धर्म की राजधानी हरिद्वार की विश्व विख्यात हर की पैड़ी पर नियम-कानूनों के बजाय कथित रूप से भ्रष्टाचार का “अघोषित एक्ट” चलता दिखाई दे रहा है। नगर निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों पर गंभीर आरोप हैं कि वे राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट आदेशों की धज्जियां उड़ाकर गुपचुप तरीके से फूल फरोशी के अवैध ठेके देने की तैयारी में जुटे हुए हैं, जिससे मां गंगा की पवित्रता पर ‘कमाई’ का हमला हो रहा है। एनजीटी ने गंगा में पुष्प और पूजन सामग्री डालने पर साफ प्रतिबंध लगा रखा है, इसके बावजूद हर की पैड़ी और गंगा घाटों पर फूलों, प्रसाद और प्लास्टिक में पैक सामग्री का खुला व्यापार कराया जा रहा है। नगर निगम एक्ट भी हर की पैड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का क्रय-विक्रय प्रतिबंधित करता है, लेकिन घाटों पर अवैध फड़ और प्लास्टिक में पैक प्रसाद खुलेआम बिक रहा है। फूल फरोशी के ठेकों की अवधि समाप्त होने के बावजूद दुकानें हटाई नहीं गईं; उन्हें सिर्फ ऊपर से पॉलिथीन से ढका गया है, जबकि अंदर से व्यापार पहले की तरह धड़ल्ले से जारी है। श्रद्धालुओं को खुलेआम फूल, प्रसाद, धूपबत्ती, अगरबत्ती और प्लास्टिक की केनी बेची जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है, और सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी संवेदनशील धार्मिक स्थली पर यह अवैध कारोबार किसकी छत्रछाया में फल-फूल रहा है। एनजीटी के आदेशों का उद्देश्य मां गंगा को प्रदूषण से बचाना था, लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने इन आदेशों को ही “कमाई का जरिया” बना दिया है। प्रतिदिन टनों फूल, प्लास्टिक और पूजन सामग्री गंगा में बहाई जा रही है, जिससे मां गंगा की निर्मलता, अविरलता और पवित्रता खतरे में है। जिन अधिकारियों पर गंगा की रक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर नियमों को ताक पर रखकर अपनी जेबें भरने के आरोप लग रहे हैं। श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि अगर कानून के रखवाले ही कानून तोड़ेंगे और गंगा की रक्षा करने वाले ही उसे प्रदूषित करेंगे, तो आम जनता शिकायत लेकर कहां जाए? लगातार समाचार प्रकाशित होने और जनआक्रोश बढ़ने के बावजूद न तो अवैध फड़ हटाए गए और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। अब यह चर्चा भी है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी गुपचुप तरीके से फूल फरोशी के नए ठेके देने की तैयारी चल रही है। यदि ऐसा होता है, तो इसे एनजीटी के आदेशों और नगर निगम एक्ट की खुली अवहेलना माना जाएगा। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हरिद्वार में यह अवैध कारोबार और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं पर भी आघात है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है, जिससे अवैध फूल फरोशी के ठेकों के पीछे के लोग, संदिग्ध अधिकारी और एनजीटी आदेशों की अनदेखी के संरक्षक सामने आएं और मां गंगा की पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई हो, क्योंकि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियां पूछेंगी कि जिम्मेदार लोग आखिर मौन क्यों थे।
धर्म की राजधानी हरिद्वार की विश्व विख्यात हर की पैड़ी पर नियम-कानूनों के बजाय कथित रूप से भ्रष्टाचार का “अघोषित एक्ट” चलता दिखाई दे रहा है। नगर निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों पर गंभीर आरोप हैं कि वे राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट आदेशों की धज्जियां उड़ाकर गुपचुप तरीके से फूल फरोशी के अवैध ठेके देने की तैयारी में जुटे हुए हैं, जिससे मां गंगा की पवित्रता पर ‘कमाई’ का हमला हो रहा है। एनजीटी ने गंगा में पुष्प और पूजन सामग्री डालने पर साफ प्रतिबंध लगा रखा है, इसके बावजूद हर की पैड़ी और गंगा घाटों पर फूलों, प्रसाद और प्लास्टिक में पैक सामग्री का खुला व्यापार कराया जा रहा है। नगर निगम एक्ट भी हर की पैड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार
का क्रय-विक्रय प्रतिबंधित करता है, लेकिन घाटों पर अवैध फड़ और प्लास्टिक में पैक प्रसाद खुलेआम बिक रहा है। फूल फरोशी के ठेकों की अवधि समाप्त होने के बावजूद दुकानें हटाई नहीं गईं; उन्हें सिर्फ ऊपर से पॉलिथीन से ढका गया है, जबकि अंदर से व्यापार पहले की तरह धड़ल्ले से जारी है। श्रद्धालुओं को खुलेआम फूल, प्रसाद, धूपबत्ती, अगरबत्ती और प्लास्टिक की केनी बेची जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है, और सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी संवेदनशील धार्मिक स्थली पर यह अवैध कारोबार किसकी छत्रछाया में फल-फूल रहा है। एनजीटी के आदेशों का उद्देश्य मां गंगा को प्रदूषण से बचाना था, लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने इन आदेशों को ही “कमाई
का जरिया” बना दिया है। प्रतिदिन टनों फूल, प्लास्टिक और पूजन सामग्री गंगा में बहाई जा रही है, जिससे मां गंगा की निर्मलता, अविरलता और पवित्रता खतरे में है। जिन अधिकारियों पर गंगा की रक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर नियमों को ताक पर रखकर अपनी जेबें भरने के आरोप लग रहे हैं। श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि अगर कानून के रखवाले ही कानून तोड़ेंगे और गंगा की रक्षा करने वाले ही उसे प्रदूषित करेंगे, तो आम जनता शिकायत लेकर कहां जाए? लगातार समाचार प्रकाशित होने और जनआक्रोश बढ़ने के बावजूद न तो अवैध फड़ हटाए गए और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। अब यह चर्चा भी है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी गुपचुप तरीके से फूल फरोशी
के नए ठेके देने की तैयारी चल रही है। यदि ऐसा होता है, तो इसे एनजीटी के आदेशों और नगर निगम एक्ट की खुली अवहेलना माना जाएगा। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हरिद्वार में यह अवैध कारोबार और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं पर भी आघात है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है, जिससे अवैध फूल फरोशी के ठेकों के पीछे के लोग, संदिग्ध अधिकारी और एनजीटी आदेशों की अनदेखी के संरक्षक सामने आएं और मां गंगा की पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई हो, क्योंकि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियां पूछेंगी कि जिम्मेदार लोग आखिर मौन क्यों थे।
- उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन प्रहार' अभियान के तहत, हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशों पर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में, पुलिस टीम ने 30 मई 2026 को पिरान कलियर क्षेत्र से एक व्यक्ति को अवैध रूप से सट्टे की खाईबाड़ी करते हुए रंगेहाथ पकड़ा। गिरफ्तार किए गए आरोपित की पहचान मोहम्मद अरकान पुत्र मुख्तार हुसैन के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल जिले के शहबाजपुरा खेड़ा, थाना रायसत्ती का निवासी है और वर्तमान में कलियर के मुकर्रबपुर में रईश के मकान में रह रहा था। पुलिस ने उसके कब्जे से एक सट्टा डायरी, एक पेन और कुल ₹1650/- नकद बरामद किए हैं। आरोपित मोहम्मद अरकान के खिलाफ जुआ अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में कांस्टेबल सुबोध कुमार और होमगार्ड राजेंद्र सिंह शामिल थे।1
- लक्सर में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। आसमान में घनी काली घटा छा जाने के बाद, इलाके में जमकर बारिश हुई। इस बारिश के चलते लोगों को गर्मी और लू की मार से काफी राहत मिली।1
- khatarnak1
- हरिद्वार जनपद के विकासखंड लक्सर अंतर्गत ग्राम पंचायत अकोढ़ा कला में अपर जिलाधिकारी वैभव गुप्ता की अध्यक्षता में एक जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर पहुँचे, जिन्होंने प्रशासन के सामने बिजली, पेयजल, सड़क, पेंशन और राजस्व से जुड़ी विभिन्न समस्याएँ रखीं। अपर जिलाधिकारी ने कई शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया, जबकि शेष मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए। इस जनता दरबार में खंड विकास अधिकारी, तहसीलदार, खंड शिक्षा अधिकारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।1
- यह पोस्ट पैसे को आकर्षित करने के तरीकों के बारे में सवाल उठाती है। इसमें पूछा गया है कि पैसे को कैसे आकर्षित किया जाता है और इसके क्या उपाय हैं।1
- गतवर्ष मनसा देवी सीढ़ी मार्ग पर हुई दुर्घटना में 9 लोगों की जान चली गई थी। उस समय प्रथमदृष्टया माना गया था कि किसी खंबे से बिजली का तार टूटने के बाद मची भगदड़ में लोग हादसे का शिकार हुए थे। इस घटना के बाद व्यवस्थाओं में सुधार के दावे तो किए गए, लेकिन अब भी हालात पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। वर्तमान में इस मार्ग पर बिजली के खंभे ही टूटकर गिरने को तैयार खड़े हैं, जो बिजली के बल्ब और तारों का बोझ भी नहीं संभाल पा रहे हैं। हालाँकि सीढ़ी मार्ग प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए बंद करा रखा है, लेकिन आने वाले दिनों में भीड़ बढ़ने पर इस मार्ग को खोलने की ज़रूरत कभी भी पड़ सकती है। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ खंभों को तो विभाग ने नीचे से ईंट और लकड़ी का सहारा देकर अस्थायी 'जुगाड़' से टिका रखा है। लगभग एक माह पूर्व भी यहाँ एक बिजली का पोल गिर गया था, जिसे बाद में फिर जुगाड़ से खड़ा कर दिया गया था। अब कांवड़ मेला नजदीक है और ऐसे में इस मार्ग पर बिजली के ये झूलते खंभे फिर किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बनने के लिए तैयार खड़े हैं, जो बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।1