाएं छुट्टियों के दौरान हुईं, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। इस लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने बताया कि 21 मई की घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षा विभाग ने मौके का मुआयना तो किया था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, संस्था प्रधान ने पहले ही क्रैक वाले हिस्से में रस्सी बांधकर उसे 'नो-गो ज़ोन' घोषित कर दिया था, जिसके चलते आज सुबह कोई व्यक्ति उस जगह के नीचे नहीं गया और एक बड़ा हादसा टल गया। जाशमा के ग्रामीणों की प्रशासन से पुरजोर मांग है कि विद्यालय के इस जर्जर भवन को तुरंत जमींदोज कर यहां एक नया और सुरक्षित ब्लॉक बनाया जाए, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में झालावाड़ जैसी किसी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो। समाजसेवी दिलीप कुमार जैन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते नए भवन का निर्माण नहीं कराया, तो जाशमा ग्रामवासी उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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- चित्तौड़गढ़ में महिला कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए मंत्री का पुतला दहन किया और उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की। महिला सम्मान के मुद्दे पर यह 'हल्ला बोल' प्रदर्शन पूरे जोश के साथ गरजा। इस दौरान, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट रहा। महिला कांग्रेस ने इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से महिला अधिकारों और सम्मान को लेकर अपनी आवाज बुलंद की, मंत्री के बर्खास्तगी की मांग को प्रमुखता से उठाया।1
- नीमच में स्कीम नंबर 36-ए स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शनिवार को मंत्री नारायणसिंह कुशवाह कथा पंडाल पहुंचे। इस अवसर पर आयोजन समिति ने मंत्री का स्वागत किया। मंत्री कुशवाह ने व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली और समिति को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समिति सदस्य मौजूद रहे।1
- नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने झंझारवाड़ा उद्योग क्षेत्र का दौरा कर निरीक्षण किया।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के नव पदस्थापित पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने शनिवार को पुलिस लाइन सभागार में अपनी पहली अपराध गोष्ठी का आयोजन किया। इस बैठक में जिले के समस्त पुलिस अधिकारियों, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों, वृत्त अधिकारियों और थाना अधिकारियों सहित चित्तौड़गढ़ के एएसपी मुकुल शर्मा और रावतभाटा के भगवत सिंह भी उपस्थित रहे। पुलिस अधीक्षक ने सभी अधिकारियों से परिचय प्राप्त करते हुए जिले की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। गोष्ठी के दौरान, एसपी धर्मेंद्र सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में आदतन अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों, स्थाई वारंटियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ प्रभावी और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपराधियों में कानून का भय स्थापित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एसपी सिंह ने अधिकारियों को मादक पदार्थ तस्करी, अवैध हथियार, संगठित अपराध और अन्य गंभीर अपराधों में संलिप्त अपराधियों द्वारा अर्जित अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें नियमानुसार फ्रीज और जब्त करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अपराध से अर्जित संपत्ति पर प्रहार करना अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने का एक प्रभावी माध्यम है। पुलिस अधीक्षक ने जिले में अवैध खनन की गतिविधियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए साफ किया कि ऐसी गतिविधियां किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होंगी। उन्होंने संबंधित थानाधिकारियों को नियमित निगरानी रखने और अवैध खनन में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने के आदेश दिए। इसके साथ ही, गोष्ठी में लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण, महिला एवं बाल अपराधों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई, साइबर अपराधों की रोकथाम, प्रभावी गश्त व्यवस्था, वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी तथा आमजन की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया। एसपी धर्मेंद्र सिंह ने अंत में कहा कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य आमजन में सुरक्षा की भावना को मजबूत करना और अपराधियों में कानून का भय स्थापित करना है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से टीम भावना के साथ काम करते हुए जिले में शांति, कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। इस बैठक में एसपी ऑफिस के अपराध सहायक जोधाराम पुलिस निरीक्षक सहित कार्यालय की सभी शाखाओं के प्रभारी भी मौजूद थे।1
- ट्विशा शर्मा के साथ जो हुआ, उसे बेहद दुखद बताया गया है, जिस पर कोई दो राय नहीं है। हालाँकि, यह सवाल उठाया गया है कि जब किसी महिला और उसके प्रेमी द्वारा पति की हत्या कर दी जाती है, या जब किसी पति को मानसिक प्रताड़ना, झूठे मुकदमों और सामाजिक अपमान के कारण आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता है, तब वैसी ही संवेदना और उतना ही आक्रोश क्यों नहीं दिखाया जाता। पोस्ट में जोर दिया गया है कि न्याय का अर्थ केवल एक पक्ष के लिए आवाज़ उठाना नहीं है, बल्कि अपराधी चाहे पुरुष हो या महिला, और पीड़ित चाहे महिला हो या पुरुष, कानून और समाज की संवेदना दोनों के लिए एक समान होनी चाहिए। यह स्पष्ट किया गया है कि किसी पीड़ित की पीड़ा को कम नहीं आँका जा रहा है, बल्कि यह माँग की जा रही है कि हर निर्दोष पीड़ित को न्याय मिले और हर अपराधी को सजा मिले। अंत में, 'एक देश, एक कानून, एक न्याय' की भावना पर बल देते हुए कहा गया है कि पीड़ित का लिंग नहीं, बल्कि उसका दर्द देखा जाना चाहिए।1
- श्री सांवलिया सेठ के दिव्य लाइव श्रृंगार दर्शन में भक्तों का एक विशाल श्रद्धा सैलाब उमड़ पड़ा। इस पवित्र अवसर पर, अपने आराध्य देव के मनमोहक स्वरूप के दर्शन पाकर भक्तगण अत्यंत आनंदित और भाव-विभोर हो गए, जिससे वे स्वयं को निहाल महसूस कर रहे थे।1
- मूल पाठ में एक मां के प्रति हृदय से वंदन व्यक्त किया गया है। यह विशेष वंदन उस मां के लिए है, जिसकी बेटी चार बच्चों की मां है।1