This archive presents a collection of scientific and philosophical research models developed by Sanjay Soni (2026). The work explores fundamental questions related to cosmic origin, stellar formation, consciousness, and universal processes. The models combine observational reasoning, philosophical inquiry, and conceptual scientific frameworks to explain natural phenomena. Topics covered in this research archive include: • Cosmic Origin Model • Unified Cosmic Process Theory (SS-UCPT) • Cosmic Process Model (SS-CPM) • Micro-Action Brahm Model (SS-MABM) • Sun and Sun-Like Stars Concept • Consciousness and Biological Structure Model The objective of this archive is to present conceptual frameworks that connect cosmic structure, natural laws, and consciousness. All models are authored and compiled by Sanjay Soni and are publicly available through GitHub repositories linked with Zenodo DOI for permanent scientific record and accessibility. Author: Sanjay Soni Year: 2026
This archive presents a collection of scientific and philosophical research models developed by Sanjay Soni (2026). The work explores fundamental questions related to cosmic origin, stellar formation, consciousness, and universal processes. The models combine observational reasoning, philosophical inquiry, and conceptual scientific frameworks to explain natural phenomena. Topics covered in this research archive include: • Cosmic Origin Model • Unified Cosmic Process Theory (SS-UCPT) • Cosmic Process Model (SS-CPM) • Micro-Action Brahm Model (SS-MABM) • Sun and Sun-Like Stars Concept • Consciousness and Biological Structure Model The objective of this archive is to present conceptual frameworks that connect cosmic structure, natural laws, and consciousness. All models are authored and compiled by Sanjay Soni and are publicly available through GitHub repositories linked with Zenodo DOI for permanent scientific record and accessibility. Author: Sanjay Soni Year: 2026
- अमेठी जिला मुख्यालय गौरीगंज स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में सोमवार को एक महिला ने तालाब की जमीन पर किए गए कथित अवैध निर्माण को हटवाने की मांग को लेकर गुहार लगाई। पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि पड़ोसी द्वारा तालाब खाते की भूमि पर निर्माण कर रास्ता बंद कर दिया गया है। मामला पीपरपुर थाना क्षेत्र के भादर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम केशवपुर का है। गांव निवासी पीड़ित महिला निर्मला देवी पत्नी स्वर्गीय वंशीलाल ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की है। निर्मला देवी ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनके पड़ोसी अभयराज पुत्र छोटेलाल ने जबरन तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण करा लिया है। इस निर्माण के कारण उनके घर आने-जाने का रास्ता बाधित हो गया है, जिससे उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महिला ने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले भी सम्पूर्ण समाधान दिवस में की जा चुकी है। उस दौरान उपजिलाधिकारी द्वारा राजस्व निरीक्षक भादर को अवैध निर्माण हटवाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद राजस्व निरीक्षक ने मौके पर पहुंचकर जांच भी की, लेकिन कार्रवाई अभी तक नहीं हो सकी है। राजस्व विभाग का कहना है कि जब तक मामले में संयुक्त टीम का गठन नहीं हो जाता, तब तक अवैध निर्माण को हटाना संभव नहीं है। पीड़िता ने जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी से मामले में शीघ्र कार्रवाई कर अवैध निर्माण हटवाने और रास्ता खुलवाने की मांग की है। वहीं इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी संजय चौहान ने जांच कर उचित कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया है।2
- अमेठी लोकसभा क्षेत्र में एलपीजी गैस की भारी किल्लत को लेकर यूथ कांग्रेस ने नाराजगी जताई है। कई गैस सेंटरों पर गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण आम जनता, खासकर किसानों, माता-बहनों और छोटे व्यापारियों को 4–5 दिन तक लंबी लाइन में लगने के बावजूद भी गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। साथ ही कुछ जगहों पर गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। यूथ कांग्रेस जिला अध्यक्ष शुभम सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा गैस की पर्याप्त उपलब्धता के दावे पूरी तरह गलत साबित हो रहे हैं। अमेठी के कई सेंटरों पर घरेलू और कमर्शियल दोनों प्रकार की गैस की कमी है, जिससे किसान, दुकानदार और व्यापारी काफी परेशान हैं और उनकी रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि अमेठी के सभी गैस सेंटरों पर जल्द से जल्द पर्याप्त मात्रा में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई की जाए। जिला अध्यक्ष शुभम सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसानों, नौजवानों और आम जनता की समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया और सभी सेंटरों पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हुई, तो अमेठी यूथ कांग्रेस किसानों और नौजवानों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी। किसान और नौजवानों की परेशानी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।4
- * *भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति, अमेठी में बुद्धिजीवियों ने दिया ज्ञापन* अमेठी। उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा की प्रथम पाली में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर अमेठी में विवाद खड़ा हो गया है। अमित तहसील क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए राज्यपाल के नाम उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। एडवोकेट राजेश मिश्र की अगुवाई में बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधिमंडल तहसील पहुंचा और उपजिलाधिकारी आशीष सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि 14 मार्च 2026 को आयोजित एसआई भर्ती परीक्षा की पहली पाली में अवसर के अनुसार बदल जाने जैसे अर्थ के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किया गया, जो आपत्तिजनक है। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय परंपरा में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग विद्वान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति के लिए किया जाता है। इसे अवसरवादिता जैसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना न केवल भाषाई दृष्टि से गलत है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अनुचित है। इससे समाज में गलत संदेश जाता है और अनावश्यक जातीय तनाव उत्पन्न होने की आशंका है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि संबंधित प्रश्न को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति के जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। इस दौरान उपजिलाधिकारी आशीष सिंह ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले को उच्च अधिकारियों तक भेजने का आश्वासन दिया। इस संबंध में एडवोकेट राजेश मिश्र ने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग विद्वान और सम्मानित व्यक्ति के लिए किया जाता है। इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना गलत है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने मांग की कि इस प्रश्न को तत्काल निरस्त किया जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। वहीं राजीव शुक्ल ने कहा कि इस प्रकार के प्रश्न परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। यदि समय रहते इस पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो समाज में आक्रोश बढ़ सकता है। दिनेश तिवारी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे शब्दों का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे अभ्यर्थियों और समाज की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने शासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की। समाजवादी पार्टी महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष गुंजन सिंह ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह के शब्दों का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘पंडित’ शब्द विद्वता और सम्मान का प्रतीक है, इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने शासन से मांग की कि संबंधित प्रश्न को तत्काल निरस्त किया जाए और भविष्य में इस प्रकार की त्रुटियां न हों, इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस मौके पर राजीव शुक्ल, दिनेश तिवारी, रसिक तिवारी,समाजवादी पार्टी महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष गुंजन सिंह, रोहित तिवारी, शुभम शुक्ल, विकास शुक्ल, विभव तिवारी, कैलाश शुक्ल, सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।1
- UPSI भर्ती परीक्षा के प्रश्न पर अमेठी में आपत्ति, ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर सौंपा गया ज्ञापन अमेठी। उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर अमेठी में विरोध देखने को मिला। तहसील क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए राज्यपाल के नाम उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर संबंधित प्रश्न को निरस्त करने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। एडवोकेट राजेश मिश्र की अगुवाई में बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधिमंडल तहसील पहुंचा और उपजिलाधिकारी आशीष सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि 14 मार्च 2026 को आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा की प्रथम पाली में “अवसर के अनुसार बदल जाने” जैसे अर्थ वाले विकल्प में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किया गया, जो आपत्तिजनक है। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय परंपरा में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग विद्वान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति के लिए किया जाता है। इसे अवसरवादिता जैसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना न केवल भाषाई दृष्टि से गलत है, बल्कि सामाजिक रूप से भी अनुचित है। इससे समाज में गलत संदेश जाता है और अनावश्यक जातीय तनाव उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि संबंधित प्रश्न को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति के जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय जांच कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की त्रुटियां दोबारा न हों। इस संबंध में एडवोकेट राजेश मिश्र ने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘पंडित’ शब्द विद्वता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना गलत है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शब्दों के चयन को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए। राजीव शुक्ल ने कहा कि इस तरह के प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। यदि समय रहते इस पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो समाज में आक्रोश बढ़ सकता है। दिनेश तिवारी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे शब्दों का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे अभ्यर्थियों और समाज की भावनाएं आहत होती हैं, इसलिए शासन को इस मामले में गंभीरता से जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं समाजवादी पार्टी महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष गुंजन सिंह ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘पंडित’ शब्द विद्वता और सम्मान का प्रतीक है। इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने शासन से मांग की कि संबंधित प्रश्न को तुरंत निरस्त किया जाए और भविष्य में इस तरह की त्रुटियों को रोकने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।1
- अमेठी में सोमवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल जिलाध्यक्ष महेश सोनी के नेतृत्व में नगर के पदाधिकारियों ने उप जिलाधिकारी अमेठी को गृहमंत्री अमित शाह को संबोधित ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन मे व्यापारियों ने अमेठी किठावर मार्ग पर स्थित एआरओ भवन जर्जर स्थिति मे है, जिसका मेंटिनेंस नगर पंचायत अमेठी के जिम्मे है ।ऐसी अवस्था मे यदि भवन को मरम्मत नही किया गया तो यह कार्यालय अयोध्या शिफ्ट कर दिया जाएगा। इस भवन का अमेठी से बहुत पुराना संबंध है जिसमें कई व्यापारी बंधुओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। और इस भवन के लिए स्थाई भूमि के लिए भी मांग किया गया है। इस मौके पर वरिष्ठ जिला महामंत्री सुशील जायसवाल नगर महामंत्री संदीप अग्रहरि युवा जिला महामंत्री पवन वैश्य नगर अध्यक्ष सोनू कसौधन हिमांशु कसौधन राहुल लोहिया रमेश राव हर्षित बरनवाल अखिलेश सोनी विकास सरोज आदि नगर वासी व्यापारी मौजूद रहे।2
- Post by Dharm Raj1
- थाना अंतू क्षेत्रान्तर्गत ग्राम पारा हमीदपुर में शव मिलने की सूचना पर पुलिस द्वारा की जा रही अग्रिम विधिक कार्यवाही के संबंध में पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि पारा हमीदपुर में शव मिलने के मामले में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है और आगे क्या कहा देखें।1
- भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति, अमेठी में बुद्धिजीवियों ने दिया ज्ञापन अमेठी। उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा की प्रथम पाली में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर अमेठी में विवाद खड़ा हो गया है। अमित तहसील क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए राज्यपाल के नाम उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। एडवोकेट राजेश मिश्र की अगुवाई में बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधिमंडल तहसील पहुंचा और उपजिलाधिकारी आशीष सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि 14 मार्च 2026 को आयोजित एसआई भर्ती परीक्षा की पहली पाली में अवसर के अनुसार बदल जाने जैसे अर्थ के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किया गया, जो आपत्तिजनक है। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय परंपरा में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग विद्वान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति के लिए किया जाता है। इसे अवसरवादिता जैसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना न केवल भाषाई दृष्टि से गलत है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अनुचित है। इससे समाज में गलत संदेश जाता है और अनावश्यक जातीय तनाव उत्पन्न होने की आशंका है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि संबंधित प्रश्न को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति के जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। इस दौरान उपजिलाधिकारी आशीष सिंह ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले को उच्च अधिकारियों तक भेजने का आश्वासन दिया। इस संबंध में एडवोकेट राजेश मिश्र ने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग विद्वान और सम्मानित व्यक्ति के लिए किया जाता है। इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना गलत है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने मांग की कि इस प्रश्न को तत्काल निरस्त किया जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। वहीं राजीव शुक्ल ने कहा कि इस प्रकार के प्रश्न परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। यदि समय रहते इस पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो समाज में आक्रोश बढ़ सकता है। दिनेश तिवारी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे शब्दों का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे अभ्यर्थियों और समाज की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने शासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की। समाजवादी पार्टी महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष गुंजन सिंह ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह के शब्दों का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘पंडित’ शब्द विद्वता और सम्मान का प्रतीक है, इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने शासन से मांग की कि संबंधित प्रश्न को तत्काल निरस्त किया जाए और भविष्य में इस प्रकार की त्रुटियां न हों, इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस मौके पर राजीव शुक्ल, दिनेश तिवारी, रसिक तिवारी,समाजवादी पार्टी महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष गुंजन सिंह, रोहित तिवारी, शुभम शुक्ल, विकास शुक्ल, विभव तिवारी, कैलाश शुक्ल, सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।3
- उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा की प्रथम पाली में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर अमेठी में विवाद खड़ा हो गया है। तहसील में क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए राज्यपाल के नाम उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। एडवोकेट राजेश मिश्र की अगुवाई में बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधिमंडल तहसील पहुंचा और उपजिलाधिकारी आशीष सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि 14 मार्च 2026 को आयोजित एसआई भर्ती परीक्षा की पहली पाली में अवसर के अनुसार बदल जाने जैसे अर्थ के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किया गया, जो आपत्तिजनक है। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय परंपरा में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग विद्वान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति के लिए किया जाता है। इसे अवसरवादिता जैसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना न केवल भाषाई दृष्टि से गलत है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अनुचित है। इससे समाज में गलत संदेश जाता है और अनावश्यक जातीय तनाव उत्पन्न होने की आशंका है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि संबंधित प्रश्न को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति के जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। इस दौरान उपजिलाधिकारी आशीष सिंह ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले को उच्च अधिकारियों तक भेजने का आश्वासन दिया। इस संबंध में एडवोकेट राजेश मिश्र ने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग विद्वान और सम्मानित व्यक्ति के लिए किया जाता है। इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना गलत है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने मांग की कि इस प्रश्न को तत्काल निरस्त किया जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। वहीं राजीव शुक्ल ने कहा कि इस प्रकार के प्रश्न परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। यदि समय रहते इस पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो समाज में आक्रोश बढ़ सकता है। दिनेश तिवारी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे शब्दों का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे अभ्यर्थियों और समाज की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने शासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की। समाजवादी पार्टी महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष गुंजन सिंह ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह के शब्दों का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘पंडित’ शब्द विद्वता और सम्मान का प्रतीक है, इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने शासन से मांग की कि संबंधित प्रश्न को तत्काल निरस्त किया जाए और भविष्य में इस प्रकार की त्रुटियां न हों, इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस मौके पर राजीव शुक्ल, दिनेश तिवारी, रसिक तिवारी,समाजवादी पार्टी महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष गुंजन सिंह, रोहित तिवारी, शुभम शुक्ल, विकास शुक्ल, विभव तिवारी, कैलाश शुक्ल, सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।1