ढेंगदा कन्या आवासीय परिसर की अधीक्षिका को हटाने की मांग, निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर को ज्ञापन इरशाद पठान श्योपुर। माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर ढेंगदा में छात्राओं से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच के बीच अधीक्षिका को तत्काल पद से हटाकर अन्यत्र संलग्न अथवा स्थानांतरित करने की मांग तेज हो गई है। आदिवासी जागरूकता एवं सहायता सेवा समिति, ग्राम ढेंगदा ने बुधवार, 19 अगस्त को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। समिति ने ज्ञापन में कहा कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शिक्षक पंकज मथुरिया को निलंबित किया जा चुका है, जबकि अन्य संबंधित स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। समिति ने जिला प्रशासन की प्रारंभिक कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जांच के दौरान वर्तमान अधीक्षिका का उसी छात्रावास में पदस्थ रहना निष्पक्ष जांच की दृष्टि से उचित नहीं है। छात्राओं के बयान प्रभावित होने की जताई आशंका समिति ने आशंका जताई कि अधीक्षिका के छात्रावास में बने रहने से छात्राओं के स्वतंत्र रूप से बयान देने पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। साथ ही जांच से जुड़े रिकॉर्ड और साक्ष्यों के प्रभावित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराना है। CCTV और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग ज्ञापन में जांच पूरी होने तक अधीक्षिका को छात्रावास से हटाकर अन्यत्र संलग्न या स्थानांतरित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही छात्राओं से संबंधित स्टाफ और मामले से जुड़े रिकॉर्ड तक अनावश्यक पहुंच पर रोक लगाने की मांग की गई है। समिति ने छात्राओं के बयान महिला अधिकारी अथवा अधिकृत महिला जांच अधिकारी की मौजूदगी में सुरक्षित और बाल-मित्र वातावरण में दर्ज कराने की मांग की। इसके अलावा छात्रावास के CCTV फुटेज, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, विजिटर रजिस्टर सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। वैकल्पिक महिला अधिकारी की व्यवस्था की मांग समिति ने कहा कि जांच अवधि में छात्रावास की व्यवस्थाएं प्रभावित न हों, इसके लिए एक निष्पक्ष एवं सक्षम महिला अधिकारी अथवा अधीक्षिका की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। छात्राओं को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव के जांच अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकें। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जांच सही दिशा में नहीं होती और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आदिवासी समाज की ओर से आंदोलन किया जाएगा। समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन समिति की मांगों पर क्या कदम उठाता है और छात्राओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। ढेंगदा कन्या आवासीय परिसर की अधीक्षिका को हटाने की मांग, निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर को ज्ञापन इरशाद पठान श्योपुर। माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर ढेंगदा में छात्राओं से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच के बीच अधीक्षिका को तत्काल पद से हटाकर अन्यत्र संलग्न अथवा स्थानांतरित करने की मांग तेज हो गई है। आदिवासी जागरूकता एवं सहायता सेवा समिति, ग्राम ढेंगदा ने बुधवार, 19 अगस्त को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। समिति ने ज्ञापन में कहा कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शिक्षक पंकज मथुरिया को निलंबित किया जा चुका है, जबकि अन्य संबंधित स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। समिति ने जिला प्रशासन की प्रारंभिक कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जांच के दौरान वर्तमान अधीक्षिका का उसी छात्रावास में पदस्थ रहना निष्पक्ष जांच की दृष्टि से उचित नहीं है। छात्राओं के बयान प्रभावित होने की जताई आशंका समिति ने आशंका जताई कि अधीक्षिका के छात्रावास में बने रहने से छात्राओं के स्वतंत्र रूप से बयान देने पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। साथ ही जांच से जुड़े रिकॉर्ड और साक्ष्यों के प्रभावित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराना है। CCTV और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग ज्ञापन में जांच पूरी होने तक अधीक्षिका को छात्रावास से हटाकर अन्यत्र संलग्न या स्थानांतरित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही छात्राओं से संबंधित स्टाफ और मामले से जुड़े रिकॉर्ड तक अनावश्यक पहुंच पर रोक लगाने की मांग की गई है। समिति ने छात्राओं के बयान महिला अधिकारी अथवा अधिकृत महिला जांच अधिकारी की मौजूदगी में सुरक्षित और बाल-मित्र वातावरण में दर्ज कराने की मांग की। इसके अलावा छात्रावास के CCTV फुटेज, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, विजिटर रजिस्टर सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। वैकल्पिक महिला अधिकारी की व्यवस्था की मांग समिति ने कहा कि जांच अवधि में छात्रावास की व्यवस्थाएं प्रभावित न हों, इसके लिए एक निष्पक्ष एवं सक्षम महिला अधिकारी अथवा अधीक्षिका की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। छात्राओं को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव के जांच अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकें। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जांच सही दिशा में नहीं होती और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आदिवासी समाज की ओर से आंदोलन किया जाएगा। समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन समिति की मांगों पर क्या कदम उठाता है और छात्राओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
ढेंगदा कन्या आवासीय परिसर की अधीक्षिका को हटाने की मांग, निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर को ज्ञापन इरशाद पठान श्योपुर। माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर ढेंगदा में छात्राओं से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच के बीच अधीक्षिका को तत्काल पद से हटाकर अन्यत्र संलग्न अथवा स्थानांतरित करने की मांग तेज हो गई है। आदिवासी जागरूकता एवं सहायता सेवा समिति, ग्राम ढेंगदा ने बुधवार, 19 अगस्त को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। समिति ने ज्ञापन में कहा कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शिक्षक पंकज मथुरिया को निलंबित किया जा चुका है, जबकि अन्य संबंधित स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। समिति ने जिला प्रशासन की प्रारंभिक कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जांच के दौरान वर्तमान अधीक्षिका का उसी छात्रावास में पदस्थ रहना निष्पक्ष जांच की दृष्टि से उचित नहीं है। छात्राओं के बयान प्रभावित होने की जताई आशंका समिति ने आशंका जताई कि अधीक्षिका के छात्रावास में बने रहने से छात्राओं के स्वतंत्र रूप से बयान देने पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। साथ ही जांच से जुड़े रिकॉर्ड और साक्ष्यों के प्रभावित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराना है। CCTV और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग ज्ञापन में जांच पूरी होने तक अधीक्षिका को छात्रावास से हटाकर अन्यत्र संलग्न या स्थानांतरित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही छात्राओं से संबंधित स्टाफ और मामले से जुड़े रिकॉर्ड तक अनावश्यक पहुंच पर रोक लगाने की मांग की गई है। समिति ने छात्राओं के बयान महिला अधिकारी अथवा अधिकृत महिला जांच अधिकारी की मौजूदगी में सुरक्षित और बाल-मित्र वातावरण में दर्ज कराने की मांग की। इसके अलावा छात्रावास के CCTV फुटेज, उपस्थिति
रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, विजिटर रजिस्टर सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। वैकल्पिक महिला अधिकारी की व्यवस्था की मांग समिति ने कहा कि जांच अवधि में छात्रावास की व्यवस्थाएं प्रभावित न हों, इसके लिए एक निष्पक्ष एवं सक्षम महिला अधिकारी अथवा अधीक्षिका की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। छात्राओं को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव के जांच अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकें। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जांच सही दिशा में नहीं होती और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आदिवासी समाज की ओर से आंदोलन किया जाएगा। समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन समिति की मांगों पर क्या कदम उठाता है और छात्राओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। ढेंगदा कन्या आवासीय परिसर की अधीक्षिका को हटाने की मांग, निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर को ज्ञापन इरशाद पठान श्योपुर। माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर ढेंगदा में छात्राओं से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच के बीच अधीक्षिका को तत्काल पद से हटाकर अन्यत्र संलग्न अथवा स्थानांतरित करने की मांग तेज हो गई है। आदिवासी जागरूकता एवं सहायता सेवा समिति, ग्राम ढेंगदा ने बुधवार, 19 अगस्त को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। समिति ने ज्ञापन में कहा कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शिक्षक पंकज मथुरिया को निलंबित किया जा चुका है, जबकि अन्य संबंधित स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। समिति ने जिला प्रशासन की प्रारंभिक कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जांच के दौरान वर्तमान अधीक्षिका का उसी छात्रावास में पदस्थ रहना निष्पक्ष जांच की दृष्टि से उचित नहीं है। छात्राओं के बयान प्रभावित होने की जताई
आशंका समिति ने आशंका जताई कि अधीक्षिका के छात्रावास में बने रहने से छात्राओं के स्वतंत्र रूप से बयान देने पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। साथ ही जांच से जुड़े रिकॉर्ड और साक्ष्यों के प्रभावित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराना है। CCTV और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग ज्ञापन में जांच पूरी होने तक अधीक्षिका को छात्रावास से हटाकर अन्यत्र संलग्न या स्थानांतरित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही छात्राओं से संबंधित स्टाफ और मामले से जुड़े रिकॉर्ड तक अनावश्यक पहुंच पर रोक लगाने की मांग की गई है। समिति ने छात्राओं के बयान महिला अधिकारी अथवा अधिकृत महिला जांच अधिकारी की मौजूदगी में सुरक्षित और बाल-मित्र वातावरण में दर्ज कराने की मांग की। इसके अलावा छात्रावास के CCTV फुटेज, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, विजिटर रजिस्टर सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। वैकल्पिक महिला अधिकारी की व्यवस्था की मांग समिति ने कहा कि जांच अवधि में छात्रावास की व्यवस्थाएं प्रभावित न हों, इसके लिए एक निष्पक्ष एवं सक्षम महिला अधिकारी अथवा अधीक्षिका की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। छात्राओं को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव के जांच अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकें। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जांच सही दिशा में नहीं होती और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आदिवासी समाज की ओर से आंदोलन किया जाएगा। समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन समिति की मांगों पर क्या कदम उठाता है और छात्राओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
- श्योपुर:CCTV खंगालिए, दूध का दूध-पानी का पानी हो जाएगा” आरोपों के बीच भावुक हुए शिक्षक1
- ढेंगदा कन्या आवासीय परिसर की अधीक्षिका को हटाने की मांग, निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर को ज्ञापन इरशाद पठान श्योपुर। माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर ढेंगदा में छात्राओं से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच के बीच अधीक्षिका को तत्काल पद से हटाकर अन्यत्र संलग्न अथवा स्थानांतरित करने की मांग तेज हो गई है। आदिवासी जागरूकता एवं सहायता सेवा समिति, ग्राम ढेंगदा ने बुधवार, 19 अगस्त को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। समिति ने ज्ञापन में कहा कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शिक्षक पंकज मथुरिया को निलंबित किया जा चुका है, जबकि अन्य संबंधित स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। समिति ने जिला प्रशासन की प्रारंभिक कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जांच के दौरान वर्तमान अधीक्षिका का उसी छात्रावास में पदस्थ रहना निष्पक्ष जांच की दृष्टि से उचित नहीं है। छात्राओं के बयान प्रभावित होने की जताई आशंका समिति ने आशंका जताई कि अधीक्षिका के छात्रावास में बने रहने से छात्राओं के स्वतंत्र रूप से बयान देने पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। साथ ही जांच से जुड़े रिकॉर्ड और साक्ष्यों के प्रभावित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराना है। CCTV और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग ज्ञापन में जांच पूरी होने तक अधीक्षिका को छात्रावास से हटाकर अन्यत्र संलग्न या स्थानांतरित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही छात्राओं से संबंधित स्टाफ और मामले से जुड़े रिकॉर्ड तक अनावश्यक पहुंच पर रोक लगाने की मांग की गई है। समिति ने छात्राओं के बयान महिला अधिकारी अथवा अधिकृत महिला जांच अधिकारी की मौजूदगी में सुरक्षित और बाल-मित्र वातावरण में दर्ज कराने की मांग की। इसके अलावा छात्रावास के CCTV फुटेज, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, विजिटर रजिस्टर सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। वैकल्पिक महिला अधिकारी की व्यवस्था की मांग समिति ने कहा कि जांच अवधि में छात्रावास की व्यवस्थाएं प्रभावित न हों, इसके लिए एक निष्पक्ष एवं सक्षम महिला अधिकारी अथवा अधीक्षिका की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। छात्राओं को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव के जांच अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकें। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जांच सही दिशा में नहीं होती और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आदिवासी समाज की ओर से आंदोलन किया जाएगा। समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन समिति की मांगों पर क्या कदम उठाता है और छात्राओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। ढेंगदा कन्या आवासीय परिसर की अधीक्षिका को हटाने की मांग, निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर को ज्ञापन इरशाद पठान श्योपुर। माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर ढेंगदा में छात्राओं से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच के बीच अधीक्षिका को तत्काल पद से हटाकर अन्यत्र संलग्न अथवा स्थानांतरित करने की मांग तेज हो गई है। आदिवासी जागरूकता एवं सहायता सेवा समिति, ग्राम ढेंगदा ने बुधवार, 19 अगस्त को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। समिति ने ज्ञापन में कहा कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शिक्षक पंकज मथुरिया को निलंबित किया जा चुका है, जबकि अन्य संबंधित स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। समिति ने जिला प्रशासन की प्रारंभिक कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जांच के दौरान वर्तमान अधीक्षिका का उसी छात्रावास में पदस्थ रहना निष्पक्ष जांच की दृष्टि से उचित नहीं है। छात्राओं के बयान प्रभावित होने की जताई आशंका समिति ने आशंका जताई कि अधीक्षिका के छात्रावास में बने रहने से छात्राओं के स्वतंत्र रूप से बयान देने पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। साथ ही जांच से जुड़े रिकॉर्ड और साक्ष्यों के प्रभावित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराना है। CCTV और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग ज्ञापन में जांच पूरी होने तक अधीक्षिका को छात्रावास से हटाकर अन्यत्र संलग्न या स्थानांतरित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही छात्राओं से संबंधित स्टाफ और मामले से जुड़े रिकॉर्ड तक अनावश्यक पहुंच पर रोक लगाने की मांग की गई है। समिति ने छात्राओं के बयान महिला अधिकारी अथवा अधिकृत महिला जांच अधिकारी की मौजूदगी में सुरक्षित और बाल-मित्र वातावरण में दर्ज कराने की मांग की। इसके अलावा छात्रावास के CCTV फुटेज, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, विजिटर रजिस्टर सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। वैकल्पिक महिला अधिकारी की व्यवस्था की मांग समिति ने कहा कि जांच अवधि में छात्रावास की व्यवस्थाएं प्रभावित न हों, इसके लिए एक निष्पक्ष एवं सक्षम महिला अधिकारी अथवा अधीक्षिका की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। छात्राओं को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव के जांच अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकें। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जांच सही दिशा में नहीं होती और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आदिवासी समाज की ओर से आंदोलन किया जाएगा। समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन समिति की मांगों पर क्या कदम उठाता है और छात्राओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।3
- सवाई माधोपुर जिले में क्यों नहीं छोड़ा गया बनास नदी में पानी आखिर क्यों नहीं छोड़ा गया बनास नदी में पानी1
- हनुमान मंदिर का होगा जीर्णोद्धार, भव्य मंदिर बनेगा आस्था का प्रमुख केंद्र सारसोप । समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से पुराने मंदिर को हटाकर यहां भव्य एवं आकर्षक हनुमान मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। मंदिर निर्माण को लेकर ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है और सभी मिलकर इस धार्मिक कार्य में सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर काफी समय से जर्जर हालत में था, जिसके चलते श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से मंदिर के नवनिर्माण का निर्णय लिया है। निर्माण कार्य में ग्रामीण अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक एवं श्रम सहयोग करेंगे। मंदिर को श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि भव्य मंदिर बनने से गांव में धार्मिक वातावरण को बढ़ावा मिलेगा और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा। मंदिर निर्माण के लिए जल्द ही आवश्यक तैयारियां शुरू की जाएंगी।1
- डिग्गी कल्याण पदयात्रियों के लिए राधा कृष्ण गौशाला के पास मंदिर श्री त्रिनेत्र गणेश जी महाराज रणथंभौर के महंत के सौजन्य से चतुर्थ पोहे व चाय भण्डारे मे सेवा करते मानव सेवा प्रकृति प्रेमी ग्रुप सवाई माधोपुर के पर्यावरण प्रेमी2
- सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर हाउसिंग बोर्ड, सर्किट हाउस रोड, आलनपुर अहिंसा सर्किल,कोतवाली थाना रोड ,रणथंभौर सर्किल, दशहरा मैदान आदि कई स्थानों की पांच दिनों से रोड लाइट बंद। रोड लाइट के कर्मचारियों को कई दिनों से नहीं मिल रहा भुगतान। भुगतान मिले तो कर्मचारी आए अपनी ड्यूटी पर। लेकिन नगर परिषद की लापरवाही हो रही उजागर। आखिर देखने की बात है कि क्या जिला प्रशासन इस पर करता है कार्रवाई? रात में आमजनता को हो रही परेशानी। जिम्मेदार कौन? बड़ा हादसा होने का कर रहे इंतजार। सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर हाउसिंग बोर्ड, सर्किट हाउस रोड, आलनपुर अहिंसा सर्किल,कोतवाली थाना रोड ,रणथंभौर सर्किल, दशहरा मैदान आदि कई स्थानों की पांच दिनों से रोड लाइट बंद। रोड लाइट के कर्मचारियों को कई दिनों से नहीं मिल रहा भुगतान। भुगतान मिले तो कर्मचारी आए अपनी ड्यूटी पर। लेकिन नगर परिषद की लापरवाही हो रही उजागर। आखिर देखने की बात है कि क्या जिला प्रशासन इस पर करता है कार्रवाई? रात में आमजनता को हो रही परेशानी। जिम्मेदार कौन? बड़ा हादसा होने का कर रहे इंतजार।1
- नगर परिषद के वार्ड की आरक्षित सीट बदलने की मांग, देखिए _लालिमा न्यूज_। @bharat_news_24_baran चैनल लाईक व सब्सक्राइब करिए। नगर परिषद के वार्ड की आरक्षित सीट बदलने की मांग, देखिए _लालिमा न्यूज_। @bharat_news_24_baran चैनल लाईक व सब्सक्राइब करिए।1
- श्योपुर जिले के जावदेश्वर पंचायत में सड़क पर पानी, ग्रामीणों ने सरपंच सचिव पर लगाए गंभीर आरोप1