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बेरसिया, मध्यप्रदेश विकास कार्यों पर मीडिया से की चर्चा बचे विकास कार्य भी जल्द पूरे किए जाएंगे – सरपंच मचल सिंह मालवीय हर्राखेडा
मो। शादाब पत्रकार
बेरसिया, मध्यप्रदेश विकास कार्यों पर मीडिया से की चर्चा बचे विकास कार्य भी जल्द पूरे किए जाएंगे – सरपंच मचल सिंह मालवीय हर्राखेडा
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- Post by मो। शादाब पत्रकार1
- राजधानी में नहीं है पेट्रोल डीजल की कमी भोपाल लामाखेड़ा न्यू स्टार पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल मिलना शुरू1
- इनके मजे है देख 🤐🤣 #comedy #khillu #funny #trending #viralvideo #viralshort #comedyshorts #shortvideos #love #ytshorts #youtubeshorts #shorts #short #shortsfeed #shortsviral #shortvideo #shortsyoutube #youtubeshort #youtube #youtube1
- आरिफ मसूद का बयान: कोरोना जैसे हालात में भी हम नहीं रुके, लेकिन आज जनता पेट्रोल और गैस सिलेंडर की महंगाई से परेशान है।”1
- Post by Naved khan2
- जानवी गैस एजेंसी भोपाल एयरपोर्ट रोड़ आशाराम बापू आश्रम का नजारा1
- *मोहन सरकार में बिजली बिल वसूली जोरों पर ?* *सिस्टम की दबंगई और किसान की लाचारी पर सवाल* मध्यप्रदेश में इन दिनों बिजली बिल वसूली को लेकर जो हालात बन रहे हैं, वे आम जनता, खासकर किसानों के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। हाल ही में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा की विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बिजली बिल बकाया होने पर विभाग ने एक किसान का ट्रैक्टर जब्त कर लिया वह ट्रैक्टर, जो उसके जीवनयापन का मुख्य साधन था। यह घटना सिर्फ एक किसान की परेशानी नहीं, बल्कि उस मानसिकता का प्रतीक बनती जा रही है जिसमें वसूली को सेवा से ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। किसान, जो पहले से ही मौसम, लागत और बाजार की मार झेल रहा है, अब सरकारी तंत्र की सख्ती के सामने भी लाचार नजर आ रहा है। क्या अब गरीबों को अपने घर के बर्तन-भांडे भी छुपाकर रखने होंगे? क्या वसूली का दायरा इतना बढ़ जाएगा कि इंसान की गरिमा भी कुर्की की सूची में शामिल हो जाए? यह सवाल इसलिए भी उठता है क्योंकि ऐसी घटनाएं जनता के मन में डर और अविश्वास पैदा करती हैं। सरकार का तर्क होता है कि राजस्व वसूली जरूरी है, ताकि व्यवस्था चल सके। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वसूली मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार करके की जाएगी? क्या कोई वैकल्पिक समाधान नहीं हो सकता जैसे किस्तों में भुगतान, सब्सिडी, या विशेष राहत योजना? आज जरूरत है संतुलन की जहाँ सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए, वहीं जनता के हालात को भी समझे। किसान केवल उपभोक्ता नहीं है, वह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि वही असुरक्षित महसूस करेगा, तो विकास की सारी बातें खोखली साबित होंगी। यह मामला एक चेतावनी है सिस्टम को अपनी कार्यशैली पर पुनर्विचार करना होगा, वरना “वसूली” और “विकास” के बीच की खाई और गहरी होती जाएगी।1
- Post by Naved khan1
- न्यू कबाड़ खाने में लोग कचरे से ओर गंदगी से होराहे है परेशान लोगोका कहना हे कई बार शिकायत करने के बाबजूद ना तो नगर निगम द्वारा नालिया साफ होती हे नाटो कचरा उठाया जाता है बड़ा सवाल ये है क्यों शिकायत करनेके बाबजूद समस्या का निराकरण नहीं हुआ आला अधि कारि को अवगत करदिए गया हे जल्द से जल्द समस्या का निराकरण कराया जाए ए एम न्यूज से जफर खान1