बुलडोज़र, भीड़ और डर का माहौल — क्या यही नया भारत है? मजा़हीर अनवर (एआईएमआईएम कामठी) माननीय उच्चतम न्यायालय ने बार बार राज्यों और केंद्र सरकार को बुलडोज़र एक्शन पर लगाम लगाने पर जोर दिया है लेकिन ऐसा लगता है सरकारें खुदको संविधान और न्याय पालिका से बढ़कर समझने लगी है। भारत का संविधान दुनिया के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक दस्तावेज़ों में से एक माना जाता है। यह हर नागरिक को बराबरी, न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से जो घटनाएं सामने आई हैं—चाहे वह बुलडोज़र एक्शन हो, मॉब लिंचिंग की घटनाएं हों या सामाजिक भेदभाव—उन्होंने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे समाज में सभी नागरिक सच में समान सुरक्षा और सम्मान पा रहे हैं। हाल के समय में कई राज्यों में प्रशासन द्वारा अपराध के आरोपित लोगों के घरों पर बुलडोज़र चलाने की घटनाएं सामने आई हैं। कई बार यह कार्रवाई ऐसे मामलों में भी हुई जहां अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया था। कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को सज़ा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका को है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अदालत से पहले ही किसी का घर गिरा दिया जाता है, तो क्या यह संविधान के उस सिद्धांत के खिलाफ नहीं है जो हर व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार देता है। इसी तरह मॉब लिंचिंग की घटनाएं भी पिछले वर्षों में देश के लिए चिंता का विषय बनी हैं। कई मामलों में भीड़ ने अफवाहों या धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को निशाना बनाया। ऐसे हादसे सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं लेते, बल्कि समाज में डर और अविश्वास का माहौल भी पैदा करते हैं। जब भीड़ कानून अपने हाथ में लेने लगती है, तो यह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए खतरनाक संकेत होता है। सामाजिक स्तर पर भी कई मुसलमानों ने यह शिकायत की है कि उन्हें मकान किराये पर लेने, नौकरी पाने या व्यापार करने में कभी-कभी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह सच है कि भारत में लाखों उदाहरण ऐसे भी हैं जहां अलग-अलग धर्मों के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं, लेकिन जब भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं तो वे समाज में दूरी और असुरक्षा को बढ़ाती हैं। भारत की असली पहचान उसकी विविधता और गंगा-जमुनी तहज़ीब है। यह वह देश है जहां सदियों से अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग साथ रहते आए हैं। इसलिए यह जरूरी है कि कानून का राज मजबूत हो, न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष हो और किसी भी समुदाय को यह महसूस न हो कि उसके साथ अन्याय हो रहा है। एक लोकतांत्रिक समाज की मजबूती इसी में है कि वह अपने कमजोर और अल्पसंख्यक नागरिकों की भी उतनी ही सुरक्षा करे जितनी बहुसंख्यक की। अगर हम संविधान के मूल्यों—न्याय, समानता और भाईचारे—को सच में अपनाएं, तभी भारत एक ऐसा देश बना रह सकता है जहां हर नागरिक बिना डर के जी सके। आज समय की मांग यही है कि हम नफरत और डर की राजनीति से ऊपर उठकर इंसाफ, संविधान और इंसानियत की बात करें। क्योंकि जब न्याय सबके लिए समान होगा, तभी भारत की लोकतांत्रिक आत्मा भी सुरक्षित रहेगी।
बुलडोज़र, भीड़ और डर का माहौल — क्या यही नया भारत है? मजा़हीर अनवर (एआईएमआईएम कामठी) माननीय उच्चतम न्यायालय ने बार बार राज्यों और केंद्र सरकार को बुलडोज़र एक्शन पर लगाम लगाने पर जोर दिया है लेकिन ऐसा लगता है सरकारें खुदको संविधान और न्याय पालिका से बढ़कर समझने लगी है। भारत का संविधान दुनिया के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक दस्तावेज़ों में से एक माना जाता है। यह हर नागरिक को बराबरी, न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से जो घटनाएं सामने आई हैं—चाहे वह बुलडोज़र एक्शन हो, मॉब लिंचिंग की घटनाएं हों या सामाजिक भेदभाव—उन्होंने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे समाज में सभी नागरिक सच में समान सुरक्षा और सम्मान पा रहे हैं। हाल के समय में कई राज्यों में प्रशासन द्वारा अपराध के आरोपित लोगों के घरों पर बुलडोज़र चलाने की घटनाएं सामने आई हैं। कई बार यह कार्रवाई ऐसे मामलों में भी हुई जहां अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया था। कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को सज़ा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका को है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अदालत से पहले ही किसी का घर गिरा दिया जाता है, तो क्या यह संविधान के उस सिद्धांत के खिलाफ नहीं है जो हर व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार देता है। इसी तरह मॉब लिंचिंग की घटनाएं भी पिछले वर्षों में देश के लिए चिंता का विषय बनी हैं। कई मामलों में भीड़ ने अफवाहों या धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को निशाना बनाया। ऐसे हादसे सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं लेते, बल्कि समाज में डर और अविश्वास का माहौल भी पैदा करते हैं। जब भीड़ कानून अपने हाथ में लेने लगती है, तो यह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए खतरनाक संकेत होता है। सामाजिक स्तर पर भी कई मुसलमानों ने यह शिकायत की है कि उन्हें मकान किराये पर लेने, नौकरी पाने या व्यापार करने में कभी-कभी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह सच है कि भारत में लाखों उदाहरण ऐसे भी हैं जहां अलग-अलग धर्मों के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं, लेकिन जब भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं तो वे समाज में दूरी और असुरक्षा को बढ़ाती हैं। भारत की असली पहचान उसकी विविधता और गंगा-जमुनी तहज़ीब है। यह वह देश है जहां सदियों से अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग साथ रहते आए हैं। इसलिए यह जरूरी है कि कानून का राज मजबूत हो, न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष हो और किसी भी समुदाय को यह महसूस न हो कि उसके साथ अन्याय हो रहा है। एक लोकतांत्रिक समाज की मजबूती इसी में है कि वह अपने कमजोर और अल्पसंख्यक नागरिकों की भी उतनी ही सुरक्षा करे जितनी बहुसंख्यक की। अगर हम संविधान के मूल्यों—न्याय, समानता और भाईचारे—को सच में अपनाएं, तभी भारत एक ऐसा देश बना रह सकता है जहां हर नागरिक बिना डर के जी सके। आज समय की मांग यही है कि हम नफरत और डर की राजनीति से ऊपर उठकर इंसाफ, संविधान और इंसानियत की बात करें। क्योंकि जब न्याय सबके लिए समान होगा, तभी भारत की लोकतांत्रिक आत्मा भी सुरक्षित रहेगी।
- Post by Ammar haider (ezaan)1
- Post by आनंद चौधरी ठाकुर शिवसेना कट्टर हिन्दू नेता युवा सेना उप राष्ट्रीय प्रमुख1
- गडचिरोली जिल्ह्यातील शेतकऱ्यांच्या समस्या विधिमंडळात;शेतजमीन अधिग्रहणास स्थानिक शेतकऱ्यांचा तीव्र विरोध विशेष प्रतिनिधी मुंबई गडचिरोली: (दि ११) चामोर्शी तालुक्यातील भेंडाळा परिसरातील सुपीक शेतजमीन एमआयडीसीकरिता अधिग्रहित करू नये यासाठी स्थानिक शेतकऱ्यांचा तीव्र विरोध आहे. या संदर्भात गडचिरोली जिल्ह्यातील शेतकऱ्यांच्या समस्या विधिमंडळात मांडाव्यात, अशी मागणी गडचिरोली जिल्हा काँग्रेस कमिटी अध्यक्ष महेंद्र ब्राह्मणवाडे यांनी पत्राद्वारे विधान परिषदेचे आमदार अभिजित दादा वंजारी यांच्याकडे केली होती. या मागणीची दखल घेत आमदार अभिजित दादा वंजारी यांनी विधान परिषदेत चामोर्शी तालुक्यातील भेंडाळा परिसरातील सुपीक शेतजमीन अधिग्रहित करू नये तसेच जमीन अधिग्रहण करताना स्थानिक शेतकऱ्यांना विश्वासात घेऊन निर्णय घ्यावा, अशी मागणी जोरदारपणे मांडून शेतकऱ्यांच्या प्रश्नाला वाचा फोडली.1
- Post by Dr.Mirza Md.Meher Abbas1
- लखनऊ । रमजान ड्यूटी पर लखनऊ के ऐशबाग मिलरोड के रैनबसेरा में कैंप कर रही पुलिस कंपनी का ये सिपाही करेहटा चौराहे पर चाट बताशे खाने के बाद पैसा देने के समय दुकानदार पर पुलिसिया रौब गांठने लगा और गाली गलौच करने लग गया । जब आसपास के लोगों को जानकारी हुई तो सभी करेहटा सेल्टर होम पहुंचे जहाँ ये पुलिसकर्मी नशे में धुत मिला । ऐसे पुलिसकर्मी ही गरीबों को सता रहे हैं और योगी सरकार की फजीहत करा रहे हैं, ऐसे पुलिस वालों पर कार्यवाही जरूरी है।1
- sourav plumber Roy 83486438921
- ಹಾನಗಲ್. ಸತತ 6 ವರ್ಷಗಳ ಕೆಪಿಸಿಸಿ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾಗಿ ಪಯಣ. ಉಪ ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿ ಡಿ.ಕೆ.ಶಿವಕುಮಾರ್ ಅವರಿಗೆ ಕೆಪಿಸಿಸಿ ಕಾರ್ಯದರ್ಶಿ ಪ್ರಕಾಶಗೌಡ ಹಾಗೂ ಅವರ ಬಳಗದ ವತಿಯಿಂದ ಸಾಯಿಬಾಬಾ ದೇವಸ್ಥಾನಕ್ಕೆ ತೆರಳಿ ಪೂಜೆ ಸಲ್ಲಿಸಿವುದರೊಂದಿಗೆ ಡಿಸಿಎಂ.ಡಿ.ಕೆ.ಶಿವಕುಮಾರವರಿಗೆ ಅಭಿನಂದನೆ ಸಲ್ಲಿಸಿದರು.1
- पवनी शिवारात रोवणी पूर्ण; दुस-या हंगामाची धान पेरणी जोमात पवनी/भंडारा शहर प्रतिनिधी पवनी:(दि ११) भंडारा जिल्हात सर्वदूर दुस-या हंगामातील धान पेरणी पूर्ण झाली असून रोवणा काही ठिकाणी सुरु आहे. पवनी तालुक्यातील धानोरी, सावरला, भोजापूर शिवारात रोवणा करणे सुरू असून अनेक शेतक-यांची धान पेरणीची कामे पूर्ण झाली आहे.1