प्रशासन की बेरुखी: घर बचाने के लिए SDM के पैर पकड़े, फिर भी ढहा दिया आशियाना सीधी-रीवा | मध्य भारत न्यूज़ प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदनाएं उस वक्त तार-तार हो गईं, जब अपना घर बचाने के लिए महिलाएं अधिकारियों के पैरों में गिरकर गिड़गिड़ाती रहीं। मामला सीधी-रीवा क्षेत्र का है, जहां अतिक्रमण हटाने या खुदाई की कार्रवाई के दौरान छह परिवारों के आशियाने पर संकट गहरा गया है। मलबे में तब्दील हुई जीवन भर की पूंजी 70 वर्षीय लक्ष्मीकांत द्विवेदी का दर्द किसी की भी आंखें नम कर सकता है। उन्होंने बताया कि कई बार आवेदन देने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं रुकी, तो उन्होंने मजबूर होकर एसडीएम (SDM) के पैर पकड़ लिए। उन्होंने गुहार लगाई— "साहब! मेरा घर मत गिराइए, यही मेरा सब कुछ है।" लेकिन उनकी एक न सुनी गई और देखते ही देखते उनका घर मलबे के ढेर में बदल गया। असुरक्षित हुए मकान, कभी भी गिर सकते हैं मौके पर मौजूद महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्रशासन द्वारा चारों ओर खुदाई करवा दी गई है, जिससे बचे हुए मकान भी अब पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं। नींव कमजोर होने के कारण घरों के कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है, जिससे 6 परिवारों की जान जोखिम में है। "जहां कभी बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहां अब सिर्फ धूल और सन्नाटा पसरा हुआ है।" — लक्ष्मीकांत द्विवेदी (पीड़ित) रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, मध्य भारत न्यूज़
प्रशासन की बेरुखी: घर बचाने के लिए SDM के पैर पकड़े, फिर भी ढहा दिया आशियाना सीधी-रीवा | मध्य भारत न्यूज़ प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदनाएं उस वक्त तार-तार हो गईं, जब अपना घर बचाने के लिए महिलाएं अधिकारियों के पैरों में गिरकर गिड़गिड़ाती रहीं। मामला सीधी-रीवा क्षेत्र का है, जहां अतिक्रमण हटाने या खुदाई की कार्रवाई के दौरान छह परिवारों के आशियाने पर संकट गहरा गया है। मलबे में तब्दील हुई जीवन भर की पूंजी 70 वर्षीय लक्ष्मीकांत द्विवेदी का दर्द किसी की भी आंखें नम कर सकता है। उन्होंने बताया कि कई बार आवेदन देने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं रुकी, तो उन्होंने मजबूर होकर एसडीएम (SDM) के पैर पकड़ लिए। उन्होंने गुहार लगाई— "साहब! मेरा घर मत गिराइए, यही मेरा सब कुछ है।" लेकिन उनकी एक न सुनी गई और देखते ही देखते उनका घर मलबे के ढेर में बदल गया। असुरक्षित हुए मकान, कभी भी गिर सकते हैं मौके पर मौजूद महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्रशासन द्वारा चारों ओर खुदाई करवा दी गई है, जिससे बचे हुए मकान भी अब पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं। नींव कमजोर होने के कारण घरों के कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है, जिससे 6 परिवारों की जान जोखिम में है। "जहां कभी बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहां अब सिर्फ धूल और सन्नाटा पसरा हुआ है।" — लक्ष्मीकांत द्विवेदी (पीड़ित) रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, मध्य भारत न्यूज़
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