एडवोकेट को किसी सरकारी कार्यालय या थाने में जाने से कोई नहीं रोक सकता-मनोज आहूजा देश के अधिवक्ता,एडवोकेट एक्ट 1961 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं।एडवोकेट एक्ट के प्रावधान इस प्रकार हैं। 1. एडवोकेट को किसी सरकारी कार्यालय या थाने जाने से कोई नहीं रोक सकता Advocates Act, 1961 में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि अधिवक्ता पुलिस थाना, कलेक्ट्रेट, तहसील, रजिस्ट्रार ऑफिस, SDM ऑफिस आदि में नहीं जा सकता। एक अधिवक्ता भारत का नागरिक भी है,और उसे वही अधिकार प्राप्त हैं जो किसी आम नागरिक को हैं। 2. Section 30 – Practise का अधिकार “An advocate shall be entitled to practise throughout the territories to which this Act extends.”इसका मतलब: पूरे भारत में प्रैक्टिस अपने मुवक्किल के हित में थाने में सरकारी विभाग में अधिकारियों से मिलना आवेदन,प्रार्थना-पत्र देना Practise का अर्थ केवल कोर्ट में बहस नहीं,बल्कि मुवक्किल के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी वैधानिक कार्य 3. थाने में अधिवक्ता का अधिकार अधिवक्ता: FIR/शिकायत देने गिरफ्तारी/पूछताछ की जानकारी लेने अपने मुवक्किल के लिए आवेदन देने कानून के तहत प्रतिनिधित्व करने किसी SHO, SI या पुलिस कर्मी को अधिकार नहीं कि वो कहे: “वकील अंदर नहीं आएगा” यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। 4. सरकारी ऑफिस में रोका जाना – अवैध अगर कोई अधिकारी कहता है: “वकील अंदर नहीं जाएगा” “केवल पार्टी आए” “एडवोकेट को अनुमति नहीं”तो ये: मनमान असंवैधानिक न्याय में बाधा (Obstruction of Justice) 5. Supreme Court of India का सिद्धांत सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुका है कि: अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग है, और उसके कार्य में अनावश्यक बाधा अस्वीकार्य है। 6. कब सीमित किया जा सकता है? (Exception) केवल इन हालात में: अगर कोई लिखित नियम/ऑर्डर हो सुरक्षा कारणों से (High Security Area) Covid/आपदा जैसे अस्थायी नियम लेकिन सिर्फ मौखिक रोक = अवैध अगर कोई रोके तो क्या करें नाम-पद पूछें लिखित आदेश माँगें वीडियो/ऑडियो रिकॉर्ड वरिष्ठ अधिकारी को शिकायत,हाईकोर्ट में रिट (Article 226) “अधिवक्ता को थाना या सरकारी कार्यालय जाने से रोकना न केवल अवैध है,बल्कि संविधान व Advocates Act, 1961 का खुला उल्लंघन है।” सादर-मनोज आहूजा एडवोकेट,प्रदेश सचिव अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच,निवर्तमान अध्यक्ष,जिला बार एसोसिएशन केकड़ी,पूर्व अध्यक्ष,बार एसोसिएशन भिनाय मोबाइल,नंबर-9413300227,9414434927
एडवोकेट को किसी सरकारी कार्यालय या थाने में जाने से कोई नहीं रोक सकता-मनोज आहूजा देश के अधिवक्ता,एडवोकेट एक्ट 1961 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं।एडवोकेट एक्ट के प्रावधान इस प्रकार हैं। 1. एडवोकेट को किसी सरकारी कार्यालय या थाने जाने से कोई नहीं रोक सकता Advocates Act, 1961 में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि अधिवक्ता पुलिस थाना, कलेक्ट्रेट, तहसील, रजिस्ट्रार ऑफिस, SDM ऑफिस आदि में नहीं जा सकता। एक अधिवक्ता भारत का नागरिक भी है,और उसे वही अधिकार प्राप्त हैं जो किसी आम नागरिक को हैं। 2. Section 30 – Practise का अधिकार “An advocate shall be entitled to practise throughout the territories to which this Act extends.”इसका मतलब: पूरे भारत में प्रैक्टिस अपने मुवक्किल के हित में थाने में सरकारी विभाग में अधिकारियों से मिलना आवेदन,प्रार्थना-पत्र देना Practise का अर्थ केवल कोर्ट में बहस नहीं,बल्कि मुवक्किल के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी वैधानिक कार्य 3. थाने में अधिवक्ता का अधिकार अधिवक्ता: FIR/शिकायत देने गिरफ्तारी/पूछताछ की जानकारी लेने अपने मुवक्किल के लिए आवेदन देने कानून के तहत प्रतिनिधित्व करने किसी SHO, SI या पुलिस कर्मी को अधिकार नहीं कि वो कहे: “वकील अंदर नहीं आएगा” यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। 4. सरकारी ऑफिस में रोका जाना – अवैध अगर कोई अधिकारी कहता है: “वकील अंदर नहीं जाएगा” “केवल पार्टी आए” “एडवोकेट को अनुमति नहीं”तो ये: मनमान असंवैधानिक न्याय में बाधा (Obstruction of Justice) 5. Supreme Court of India का सिद्धांत सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुका है कि: अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग है, और उसके कार्य में अनावश्यक बाधा अस्वीकार्य है। 6. कब सीमित किया जा सकता है? (Exception) केवल इन हालात में: अगर कोई लिखित नियम/ऑर्डर हो सुरक्षा कारणों से (High Security Area) Covid/आपदा जैसे अस्थायी नियम लेकिन सिर्फ मौखिक रोक = अवैध अगर कोई रोके तो क्या करें नाम-पद पूछें लिखित आदेश माँगें वीडियो/ऑडियो रिकॉर्ड वरिष्ठ अधिकारी को शिकायत,हाईकोर्ट में रिट (Article 226) “अधिवक्ता को थाना या सरकारी कार्यालय जाने से रोकना न केवल अवैध है,बल्कि संविधान व Advocates Act, 1961 का खुला उल्लंघन है।” सादर-मनोज आहूजा एडवोकेट,प्रदेश सचिव अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच,निवर्तमान अध्यक्ष,जिला बार एसोसिएशन केकड़ी,पूर्व अध्यक्ष,बार एसोसिएशन भिनाय मोबाइल,नंबर-9413300227,9414434927
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- शाहपुरा -भैरू लाल लक्षकार भीम उनियारा सड़क मार्ग 148 पर राज्यास गांव के पास आमली,मालपुरा(टोंक) जिले से आए राजपूत समाज के लोगो की कार पलक झपकते ही खाक हो गई, उनकी चीख-पुकार मच गई, प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार, हादसा इतना भयानक था कि स्कार्पियो के पलटते ही उसमें धमाका हुआ और वह आग की लपटों से घिर गई। गाड़ी में सवार लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। आग का गोला बनी गाड़ी को देख राहगीरों और ग्रामीणों के हाथ-पांव फूल गए। सूचना मिलते ही फूलियाकलां पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भारी जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे। तीन घायलों की हालत नाजुक, शाहपुरा रेफर वहां से भीलवाड़ा किया रेफर हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए तीन लोगों को ग्रामीणों और पुलिस की मदद से जलती गाड़ी के पास से रेस्क्यू किया गया। उन्हें तत्काल उपचार के लिए शाहपुरा जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जहां तीनों फूलचंद, शंकर सिंह, विजय सिंह की हालत बेहद नाजुक होने से उनको भीलवाड़ा रेफर कर दिया गया है। दोनों मृतक पिता पुत्र कज़ोड़ (45) व अजय सिंह (35)बताए जा रहे उनके शवों को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवाया गया। हादसे के मेगा हाईवे पर लंबा जाम लग गया राज्यास के पास हुए इस हादसे के बाद मेगा हाईवे 148 डी पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस ने क्रेन की मदद से जली हुई गाड़ी को सडक़ किनारे कर यातायात सुचारू करवाया। मौके पर भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा है और पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी या पलटने के दौरान फ्यूल टैंक फटने से लगी है या नहीं जांच के बाद पता लगेगा। मृतकों का सुबह परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम होगा। सभी गुहली मायरा भरने जा रहे थे, इस दौरान हादसा हो गया।2
- अजमेर के सुभाष नगर स्थित ब्यावर रोड पुरानी चुंगी के पास गहरे गड्ढे में सामान से भरी पिकअप वाहन गिरकर एक ओर झुक गई। मौके पर मौजूद दुकानदारों और व्यापारियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। श्री अजमेर व्यापारिक महासंघ के पदाधिकारियों ने सड़क पर बने गहरे गड्ढों और खुले नालों को तुरंत ढकवाने की मांग की है। व्यापारियों ने संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और नगर निगम प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी जनहानि से बचा जा सके। घटना के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।1
- सुल्तानुल हिन्द हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि की दरगाह अजमेर में महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोेग अध्यक्ष हाजी आराफात शेख ने अपने शिष्मण्डल के साथ जियारत की । शेख ने ख्वाजा गरीब नवाज के आस्ताना पर मखमली चादर व फूल पेश कर दुआं मांगी । दरगाह के खादिम सैयद अनस चिश्ती ने सब को जियारत करवाई और दस्तारबन्दी कर तबर्रूक दिया। इस दौरान उनके साथ आसिफ बैजापुरी के बेटे कदीरुल्लाह शाह कादरी लासानी समेत कई सूफी ख़ानक़ाहों के सज्जादानशी मौजूद रहे । शेख ने बताया कि ई शिष्टमंडल का अजमेर आने का असली मक़सद मिशन ए इंसानियत है। इसी के तहत क़ौमी एकता के लिए मुम्बई में 'एक शाम ख्वाजा गरीब नवाज के नाम, प्रोग्राम के भी किया जाना है। इस1
- Ajmer mein padhati barish ke Karan bada mahaul thand ka ek bar fir se garmi Hatti thandai lag raha hai ki Dil Ko kuchh sukun Mila Rahat Mili to hamen aapka bhai special news1
- राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के असर से 17–18 फरवरी को कई संभागों में मेघगर्जन, हल्की-मध्यम बारिश और 30–40 किमी/घंटा की तेज हवाओं का अलर्ट जारी, मौसम विभाग ने किसानों को रबी फसलों की सुरक्षा के इंतजाम करने की सलाह दी।1
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